भोपाल ब्यूरो
मध्य प्रदेश के 71वें स्थापना दिवस के मौके पर राजधानी भोपाल में आज उद्यमियों के लिए बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित उद्यम सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदेश की 950 एमएसएमई इकाइयों को 490 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि और 100 से अधिक स्टार्टअप को लगभग 1.50 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित करेंगे। इस मौके पर उद्यमियों को भूमि आवंटन के आशय पत्र भी सौंपे जाएंगे और मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के हितग्राहियों को ऋण राशि के चेक भी दिए जाएंगे।
आज का उद्यम सम्मेलन: कहां, कब और किसकी अध्यक्षता में
घोषित कार्यक्रम के अनुसार, यह उद्यम सम्मेलन रविवार, 1 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री निवास, भोपाल में आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के दिन के कार्यक्रम में इस सम्मेलन का समय सुबह 11:30 बजे बताया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप करेंगे। स्थापना दिवस के दिन इस सम्मेलन का आयोजन इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इसी दिन प्रदेश अपना 71वां स्थापना दिवस मना रहा है और भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर तीन दिवसीय राज्योत्सव का भी शुभारंभ हो रहा है। उद्यम सम्मेलन को राज्योत्सव के आर्थिक पक्ष के रूप में देखा जा रहा है, जहां सरकार की ओर से उद्योग और रोजगार से जुड़ी घोषणाओं को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है। सम्मेलन में उद्यमी, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि और स्टार्टअप से जुड़े युवा भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री इस दौरान चार उद्योग संघों के प्रतिनिधियों, उद्यमियों और स्टार्टअप से सीधा संवाद भी करेंगे, ताकि जमीन पर उद्योगों के सामने आ रही दिक्कतों और सुझावों को सीधे सुना जा सके।
किसे कितनी राशि: 950 इकाइयों को 490 करोड़, 100 से अधिक स्टार्टअप को 1.50 करोड़
मध्य प्रदेश एमएसएमई विकास नीति के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों की 950 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 490 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि का वितरण किया जाएगा। यह राशि प्रोत्साहन राशि के रूप में दी जा रही है, यानी उन इकाइयों को, जिन्होंने प्रदेश में निवेश किया है और उत्पादन तथा रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाया है। इसी तरह, स्टार्टअप नीति 2025 के अंतर्गत प्रदेश के 100 से अधिक स्टार्टअप को सिंगल क्लिक द्वारा लगभग 1.50 करोड़ रुपये की सहायता की स्वीकृति और वितरण किया जाएगा। सिंगल क्लिक व्यवस्था का अर्थ यह है कि राशि सीधे लाभार्थियों के खातों तक पहुंचेगी, बिना किसी बिचौलिए के और बिना लंबी कागजी प्रक्रिया के। सरकार का कहना है कि इसी केंद्रीकृत व्यवस्था के माध्यम से स्थापित उद्योगों को निवेश पर अनुदान दिया जा रहा है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और राशि समय पर मिले। मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में पहली बार एमएसएमई इकाइयों को अनुदान समय पर वितरित किया जा रहा है, जो पहले की व्यवस्था की तुलना में एक बड़ा बदलाव है।

मंच से और क्या मिलेगा: भूमि आवंटन पत्र और उद्यम क्रांति योजना के चेक
उद्यम सम्मेलन के मंच से ही पांच उद्यमियों को भूमि आवंटन के आशय पत्र प्रदान किए जाएंगे। भूमि आवंटन का आशय पत्र किसी उद्यमी के लिए इसलिए अहम होता है, क्योंकि उद्योग लगाने की दिशा में जमीन की उपलब्धता सबसे पहली और सबसे बड़ी जरूरत होती है। आशय पत्र मिलने के बाद उद्यमी अपनी इकाई की स्थापना की औपचारिक प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही, चार उद्यमियों को मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के अंतर्गत ऋण राशि का चेक प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना का उद्देश्य ऐसे युवाओं और उद्यमियों को बैंक ऋण के माध्यम से पूंजी उपलब्ध कराना है, जिनके पास अपना व्यवसाय शुरू करने का विचार तो है, लेकिन पर्याप्त पूंजी नहीं है। इस योजना के तहत रियायती ब्याज दर पर बिना बड़ी जमानत के ऋण की व्यवस्था की जाती है, ताकि नया उद्यम शुरू करने का रास्ता आसान हो। सम्मेलन में इन दोनों घोषणाओं को इसलिए भी महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि ये सीधे नए उद्योगों की शुरुआत और पुराने उद्योगों के विस्तार, दोनों से जुड़ी हुई हैं।
