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दीपावली का महत्व: लक्ष्मी-गणेश पूजा, दीयों की रोशनी और अंधकार पर प्रकाश की विजय की कहानी

दीपावली पर जलते दीये (सांकेतिक तस्वीर) Photo: Praful Kharade, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons

डेस्क रिपोर्ट।

8 नवंबर 2026 को दीपावली मनाई जाएगी। यह भारत का सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय पर्व है, जिसे प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक मास की अमावस्या को आने वाली इस रात घर-घर में दीप जलते हैं, रंगोली सजती है, और लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है। दीपावली केवल एक रात का पर्व नहीं है, बल्कि पांच दिनों तक चलने वाले दीपोत्सव का केंद्र है। इस पर्व में आस्था, परिवार, समाज और संस्कृति — सभी का संगम देखने को मिलता है।

दीपावली क्या है और इसे कब मनाते हैं

दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। दीपों की अवली, अर्थात दीपों की पंक्ति, से इस पर्व का नाम पड़ा है। इस रात अंधेरी अमावस्या को हजारों दीपों की रोशनी से जगमग कर दिया जाता है। दीपावली से पहले धनतेरस और नरक चतुर्दशी आती है, और इसके बाद गोवर्धन पूजा तथा भाई दूज मनाया जाता है। इस तरह दीपावली पांच दिवसीय पर्व श्रृंखला के बीच में आती है, लेकिन इसकी रात सबसे विशेष मानी जाती है। इसी रात लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त होता है, जब लोग अपने घरों में लक्ष्मी और गणेश की आराधना करते हैं।

राम के अयोध्या लौटने की मान्यता

परंपरा के अनुसार दीपावली की सबसे प्रसिद्ध कथा राम के अयोध्या लौटने से जुड़ी है। माना जाता है कि चौदह वर्ष के वनवास और रावण पर विजय के बाद जब राम अयोध्या लौटे, तब नगर के लोगों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी प्रसन्नता की स्मृति में दीपावली मनाई जाती है। इस कथा के कारण दीपावली को अच्छाई की बुराई पर विजय और सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक माना जाता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इस कथा को जानते हैं, और दीपावली की रात दीप जलाते समय इसी भावना को याद किया जाता है।

लक्ष्मी-गणेश पूजा का महत्व

दीपावली की रात लक्ष्मी और गणेश की पूजा की जाती है। लक्ष्मी को धन, समृद्धि और वैभव की देवी माना जाता है, और गणेश को विघ्न दूर करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। परंपरा के अनुसार इस रात लक्ष्मी घर-घर में भ्रमण करती हैं, और जिस घर में स्वच्छता, शांति और भक्ति होती है, वहां वे निवास करती हैं। इसलिए दीपावली से पहले घरों की विशेष सफाई की जाती है। पूजा के समय दीप, फूल, मिठाई और नए बही-खाते भी रखे जाते हैं। व्यापारी वर्ग के लिए यह पूजा विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इस दिन से नए व्यापारिक वर्ष की शुरुआत की परंपरा भी कई स्थानों पर है। परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर पूजा करते हैं, और इसके बाद एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं देते हैं।

दीये, रंगोली और सजावट की परंपरा

दीपावली की पहचान दीयों की रोशनी है। मिट्टी के दीयों में तेल और बाती डालकर उन्हें घर के द्वार, आंगन, छत और खिड़कियों पर रखा जाता है। कई घरों में मोमबत्तियां और बिजली की झालरें भी लगाई जाती हैं, लेकिन मिट्टी के दीये की परंपरा आज भी सबसे अधिक प्रिय है। घर के द्वार पर रंगोली बनाई जाती है, जिसमें रंगों और फूलों से सुंदर आकृतियां सजाई जाती हैं। रंगोली को शुभ और मंगल का प्रतीक माना जाता है। घरों को फूलों, तोरणों और बंदनवार से सजाया जाता है। सजावट की यह परंपरा केवल सुंदरता के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे अतिथि के स्वागत और घर में सकारात्मक वातावरण बनाने की भावना भी है।

पांच दिवसीय दीपोत्सव का क्रम

दीपावली अकेला पर्व नहीं है, बल्कि पांच दिनों के उत्सव का केंद्र है। पहला दिन धनतेरस होता है, जब खरीदारी और आरोग्य की कामना की जाती है। दूसरा दिन नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली कहलाता है, जब प्रातःकाल स्नान और दीप जलाने की परंपरा है। तीसरा दिन मुख्य दीपावली है, जब लक्ष्मी पूजा होती है। चौथा दिन गोवर्धन पूजा का होता है, जब अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। पांचवां दिन भाई दूज है, जब बहनें भाइयों के दीर्घायु होने की कामना करती हैं। इस क्रम से दीपोत्सव एक सप्ताह से अधिक समय तक चलने वाला सांस्कृतिक उत्सव बन जाता है, जिसमें हर दिन की अपनी अलग परंपरा और अपना अलग संदेश है।

दीपावली का सामाजिक महत्व

दीपावली का सामाजिक महत्व बहुत बड़ा है। यह पर्व लोगों को अपने परिवार और मित्रों के पास लाता है। दूर रहने वाले लोग अपने घर लौटते हैं, पुरानी नाराजगी भुलाकर एक-दूसरे से मिलते हैं, और मिठाइयां बांटकर खुशियां साझा करते हैं। इस अवसर पर लोग अपने कर्मचारियों, सहायकों और पड़ोसियों को भी उपहार और मिठाई देते हैं। दीपावली के समय बाजारों में विशेष रौनक होती है, जिससे कारीगरों, व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को भी लाभ मिलता है। यह पर्व समाज में एकता, प्रेम और सद्भावना को बढ़ावा देता है।

अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश

दीपावली का सबसे गहरा संदेश अंधकार पर प्रकाश की विजय का है। अमावस्या की सबसे अंधेरी रात में दीप जलाना यह बताता है कि कठिन से कठिन समय में भी आशा की ज्योति जलाए रखी जा सकती है। यह संदेश केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में लागू होता है। दीपावली हमें यह सिखाती है कि ज्ञान अज्ञान पर, प्रेम घृणा पर और अच्छाई बुराई पर विजय पाती है। यही कारण है कि दीपावली केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में भी मनाई जाती है, जहां भारतीय समुदाय रहता है। इस पर्व को मनाते समय आसपास के लोगों, बुजुर्गों और पशु-पक्षियों का भी ध्यान रखना इस संदेश का ही एक अंग माना जाता है।

क्यों खास है दीपावली

दीपावली इसलिए खास है क्योंकि यह एक ही पर्व में आस्था, परिवार, समाज और संस्कृति को जोड़ती है। एक ओर लक्ष्मी पूजा और राम के लौटने की कथा है, दूसरी ओर दीयों, रंगोली और मिठाइयों की परंपरा। एक ओर घर की सफाई और सजावट है, दूसरी ओर समाज में प्रेम और सद्भावना का संदेश। वर्ष के सभी पर्वों में दीपावली को सबसे अधिक धूमधाम से मनाया जाता है, और यही कारण है कि इस रात का इंतजार हर आयु के लोग करते हैं। जब अमावस्या की रात हजारों दीप एक साथ जलते हैं, तब दीपावली का संदेश स्वयं ही स्पष्ट हो जाता है — अंधेरा चाहे जितना गहरा हो, एक छोटा सा दीप भी उसे दूर कर सकता है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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