भोपाल ब्यूरो
सार: मोहन यादव धनतेरस पूजा के लिए शुक्रवार सुबह भोपाल स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान धन्वंतरि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे बड़ा धन निरोगी काया है, और इसी दिन से गांवों में घरों की निःशुल्क रजिस्ट्री का विशेष अभियान भी तेज हो गया है, जिसके तहत 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
धनतेरस का पर्व इस बार मध्य प्रदेश के लिए दोहरी खुशी लेकर आया है। एक ओर पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हुई है, तो दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों को उनके घर का पक्का कानूनी दस्तावेज देने का अभियान भी अपने चरम पर पहुंच गया है। शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री मोहन यादव भोपाल स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे। पूजा के बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को धनतेरस की बधाई दी और कहा कि यह पर्व स्वास्थ्य, समृद्धि और नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है।
मोहन यादव धनतेरस पूजा: भाजपा कार्यालय में धन्वंतरि पूजन
धनतेरस और आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की जयंती पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार सुबह करीब साढ़े दस बजे भाजपा मुख्यालय पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान धन्वंतरि से समस्त प्रदेशवासियों के जीवन के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। पूजा के दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
मोहन यादव धनतेरस पूजा के बाद सोशल मीडिया पर भी बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि दीपोत्सव के शुभारंभ और सुख-समृद्धि की मंगलकामना के पावन पर्व धनतेरस की सभी को बधाई है। उन्होंने उज्जैन स्थित महर्षि सांदीपनि आश्रम के प्राचीन कुंडेश्वर महादेव मंदिर में विराजमान भगवान कुबेर से प्रार्थना की कि सभी नागरिकों के जीवन में वैभव और आरोग्यता बनी रहे। मुख्यमंत्री का यह संदेश धनतेरस के उस भाव को रेखांकित करता है, जिसमें धन का अर्थ केवल सोना-चांदी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और समृद्धि भी माना जाता है।
धनतेरस पर धन्वंतरि की पूजा की परंपरा बहुत पुरानी है। मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन उनकी पूजा आरोग्य और दीर्घायु की कामना से की जाती है। धन्वंतरि की कथा और यम दीपदान की परंपरा के बारे में विस्तार से यहां पढ़ें।
सबसे बड़ा धन निरोगी काया
पूजा के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पांच दिवसीय दीपोत्सव का पर्व धनतेरस से आरंभ होता है और आज के दिन भगवान धन्वंतरि का पूजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए सबसे बड़ा धन निरोग रहना है, इसलिए सबसे बड़ा सुख निरोगी काया माना जाता है। मुख्यमंत्री की यह बात धनतेरस के मूल भाव को सामने लाती है, जहां स्वास्थ्य को ही असली संपत्ति माना गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एलोपैथी के साथ आयुर्वेदिक और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को जोड़कर पारंपरिक पद्धति को भी बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि आयुष विभाग के माध्यम से प्राचीन चिकित्सा पद्धति को सम्मान मिल रहा है। यह टिप्पणी इसलिए भी अहम है, क्योंकि धनतेरस को आयुर्वेद दिवस के रूप में भी देखा जाता है और भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक माना जाता है।
प्रदेश में आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए सरकार पहले से ही कई कदम उठा रही है। आयुर्वेदिक अस्पतालों और औषधालयों का विस्तार हो रहा है, और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का प्रयास चल रहा है। मुख्यमंत्री का धनतेरस पर दिया गया संदेश इसी दिशा में एक और कदम के रूप में देखा जा रहा है।

ग्रामीणों के घरों की निःशुल्क रजिस्ट्री
