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दीपावली से पहले राज्यों को फिर बड़ी राहत: केंद्र ने पाँच दिन पहले जारी की ₹1,09,019 करोड़ की कर हस्तांतरण किस्त, मध्य प्रदेश को मिले ₹8,010 करोड़

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नई दिल्ली ब्यूरो

सार: दीपावली से पहले केंद्र ने राज्यों को बड़ी राहत देते हुए कर हस्तांतरण की नियमित नवंबर किस्त पाँच दिन पहले जारी कर दी है। गुरुवार, 5 नवंबर को राज्यों के खातों में कुल ₹1,09,019 करोड़ भेजे गए, जबकि यह किस्त सामान्य रूप से 10 नवंबर को जारी होनी थी। मध्य प्रदेश को इस बार ₹8,010 करोड़ मिले हैं, जो देश में तीसरा सबसे बड़ा हिस्सा है। यह राशि 31 अक्टूबर को जारी अतिरिक्त किस्त से अलग है — वह अतिरिक्त किस्त थी, यह नवंबर की नियमित किस्त है, और पाँच दिन के भीतर राज्यों को कुल ₹2,18,038 करोड़ मिल चुके हैं।

पाँच दिन पहले क्यों जारी हुई यह किस्त

वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, त्योहारों के मौसम को देखते हुए नवंबर की नियमित किस्त को समय से पहले जारी किया गया है। मंत्रालय ने कहा है कि इस अग्रिम भुगतान से राज्य सरकारें पूंजीगत खर्च तेज कर सकेंगी और विकास तथा जनकल्याण से जुड़े खर्चों के लिए धन की व्यवस्था कर सकेंगी। दीपावली के आसपास राज्यों के खर्च में आमतौर पर बढ़ोतरी होती है — सड़कों, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े कामों के भुगतान, कर्मचारियों के वेतन-भत्ते और त्योहारों से जुड़ी व्यवस्थाओं पर खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में समय से पहले मिली यह राशि राज्यों के खजाने को तत्काल राहत देती है।

नियमित किस्त का समय से पहले आना कोई असाधारण घटना नहीं है, लेकिन इस बार इसका महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि इसी सप्ताह 31 अक्टूबर को भी इतनी ही राशि की एक अतिरिक्त किस्त जारी हो चुकी है। यानी पाँच दिन के भीतर राज्यों को दो बार ₹1,09,019-₹1,09,019 करोड़ मिले हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह भुगतान राज्यों को विकास और कल्याणकारी खर्चों के लिए धन उपलब्ध कराने की केंद्र की नीति का हिस्सा है।

किस राज्य को कितना हिस्सा मिला

इस बार की किस्त में सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश को मिला है — ₹19,208 करोड़। दूसरे स्थान पर बिहार है, जिसे ₹10,845 करोड़ मिले हैं। मध्य प्रदेश ₹8,010 करोड़ के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके बाद पश्चिम बंगाल को ₹7,866 करोड़, महाराष्ट्र को ₹7,022 करोड़ और राजस्थान को ₹6,460 करोड़ मिले हैं।

अन्य बड़े राज्यों में ओडिशा को ₹4,819 करोड़, आंध्र प्रदेश को ₹4,597 करोड़, कर्नाटक को ₹4,504 करोड़, तमिलनाडु को ₹4,466 करोड़ और गुजरात को ₹4,094 करोड़ मिले हैं। झारखंड को ₹3,660 करोड़, छत्तीसगढ़ को ₹3,602 करोड़ और असम को ₹3,552 करोड़ दिए गए हैं। केरल को ₹2,597 करोड़, तेलंगाना को ₹2,370 करोड़ और पंजाब को ₹2,176 करोड़ मिले हैं।

छोटे राज्यों में हरियाणा को ₹1,484 करोड़, अरुणाचल प्रदेश को ₹1,476 करोड़ और उत्तराखंड को ₹1,244 करोड़ मिले हैं। हिमाचल प्रदेश को ₹996 करोड़, त्रिपुरा को ₹699 करोड़, मेघालय को ₹688 करोड़, मणिपुर को ₹682 करोड़ और मिजोरम को ₹615 करोड़ दिए गए हैं। नागालैंड को ₹524 करोड़, सिक्किम को ₹365 करोड़ और गोवा को ₹398 करोड़ मिले हैं। यह किस्त देश के सभी 28 राज्यों को दी गई है।

हिस्सेदारी के लिहाज से देखें तो उत्तर प्रदेश को कुल राशि का करीब 17.6 प्रतिशत, बिहार को करीब 10 प्रतिशत और मध्य प्रदेश को करीब 7.35 प्रतिशत मिला है। यह बंटवारा वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार तय हिस्सेदारी पर आधारित होता है, जिसमें राज्यों की आबादी, क्षेत्रफल, आय का स्तर और राजकोषीय स्थिति जैसे मानदंड शामिल होते हैं।

