सार: उज्जैन गिर गाय राधा 19.760 लीटर दूध: तालोद गांव की गिर नस्ल की गाय राधा ने प्रतिदिन औसतन 19.760 लीटर दूध देकर मध्य प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के तहत 27 से 31 अक्टूबर के बीच हुई दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता में राधा प्रदेश भर में अव्वल रही। अब 9 नवंबर को गोवर्धन पर्व पर भोपाल में होने वाले राज्य स्तरीय गौ-पूजन एवं पशुपालक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पशुपालक गौरव रघुवंशी को सम्मानित करेंगे।
तालोद के पशुपालक गौरव रघुवंशी की मेहनत रंग लाई
उज्जैन जिले के वृंदावन ग्राम तालोद के पशुपालक गौरव रघुवंशी ने यह साबित कर दिया है कि देशी नस्ल की गायों का पालन केवल परंपरा नहीं, बल्कि अच्छी कमाई का जरिया भी बन सकता है। उनकी गिर नस्ल की गाय राधा ने प्रतिदिन औसतन 19 लीटर 760 ग्राम दूध देकर प्रदेश की दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि के लिए गौरव रघुवंशी को एक लाख रुपये का पुरस्कार मिलेगा।
गौरव रघुवंशी ने बताया कि राधा उनके लिए सिर्फ एक गाय नहीं, बल्कि परिवार की महत्वपूर्ण सदस्य है। उन्होंने राधा के संतुलित आहार, बेहतर देखभाल और नियमित रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया। सही देखभाल, संतुलित पोषण और बेहतर पशुपालन प्रबंधन का ही नतीजा रहा कि राधा ने प्रदेश की प्रतियोगिता में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन कर पहला स्थान हासिल किया।
गौरव रघुवंशी उज्जैन जिले के वृंदावन ग्राम तालोद के निवासी हैं। मुख्यमंत्री द्वारा तालोद को वृंदावन ग्राम घोषित किए जाने के बाद गांव में देशी गोवंश के संरक्षण और संवर्धन को प्रोत्साहन मिला है। पशुपालन विभाग ने ग्रामीणों को उन्नत नस्ल की गायों के पालन, दुग्ध उत्पादन और शासन की योजनाओं की जानकारी दी। इसी से प्रेरित होकर गौरव रघुवंशी ने गिर नस्ल की गाय खरीदी और पारंपरिक गोपालन को आगे बढ़ाया।
27 से 31 अक्टूबर तक 208 वृंदावन ग्रामों में हुई प्रतियोगिता
पशुपालन और डेयरी विभाग ने गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के तहत 27 से 31 अक्टूबर के बीच प्रदेश के वृंदावन ग्रामों में दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता आयोजित कराई थी। प्रदेश के चयनित 208 वृंदावन ग्रामों में यह प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसका उद्देश्य पशुपालकों को प्रोत्साहित करना और देशी उन्नत नस्ल की गायों के पालन को बढ़ावा देना है।

प्रतियोगिता में पहले तीन स्थान हासिल करने वाले पशुपालकों को पुरस्कृत किया जाएगा। प्रथम स्थान पर एक लाख रुपये, द्वितीय स्थान पर 50 हजार रुपये और तृतीय स्थान पर 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके साथ प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा। सभी विजेताओं के खातों में पुरस्कार राशि एक साथ डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी।
गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के तहत आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रदेश भर के पशुपालकों ने हिस्सा लिया। दुग्ध उत्पादन के आंकड़ों के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया। उज्जैन गिर गाय राधा 19.760 लीटर दूध प्रतिदिन के साथ पहले स्थान पर रही।
उज्जैन गिर गाय राधा 19.760 लीटर दूध: प्रदेश की टॉप-5 दूध देने वाली गायें
प्रतियोगिता में प्रदेश की सर्वाधिक दूध देने वाली गायों की सूची में पहले स्थान पर उज्जैन जिले के ग्राम तालोद निवासी गौरव रघुवंशी की गिर गाय राधा रही, जिसने प्रतिदिन 19.760 लीटर दूध उत्पादन किया। दूसरे स्थान पर रतलाम जिले के ग्राम सुखेड़ा निवासी मुकेश कुमार परमार की गाय रही, जिसने 17.230 लीटर प्रतिदिन दूध दिया।