धनतेरस के मौके पर मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के घरों की निःशुल्क रजिस्ट्री का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आज के समय में गांवों में मकान बनाने के लिए लोग लाखों रुपये की अपनी पूंजी लगाते हैं। ऐसे में सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वामित्व योजना के तहत उनके आवास की निःशुल्क रजिस्ट्री कराने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने इस योजना को अभियान के रूप में लिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रजिस्ट्री होने से ग्रामीणजन अपने मकान के दस्तावेजों के आधार पर बैंक से आवश्यकता के अनुसार ऋण ले सकते हैं। उन्होंने इस योजना से लाभान्वित हो रहे सभी लाभार्थियों को बधाई दी। यह योजना उन लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए अहम है, जिनके पास मकान या प्लॉट का पट्टा तो है, लेकिन उसकी पक्की रजिस्ट्री नहीं हुई है। ऐसे परिवारों को अब सरकार मुफ्त में पक्की रजिस्ट्री कराकर मालिकाना हक दे रही है, और रजिस्ट्री के लिए लगने वाला स्टांप शुल्क भी सरकार अपने खजाने से जमा कर रही है।
योजना के तहत गांवों की आबादी भूमि पर स्थित पात्र मकानों और भूखंडों का सर्वेक्षण किया जाता है। सर्वेक्षण और सत्यापन के बाद पात्र हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख और संपत्ति स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सारा ऐप और संपदा 2.0 जैसी डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रजिस्ट्री मिलने से संपत्ति पर कानूनी मालिकाना हक मिलता है और नियमानुसार उसके क्रय-विक्रय के साथ ऋण लेने का रास्ता भी खुलता है।
आंकड़ों में रजिस्ट्री अभियान
मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के आंकड़े बताते हैं कि अभियान कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक नवंबर 2026 की स्थिति में प्रदेश में 12,87,252 रजिस्ट्री पंजीयन पूरे हो चुके थे। यह जानकारी मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में हुई समीक्षा बैठक में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने दी थी। इसके बाद अभियान ने और गति पकड़ी।
पांच नवंबर को प्रकाशित विस्तृत आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में तब तक 15,98,046 रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी थीं। धनतेरस के दिन जारी सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, अब यह आंकड़ा 17 लाख 9 हजार से अधिक हो गया है। राज्य सरकार ने 15 नवंबर तक इस आंकड़े को 20 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुरैना जिले में भी अब तक 20,947 रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं।
आंकड़ों में यह बढ़ोतरी इसलिए भी अहम है, क्योंकि धनतेरस के दिन प्रदेशभर के चयनित गांवों में शत-प्रतिशत पंजीयन के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। मंत्री, सांसद और विधायक गांव-गांव पहुंचकर पात्र हितग्राहियों की संपत्तियों का पंजीयन अपनी मौजूदगी में करा रहे हैं। सरकार का कहना है कि इस अभियान से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकार को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता दूर होगी।
आज मुरैना से शुरू हुआ विशेष अभियान
धनतेरस के दिन का सबसे बड़ा कार्यक्रम मुरैना जिले के करुआ गांव में रखा गया है, जहां दोपहर डेढ़ बजे मुख्यमंत्री मोहन यादव मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के अंतर्गत स्वामित्व दस्तावेजों के पंजीयन अभियान में शामिल हो रहे हैं। इस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी मौजूद रहेंगे। मुरैना में रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत और उसके लक्ष्य के बारे में विस्तार से यहां पढ़ें।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री प्रक्रिया का अवलोकन करेंगे, हितग्राहियों से संवाद करेंगे और उत्कृष्ट कार्य करने वाले पटवारियों का सम्मान करेंगे। मुख्यमंत्री का आज का दौरा मुरैना के साथ-साथ भिंड और अशोकनगर जिलों तक भी फैला है। सुबह भाजपा कार्यालय में पूजा के बाद मुख्यमंत्री स्टेट हैंगर से ग्वालियर के लिए रवाना हुए, और शाम को भोपाल स्थित निवास लौटने का कार्यक्रम है।