किन इकाइयों को मिल रहा है प्रोत्साहन: 7,000 करोड़ का निवेश, 17,000 से अधिक रोजगार
मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने शनिवार को जानकारी देते हुए बताया कि जिन इकाइयों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, उनके द्वारा 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है और 17,000 से अधिक व्यक्तियों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान किया जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि यह सहायता केवल कागज पर दी जाने वाली राशि नहीं है, बल्कि उन इकाइयों तक पहुंच रही है, जो पहले से ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था में निवेश कर चुकी हैं और लोगों को काम दे रही हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है, क्योंकि ये बड़े उद्योगों की तुलना में कम पूंजी में अधिक रोजगार पैदा करते हैं और छोटे शहरों तथा कस्बों तक आर्थिक गतिविधि को पहुंचाते हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों की इकाइयों को इस वितरण में शामिल किया गया है, ताकि लाभ केवल राजधानी या बड़े शहरों तक सीमित न रहे। रोजगार के आंकड़े में प्रत्यक्ष रोजगार के साथ अप्रत्यक्ष रोजगार भी शामिल है, यानी उन लोगों को मिला काम भी, जो इन इकाइयों से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन, व्यापार और सेवाओं से जुड़े हैं।
एमएसएमई विकास नीति: निवेश पर अनुदान की केंद्रीकृत व्यवस्था
मध्य प्रदेश एमएसएमई विकास नीति के तहत स्थापित उद्योगों को उनके निवेश पर अनुदान सिंगल क्लिक के माध्यम से केंद्रीकृत व्यवस्था के अंतर्गत प्रदान किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि उद्यमी को अनुदान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और पूरी प्रक्रिया एक ही प्रणाली से संचालित हो। निवेश अनुकूल नीतियों के क्रियान्वयन को सरकार अपनी औद्योगिक रणनीति का अहम हिस्सा बता रही है। प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में निवेश सम्मेलनों, क्षेत्रीय उद्योग सम्मेलनों और विभागीय योजनाओं के माध्यम से निवेशकों को आमंत्रित किया गया है। एमएसएमई इकाइयों के लिए प्रोत्साहन राशि इसी कड़ी का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि जब छोटे और मझोले उद्योगों को समय पर सहायता मिलती है, तो वे अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा सकते हैं, नई मशीनें लगा सकते हैं और अधिक लोगों को रोजगार दे सकते हैं। यही कारण है कि स्थापना दिवस जैसे मौके पर इस तरह के वितरण कार्यक्रम को सरकार अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
स्टार्टअप नीति 2025: प्रदेश में बढ़ता स्टार्टअप परिदृश्य
स्टार्टअप नीति 2025 के अंतर्गत 100 से अधिक स्टार्टअप को सहायता देने का फैसला प्रदेश के स्टार्टअप परिदृश्य की बढ़ती गति को दर्शाता है। मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 2,081 स्टार्टअप को भारत सरकार द्वारा मान्यता प्रदान की गई है। वर्ष 2026-27 में 1,302 स्टार्टअप पंजीकृत हुए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में नए विचारों पर आधारित व्यवसायों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्टार्टअप आमतौर पर तकनीक, सेवा, कृषि प्रसंस्करण, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं और युवा उद्यमियों को अपनी पहचान बनाने का मौका देते हैं। सरकार की स्टार्टअप नीति के तहत वित्तीय सहायता के साथ-साथ पंजीकरण, मार्गदर्शन और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया जाता है। आज के सम्मेलन में स्टार्टअप को दी जाने वाली 1.50 करोड़ रुपये की राशि भले ही एमएसएमई को दी जाने वाली राशि की तुलना में छोटी लगे, लेकिन इसका संदेश यह है कि सरकार नए उद्यमियों को भी उतनी ही गंभीरता से ले रही है। स्टार्टअप के लिए शुरुआती पूंजी ही सबसे बड़ी चुनौती होती है, और सरकारी सहायता से उन्हें अपना उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
