इंदौर ब्यूरो।
कृषि उत्पादन आयुक्त के.सी. गुप्ता की अध्यक्षता में इंदौर में पशुपालन एवं डेयरी विकास तथा संबंधित विभागों की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में पशु नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशु स्वास्थ्य और टीकाकरण, हरा चारा, कृत्रिम गर्भाधान, किसान कार्ड वितरण, गोबर-गोमूत्र से जैविक खाद, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, दुग्ध संकलन और साइलेज जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए, जिनका सीधा लाभ प्रदेश के पशुपालकों और किसानों को मिलेगा।
गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार: श्रेष्ठ दुग्ध उत्पादक को एक लाख रुपये
बैठक में सबसे खास ऐलान गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना को लेकर हुआ। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार ने भारतीय उन्नत नस्ल के गोवंश को बढ़ावा देने के लिए यह योजना शुरू की है। योजना के तहत वृंदावन गांव के पशुपालकों की गायों को प्रतियोगिता में शामिल किया गया है। प्रतियोगिता में श्रेष्ठ दुग्ध उत्पादक गाय के पशुपालक को एक लाख रुपये का प्रथम पुरस्कार, 50 हजार रुपये का द्वितीय पुरस्कार और 25 हजार रुपये का तृतीय पुरस्कार दिया जाएगा। यह प्रतियोगिता आगामी गोवर्धन पूजा के अवसर पर संपन्न होगी।
श्री गुप्ता ने कहा कि इस योजना से पशुपालक प्रोत्साहित होंगे और साथ ही किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। उन्नत नस्ल के गोवंश के पालन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं, इसके लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
डॉ. अम्बेडकर कामधेनु योजना को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। श्री गुप्ता ने बताया कि इस योजना के तहत पशुपालकों को डेयरी लगाने के लिए ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाती है। एक इकाई में एक ही नस्ल के गौ-भैंसवंशीय पशु रखे जाते हैं। योजना का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा पशुपालक इसका लाभ उठा सकें। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पात्र हितग्राहियों तक योजना की जानकारी पहुंचे और ऋण प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
दुग्ध उत्पादन 9 से 20 प्रतिशत: दोगुने से ज्यादा का लक्ष्य
बैठक में दुग्ध उत्पादन को लेकर बड़ा लक्ष्य तय किया गया। निर्देश दिए गए कि संभाग में दुग्ध उत्पादन को वर्तमान 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाए। इंदौर सहकारी दुग्ध संघ को संभाग में दुग्ध संकलन की मात्रा बढ़ाने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा दुग्ध संघ संभाग के सभी जिलों में दुग्ध से तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए नवीन पार्लरों की स्थापना करेगा।
इंदौर सहकारी दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि दुग्ध संघ की डेयरी संयंत्र की प्रसंस्करण क्षमता चार लाख लीटर प्रतिदिन है। यहां दूध के साथ श्वेत मक्खन, दुग्ध चूर्ण आदि का उत्पादन किया जाता है। दुग्ध संघ की नौ जिलों में 2637 दुग्ध समितियां हैं, जिनके माध्यम से दुग्ध संकलन का कार्य किया जा रहा है और हितग्राहियों को समय पर भुगतान किया जा रहा है। भारत सरकार की एनपीडीडी परियोजना के अंतर्गत संकलित दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए 23 नवीन बल्क मिल्क कूलर (बीएमसी) की स्थापना की गई है।
नस्ल सुधार, टीकाकरण और हरे चारे पर जोर
बैठक में पशुओं के नस्ल सुधार, पोषण और स्वास्थ्य को लेकर व्यापक चर्चा हुई। श्री गुप्ता ने निर्देश दिए कि संभाग में पशुपालकों को पशुओं के नस्ल सुधार, पशु पोषण और पशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाए। बताया गया कि प्रदेश में 259 लाख गौ-भैंसवंशीय पशु उपलब्ध हैं, जिनमें से केवल 35 प्रतिशत ही उन्नत नस्ल के हैं — इस स्थिति को बदलने के लिए कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार कार्यक्रमों को गति देने पर सहमति बनी।
संभाग में सभी पशुओं को हरे चारे के साथ-साथ संतुलित आहार मिले और समय पर टीकाकरण हो, यह सुनिश्चित किया जा रहा है। हरे चारे की कमी की पूर्ति साइलेज के माध्यम से की जा रही है। गोबर-गोमूत्र से जैविक खाद बनाने को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
पशु मेले और पशु हाट को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में निर्देश दिए गए कि संभाग के सभी जिलों में पशुओं के क्रय-विक्रय के लिए पशु मेलों और पशु हाट को बढ़ावा दिया जाए। इससे पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए बेहतर बाजार मिलेगा और उन्नत नस्ल के पशुओं की खरीद-बिक्री को प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री गौसेवा योजना के अंतर्गत मनरेगा मद से स्वीकृत गौशालाओं की जानकारी भी बैठक में दी गई। साथ ही वीबीजी रामजी योजना, हिरण्यगर्भा अभियान, नस्ल सुधार और लखपति गौपालक दीदी योजना जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार, इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा सहित जिले के कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के संचालक, संयुक्त संचालक और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
पशुपालकों के लिए क्या मायने
पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य सीधे पशुपालकों की आय से जुड़ा है। गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार जैसी योजनाएं उन्नत नस्ल के पालन को प्रोत्साहन देंगी, जबकि कामधेनु योजना के तहत ऋण सहायता से नए डेयरी उद्यमी तैयार होंगे। दुग्ध संकलन बढ़ने और नए पार्लर खुलने से दूध की बिक्री के अवसर भी बढ़ेंगे। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे नस्ल सुधार, टीकाकरण और संतुलित आहार पर ध्यान दें और शासकीय योजनाओं का लाभ उठाएं।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
