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GeM पोर्टल पर खरीद में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई: मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में 392 अधिकारी-कर्मचारी घेरे में, 7 बर्खास्त, 80 से अधिक सप्लायर काली सूची में

सांकेतिक चित्र: सरकारी कार्यालय भवन सांकेतिक चित्र: सरकारी कार्यालय भवन

भोपाल ब्यूरो

मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीद के लिए इस्तेमाल होने वाले गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर हुई खरीदी में वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से अब तक 392 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की गई है। इनमें करीब 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी भी शामिल हैं। गंभीर मामलों में 7 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि करीब 3 से 4 करोड़ रुपये की वसूली की कार्रवाई भी की गई है। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले 80 से अधिक ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को काली सूची में डाला गया है।

क्या है पूरा मामला

मध्य प्रदेश के 374 नगरीय निकायों ने पिछले तीन वर्षों में, यानी वर्ष 2023 से 2026 के बीच, GeM पोर्टल के माध्यम से करीब 1,134 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इस खरीदारी के प्रारंभिक मूल्यांकन में सामने आया कि यदि सामान औसत दरों पर खरीदा जाता, तो करीब 250 करोड़ रुपये की बचत संभव थी। दरों में भारी अंतर और नियमों की अनदेखी के मामलों ने विभाग को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया।

नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्पष्ट किया है कि सरकार का मुख्य उद्देश्य जनता की कमाई का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना और उसका पूरा लाभ नागरिकों तक पहुंचाना है। विभाग का कहना है कि सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और वित्तीय गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने के लिए यह प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी।

कैसे खुली गड़बड़ी की पोल

दरों में अंतर का मामला सबसे पहले अप्रैल 2026 में सामने आया था, जब अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने अधिकारियों की एक कार्यशाला के दौरान खरीदारी की दरों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया था कि एक निकाय ने कचरा वाहन दो लाख रुपये में खरीदा, जबकि दूसरे निकाय में चार डस्टबिन लगाकर छह लाख रुपये में खरीदी दिखाई गई।

इसी तरह, बाजार में 306 रुपये कीमत वाली एलईडी लाइट की खरीदी कुछ निकायों में 11,800 रुपये तक की दर पर दर्ज की गई। इन उदाहरणों के बाद खरीदी की दरों और भुगतान से जुड़े मामलों की प्रारंभिक जांच शुरू कराई गई थी। बाद में जब यह मामला सार्वजनिक चर्चा में आया, तो विभाग ने कार्रवाई को और तेज कर दिया।

अब तक की कार्रवाई: एक नजर में

विभागीय जानकारी के अनुसार, अब तक की कार्रवाई कई स्तरों पर हुई है। गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और लापरवाही के मामलों में 7 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है। अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि, वेतनवृद्धि रोकने और राशि की वसूली जैसी कार्रवाई की गई है।

कार्रवाई के दायरे में आए 392 अधिकारी-कर्मचारियों में लगभग 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा, 80 से अधिक ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को काली सूची में डाला गया है, ताकि वे भविष्य में सरकारी खरीद प्रक्रिया में भाग न ले सकें। करीब 3 से 4 करोड़ रुपये की राशि की वसूली की कार्रवाई भी की गई है।

लोकायुक्त ने भी शुरू की जांच

विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अब इस मामले की जांच लोकायुक्त संगठन की विशेष स्थापना पुलिस ने भी शुरू कर दी है। शासन स्तर पर पूरे प्रदेश के नगरीय निकायों में हुई खरीदी की विस्तृत जांच कराई जा रही है। जांच में अनियमितताओं की वास्तविक सीमा सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कितनी राशि की खरीदी में अनियमितता हुई और किन अधिकारियों, ठेकेदारों या आपूर्तिकर्ताओं की जिम्मेदारी तय होती है। तब तक खरीद प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी जारी रहेगी।

तकनीक और एआई से होगी निगरानी

गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए अब तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। नगरीय प्रशासन विभाग में अनियमितताओं की निगरानी के लिए डिजिटल माध्यम से पोर्टल पर होने वाली हर खरीदी और वित्तीय लेनदेन की मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं को पूरी तरह रोका जा सके।

विभाग का जोर इस बात पर है कि जनता के पैसे का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से हो और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचे। सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए दरों, भुगतान और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जा रही है, ताकि नियमों के विपरीत होने वाली खरीद की पहचान की जा सके।

क्या है GeM पोर्टल और क्यों है यह अहम

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस, यानी GeM, केंद्र सरकार का ऑनलाइन खरीद प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से सरकारी विभाग और निकाय सामान और सेवाओं की खरीद करते हैं। इसका उद्देश्य सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाना, प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और सही दरों पर सामान उपलब्ध कराना है।

मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय — नगर निगम, नगरपालिका और नगर परिषद — अपने दैनिक कामकाज के लिए वाहनों, लाइटों, उपकरणों और अन्य सामग्रियों की खरीद इसी पोर्टल के माध्यम से करते हैं। जब एक ही सामान अलग-अलग निकायों में कई गुना अधिक दर पर खरीदा जाता है, तो इससे न केवल सरकारी खजाने को नुकसान होता है, बल्कि जनता का भरोसा भी कमजोर होता है। यही वजह है कि इस मामले में हुई कार्रवाई को प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

विपक्ष ने भी उठाए सवाल, सरकार का रुख स्पष्ट

इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद विपक्ष ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकारी खरीद में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, सरकार और विभाग का रुख स्पष्ट है — भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी-कर्मचारी या सप्लायर को बख्शा नहीं जाएगा। नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री ने भी कहा है कि खरीद प्रक्रिया पर उचित निगरानी और पर्यवेक्षण बेहद जरूरी है और गलत काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की सरकार की प्रतिबद्धता पहले भी साबित हो चुकी है।

आगे क्या होगा

शासन स्तर पर अब पूरे प्रदेश के नगरीय निकायों में हुई खरीदी की विस्तृत जांच कराई जा रही है। विभागीय कार्रवाई के साथ लोकायुक्त की जांच और विस्तृत परीक्षण के नतीजों का इंतजार है। जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी, जिसमें और अधिकारियों पर कार्रवाई या वसूली भी शामिल हो सकती है।

इस बीच, विभाग ने सभी नगरीय निकायों को स्पष्ट संदेश दिया है कि खरीद प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दरों की तुलना, भुगतान की जांच और डिजिटल निगरानी के जरिए भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश के नागरिकों के लिए यह कार्रवाई इस बात का भरोसा है कि उनके टैक्स का पैसा पारदर्शी तरीके से खर्च होगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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