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मध्य प्रदेश के लिए क्या मायने रखती है यह राशि

मध्य प्रदेश के लिए ₹8,010 करोड़ की यह राशि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश इस समय कई बड़े कामों पर खर्च कर रहा है। सड़कों और सिंचाई परियोजनाओं, बिजली उत्पादन, शहरी विकास और ग्रामीण योजनाओं पर लगातार खर्च हो रहा है। दीपावली के पहले यह राशि मिलने से प्रदेश सरकार को चालू वित्त वर्ष के विकास कार्यों के भुगतान और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

प्रदेश में इस समय ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। गांधी सागर पंप स्टोरेज परियोजना जैसी योजनाओं में दिसंबर तक पहली टरबाइन चलाने का लक्ष्य है। ऐसे बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए समय पर धन मिलना बेहद जरूरी होता है। कर हस्तांतरण की यह किस्त प्रदेश के खजाने को उस दिशा में मजबूती देती है।

इसके अलावा, त्योहारों के मौसम में प्रदेश में बाजारों में खरीदारी बढ़ती है। धनतेरस और दीपावली के दौरान सोना-चांदी, वाहन और घरेलू सामान की बिक्री में उछाल आता है, जिससे राज्य को कर राजस्व भी मिलता है। केंद्र से मिली यह अग्रिम राशि और त्योहारी मौसम का राजस्व मिलकर प्रदेश की आर्थिक स्थिति को स्थिर रखते हैं। किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसे खर्चों के लिए भी यह धन काम आएगा।

पाँच दिन में दूसरी बार ₹1.09 लाख करोड़

इस किस्त की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पाँच दिन के भीतर राज्यों को मिली दूसरी ₹1,09,019 करोड़ की राशि है। 31 अक्टूबर को केंद्र ने इतनी ही राशि की एक अतिरिक्त किस्त जारी की थी, जो चालू वित्त वर्ष की दूसरी अतिरिक्त किस्त थी। अब 5 नवंबर को नवंबर की नियमित किस्त भी जारी हो गई है। दोनों को मिलाकर राज्यों को पाँच दिन में कुल ₹2,18,038 करोड़ मिल चुके हैं।

अतिरिक्त किस्त और नियमित किस्त में अंतर समझना जरूरी है। अतिरिक्त किस्त वह होती है जो सामान्य मासिक कार्यक्रम से हटकर, विशेष परिस्थितियों में जारी की जाती है। नियमित किस्त वह होती है जो हर महीने तय कार्यक्रम के अनुसार दी जाती है। 31 अक्टूबर की किस्त अतिरिक्त थी, जबकि 5 नवंबर की किस्त नवंबर महीने की नियमित किस्त है, जिसे केवल पाँच दिन पहले जारी किया गया है। दोनों का कुल योग राज्यों के लिए त्योहारी मौसम में बड़ी वित्तीय राहत बन गया है।

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में राज्यों को कर हस्तांतरण के रूप में कुल ₹15.26 लाख करोड़ देने का अनुमान लगाया गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह राशि ₹13.93 लाख करोड़ थी। यानी इस साल राज्यों को पिछले साल की तुलना में करीब ₹1.33 लाख करोड़ अधिक मिलने का अनुमान है। यह बढ़ोतरी केंद्र के कर संग्रह में वृद्धि और राज्यों की वित्तीय जरूरतों को दर्शाती है।

कर हस्तांतरण आखिर होता क्या है

कर हस्तांतरण का मतलब है केंद्र सरकार द्वारा वसूले गए करों में से राज्यों का हिस्सा उन्हें देना। संविधान के अनुसार, केंद्र सरकार जिन करों को वसूलती है, उनमें से एक तय हिस्सा राज्यों को दिया जाता है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, केंद्र के करों के विभाज्य पूल का 41 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को दिया जाता है। यह राशि एक वित्त वर्ष में 14 किस्तों में राज्यों को भेजी जाती है।

यह व्यवस्था वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित होती है। वित्त आयोग हर पाँच साल में यह तय करता है कि केंद्र और राज्यों के बीच करों का बंटवारा किस अनुपात में होगा और राज्यों के बीच यह राशि किस फार्मूले से बांटी जाएगी। राज्यों के बीच बंटवारे में आबादी, क्षेत्रफल, प्रति व्यक्ति आय, राजकोषीय अनुशासन और जनसांख्यिकीय प्रदर्शन जैसे मानदंडों का ध्यान रखा जाता है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और अधिक आबादी वाले राज्य को सबसे बड़ा हिस्सा मिलता है।

कर हस्तांतरण राज्यों की आय का एक बड़ा स्रोत होता है। राज्य सरकारें अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा इसी राशि से पूरा करती हैं। अपने स्वयं के करों — जैसे राज्य वस्तु एवं सेवा कर, स्टांप शुल्क, आबकारी और वाहन कर — के अलावा, केंद्र से मिलने वाला यह हिस्सा राज्यों के लिए वित्तीय स्थिरता की रीढ़ होता है। जब यह राशि समय से पहले मिलती है, तो राज्यों को अपने खर्चों की योजना बनाने में आसानी होती है।

