नई दिल्ली ब्यूरो
सार: केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत अभी हर छह दिन में एक लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लग रहे हैं और अगले दो से तीन हफ्तों में यह रफ्तार बढ़कर हर चार से पांच दिन में एक लाख सिस्टम तक पहुंच जाएगी। 2 नवंबर तक योजना में 88.3 लाख से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं, 55.3 लाख से ज्यादा सिस्टम लग चुके हैं और 65 लाख से ज्यादा परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है।
भारत में घरों की छतों पर सौर ऊर्जा लगाने की रफ्तार अब एक नए दौर में पहुंच गई है। नई दिल्ली में भारत मंडपम में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और एक्सपो 2026 के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने योजना की ताजा प्रगति के आंकड़े साझा किए। उनके अनुसार, देश में अब हर छह दिन में एक लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं। यह रफ्तार कुछ ही हफ्तों में और तेज होने वाली है। मंत्री ने भरोसा जताया कि योजना अपने तय लक्ष्य को पूरा करेगी।
क्या है नई रफ्तार का ऐलान
मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शिखर सम्मेलन के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि आज हर छह दिन में एक लाख सोलर रूफटॉप इंस्टॉलेशन पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन हफ्तों में यही काम चार से पांच दिन में होने लगेगा। यानी, एक लाख सिस्टम लगाने में लगने वाला समय छह दिन से घटकर चार-पांच दिन रह जाएगा। यह बयान इसलिए अहम है, क्योंकि यह बताता है कि योजना अब शुरुआती चरण से आगे बढ़कर तेज विस्तार के दौर में है।
मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार को भरोसा है कि योजना अपने मील के पत्थर पूरे करती रहेगी और तय समय पर अपना लक्ष्य हासिल कर लेगी। लक्ष्य है 31 मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाना। इस योजना के पहले चरण का समापन उसी तारीख को होगा। मौजूदा रफ्तार और प्रस्तावित तेजी को देखते हुए यह लक्ष्य अब पहले से ज्यादा करीब दिख रहा है।
अब तक कितनी प्रगति हुई
राष्ट्रीय रूफटॉप सोलर पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 2 नवंबर तक पीएम सूर्य घर योजना में 88.3 लाख से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 55.3 लाख से ज्यादा रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। योजना से लाभान्वित परिवारों की संख्या 65 लाख से ज्यादा हो गई है। यह आंकड़ा बताता है कि योजना अब देश के लाखों घरों की रोजमर्रा की बिजली व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी है।
दो साल के भीतर 65 लाख घरों तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। योजना की शुरुआत 13 फरवरी 2024 को हुई थी। तब से अब तक आवेदनों और इंस्टॉलेशन की संख्या लगातार बढ़ी है। मंत्री के अनुसार, योजना के तहत अब तक 21 लाख से ज्यादा परिवारों को कम से कम एक बिलिंग अवधि में शून्य बिजली बिल मिला है। यानी, उन परिवारों का बिजली बिल उस अवधि में शून्य रहा। यह उन परिवारों के लिए सीधी आर्थिक राहत है, जिनके घरों की छतों पर सोलर पैनल लगे हैं।

क्या है पीएम सूर्य घर योजना
पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना एक प्रमुख आवासीय सौर कार्यक्रम है। इसके तहत एक करोड़ घरों को रूफटॉप सोलर सिस्टम के जरिये हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का लक्ष्य रखा गया है। योजना का कुल परिव्यय लगभग 75,000 करोड़ रुपये है। इसका मकसद घरों को अपनी बिजली खुद पैदा करने में सक्षम बनाना है, ताकि बिजली बिल का बोझ कम हो और स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़े।
योजना के तहत घर की छत पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं। दिन में पैदा होने वाली बिजली का इस्तेमाल घर में होता है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जा सकती है। इससे परिवारों को दो तरह का फायदा मिलता है — एक तरफ बिजली बिल घटता है और दूसरी तरफ स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल से पर्यावरण को भी लाभ होता है। यही वजह है कि योजना को सरकार की प्रमुख ऊर्जा योजनाओं में गिना जाता है।
बिजली की कीमत में कितना बदलाव आया
मंत्री ने अपने लेख और बयानों में सौर ऊर्जा की कीमत में आए बदलाव का भी जिक्र किया है। उनके अनुसार, 2014-15 में सौर ऊर्जा की कीमत लगभग आठ रुपये प्रति यूनिट थी, जो अब घटकर 2.15 रुपये प्रति यूनिट तक आ गई है। कीमत में यह गिरावट ही वह वजह है, जिसने सौर ऊर्जा को आम घरों तक पहुंचने योग्य बनाया है।
