नई दिल्ली ब्यूरो
सार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर प्रदेश की जनता को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रदेश को गौरवशाली विरासत, समृद्ध संस्कृति और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि बताया और कहा कि प्रदेश के लोग अपनी प्रतिभा और उद्यमशीलता से हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रहे हैं।
प्रधानमंत्री का संदेश रविवार सुबह सामने आया, जब मध्य प्रदेश अपना 71वां स्थापना दिवस मना रहा है। राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में स्थापना दिवस और राज्योत्सव के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री के संदेश में प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान, सांस्कृतिक समृद्धि और विकास यात्रा — तीनों का उल्लेख है।
प्रधानमंत्री का संदेश: विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में मध्य प्रदेश के सभी भाई-बहनों को राज्य के स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश गौरवशाली विरासत, समृद्ध संस्कृति और अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि है। उनके अनुसार, यहां के विश्वविख्यात धरोहर स्थल प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को और भव्य बनाते हैं।
प्रधानमंत्री ने प्रदेश के लोगों की प्रतिभा और उद्यमशीलता की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के लोगों ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। कृषि, उद्योग, पर्यटन, शिक्षा और बुनियादी ढांचे से लेकर नवाचार तक, प्रदेश हर मोर्चे पर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अपने सर्वांगीण विकास के साथ प्रदेश आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने कामना की कि यह विशेष अवसर प्रदेश के लोगों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। उनका संदेश एक बयान के रूप में सामने आया है, जिसमें प्रदेश की पहचान और उसके लोगों के योगदान पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी दीं शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रदेश की विकास यात्रा और बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, विरासत का गौरव और विकास की नई उड़ान अब मध्य प्रदेश की नई पहचान बन गई है।
मुख्यमंत्री के संदेश में प्रदेश की समृद्ध विरासत और विकास की आकांक्षा के मेल पर जोर दिया गया। स्थापना दिवस के मौके पर भोपाल में राज्य स्तरीय राज्योत्सव का आयोजन हो रहा है, जिसकी केंद्रीय थीम विरासत से विकास के पथ की ओर अग्रसर प्रदेश है। जिला स्तर पर भी स्थापना दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें जनप्रतिनिधि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं।
अन्य नेताओं की शुभकामनाएं
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मध्य प्रदेश के लोगों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने मध्य प्रदेश को नर्मदा की पवित्र धाराओं, आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली परंपराओं से समृद्ध प्रदेश बताया। उन्होंने सुशासन, विकास और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित होने की कामना की।
इसके अलावा कई अन्य नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। स्थापना दिवस के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों से मध्य प्रदेश के लिए बधाई संदेश आए, जिनमें प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और विकास यात्रा का उल्लेख किया गया।
1956 में बना था मध्य प्रदेश, 71वां स्थापना दिवस
मध्य प्रदेश का गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ था। राज्यों के पुनर्गठन के तहत तत्कालीन मध्य भारत, विंध्य प्रदेश, भोपाल राज्य और मध्य प्रांत एवं बरार के हिस्सों को मिलाकर नया मध्य प्रदेश बना। भोपाल को प्रदेश की राजधानी बनाया गया। इसी वजह से हर साल 1 नवंबर को प्रदेश का स्थापना दिवस मनाया जाता है।
साल 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ नया राज्य बना, लेकिन मध्य प्रदेश आज भी क्षेत्रफल के लिहाज से देश के बड़े राज्यों में गिना जाता है। सात दशकों की इस यात्रा में प्रदेश ने प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक मोर्चों पर लंबा सफर तय किया है। इस साल मनाया जा रहा 71वां स्थापना दिवस इसी यात्रा का प्रतीक है।
स्थापना दिवस केवल एक तारीख का उत्सव नहीं है, बल्कि प्रदेश की पहचान, उसकी विविधता और उसके लोगों की सामूहिक यात्रा का स्मरण भी है। मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, बघेलखंड, महाकोशल और ग्वालियर-चंबल जैसे अंचलों की अपनी-अपनी सांस्कृतिक पहचान है, जो मिलकर मध्य प्रदेश की समग्र तस्वीर बनाती है।
धरोहर, संस्कृति और पर्यटन: प्रदेश की पहचान