बजट में कितना अनुमान

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में कर हस्तांतरण के लिए ₹15.26 लाख करोड़ का अनुमान लगाया गया है। पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान ₹13.93 लाख करोड़ की तुलना में यह करीब 9.5 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी बताती है कि केंद्र को इस साल कर संग्रह में वृद्धि की उम्मीद है और राज्यों को भी अधिक धन मिलने का अनुमान है।

बजट अनुमान के अनुसार, राज्यों को मिलने वाली यह राशि उनके कुल राजस्व का एक बड़ा हिस्सा होती है। मध्य प्रदेश जैसे राज्य के लिए, जिसे इस बार एक किस्त में ₹8,010 करोड़ मिले हैं, साल भर में मिलने वाली कुल राशि प्रदेश के बजट के लिए निर्णायक होती है। प्रदेश सरकार इसी राशि के भरोसे सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च करती है।

अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में जारी दो किस्तों को मिलाकर राज्यों को अब तक इस वित्त वर्ष में बड़ी राशि मिल चुकी है। 31 अक्टूबर की अतिरिक्त किस्त और 5 नवंबर की नियमित किस्त के बाद, राज्यों के खजाने में त्योहारी मौसम के लिए पर्याप्त धन आ गया है। इससे राज्यों को अपने विकास कार्यों के भुगतान में देरी नहीं करनी पड़ेगी।

राज्यों के खर्च पर क्या असर पड़ेगा

समय से पहले मिली इस राशि का सबसे सीधा असर राज्यों के पूंजीगत खर्च पर पड़ेगा। पूंजीगत खर्च वह होता है जो सड़कों, पुलों, बांधों, बिजलीघरों, स्कूलों और अस्पतालों जैसी स्थायी संपत्तियों के निर्माण पर किया जाता है। ऐसे खर्च से न केवल बुनियादी ढांचा मजबूत होता है, बल्कि रोजगार भी पैदा होता है। त्योहारी मौसम में जब निर्माण कार्य तेज होते हैं, तो समय पर धन मिलना इन परियोजनाओं की गति बनाए रखता है।

दूसरा असर जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा। राज्यों को पेंशन, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य बीमा, राशन और आवास जैसी योजनाओं के लिए हर महीने बड़ी राशि खर्च करनी होती है। त्योहारों के समय इन योजनाओं के लाभार्थियों की जरूरतें बढ़ जाती हैं। अग्रिम किस्त से राज्य इन भुगतानों को समय पर कर सकेंगे।

तीसरा असर यह होगा कि राज्यों को बाजार से उधार लेने की जरूरत कम पड़ेगी। जब राज्यों के पास पर्याप्त नकदी होती है, तो उन्हें अपने खर्चों के लिए महंगे ब्याज पर उधार नहीं लेना पड़ता। इससे राज्यों का ब्याज बोझ कम होता है और वे बची हुई राशि को विकास कार्यों पर खर्च कर सकते हैं। दीपावली से पहले मिली यह राशि राज्यों को वित्तीय रूप से मजबूत स्थिति में रखती है।

आगे क्या — अगली किस्त कब

नियमित किस्त आमतौर पर हर महीने की 10 तारीख को जारी होती है। नवंबर की किस्त पाँच दिन पहले 5 नवंबर को जारी कर दी गई है। अगली नियमित किस्त दिसंबर में तय कार्यक्रम के अनुसार जारी होने की उम्मीद है। यदि केंद्र इसी तरह त्योहारी मौसम या विशेष परिस्थितियों में अग्रिम भुगतान करता रहा, तो राज्यों को आगे भी समय से पहले धन मिल सकता है।

मध्य प्रदेश के लिहाज से देखें तो आने वाले हफ्तों में प्रदेश में गोवर्धन पूजा और अन्य त्योहारों के आयोजन, शीतकालीन फसलों की बुआई के लिए किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता, और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार योजनाओं पर खर्च बढ़ेगा। केंद्र से मिली ₹8,010 करोड़ की यह राशि इन सभी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। प्रदेश सरकार के लिए अब चुनौती यह होगी कि इस राशि का उपयोग विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं में सही समय पर और पारदर्शी तरीके से हो।

राज्यों को मिलने वाली कर हस्तांतरण की राशि देश की संघीय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। केंद्र के कर संग्रह में वृद्धि का लाभ जब समय पर राज्यों तक पहुंचता है, तो विकास की गति पूरे देश में एक साथ बढ़ती है। दीपावली से पहले पाँच दिन में ₹2.18 लाख करोड़ का हस्तांतरण इस बात का संकेत है कि केंद्र राज्यों की वित्तीय जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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