दिल्ली ब्यूरो
सार: केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले राज्यों को करों में हिस्सेदारी के रूप में 1,09,019 करोड़ रुपये की अतिरिक्त किस्त जारी कर दी है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश को 19,208 करोड़ रुपये मिला है, जबकि मध्य प्रदेश के खाते में 8,010 करोड़ रुपये आए हैं। यह राशि नियमित मासिक किस्त से अलग है और चालू वित्त वर्ष की दूसरी अतिरिक्त किस्त है।
कितनी राशि जारी हुई और किस राज्य को कितना मिला
वित्त मंत्रालय ने 31 अक्टूबर की रात राज्यों को कर हस्तांतरण की एक अतिरिक्त किस्त जारी करने की जानकारी दी। कुल 1,09,019 करोड़ रुपये की यह राशि राज्यों को इसलिए दी गई है ताकि वे त्योहारी सीजन में पूंजीगत खर्च में तेजी ला सकें और विकास तथा कल्याण से जुड़े कामों के लिए धन जुटा सकें। यह किस्त नियमित मासिक हस्तांतरण के ऊपर है, यानी नवंबर में राज्यों को सामान्य किस्त के अलावा यह अतिरिक्त राशि भी मिल रही है।
राज्यवार बंटवारे में उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 19,208 करोड़ रुपये मिले हैं, जो कुल राशि का लगभग 17.6 प्रतिशत है। इसके बाद बिहार को 10,845 करोड़ रुपये और मध्य प्रदेश को 8,010 करोड़ रुपये दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल को 7,866 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 7,022 करोड़ रुपये और राजस्थान को 6,460 करोड़ रुपये मिले हैं। ओडिशा को 4,819 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 4,597 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 4,504 करोड़ रुपये और तमिलनाडु को 4,466 करोड़ रुपये दिए गए हैं। सबसे कम राशि सिक्किम को मिली है, जिसके खाते में 365 करोड़ रुपये आए हैं।
यह बंटवारा किसी विवेकाधीन अनुदान की तरह नहीं है। राज्यों का हिस्सा एक तय फॉर्मूले के अनुसार निर्धारित होता है, जिसमें आबादी, क्षेत्रफल और आय के अंतर जैसे मानक शामिल होते हैं। इसी वजह से बड़े राज्यों को अधिक राशि मिलती है और छोटे राज्यों को उनके हिस्से के अनुसार कम, लेकिन हर राज्य को उसके निर्धारित हिस्से के अनुरूप राशि मिलती है।
मध्य प्रदेश के लिए 8,010 करोड़ रुपये का क्या मतलब है

मध्य प्रदेश को मिली 8,010 करोड़ रुपये की राशि कुल हस्तांतरण का लगभग 7.3 प्रतिशत है और देश में यह तीसरा सबसे बड़ा हिस्सा है। राज्य के लिहाज से यह राशि इसलिए अहम है क्योंकि इन दिनों मध्य प्रदेश अपना 71वां स्थापना दिवस मना रहा है और भोपाल में तीन दिवसीय राज्योत्सव चल रहा है। त्योहारी सीजन और स्थापना दिवस के मौके पर राज्य सरकार के पास विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय गुंजाइश रहेगी।
इस राशि का उपयोग राज्य सरकार सड़कों, पेयजल, सिंचाई और शहरी बुनियादी ढांचे जैसे पूंजीगत कार्यों में कर सकती है, साथ ही योजनाओं के भुगतान और कल्याणकारी खर्चों में भी इसका उपयोग हो सकेगा। यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह राशि किसी विशेष कार्यक्रम के लिए तय नहीं है, बल्कि राज्य के सामान्य खजाने में जाती है, जहां से सरकार अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च करती है।
एक और अहम बात यह है कि नवंबर के मध्य में राज्यों को मिलने वाली सामान्य मासिक किस्त अपने तय समय पर अलग से आएगी। यानी नवंबर में मध्य प्रदेश सहित सभी राज्यों को दो तरह की राशि मिलेगी, एक यह अतिरिक्त किस्त और दूसरी नियमित मासिक किस्त। इससे राज्यों पर तत्काल वित्तीय दबाव कम होगा और वे बिना उधारी बढ़ाए अपने खर्च पूरे कर सकेंगे।
कर हस्तांतरण क्या होता है