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में जिन विश्वविख्यात धरोहर स्थलों का उल्लेख किया, उनमें खजुराहो के मंदिर समूह और साँची का स्तूप प्रमुख हैं। भीमबेटका के शैलाश्रय भी प्रदेश की प्राचीन विरासत की गवाही देते हैं। ये स्थल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं और प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को मजबूत करते हैं।
धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी मध्य प्रदेश का विशेष स्थान है। उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर, ओंकारेश्वर, चित्रकूट और अमरकंटक जैसे स्थल आस्था के केंद्र हैं। नर्मदा नदी प्रदेश की जीवनरेखा मानी जाती है, जिसके किनारे कई धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं विकसित हुई हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य के मामले में भी प्रदेश समृद्ध है। कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच जैसे राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीव पर्यटन के लिए जाने जाते हैं। सतपुड़ा और विंध्य की पहाड़ियां, झरने और घने जंगल प्रदेश के प्राकृतिक वैभव को दर्शाते हैं। लोक संस्कृति, लोक नृत्य और जनजातीय परंपराएं इस तस्वीर को और रंगीन बनाती हैं।
कृषि, उद्योग, शिक्षा और बुनियादी ढांचे में योगदान
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कृषि, उद्योग, पर्यटन, शिक्षा और बुनियादी ढांचे का विशेष उल्लेख किया। मध्य प्रदेश कृषि के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है। गेहूं, सोयाबीन और दलहन जैसी फसलों के उत्पादन में प्रदेश की अहम भूमिका है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था प्रदेश के लाखों परिवारों की आजीविका से जुड़ी है।
उद्योग और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर भी प्रदेश में लगातार काम हो रहा है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे शहर व्यापार, शिक्षा और प्रशासन के केंद्र हैं। सड़क, रेल और शहरी बुनियादी ढांचे के विस्तार से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के बीच संपर्क बेहतर हुआ है।
शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में भी प्रदेश आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान और शोध केंद्र युवाओं को नए अवसर दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में नवाचार का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के लोग अपनी प्रतिभा से हर क्षेत्र में नए मील के पत्थर स्थापित कर रहे हैं।
आत्मनिर्भर भारत में मध्य प्रदेश की भूमिका
प्रधानमंत्री के संदेश का एक अहम हिस्सा आत्मनिर्भर भारत से जुड़ा है। उनके अनुसार, मध्य प्रदेश अपने सर्वांगीण विकास के साथ आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रहा है। इसका अर्थ है कि प्रदेश का विकास केवल प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की समग्र प्रगति में भी उसका योगदान है।
आत्मनिर्भरता का यह विचार कृषि, उद्योग, पर्यटन और नवाचार — सभी क्षेत्रों से जुड़ा है। स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, कृषि उपज और पर्यटन के जरिए प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। महिला उद्यमिता और स्वरोजगार से जुड़ी पहलें भी इस दिशा में काम कर रही हैं, जिनकी झलक राज्योत्सव के आयोजनों में भी देखने को मिलती है।
प्रदेश के लोगों की उद्यमशीलता को प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से रेखांकित किया। उनके अनुसार, यही उद्यमशीलता प्रदेश को हर क्षेत्र में आगे ले जा रही है। विकास की यह यात्रा विरासत के सम्मान के साथ आगे बढ़ रही है, जो राज्योत्सव की थीम में भी झलकती है।
आगे क्या: स्थापना दिवस का उत्सव जारी रहेगा
स्थापना दिवस के मौके पर भोपाल में राज्य स्तरीय राज्योत्सव का आयोजन 1 नवंबर से 3 नवंबर तक चल रहा है। इस दौरान विकास प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और लोक कला से जुड़े कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। जिला स्तर पर भी स्थापना दिवस के समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।
आने वाले दिनों में राज्योत्सव के तहत लोक नृत्य, वाद्यवृंद और लोक गायन की प्रस्तुतियां होंगी। स्थापना दिवस का यह उत्सव प्रदेश की विरासत और विकास यात्रा — दोनों को एक साथ सामने लाता है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के शुभकामना संदेशों ने इस उत्सव की शुरुआत को और विशेष बना दिया है।
मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर आए शुभकामना संदेश प्रदेश की पहचान, उसकी विरासत और उसके लोगों के योगदान का स्मरण कराते हैं। विरासत का गौरव और विकास की आकांक्षा — इन्हीं दो धागों से प्रदेश की आगे की यात्रा बुनी जाएगी।
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