तीसरे स्थान पर उमरिया जिले के ग्राम डोडका निवासी संध्या पांडेय की गिर गाय रही, जिसने 17.166 लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन किया। चौथे स्थान पर रायसेन जिले के ग्राम मांगरोल निवासी ज्ञानेश्वर पटेल की गाय रही, जिसने 16.350 लीटर प्रतिदिन दूध दिया। पांचवें स्थान पर राजगढ़ जिले के ग्राम सलेहपुर निवासी सुमेर सिंह पंवार की गाय रही, जिसने 16.144 लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन किया।
इन पशुपालकों की उपलब्धियां देशी गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के साथ बेहतर पशुपालन और दुग्ध उत्पादन की दिशा में प्रेरक उदाहरण हैं। इनकी सफलता यह बताती है कि सही नस्ल का चुनाव, संतुलित आहार और नियमित देखभाल से देशी गायें भी दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।
9 नवंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय गौ-पूजन और सम्मान समारोह
गोवर्धन पर्व के अवसर पर 9 नवंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय पशुपालक सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय गौ-पूजन एवं पशुपालक सम्मान समारोह में गौरव रघुवंशी सहित प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित करेंगे। कार्यक्रम दोपहर 12:30 बजे से शुरू होगा।
समारोह में मुख्यमंत्री प्रदेश के टॉप-10 दुग्ध उत्पादक पशुपालकों को सांकेतिक रूप से सम्मानित करेंगे। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर गौ-पूजन और पशुपालक सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गोवर्धन पर्व पर होने वाला यह समारोह पशुपालकों के सम्मान और देशी गोवंश के संरक्षण के संदेश के साथ आयोजित किया जा रहा है।
धनतेरस पर उज्जैन के गजलक्ष्मी मंदिर में देवी को 40 लाख रुपये के नोटों से सजाया गया था और हजारों भक्तों ने दर्शन किए थे।
कार्यक्रम में पशुपालन विभाग की योजनाओं और नवाचारों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसका उद्देश्य देशी गोवंश का संरक्षण करने के साथ पशुपालन को किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आय का बेहतर साधन बनाना है।
गौशालाओं के लिए 60 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि
समारोह में मुख्यमंत्री प्रदेश की तीन हजार से अधिक पंजीकृत गौशालाओं में संरक्षित 5.51 लाख गोवंश के भरण-पोषण के लिए सितंबर महीने की 60 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि भी जारी करेंगे। यह राशि गौशालाओं में रह रहे गोवंश के चारे, पानी और देखभाल की व्यवस्था के लिए दी जाएगी।
राज्य सरकार का कहना है कि गौशालाओं में संरक्षित गोवंश की देखभाल सरकार की प्राथमिकता है। अनुदान राशि समय पर जारी होने से गौशालाओं को अपने दैनिक खर्चों की व्यवस्था में मदद मिलेगी। प्रदेश में तीन हजार से अधिक पंजीकृत गौशालाएं काम कर रही हैं, जिनमें लाखों गोवंश संरक्षित हैं।
वृंदावन ग्राम योजना से देशी गोवंश को मिला प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के कई गांवों को वृंदावन ग्राम घोषित किया है। तालोद को वृंदावन ग्राम घोषित किए जाने के बाद गांव में देशी गोवंश के संरक्षण और संवर्धन को विशेष प्रोत्साहन मिला। पशुपालन विभाग ने ग्रामीणों को उन्नत नस्ल की गायों के पालन, दुग्ध उत्पादन और शासन की योजनाओं की जानकारी दी।
वृंदावन ग्राम योजना का उद्देश्य गांवों में देशी गोवंश के पालन को बढ़ावा देना और पशुपालकों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना इसी कड़ी में एक अहम पहल है, जिसके तहत दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता आयोजित कर पशुपालकों को पुरस्कृत किया जा रहा है।
