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धार में ₹2,387.60 करोड़ की नर्मदा माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना का आज लोकार्पण: CM मोहन यादव करेंगे उद्घाटन, 260 गांवों के 57,422 हेक्टेयर खेतों तक पहुंचेगा नर्मदा का पानी

सांकेतिक चित्र — नर्मदा सिंचाई परियोजना से हरे-भरे खेतों को मिलता पानी

धार ब्यूरो

मध्यप्रदेश के किसानों के लिए शनिवार का दिन बड़ी सौगात लेकर आ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज धार जिले के सरदारपुर में ₹2,387.60 करोड़ की लागत वाली नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना का लोकार्पण करेंगे। कार्यक्रम सरदारपुर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित किया जाएगा। इस परियोजना से धार और झाबुआ जिलों के 260 गांवों की 57,422 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी, जिससे हजारों किसान परिवारों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

परियोजना की मुख्य बातें एक नजर में

इस परियोजना का नाम इसके दायरे को ही बता देता है — नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना। परियोजना की कुल लागत ₹2,387.60 करोड़ आंकी गई है। इसके दायरे में धार जिले के सरदारपुर तहसील के 66 गांव आते हैं, जिनमें 25,422 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। वहीं झाबुआ जिले के 194 गांवों की 32,000 हेक्टेयर भूमि इस परियोजना से लाभान्वित होगी। दोनों जिलों को मिलाकर कुल 260 गांव और 57,422 हेक्टेयर कृषि भूमि इस परियोजना के दायरे में आती है। शनिवार को होने वाले लोकार्पण समारोह में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया भी मौजूद रहेंगी।

भूमिगत पाइपलाइन से खेतों तक पहुंचेगा नर्मदा का पानी

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका भूमिगत पाइपलाइन कैनाल सिस्टम है। पारंपरिक नहरों की बजाय पानी भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इस व्यवस्था में 20 मीटर के दबाव पर 2.5 हेक्टेयर के भूमि ब्लॉकों को पानी की आपूर्ति की जाएगी। दबावयुक्त पानी की उपलब्धता का सीधा फायदा यह होगा कि किसान आसानी से ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपना सकेंगे, जिससे पानी की भारी बचत होगी और फसल की पैदावार भी बढ़ेगी।

परियोजना के लिए पानी नर्मदा नदी से धार जिले की कुकशी तहसील के चंदनखेड़ी गांव के पास से उठाया जाएगा। पानी को ऊपर उठाने और पाइपलाइनों के जरिए आगे भेजने के लिए 102.30 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि इस समय टेस्टिंग और कमिशनिंग का काम चल रहा है। कमिशनिंग पूरी होते ही परियोजना क्षेत्र के खेतों तक पानी पहुंचना शुरू हो जाएगा।

लोकार्पण की तैयारियां जोरों पर, शुक्रवार को अधिकारियों ने किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार को केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा ने सरदारपुर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्थित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा की। अधिकारियों ने मंच, पंडाल, बैठने की व्यवस्था, बैरिकेडिंग, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और पार्किंग की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

कलेक्टर मीणा ने अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा में सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए और बिजली, पेयजल, स्वच्छता और साउंड सिस्टम की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। एसपी शर्मा ने सुरक्षा और यातायात योजना की समीक्षा की और कार्यक्रम के दौरान सुचारू आवागमन तथा जनसुविधा के लिए विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

धार-झाबुआ के किसानों की बदलेगी तकदीर

धार और झाबुआ मालवा-निमाड़ अंचल के ऐसे जिले हैं, जहां बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और इनमें आदिवासी किसान परिवारों की संख्या भी अधिक है। अब तक इस क्षेत्र की खेती काफी हद तक मानसून की बारिश पर निर्भर रही है। रबी के सीजन में गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलों के लिए सिंचाई का पानी मिलना किसानों की सबसे बड़ी जरूरत रही है। इस परियोजना से जब 57,422 हेक्टेयर भूमि को सुनिश्चित सिंचाई मिलेगी, तो किसान एक फसल की बजाय दो से तीन फसलें लेने की स्थिति में आ सकेंगे।

माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें खुली नहरों की तुलना में जमीन का अधिग्रहण कम होता है और पानी का रिसाव व वाष्पीकरण भी न के बराबर होता है। दबावयुक्त पाइपलाइन व्यवस्था से ड्रिप सिंचाई अपनाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर पानी की खपत में 40 से 50 प्रतिशत तक की बचत संभव होती है, जबकि उपज में भी बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। यही वजह है कि राज्य सरकार अब नहर आधारित परियोजनाओं की जगह माइक्रो लिफ्ट और पाइपलाइन आधारित सिंचाई परियोजनाओं को तरजीह दे रही है।

राज्य की सिंचाई रणनीति में नर्मदा घाटी की अहम भूमिका

नर्मदा घाटी मध्यप्रदेश की जीवनरेखा मानी जाती है और राज्य सरकार नर्मदा के पानी के अधिकतम उपयोग की दिशा में लगातार परियोजनाएं आगे बढ़ा रही है। सरदारपुर की यह परियोजना उसी कड़ी का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नर्मदा घाटी की सिंचाई परियोजनाओं से पश्चिमी मध्यप्रदेश के सूखा प्रभावित और कम सिंचित क्षेत्रों में कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। धार और झाबुआ जैसे जिलों में जहां अब तक सिंचाई का रकबा सीमित था, वहां इस परियोजना से कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

आगे क्या होगा

शनिवार को लोकार्पण के बाद परियोजना औपचारिक रूप से किसानों को समर्पित हो जाएगी। टेस्टिंग और कमिशनिंग का काम अंतिम चरण में है, जिसके पूरा होते ही चंदनखेड़ी से उठा नर्मदा का पानी पाइपलाइनों के जरिए 260 गांवों के खेतों तक पहुंचने लगेगा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी रबी सीजन से ही इस परियोजना का लाभ किसानों को मिलने लगेगा। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि नर्मदा घाटी की ऐसी परियोजनाओं के जरिए सिंचित रकबे में लगातार वृद्धि की जाए, ताकि किसान मानसून की अनिश्चितता से मुक्त होकर साल भर खेती कर सकें।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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