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एसआईआर पर भोपाल में भाजपा का पलटवार: 12 में से 10 बार कांग्रेस के शासन में हुआ पुनरीक्षण, 12 नवंबर से मध्य प्रदेश में एसएसआर

सांकेतिक चित्र: खाली पत्रकार-वार्ता कक्ष में मंच, माइक और झंडे सांकेतिक चित्र.

भोपाल ब्यूरो

सार: मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। गुरुवार को भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने पत्रकार-वार्ता कर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। भाजपा नेताओं का कहना है कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है — आजादी के बाद यह 12 बार हो चुका है, जिनमें से 10 बार कांग्रेस के शासनकाल में हुआ। इसी बीच, 12 नवंबर से मध्य प्रदेश में एसएसआर शुरू होने जा रहा है, जिसमें नए नाम जोड़े जाएंगे और गलत प्रविष्टियों को सुधारा जाएगा।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार-वार्ता: खंडेलवाल और शुक्ला ने क्या कहा

गुरुवार को भोपाल में भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार-वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। दोनों नेताओं ने कहा कि अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृत मतदाताओं के सत्यापन की प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और मतदाता सूची को पारदर्शी तथा त्रुटिरहित बनाना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है।

खंडेलवाल ने कहा कि राहुल गांधी मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम काटे जाने का दावा कर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर के साथ भाजपा, कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट भी शामिल रहते हैं, इसलिए यह प्रक्रिया किसी एक दल के भरोसे नहीं चलती। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और विपक्षी दल संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर देश में भ्रम और अविश्वास का माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रेम शुक्ला ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा और बहस के लिए संसद का मंच निर्धारित है, लेकिन राहुल गांधी सदन में बहस करने के बजाय हंगामा करते हैं और फिर सड़क पर जाकर बहस की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में एसआईआर को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में 18 याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन उनके अनुसार विपक्ष अपने आरोपों को प्रमाणित नहीं कर सका और एक भी ऐसा वैध मतदाता सामने नहीं ला सका जिसका नाम गलत तरीके से काटा गया हो। शुक्ला ने यह भी कहा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस ने 10 लाख लोगों के जुटने का दावा किया था, लेकिन वास्तव में 25 हजार लोग ही जुट सके थे। भाजपा नेताओं ने कहा कि विपक्ष की इस राजनीति के खिलाफ पार्टी ने लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ अभियान शुरू किया है, जिसके तहत इंदौर, जबलपुर और भोपाल में पदयात्राएं निकाली जा चुकी हैं।

एसआईआर क्या है और यह अब तक कितनी बार हो चुका है

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण, जिसे एसआईआर कहा जाता है, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को नए सिरे से जांचने और शुद्ध करने की प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाता है। जो मतदाता अब उस पते पर नहीं रहते, जिनका स्थानांतरण हो चुका है या जिनका निधन हो चुका है, उनके नाम सूची से हटाए जाते हैं। साथ ही, जो पात्र मतदाता सूची में छूट गए हैं, उनके नाम जोड़ने का अवसर भी दिया जाता है।

भाजपा नेताओं के अनुसार, आजादी के बाद अब तक एसआईआर की प्रक्रिया 12 बार हो चुकी है, जिनमें से 10 बार कांग्रेस के शासनकाल में कराई गई। प्रेम शुक्ला ने बताया कि शुरुआत की तीन एसआईआर प्रक्रियाएं जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में हुईं। इसके बाद इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी यह प्रक्रिया कराई गई और तब यह पूरी प्रक्रिया संवैधानिक मानी जाती थी। भाजपा का तर्क है कि जब उन्हीं प्रक्रियाओं के तहत अब फर्जी, मृत और स्थायी रूप से जा चुके मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, तो कांग्रेस को यह प्रक्रिया असंवैधानिक लग रही है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने बुधवार को भोपाल में हुई पदयात्रा के दौरान भी यही बात कही थी। उस पदयात्रा में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। नड्डा ने कहा था कि कांग्रेस चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की बुनियाद है और इस पर सवाल उठाना संस्थाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है।

सांकेतिक चित्र: मतदाता सूची का रजिस्टर और स्याही लगी उंगली
सांकेतिक चित्र.

