नई दिल्ली ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार शाम नई दिल्ली के भारत मंडपम में उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन ईस्टिक 2026 का उद्घाटन किया। 29 अक्टूबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, स्वास्थ्य, ऊर्जा, जलवायु और समुद्र विज्ञान सहित 12 विषय क्षेत्रों पर देश-विदेश के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और नीति निर्माता मंथन करेंगे।
प्रधानमंत्री ने शाम साढ़े पाँच बजे भारत मंडपम में इस सम्मेलन का उद्घाटन किया और सभा को संबोधित भी किया। प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन 27 से 29 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान, शोधकर्ता, शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ एक ही मंच पर जुटे हैं।
इस सम्मेलन का आयोजन वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद की ओर से प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के मार्गदर्शन में हो रहा है। सम्मेलन का विषय “रचनात्मक मस्तिष्क, उत्प्रेरक विज्ञान, सशक्त प्रौद्योगिकियाँ” रखा गया है, जिसका संदेश साफ है — रचनात्मकता और कल्पना को वैज्ञानिक क्षमता से जोड़कर ही नई तकनीक को समाज तक पहुँचाया जा सकता है।
भारत मंडपम में हुआ भव्य उद्घाटन
ईस्टिक 2026 का उद्घाटन नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ, जो देश का सबसे बड़ा अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और सम्मेलन केंद्र है। उद्घाटन समारोह में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, प्रमुख वैज्ञानिक और शोधकर्ता मौजूद रहे। प्रधानमंत्री के उद्घाटन के साथ ही सम्मेलन की तीन दिन की कार्यवाही औपचारिक रूप से शुरू हो गई।
इससे पहले सम्मेलन के पर्दा उठाने वाले कार्यक्रम में यह बताया गया था कि ईस्टिक को पिछले वर्ष एक नई सोच के साथ शुरू किया गया था। पहले विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़े अलग-अलग कार्यक्रम वर्ष भर बिखरे हुए होते थे। ईस्टिक ने इन सबको एक ही मंच पर लाने का काम किया है, ताकि शोधकर्ता, नवाचारी, स्टार्टअप, उद्यमी, उद्योग और नीति निर्माता एक-दूसरे से सीधे जुड़ सकें।
ईस्टिक 2026 क्या है और क्यों है खास
ईस्टिक का पूरा नाम उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन है। यह देश का प्रमुख वार्षिक मंच बन रहा है, जहाँ उभरती हुई तकनीकों और भारत की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार प्राथमिकताओं पर विचार होता है। इसका मकसद संस्थागत दीवारों को तोड़ना और वैज्ञानिक शोध, स्टार्टअप, उद्योग, बाजार और समाज के बीच मजबूत कड़ियाँ बनाना है।
आयोजकों का कहना है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी अब पहले से कहीं तेज गति से बदल रहे हैं। ऐसे में केवल प्रयोगशालाओं में शोध करना काफी नहीं है। शोध को उत्पाद, सेवा और नीति में बदलने के लिए प्रबंधन, संचार और उद्योग जगत की विशेषज्ञता भी उतनी ही जरूरी हो गई है। ईस्टिक इसी जरूरत का जवाब है — यह एक ऐसा साझा मंच है जहाँ विज्ञान की दिशा तय करने वाले सभी पक्ष एक साथ बैठते हैं।

12 विषय क्षेत्रों पर होगा मंथन
सम्मेलन में कुल 12 विषय क्षेत्रों पर चर्चा हो रही है। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, विनिर्माण, स्वास्थ्य, ऊर्जा, जलवायु और समुद्र विज्ञान प्रमुख हैं। हर विषय क्षेत्र में विशेषज्ञ शोध की प्राथमिकताओं, राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करने और वैज्ञानिक प्रगति को व्यावहारिक उपयोग में बदलने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।
इन चर्चाओं का दायरा केवल अकादमिक नहीं है। हर सत्र में यह सवाल भी उठेगा कि किसी नई तकनीक से आम आदमी के जीवन में क्या बदलाव आएगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई तकनीक इलाज को कैसे सस्ता और सुलभ बनाएगी, ऊर्जा के क्षेत्र में स्वच्छ तकनीक कैसे गाँव-शहर तक पहुँचेगी और जलवायु विज्ञान खेती और आपदा प्रबंधन में कैसे मदद करेगा — ऐसे सवालों पर भी मंथन होगा।
प्रदर्शनी में दिखेगी भारत की वैज्ञानिक ताकत