देश की कुल सौर क्षमता भी इसी दौरान तेजी से बढ़ी है। 2014 में भारत की सौर क्षमता 2.8 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर 171 गीगावाट हो गई है। पवन ऊर्जा की क्षमता 21 गीगावाट से बढ़कर लगभग 60 गीगावाट हो गई है। गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित कुल स्थापित क्षमता 2014 के लगभग 80 गीगावाट से बढ़कर 310 गीगावाट से ज्यादा हो गई है। भारत 2030 के 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्य को पांच साल पहले ही पूरा करने वाला एकमात्र जी20 देश बताया गया है।
निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के आंकड़े भी सरकार के दावे को मजबूत करते हैं। मंत्री के अनुसार, पिछले दो वर्षों में भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 67 अरब डॉलर का निवेश आया है, जिसमें 6.2 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी शामिल है। यह निवेश बताता है कि दुनिया भर के निवेशक भारत के स्वच्छ ऊर्जा बाजार पर भरोसा कर रहे हैं।
निवेश बढ़ने की एक वजह नीतिगत स्थिरता और योजनाओं का तेज क्रियान्वयन भी है। रूफटॉप सोलर के साथ-साथ बड़े सौर संयंत्रों, पवन ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भी काम चल रहा है। शिखर सम्मेलन में पहली बार अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की 9वीं सभा और हरित हाइड्रोजन पर चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एक साथ आयोजित किया जा रहा है। इससे भारत की स्वच्छ ऊर्जा पहल को अंतरराष्ट्रीय मंच भी मिल रहा है।
पीएम-कुसुम का अगला चरण भी तैयार
रूफटॉप सोलर के साथ-साथ किसानों के लिए चल रही पीएम-कुसुम योजना का भी जिक्र हुआ है। मंत्री ने कहा कि सरकार पीएम-कुसुम के अगले चरण पर काम कर रही है, जिसमें पहले के चरणों में सामने आई चुनौतियों से सीखकर सुधार किए जाएंगे। अब तक पीएम-कुसुम के विभिन्न घटकों के तहत लगभग 30 लाख सोलर पंप लगाए जा चुके हैं।
पीएम-कुसुम का मकसद खेती में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाना है। सोलर पंप से किसानों को डीजल पर निर्भरता कम करने और सिंचाई की लागत घटाने में मदद मिलती है। अगले चरण में क्रियान्वयन की बाधाओं को दूर करने पर जोर रहेगा, हालांकि मंत्री ने इसके लागू होने की कोई तय समयसीमा नहीं बताई है। यह साफ है कि सरकार रूफटॉप सोलर के साथ-साथ कृषि सौर ऊर्जा को भी अगले दौर में ले जाना चाहती है।
ग्रिड और बिजली कंपनियों के लिए नई चुनौती
घरों की छतों पर सौर ऊर्जा के तेज विस्तार से बिजली व्यवस्था में भी बदलाव आ रहा है। मंत्री ने कहा कि तेजी से बढ़ता रूफटॉप सोलर इकोसिस्टम देश की बिजली व्यवस्था को बदल रहा है। इससे बिजली कंपनियों और ग्रिड संचालकों के लिए नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं और नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
जब लाखों घर अपनी बिजली खुद पैदा करने लगते हैं, तो ग्रिड को मांग और आपूर्ति के नए पैटर्न के हिसाब से खुद को ढालना होता है। दिन में सौर उत्पादन ज्यादा होता है और शाम को मांग बढ़ती है। इसलिए भंडारण, स्मार्ट ग्रिड और लचीली बिजली व्यवस्था पर भी काम की जरूरत बढ़ेगी। सरकार का कहना है कि जैसे-जैसे बिजली व्यवस्था विकेंद्रीकृत होगी, वैसे-वैसे नए समाधान भी सामने आएंगे।
आम परिवारों के लिए इसका क्या मतलब है
आम परिवारों के लिए इस खबर का सीधा मतलब है कि रूफटॉप सोलर अब पहले से ज्यादा तेजी से लग रहा है और इसका फायदा भी साफ दिख रहा है। 21 लाख से ज्यादा परिवारों को शून्य बिल मिलने का आंकड़ा बताता है कि सही आकार का सिस्टम और सही इस्तेमाल होने पर बिजली बिल में बड़ी कटौती संभव है। हालांकि, हर घर का फायदा उसकी छत, बिजली खपत और स्थानीय नियमों पर निर्भर करेगा।
जो परिवार योजना में आवेदन करना चाहते हैं, उनके लिए राष्ट्रीय पोर्टल पर आवेदन की व्यवस्था है। आवेदन के बाद सिस्टम लगने की प्रक्रिया में वेंडर का चुनाव, इंस्टॉलेशन और निरीक्षण जैसे चरण आते हैं। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए आने वाले महीनों में इंस्टॉलेशन की कतार भी तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है।
आगे क्या होगा
अगले दो से तीन हफ्ते इस लिहाज से अहम होंगे, क्योंकि उसी अवधि में एक लाख इंस्टॉलेशन की रफ्तार छह दिन से घटकर चार-पांच दिन होने की उम्मीद जताई गई है। अगर यह रफ्तार हासिल होती है, तो 31 मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों का लक्ष्य और मजबूत होगा। इसके साथ ही पीएम-कुसुम के अगले चरण की रूपरेखा पर भी नजर रहेगी।
यह कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं है। यह इस बात की कहानी है कि भारत की ऊर्जा व्यवस्था किस तरह घरों की छतों तक पहुंच रही है। लाखों घर अब बिजली के उपभोक्ता के साथ-साथ उत्पादक भी बन रहे हैं। आने वाले महीनों में इस बदलाव की रफ्तार ही तय करेगी कि भारत अपने स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को कितनी जल्दी पूरा करता है।
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