कांग्रेस का पक्ष: राहुल गांधी के आरोप क्या हैं

कांग्रेस और राहुल गांधी का कहना है कि एसआईआर के नाम पर वैध मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा रहे हैं। कांग्रेस इसे वोट चोरी का मुद्दा बताकर देशभर में आंदोलन कर रही है। राहुल गांधी ने दावा किया है कि मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम काटे जाने की तैयारी है। कांग्रेस का कहना है कि इस प्रक्रिया से गरीब, प्रवासी और वंचित वर्ग के मतदाता सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि उनके पास दस्तावेज जुटाना कठिन होता है।

कांग्रेस ने 1 नवंबर को दिल्ली में महारैली आयोजित की थी, जिसमें मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला गया था। कांग्रेस नेताओं ने इस रैली में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने का दावा किया था। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया रोकने की मांग भी उठाई है। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग को पहले यह बताना चाहिए कि किन आधारों पर नाम हटाए जा रहे हैं और हर हटाए गए नाम का कारण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के मतदाता सूची संबंधी काम के प्रभारी ललित सेन का कहना है कि 198 विधानसभा क्षेत्रों में नियुक्त बूथ लेवल एजेंटों की सूची मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की वेबसाइट पर अपलोड की जा चुकी है और बाकी जगह एसएसआर से पहले नियुक्ति कर ली जाएगी। कांग्रेस का यह भी कहना है कि उसके बूथ स्तर के कार्यकर्ता मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं की मदद करेंगे।

12 नवंबर से मध्य प्रदेश में एसएसआर: क्या-क्या होगा

इसी बीच, मध्य प्रदेश में 12 नवंबर से मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) शुरू होने जा रहा है। इसमें नए नाम जोड़ने के साथ मतदाता सूची से नाम हटाने और संशोधन के लिए आवेदन लिए जाएंगे। एसएसआर के तहत 12 नवंबर को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होगी। इसके बाद 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक प्रारूप सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। इनका निराकरण 28 दिसंबर तक किया जाएगा और अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित होगी।

एसएसआर उन राज्यों में कराया जा रहा है, जहां एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। चुनाव आयोग ने पहले 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसएसआर का निर्देश जारी किया था, जिनमें मध्य प्रदेश भी शामिल है। इन राज्यों की प्रारूप सूची 12 नवंबर को प्रकाशित होगी। इसके अलावा, आयोग ने गुरुवार को छह और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में एसएसआर की घोषणा की, जहां प्रारूप सूची 30 नवंबर को प्रकाशित होगी।

एसआईआर के दौरान जिन मतदाताओं के नाम कट गए थे या जो पहले आवेदन नहीं कर पाए थे, उन्हें एसएसआर में नाम जुड़वाने का एक और अवसर मिलेगा। इंदौर में 28 सितंबर से 10 अक्टूबर तक एसआईआर के दौरान हटे मतदाताओं को खोजने का अभियान चलाया गया था, जिसमें 33 हजार से अधिक आवेदन मिले थे। एसएसआर में वर्ष 2027 में एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।

बूथ स्तर की तैयारी: बीएलओ-बीएलए की भूमिका और 32 सीटों का पेंच

मतदाता सूची के पुनरीक्षण में बूथ लेवल ऑफिसर के बाद सबसे महत्वपूर्ण भूमिका राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों की होती है। बूथ लेवल एजेंट अपने-अपने बूथ पर मतदाता सूची की जांच में मदद करते हैं, नए नाम जुड़वाने और गलत प्रविष्टियों को ठीक कराने का काम करते हैं। प्रदेश में 230 विधानसभा सीटों में 71,930 बूथ हैं। हर बूथ पर राजनीतिक दलों के एजेंट होने से पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी रहती है।

रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में कांग्रेस अब तक सभी विधानसभा क्षेत्रों में बूथ लेवल एजेंट नियुक्त नहीं कर पाई है। 32 विधानसभा क्षेत्रों में बूथ लेवल एजेंटों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इनमें डिंडौरी और आलीराजपुर जिले सहित कई क्षेत्र शामिल हैं। कांग्रेस ने पिछले दो साल में अपने संगठन के सशक्तीकरण पर काम किया है और निष्क्रिय बूथ लेवल एजेंटों को बदला भी गया है, लेकिन फिर भी कुछ क्षेत्रों में नियुक्तियां लंबित हैं।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने सभी राजनीतिक दलों से मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करने का आग्रह किया है। चुनाव आयोग का कहना है कि बूथ स्तर पर राजनीतिक दलों की भागीदारी से मतदाता सूची अधिक सटीक और विश्वसनीय बनती है। भाजपा का कहना है कि उसके बूथ लेवल एजेंट सभी बूथों पर सक्रिय हैं, जबकि कांग्रेस के पास हर बूथ पर एजेंट नहीं हैं।

चुनाव आयोग का कार्यक्रम: दावा-आपत्ति से अंतिम सूची तक

मध्य प्रदेश में एसएसआर की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी होगी। पहले चरण में 12 नवंबर को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद मतदाता अपनी जानकारी की जांच कर सकेंगे। जिन मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है या जिनकी जानकारी में कोई गलती है, वे निर्धारित प्रपत्र भरकर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।

दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक रहेगी। इसके बाद चुनाव अधिकारी इन दावों और आपत्तियों की जांच करेंगे और 28 दिसंबर तक इनका निराकरण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित की जाएगी। मतदाता आयोग के वोटर सर्विस पोर्टल पर जाकर अपने नाम और अन्य विवरण के आधार पर अपनी जानकारी खोज सकते हैं।

चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि एसआईआर की ड्राफ्ट सूची से नाम गायब होने पर पुराने मतदाता भी फॉर्म-6 भर सकेंगे और झूठी घोषणा का मामला नहीं बनेगा। आयोग का कहना है कि मतदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें निर्धारित समय में अपना आवेदन देना चाहिए। यह स्पष्टीकरण इसलिए अहम है, क्योंकि कई मतदाता इस बात को लेकर चिंतित थे कि उनका नाम सूची से हट गया है तो क्या होगा।

पृष्ठभूमि: पदयात्रा, होसबाले जी का बयान और फॉर्म-6 पर स्पष्टीकरण

एसआईआर को लेकर सियासी टकराव पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को भोपाल में भाजपा ने लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ पदयात्रा निकाली थी, जिसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने नेतृत्व किया था। पदयात्रा अटल पथ से रोशनपुरा चौराहे तक निकाली गई। नड्डा ने कहा था कि भाजपा बाहरी लोगों की पहचान करने, उनके नाम मतदाता सूची से हटाने और उन्हें देश से बाहर भेजने के पक्ष में है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि वह ऐसे लोगों को सामान्य, मान्यता प्राप्त और वैध बनाने की कोशिश कर रही है।

इससे पहले इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद सह सरकार्यवाह होसबाले जी ने भी एसआईआर को मतदाता सूची की नियमित शुद्धिकरण प्रक्रिया बताया था। उन्होंने कहा था कि विरोध के लिए विरोध ठीक नहीं है और सत्ता परिवर्तन सिर्फ चुनाव से होना चाहिए। होसबाले जी ने यह भी कहा था कि मतदाता सूची से मृत, दोहरी प्रविष्टि वाले और गैर-नागरिकों के नाम हटाना लोकतंत्र के हित में है।

चुनाव आयोग ने भी एसआईआर को लेकर कई स्पष्टीकरण जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि एसआईआर के दौरान हटे मतदाताओं को एसएसआर में नाम जुड़वाने का अवसर मिलेगा। आयोग के अनुसार, एसएसआर मतदाता सूची को अपडेट करने की सालाना प्रक्रिया है, जो 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद एसआईआर के कारण रुकी हुई थी। अब जहां एसआईआर पूरा हो चुका है, वहां एसएसआर कराया जा रहा है।

आगे क्या: मतदाताओं के लिए इस पुनरीक्षण के क्या मायने हैं

आने वाले दिनों में एसआईआर और एसएसआर को लेकर सियासत और तेज होने की संभावना है। मध्य प्रदेश में एसएसआर 12 नवंबर से शुरू हो रहा है और यह मतदाताओं के लिए अपनी जानकारी जांचने और सुधारने का अहम अवसर होगा। मतदाताओं को सलाह दी जा रही है कि वे प्रारूप सूची में अपना नाम जांचें और किसी भी गलती को समय रहते ठीक कराएं। जो युवा 2027 में 18 वर्ष के हो रहे हैं, वे भी अपना नाम जुड़वा सकेंगे।

राजनीतिक दलों के लिए बूथ स्तर की तैयारी अब निर्णायक होगी। जिन दलों के बूथ लेवल एजेंट हर बूथ पर सक्रिय होंगे, वे पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अपने मतदाताओं की बेहतर मदद कर सकेंगे। कांग्रेस के लिए 32 विधानसभा क्षेत्रों में बूथ लेवल एजेंटों की नियुक्ति पूरी करना पहली चुनौती होगी। भाजपा का कहना है कि वह बूथ स्तर पर पूरी तरह तैयार है और उसके कार्यकर्ता मतदाताओं तक चुनाव आयोग की प्रक्रिया की सही जानकारी पहुंचाएंगे।

कांग्रेस का कहना है कि वह वोट चोरी के मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी और एसआईआर को लेकर सवाल उठाती रहेगी। दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि वह लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ अभियान के तहत गांव, मोहल्ले और चाय की दुकानों तक जाकर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की वास्तविक स्थिति जनता को बताएगी। ऐसे में मतदाता सूची का मुद्दा आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत के केंद्र में बना रहेगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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