सम्मेलन के साथ लगी बड़ी प्रदर्शनी में भारत की स्वदेशी वैज्ञानिक उपलब्धियों और नई तकनीकों का प्रदर्शन हो रहा है। इसमें लगभग 150 डीप-टेक स्टार्टअप के स्टॉल लगे हैं, जहाँ युवा नवाचारी अपने उत्पाद और तकनीक दिखा रहे हैं। इन स्टार्टअप की तकनीकों के अलग-अलग क्षेत्रों में उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन भी इस प्रदर्शनी का प्रमुख भागीदार है। संगठन की ओर से अगली पीढ़ी के भारी वहन क्षमता वाले प्रक्षेपण यान का मॉडल दिखाया जा रहा है, जो पृथ्वी की निचली कक्षा में 30 हजार किलोग्राम से अधिक भार ले जाने में सक्षम होगा। इसके साथ ही चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 अभियानों के मॉडल भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं, जिनका लक्ष्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा तक भेजना है। प्रदर्शनी में विषय आधारित वीडियो, तकनीक प्रदर्शन, वृत्तचित्र, सूचना केंद्र और संवर्धित व आभासी वास्तविकता के अनुभव भी आगंतुकों के लिए रखे गए हैं।
ग्लोबल कनेक्ट से जुड़ेगा विश्व
इस वर्ष सम्मेलन में एक नई पहल के रूप में ग्लोबल कनेक्ट नेटवर्किंग कार्यक्रम भी शुरू किया गया है। इसमें भारत और विदेश के शिक्षा जगत, शोध संस्थानों और उद्योग जगत से 300 से अधिक आमंत्रित प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इस मंच का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शोध साझेदारियाँ बनाना, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग बढ़ाना और प्रयोगशाला से बाजार तक नवाचार पहुँचाने के रास्ते तलाशना है।
सम्मेलन के विशिष्ट वक्ताओं में तीन नोबेल पुरस्कार विजेता भी शामिल हो रहे हैं। इनमें योआखिम फ्रैंक, रिचर्ड रॉबर्ट्स और कोस्त्या नोवोसेलोव के नाम शामिल हैं। इनके साथ कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता वक्ता भी अपने अनुभव साझा करेंगे। आयोजकों का मानना है कि ऐसे वैश्विक मंच से भारतीय शोधकर्ताओं को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों से सीधे सीखने का अवसर मिलेगा।
छोटे शहरों से आ रही विज्ञान की नई लहर
सम्मेलन में एक अहम संदेश छोटे शहरों के नवाचारियों को लेकर भी दिया गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि भारत में स्टार्टअप की अगली लहर महानगरों से बाहर, छोटे शहरों से आनी चाहिए। वर्ष 2014 में देश में स्टार्टअप की संख्या मात्र 350 से 400 के आसपास थी, जो अब बढ़कर 2 लाख 30 हजार से अधिक हो गई है। इससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप तंत्र बन गया है।
खास बात यह है कि अब 50 से 60 प्रतिशत स्टार्टअप छोटे शहरों से आ रहे हैं। लेकिन इन उद्यमों के सामने विशेषज्ञों, कारोबारी नेताओं और बाजारों तक पहुँच की चुनौती बनी हुई है। ईस्टिक जैसे मंच इसी खाई को पाटने का काम करते हैं, जहाँ छोटे शहर का नवाचारी भी देश के बड़े वैज्ञानिकों, निवेशकों और उद्योग जगत से सीधा जुड़ सकता है।
विकसित भारत 2047 की दिशा में एक कदम
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने इस अवसर पर कहा है कि प्रधानमंत्री का इस कार्यक्रम का उद्घाटन करना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और प्राथमिकता को दर्शाता है। उनका मानना है कि विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए विज्ञान को विकास की धुरी बनाना होगा और इसमें प्रधानमंत्री का समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पिछले वर्ष के सम्मेलन में एक लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष की भी चर्चा हुई थी, जिसका उद्देश्य निजी क्षेत्र में शोध और विकास के लिए वित्त पोषण बढ़ाना है। इस वर्ष का सम्मेलन उसी दिशा को आगे बढ़ा रहा है — विज्ञान, नीति और उद्योग को एक साथ लाकर देश की दीर्घकालिक तकनीकी आत्मनिर्भरता की नींव मजबूत करना।
आगे दो दिन क्या होगा
सम्मेलन के बाकी दो दिन 28 और 29 अक्टूबर को विषय आधारित सत्र, प्रदर्शनी और नेटवर्किंग कार्यक्रम जारी रहेंगे। अलग-अलग विषय क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपनी शोध प्राथमिकताएँ और सुझाव रखेंगे, जिनसे आने वाले वर्षों में देश की विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति को दिशा मिलने की उम्मीद है। प्रदर्शनी में लगे स्टार्टअप और शोध संस्थान अपने नवाचारों पर उद्योग जगत और निवेशकों से संवाद भी करेंगे।
कुल मिलाकर ईस्टिक 2026 भारत को वैश्विक नवाचार के अग्रिम मोर्चे पर रखने की एक बड़ी कोशिश है। यह सम्मेलन यह संदेश देता है कि भारत अब केवल तकनीक का उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि नई तकनीक का निर्माता बनने की राह पर है। अगले दो दिन की चर्चाओं से जो नतीजे निकलेंगे, वे आने वाले समय में देश के वैज्ञानिक और औद्योगिक भविष्य की रूपरेखा तय करने में मदद करेंगे।
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