उज्जैन जिले में इस योजना का असर साफ दिखाई दे रहा है। तालोद गांव के पशुपालक गौरव रघुवंशी की सफलता के बाद गांव के अन्य पशुपालक भी देशी नस्ल की गायों के पालन की ओर प्रेरित हो रहे हैं। विभाग की ओर से पशुपालकों को नस्ल सुधार, संतुलित आहार और पशु स्वास्थ्य के बारे में नियमित जानकारी दी जा रही है।
गिर नस्ल: कम लागत, अच्छा दूध और रोग प्रतिरोधक क्षमता
गिर नस्ल देश की सबसे पुरानी और प्रसिद्ध देशी गाय नस्लों में से एक है। यह नस्ल अपने अधिक दूध उत्पादन, गर्म मौसम को सहने की क्षमता और रोगों से लड़ने की ताकत के लिए जानी जाती है। गिर गाय का दूध पौष्टिक माना जाता है और इसके पालन की लागत विदेशी नस्लों की तुलना में कम आती है।
पशुपालन विशेषज्ञों का कहना है कि देशी नस्ल की गायें भारतीय जलवायु के अनुकूल होती हैं। इन्हें कम चारे और सामान्य देखभाल में भी पाला जा सकता है। राधा की सफलता इसका उदाहरण है कि सही देखभाल और संतुलित पोषण मिलने पर गिर नस्ल की गाय प्रतिदिन 19 लीटर से अधिक दूध दे सकती है।
राज्य सरकार देशी उन्नत नस्ल की गायों के पालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं के तहत पशुपालकों को नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, पशु स्वास्थ्य सेवाएं और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी जाती है।
मध्य प्रदेश दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर
मध्य प्रदेश दुग्ध उत्पादन के मामले में देश में तीसरे स्थान पर है। राज्य सरकार का कहना है कि पशुपालन और गोवंश संवर्धन से जुड़ी योजनाओं के जरिए दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले कुछ सालों में राज्य में दुग्ध उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
दुग्ध उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार है। लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए पशुपालन आय का दूसरा साधन है। खेती के साथ पशुपालन करने से परिवार की आय बढ़ती है और दूध की बिक्री से नियमित नकद आमदनी मिलती है। इसलिए सरकार दुग्ध उत्पादन बढ़ाने वाली योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है।
उज्जैन गिर गाय राधा 19.760 लीटर दूध की सफलता राज्य के पशुपालकों के लिए प्रेरणा है। इससे यह संदेश जाता है कि देशी नस्ल की गायों के पालन से भी अच्छी कमाई हो सकती है। सरकार की योजनाओं और पुरस्कारों से पशुपालकों का उत्साह बढ़ रहा है और वे बेहतर नस्ल और बेहतर प्रबंधन की ओर बढ़ रहे हैं।
पशुपालकों के लिए आगे क्या
9 नवंबर को होने वाले सम्मान समारोह के बाद पशुपालन विभाग की योजनाओं का प्रचार-प्रसार और तेज होगा। विभाग की प्रदर्शनी में पशुपालक योजनाओं, नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी ले सकेंगे। जिला मुख्यालयों पर होने वाले गौ-पूजन और सम्मान कार्यक्रमों में स्थानीय पशुपालकों को भी सम्मानित किया जाएगा।
पुरस्कार राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे विजेताओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और पशुपालकों को समय पर राशि मिलेगी। गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना के तहत आगे भी इस तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिससे पशुपालकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो।
उज्जैन जिले के तालोद गांव की यह कहानी अब पूरे प्रदेश के पशुपालकों तक पहुंचेगी। गिर गाय राधा और पशुपालक गौरव रघुवंशी की मेहनत ने यह दिखा दिया है कि देशी गोवंश का पालन केवल परंपरा नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आर्थिक समृद्धि का सशक्त माध्यम भी है।
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