धनतेरस पर प्रदेश के सभी 55 जिलों में पंजीयन की प्रक्रिया चल रही है। सरकार ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए धनतेरस पर विशेष अभियान संचालित करने का फैसला किया है। इसके अंतर्गत प्रदेश के चयनित गांवों में मंत्री, सांसद और विधायकों की उपस्थिति में पात्र हितग्राहियों की संपत्तियों का शत-प्रतिशत पंजीयन कराया जाएगा।
स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को क्या मिलेगा
स्वामित्व योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि ग्रामीण परिवारों को उनके घर का पक्का कानूनी दस्तावेज मिलता है। पहले कई परिवारों के पास मकान तो था, लेकिन उसके स्वामित्व का कोई पक्का कागज नहीं था। इससे न तो वे बैंक से ऋण ले पाते थे और न ही संपत्ति का क्रय-विक्रय आसानी से कर पाते थे। अब रजिस्ट्री मिलने के बाद यह रास्ता खुल गया है।
दूसरा लाभ यह है कि रजिस्ट्री पूरी तरह निःशुल्क है। पात्र भू-स्वामियों के पट्टों की पक्की रजिस्ट्री के लिए लगने वाला स्टांप शुल्क सरकार अपने खजाने से भर रही है। इससे हितग्राहियों को अपनी संपत्ति की रजिस्ट्री कराने के लिए स्वयं राशि खर्च नहीं करनी पड़ती। यह उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है, जो मकान बनाने में ही अपनी जीवनभर की पूंजी लगा चुके हैं।
तीसरा लाभ यह है कि संपत्ति का अधिकार अभिलेख मिलने से ग्रामीणों की संपत्ति को कानूनी सुरक्षा मिलती है। विवाद की स्थिति में दस्तावेज ही सबसे मजबूत आधार होता है। सरकार का कहना है कि स्वामित्व योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा, क्योंकि संपत्ति के दस्तावेज के आधार पर लोग बैंक से ऋण लेकर खेती, व्यापार या बच्चों की पढ़ाई में निवेश कर सकेंगे।
धनतेरस और पांच दिवसीय दीपोत्सव
धनतेरस के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो गई है। धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है और यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ-साथ धन की देवी लक्ष्मी और कुबेर की पूजा भी की जाती है। लोग इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और नई वस्तुएं खरीदना शुभ मानते हैं।
उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में भी धनतेरस पर विशेष पूजन-अभिषेक किया जा रहा है। परंपरा के अनुसार, मंदिर में भगवान महाकाल को चांदी के सिक्के अर्पित किए जा रहे हैं और पुरोहित समिति देश, प्रदेश और नगर की सुख-समृद्धि के लिए महापूजा कर रही है। महाकाल मंदिर में दीपोत्सव की शुरुआत एकादशी पर संध्या आरती में फुलझड़ियां जलाकर हो चुकी है, और यह उत्सव पांच दिन तक चलेगा। दीपावली के बारे में विस्तार से यहां पढ़ें।
धनतेरस के बाद रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज का क्रम आएगा। इस बार दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाएगी, जबकि गोवर्धन पर्व 9 नवंबर को प्रदेशभर में मनाया जाएगा। सरकार ने गोवर्धन पर्व पर प्रदेशभर में गौ-पूजन और पशुपालकों के सम्मान का कार्यक्रम भी तय किया है।
आगे क्या
मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना का अगला पड़ाव 15 नवंबर है, जब तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। धनतेरस के दिन शुरू हुआ विशेष अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा। मंत्री, सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों के गांवों में जाकर शत-प्रतिशत पंजीयन पूरा कराने में जुटे रहेंगे। सरकार का कहना है कि 15 नवंबर तक लक्ष्य पूरा होने के बाद भी योजना जारी रहेगी, ताकि कोई भी पात्र परिवार दस्तावेज से वंचित न रहे।
दूसरी ओर, दीपोत्सव के अगले दिनों में भी प्रदेशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर जारी रहेगा। गोवर्धन पर्व पर गौशालाओं में विशेष पूजन होगा और पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा। मोहन यादव धनतेरस पूजा के बाद दिए अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे स्वास्थ्य को सबसे बड़ा धन मानकर चलें और दीपोत्सव को समृद्धि और आरोग्यता के साथ मनाएं।
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