ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा
सार: लग्न से बनने वाले योगों की श्रृंखला की तीसरी कड़ी में काम, असुर और मूसल योग — जानें किस भाव में शुभ ग्रह होने से कौन सा योग बनता है और उसका फल क्या है।
नमस्कार प्रिय Followers
लग्न से बनने वाले योगों की श्रृंखला में पिछली कड़ी में तीन योगों पर चर्चा की थी। अब आगे के योगों पर चर्चा आज करते हैं।
8. काम योग
यदि सप्तम भाव पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो साथ ही सप्तम भाव में शुभ ग्रह स्थित हों और सप्तमेश स्व राशि या उच्च राशि का हो तो काम योग बनता है। ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ कहते हैं कि ऐसा व्यक्ति उत्तम स्त्री, संतान और बंधुओं का सुख प्राप्त करता है।
9. असुर योग
यदि आठवें स्थान में शुभ ग्रह हों या शुभ ग्रह इस स्थान को देखते हों तो असुर योग बनता है। ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ कहते हैं कि इस योग में जन्म लेने वाला जातक स्वार्थी, दुराग्रही और दूसरों के काम में बाधा उत्पन्न करने वाला होता है।
10. मूसल योग
यदि बारहवें भाव में शुभ ग्रह बैठे हों या इस भाव को शुभ ग्रह देखते हों साथ ही द्वादश भाव का स्वामी स्व राशि या उच्च राशि का हो और लग्न से उत्तम स्थान में स्थित हो तो मूसल योग बनता है। ज्योतिष शास्त्र के मर्मज्ञ कहते हैं कि इस योग में जन्म लेने वाला जातक बड़ी कठिनता से धन प्राप्त करता है। ऐसा व्यक्ति बहुत व्यय करने वाला होता है। इस योग में जन्म लेने वाला जातक चपल और मूर्ख होता है। किंतु उसे जीवन के उत्तरार्ध में सफलता मिलती है।
आगे के योगों की चर्चा अगली पोस्ट में करेंगे।
पोस्ट को like और share करें।
कुंडली analysis के लिये संपर्क करें।
ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा
Contact No 9758023241
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
