बड़वानी ब्यूरो।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी जिले के गायत्री धाम कलाल्दा में आयोजित शरद उत्सव कार्यक्रम में सहभागिता के लिए पहुंचे और गायत्री धाम परिसर में आयोजित मलखंभ खेल की आकर्षक और रोमांचक प्रस्तुति का अवलोकन किया। इस अवसर पर नन्हे खिलाड़ियों ने अपने अद्भुत शारीरिक संतुलन, साहस, एकाग्रता और खेल कौशल से भारतीय पारंपरिक खेल मलखंभ की उत्कृष्ट प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत मलखंभ की विभिन्न विधाओं का उत्साहपूर्वक अवलोकन किया तथा उनके साहस, अनुशासन और उत्कृष्ट खेल प्रतिभा की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
₹1 लाख की प्रोत्साहन राशि की घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मलखंभ का शानदार प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए मुख्यमंत्री निधि से ₹1 लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने की घोषणा की। उन्होंने विद्यार्थियों की मेहनत, लगन और समर्पण की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने भारतीय पारंपरिक खेलों के महत्व को रेखांकित करते हुए मलखंभ को शारीरिक सुदृढ़ता, मानसिक एकाग्रता, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने वाला महत्वपूर्ण खेल बताया। प्रोत्साहन राशि की घोषणा से विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके प्रशिक्षकों और गुरुकुल का भी उत्साह बढ़ा है, क्योंकि इससे पारंपरिक खेलों की साधना को आधिकारिक सम्मान मिला है।

एकलव्य गुरुकुल के 20 विद्यार्थियों ने दिखाई अद्भुत प्रतिभा
शरद उत्सव के अंतर्गत एकलव्य गुरुकुल गायत्री धाम और जिला खेल एवं युवक कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मलखंभ खेल प्रस्तुति का आयोजन किया गया। इसमें एकलव्य गुरुकुल गायत्री धाम के कक्षा तीसरी से आठवीं तक के कुल 20 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। विद्यार्थियों ने मलखंभ की विभिन्न विधाओं का प्रदर्शन करते हुए अपनी शारीरिक दक्षता, लचीलेपन, संतुलन और सामूहिक समन्वय का परिचय दिया। कम उम्र में इतनी कठिन विधाओं का प्रदर्शन विद्यार्थियों के नियमित अभ्यास और गुरुकुल की अनुशासित दिनचर्या का परिणाम है। गुरुकुल में पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक साधना पर भी बराबर ध्यान दिया जाता है, जिसकी झलक इस प्रस्तुति में साफ दिखी।

एकल मलखंभ में आठ विधाओं का शानदार प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने एकल मलखंभ के अंतर्गत आठ अलग-अलग विधाओं की आकर्षक प्रस्तुति दी। इनमें आड़ी मारना, वाने गुरुजी की पकड़, चक्रासन, धनुरासन, बजरंगी, पेट मयूरासन, हाथ मयूरासन और मलखंभ के शीर्ष पर खड़े होकर संतुलन बनाए रखने जैसी चुनौतीपूर्ण विधाएं शामिल रहीं। नन्हे खिलाड़ियों ने मलखंभ पर कठिन आसनों और शारीरिक मुद्राओं का कुशलतापूर्वक प्रदर्शन कर अपनी नियमित अभ्यास क्षमता, आत्मविश्वास और एकाग्रता का परिचय दिया। कम उम्र के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत इन चुनौतीपूर्ण विधाओं ने उनकी प्रतिभा और खेल के प्रति समर्पण को प्रदर्शित किया। हर विधा में शरीर का संतुलन, पकड़ की मजबूती और गति का तालमेल जरूरी होता है, और विद्यार्थियों ने इन सभी में दक्षता दिखाई।
समूह पिरामिड मलखंभ में दिखा अद्भुत तालमेल और संतुलन
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण समूह पिरामिड मलखंभ की प्रस्तुति रही। इसमें विद्यार्थियों ने सात अलग-अलग पिरामिड संरचनाओं का प्रदर्शन किया। समूह में एक-दूसरे के सहयोग से संतुलन बनाते हुए विद्यार्थियों ने विभिन्न आकर्षक आकृतियां निर्मित कीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से खिलाड़ियों ने सामूहिक समन्वय, अनुशासन, आपसी विश्वास और शारीरिक दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। पिरामिड संरचनाओं में सबसे नीचे के खिलाड़ियों को पूरे समूह का भार संभालना होता है, जबकि ऊपर के खिलाड़ियों को संतुलन बनाए रखना होता है। यह विधा टीम भावना और एक-दूसरे पर भरोसे की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाती है, जिसमें गुरुकुल के विद्यार्थी खरे उतरे।

पारंपरिक खेल संस्कृति की समृद्ध विरासत
शरद उत्सव के अवसर पर आयोजित इस खेल प्रस्तुति ने भारतीय पारंपरिक खेल संस्कृति की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करने के साथ ही विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान किया। कार्यक्रम में नन्हे खिलाड़ियों की आकर्षक प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। मलखंभ जैसे पारंपरिक खेल आधुनिक खेलों की चकाचौंध में कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं, लेकिन गुरुकुलों में इनकी साधना अब भी जीवित है। ऐसे आयोजनों से पारंपरिक खेलों को नई पहचान मिलती है और बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का भाव पैदा होता है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति और प्रोत्साहन राशि की घोषणा ने इस विरासत को और मजबूती दी है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य, बड़वानी जिले के प्रभारी मंत्री और कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल, विधायक श्याम बर्डे, पूर्व राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी, शांतिकुंज प्रतिनिधि प्रमोद भटनागर, मेवालाल पाटीदार सहित अन्य गणमान्यजन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
आगे क्या
मुख्यमंत्री निधि से ₹1 लाख की प्रोत्साहन राशि मिलने के बाद अब गुरुकुल के विद्यार्थियों के लिए यह सम्मान आगे की साधना में प्रेरणा का काम करेगा। जिला खेल एवं युवक कल्याण विभाग के साथ गुरुकुल के इस तरह के आयोजनों से मलखंभ जैसे पारंपरिक खेलों को जिले और प्रदेश में और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। शरद उत्सव के मंच पर मिली पहचान के बाद विद्यार्थियों की प्रतिभा को बड़े मंचों तक पहुंचाने का रास्ता भी खुलेगा।
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