कर हस्तांतरण का मतलब है केंद्र सरकार द्वारा वसूले गए करों में से राज्यों का हिस्सा उन्हें सौंपना। केंद्र सरकार वस्तु एवं सेवा कर, आयकर और निगम कर जैसे करों की वसूली करती है और उसका एक तय प्रतिशत हिस्सा राज्यों के बीच बांटा जाता है। वर्तमान व्यवस्था के तहत केंद्र के करों का 41 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को दिया जाता है और यह राशि एक वित्त वर्ष में 14 किस्तों में बांटी जाती है।
यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है क्योंकि राज्यों के पास स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सेवाओं की बड़ी जिम्मेदारी होती है, लेकिन कर वसूली का बड़ा हिस्सा केंद्र के पास आता है। हस्तांतरण से राज्यों को अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए नियमित और अनुमानित आय मिलती है। इसके अलावा केंद्र सरकार योजनाओं के लिए अलग से अनुदान भी देती है, लेकिन कर हस्तांतरण राज्यों की अपनी आय जैसा होता है, जिस पर राज्य सरकार अपने विवेक से खर्च कर सकती है।
त्योहारी सीजन में इस तरह की अतिरिक्त किस्त का महत्व और बढ़ जाता है। इस दौरान बाजार में मांग बढ़ती है, निर्माण कार्य तेज होते हैं और राज्य सरकारों के खर्च भी बढ़ जाते हैं। अतिरिक्त राशि मिलने से राज्य अपने पूंजीगत कामों को रफ्तार दे सकते हैं, ठेकेदारों और योजनाओं के बकाया भुगतान कर सकते हैं और नए काम शुरू कर सकते हैं।
चालू वित्त वर्ष की दूसरी अतिरिक्त किस्त
चालू वित्त वर्ष 2026-27 में यह दूसरी बार है जब केंद्र सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त किस्त दी है। इससे पहले अगस्त में भी एक अतिरिक्त राशि जारी की गई थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया है कि यह अतिरिक्त हस्तांतरण मजबूत आर्थिक गतिविधियों और बेहतर कर संग्रह का परिणाम है। यानी जब कर वसूली उम्मीद से बेहतर होती है, तो केंद्र के पास राज्यों को अतिरिक्त राशि देने की गुंजाइश बनती है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही, यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान, केंद्र सरकार ने राज्यों को करों में हिस्सेदारी के रूप में करीब 7 लाख करोड़ रुपये जारी किए थे। इसमें नियमित किस्तें और अतिरिक्त किस्तें दोनों शामिल हैं। नई अतिरिक्त किस्त के बाद राज्यों के पास वित्त वर्ष की दूसरी छमाही की शुरुआत में ही एक मजबूत वित्तीय आधार रहेगा, जिसका उपयोग वे सर्दियों के मौसम में चलने वाले निर्माण और विकास कार्यों में कर सकेंगे।
आगे क्या होगा
यह राशि नवंबर की शुरुआत में ही राज्यों के खजाने में पहुंच जाएगी, इसलिए इसके असर के शुरुआती संकेत आने वाले हफ्तों में दिख सकते हैं। राज्य सरकारें अपने-अपने बजट के अनुसार इस राशि का उपयोग करेंगी और पूंजीगत खर्च के आंकड़े आने वाले महीनों में बताएंगे कि इस अतिरिक्त राशि का कितना हिस्सा विकास कार्यों में लगा।
नवंबर के मध्य में नियमित मासिक किस्त भी जारी होगी, जिसके बाद राज्यों की कुल प्राप्ति और बढ़ जाएगी। किसी और अतिरिक्त किस्त के बारे में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए आगे की स्थिति कर संग्रह और आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल यह तय है कि त्योहारी सीजन में राज्यों के पास खर्च के लिए अधिक राशि रहेगी और विकास तथा कल्याण के कामों में रुकावट की आशंका कम होगी।
मध्य प्रदेश के 71वें स्थापना दिवस और राज्योत्सव के मौके पर मिली यह अतिरिक्त राशि राज्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है। राज्य सरकार के पास अब विकास कार्यों को गति देने और जनता से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अधिक वित्तीय संसाधन होंगे। इस फैसले की विस्तृत जानकारी यहां पढ़ें: https://www.abplive.com/business/union-government-releases-1-09-019-crore-tax-devolution-installment-in-advance-to-boost-state-capital-spending-3209424
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