भोपाल ब्यूरो
सार: मध्य प्रदेश के 71वें स्थापना दिवस पर राजधानी भोपाल के शौर्य स्मारक में सेना दिवस-2027 के आयोजनों का शंखनाद हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सभी 55 जिलों से लाई गई मिट्टी से ‘संकल्प वृक्ष’ का रोपण किया। अब 1 नवंबर से 15 जनवरी 2027 तक प्रदेशभर में भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और समर्पण से जुड़े कार्यक्रम होंगे, जिनका मुख्य आयोजन 15 जनवरी को भोपाल में भव्य सेना दिवस परेड के रूप में होगा।
रविवार की सुबह भोपाल का शौर्य स्मारक देशभक्ति और संकल्प की भावना से सराबोर रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में ‘संकल्प वृक्ष’ पौधरोपण अभियान में शामिल हुए। सुबह 7:45 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी 55 जिलों से लाई गई मिट्टी को एक ही वृक्ष में अर्पित किया गया। यह वृक्ष अब प्रदेश की एकता, अखंडता और सामूहिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बनेगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सैन्य इवेंट प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें सेना दिवस परेड, रण हुंकार, एकीकृत युद्ध प्रदर्शन और सैन्य प्रदर्शनी की झलकियां प्रस्तुत की गई हैं।
शौर्य स्मारक में हुआ संकल्प वृक्ष का रोपण
‘संकल्प वृक्ष’ का पौधरोपण ‘मेरी माटी’ अभियान के तहत किया गया। इसके लिए प्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों से मिट्टी एकत्र की गई थी। विभिन्न जिलों से मिट्टी के कलश लेकर आए विद्यार्थियों का मुख्यमंत्री ने अभिनंदन किया। शौर्य स्मारक परिसर में हुए इस आयोजन का संदेश साफ था — एक राष्ट्र, एक सेना, एक संकल्प। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के लिए यह अत्यंत सौभाग्य और गौरव का विषय है कि 1 नवंबर से 15 जनवरी 2027 के बीच भारत की सेना अपने अदम्य पराक्रम, पुरुषार्थ और शौर्य का प्रदर्शन भोपाल की धरती पर करेगी। उन्होंने 71वें स्थापना दिवस पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई दी और 15 जनवरी 2027 को सेना दिवस पर भोपाल में होने वाले आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
55 जिलों की मिट्टी में समाई एकता की भावना

प्रदेश के सभी 55 जिलों से मिट्टी का एकत्रित होना इस बात का प्रतीक है कि अलग-अलग बोलियों, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद प्रदेशवासी एक सूत्र में बंधे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और एकता का प्रतीक बनी है। शौर्य स्मारक में रोपा गया संकल्प वृक्ष आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाता रहेगा कि देश की रक्षा करने वाले वीरों के प्रति कृतज्ञता और राष्ट्र के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ा संकल्प है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे स्थापना दिवस के अवसर पर सेना के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अनूठा तरीका बताया।
1 नवंबर से 15 जनवरी तक चलेंगे सेना के शौर्य के कार्यक्रम
सेना दिवस-2027 के आयोजन 1 नवंबर 2026 से शुरू होकर 15 जनवरी 2027 तक चलेंगे। इस अवधि में प्रदेशभर में जिला स्तर पर भी सेना के शौर्य, पराक्रम और सेवा भावना से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों का उद्देश्य प्रदेशवासियों को भारतीय सेना की समृद्ध विरासत से परिचित कराना और प्रदेश के युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में होने वाले इस आयोजन के लिए राज्य सरकार भारतीय सेना को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने रक्षा मंत्रालय सहित आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
15 जनवरी को भोपाल में पहली बार भव्य सेना दिवस परेड