अब तक कितना अनुदान: पिछले साल 1,300 करोड़, इस साल 1,085 करोड़ तक पहुंचेगा आंकड़ा
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में 1,300 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित किया गया था। वर्ष 2026-27 में रविवार को होने वाले वितरण को शामिल करते हुए 1,085 करोड़ रुपये वितरित हो जाएंगे। ये आंकड़े सरकार की ओर से जारी किए गए हैं और इन्हें एमएसएमई क्षेत्र में सरकारी सहायता की निरंतरता के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। एक साल में 1,300 करोड़ और अगले साल के शुरुआती महीनों में ही 1,085 करोड़ तक पहुंचना यह दर्शाता है कि अनुदान वितरण की गति बनी हुई है। हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि अनुदान की राशि का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब इससे जुड़ी इकाइयां अपना उत्पादन बढ़ाएं और रोजगार के नए अवसर पैदा करें। सरकार का दावा है कि समय पर अनुदान मिलने से इकाइयों की कार्यशील पूंजी की दिक्कत कम होती है और वे अपने विस्तार की योजनाओं को आगे बढ़ा पाती हैं। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि इस वितरण के बाद प्रदेश में कितने नए उद्योग स्थापित होते हैं और कितने लोगों को नया रोजगार मिलता है।
स्थापना दिवस से जुड़ाव: राज्योत्सव के बीच आर्थिक संदेश
आज का दिन प्रदेश के लिए दोहरी दृष्टि से खास है। एक ओर भोपाल में राज्योत्सव का भव्य शुभारंभ हो रहा है, जिसमें संस्कृति, संगीत, लोक कला और विकास प्रदर्शनियों की झलक देखने को मिलेगी, तो दूसरी ओर उद्यम सम्मेलन के माध्यम से सरकार आर्थिक विकास का संदेश भी दे रही है। राज्योत्सव की थीम विरासत से विकास के पथ की ओर अग्रसर प्रदेश रखी गई है, और उद्यम सम्मेलन इसी थीम के आर्थिक पक्ष को सामने रखता है। स्थापना दिवस के मौके पर मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, विकास प्रदर्शनियों का उद्घाटन और सांस्कृतिक संध्या जैसे कार्यक्रम भी हो रहे हैं। इन सबके बीच एमएसएमई और स्टार्टअप को दी जाने वाली सहायता यह बताती है कि सरकार विरासत और संस्कृति के साथ-साथ रोजगार और उद्योग को भी स्थापना दिवस के उत्सव का हिस्सा मान रही है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भी स्थापना दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें जनप्रतिनिधि मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं।
आगे क्या: जमीन, ऋण और रोजगार की अगली कड़ी
उद्यम सम्मेलन के बाद अगली कड़ी उन उद्यमियों के लिए होगी, जिन्हें भूमि आवंटन के आशय पत्र और ऋण के चेक मिल रहे हैं। आशय पत्र मिलने के बाद उन्हें अपनी इकाई की स्थापना की औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी, जिसमें जमीन का आवंटन, निर्माण और उत्पादन की शुरुआत शामिल है। इसी तरह, उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण पाने वाले हितग्राहियों को अपने व्यवसाय की योजना के अनुसार राशि का उपयोग करना होगा। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री उद्योग संघों के प्रतिनिधियों और उद्यमियों से संवाद करेंगे, ताकि भविष्य की नीतियों में उनकी परेशानियों और सुझावों को शामिल किया जा सके। यदि यह संवाद नियमित रूप से जारी रहता है, तो इससे नीतियों में सुधार की गुंजाइश बनेगी। प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां वित्त की उपलब्धता, बाजार तक पहुंच और कुशल श्रमिकों की कमी मानी जाती हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकारी सहायता के साथ-साथ बैंकों, उद्योग संगठनों और प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका भी अहम होगी। आने वाले समय में यह देखना होगा कि आज के वितरण से जुड़ी इकाइयां अपने निवेश और रोजगार के लक्ष्यों को कितना आगे बढ़ा पाती हैं।
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