घोषित कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार 15 जनवरी 2027 को भोपाल में पहली बार भव्य सेना दिवस परेड का आयोजन होगा। आयोजन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की जानकारी राज्य सरकार की ओर से पहले ही दी जा चुकी है। परेड की तैयारियों के तहत जनवरी में अभ्यास का क्रम भी तय किया गया है। सेना दिवस परेड के लिए 9, 11 और 13 जनवरी को अभ्यास होगा, जबकि शौर्य संध्या के लिए 11 और 13 जनवरी को अभ्यास रखा गया है। सैन्य प्रदर्शनी का आयोजन 7 से 12 जनवरी तक होगा। भेल क्षेत्र में कालीबाड़ी मार्ग पर मुख्य परेड प्रस्तावित है, वहीं तात्या टोपे नगर स्टेडियम में 15 जनवरी की शाम शौर्य संध्या और रण हुंकार का आयोजन होगा। जंबूरी मैदान में सेना के अत्याधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी और भोजताल स्थित वीआईपी बोट क्लब क्षेत्र में एकीकृत युद्ध प्रदर्शन भी प्रस्तावित है।
क्यों मनाया जाता है सेना दिवस
सेना दिवस हर वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सेना के इतिहास की एक ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है। 15 जनवरी 1949 को जनरल के. एम. करिअप्पा ने भारतीय सेना की कमान संभाली थी। वे भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने थे। उन्होंने अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ से सेना की कमान ग्रहण की थी। इसी ऐतिहासिक क्षण की स्मृति में हर वर्ष सेना दिवस मनाया जाता है। भोपाल में होने वाला आयोजन इस परंपरा को और भी विशेष बना देगा, क्योंकि पहली बार राजधानी की धरती पर सेना दिवस का इतना भव्य आयोजन हो रहा है।
शौर्य स्मारक: बलिदान की अमर गाथा
भोपाल का शौर्य स्मारक शहीदों की स्मृति को समर्पित एक विशेष स्मारक है। इसका लोकार्पण 14 अक्टूबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। अरेरा पहाड़ी पर करीब 12 एकड़ क्षेत्र में फैले इस स्मारक में 62 फुट ऊंचा शौर्य स्तंभ है, जो थल सेना, नौसेना और वायु सेना का प्रतीक है। स्मारक में शहीद सैनिकों के नाम कांच की पट्टिकाओं पर अंकित हैं। यहां एक भूमिगत संग्रहालय भी है, जिसमें देश के विभिन्न युद्धों और सैनिकों के शौर्य की झलकियां प्रस्तुत की गई हैं। सियाचिन ग्लेशियर की ठंड का अनुभव कराने वाली गैलरी भी इस स्मारक की विशेषता है। ऐसे में सेना दिवस के आयोजनों की शुरुआत के लिए शौर्य स्मारक से बेहतर स्थान कोई और नहीं हो सकता था।
स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई और चार वर्गों का संकल्प
मुख्यमंत्री ने स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश के विकास का संकल्प भी दोहराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल को महिला, युवा, गरीब और किसान — इन चार वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सैन्य व्यवस्था में हुए नवाचारों और बदलावों की भी उन्होंने सराहना की। अग्निवीर योजना के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रसेवा की भावना और सेना में भागीदारी को बढ़ावा देने के प्रयास का भी उन्होंने उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश की धरती पर भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम का उत्सव पूरे देश के लिए गौरव का क्षण होगा।
आगे क्या: राज्योत्सव और सेना दिवस की उलटी गिनती
स्थापना दिवस के साथ ही राजधानी में तीन दिवसीय राज्योत्सव भी चल रहा है, जो 1 से 3 नवंबर तक लाल परेड मैदान में आयोजित हो रहा है। राज्योत्सव की थीम ‘विरासत से विकास’ रखी गई है। इसके साथ ही अब सेना दिवस के आयोजनों की उलटी गिनती भी शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में जिला स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा सामने आएगी और जनवरी में परेड तथा प्रदर्शनी की तैयारियां तेज होंगी। भोपाल के लोगों के लिए यह अवसर इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्हें अपने ही शहर में सेना के शौर्य का भव्य प्रदर्शन देखने को मिलेगा।
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