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मध्य प्रदेश का 71वां स्थापना दिवस: भोपाल में 1 से 3 नवंबर तक भव्य राज्योत्सव, आज से निकलेंगी सांस्कृतिक गौरव यात्राएं

सांकेतिक चित्र: भोपाल शहर सांकेतिक चित्र: भोपाल शहर

सार: मध्य प्रदेश अपना 71वां स्थापना दिवस इस बार तीन दिन के भव्य राज्योत्सव के रूप में मनाएगा। राजधानी भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में 1 से 3 नवंबर तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, कृषि प्रदर्शनी, विद्यार्थी सम्मान और किसान कल्याण से जुड़े कार्यक्रम होंगे। उत्सव का पूर्व-रंग आज, 30 अक्टूबर से ही शुरू हो रहा है, जब भोपाल की सड़कों पर सांस्कृतिक गौरव यात्राएं निकलेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 नवंबर की शाम समारोह का शुभारंभ करेंगे।

भोपाल ब्यूरो

मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। प्रदेश का गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ था, और हर साल 1 नवंबर को स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस बार समारोह को तीन दिन का रूप दिया गया है, ताकि प्रदेश की संस्कृति, कृषि शक्ति और विकास यात्रा को एक साथ प्रस्तुत किया जा सके। राज्य स्तरीय मुख्य समारोह भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में होगा, जबकि जिला मुख्यालयों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

तीन दिन का राज्योत्सव: कब, कहां, क्या होगा

जारी कार्यक्रम रूपरेखा के अनुसार राज्योत्सव 1 से 3 नवंबर तक चलेगा। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 नवंबर को शाम 6:30 बजे करेंगे। तीनों दिन लाल परेड ग्राउंड परिसर में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, देशभक्ति कार्यक्रमों, कृषि प्रदर्शनी, विद्यार्थी सम्मान और किसान कल्याण से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन होगा। समारोह की थीम किसान कल्याण से जुड़ी है, क्योंकि वर्ष 2026 को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।

सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी कलेक्टर और कमिश्नर को आयोजन के संबंध में निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार स्थापना दिवस समारोह का आयोजन सभी जिलों में भी होगा। जिला स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ शासकीय भवनों पर प्रकाश व्यवस्था भी की जाएगी। 1 नवंबर की रात जिला मुख्यालयों के प्रमुख शासकीय भवनों को रोशन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुखों की रहेगी।

आज से पूर्व-रंग: सांस्कृतिक गौरव यात्राएं

सांकेतिक चित्र: भोपाल शहर
सांकेतिक चित्र: भोपाल शहर

राज्योत्सव का पूर्व-रंग 30 और 31 अक्टूबर को देखने को मिलेगा। इन दोनों दिन दोपहर 12 बजे से भोपाल के प्रमुख मार्गों पर भव्य सांस्कृतिक गौरव यात्राएं निकाली जाएंगी। जारी कार्यक्रम रूपरेखा के अनुसार इन यात्राओं में मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के 400 से अधिक लोक एवं जनजातीय कलाकार अपनी कला और संस्कृति की रंगारंग प्रस्तुतियां देंगे।

गौरव यात्राओं का उद्देश्य प्रदेश की लोक संस्कृति और जनजातीय परंपराओं को सड़क पर उतारकर आम लोगों तक पहुंचाना है। भोपाल के लोग इन दो दिनों में प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की वेशभूषा, नृत्य और संगीत की झलक एक साथ देख सकेंगे। यह राज्योत्सव की शुरुआत का एक जीवंत और जनभागीदारी वाला रूप होगा।

1 नवंबर: उद्घाटन और पहली सांस्कृतिक संध्या

1 नवंबर को समारोह की शुरुआत ‘देशराग’ कार्यक्रम से होगी। इसके अंतर्गत 71 बच्चों के सामूहिक वंदे मातरम् गायन और पुलिस बैंड की प्रस्तुति होगी। इस अवसर पर लाल परेड ग्राउंड में भव्य आतिशबाजी भी की जाएगी। स्थापना दिवस की पहली सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मोनाली ठाकुर अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगी।

उद्घाटन संध्या में देशभक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का संगम देखने को मिलेगा। बच्चों के सामूहिक गायन से लेकर आतिशबाजी तक, पहला दिन उत्सव के रंग में रंगा होगा। आयोजकों की रूपरेखा के अनुसार पहले दिन का कार्यक्रम प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय भावना को एक साथ सामने लाएगा।

विद्यार्थियों और किसानों का सम्मान

स्थापना दिवस समारोह में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए संस्कृति विभाग की ओर से 102 मेधावी छात्र-छात्राओं को भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चयनित विद्यार्थियों को मंच से एक-एक लाख रुपये की सम्मान राशि और प्रशस्ति-पत्र देंगे। यह सम्मान प्रदेश के उन विद्यार्थियों के लिए है, जिन्होंने पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

वहीं, किसान कल्याण स्वाभिमान पर्व क्विज के प्रदेशभर के 165 विजेता किसानों को भी पुरस्कृत किया जाएगा। जारी कार्यक्रम रूपरेखा के अनुसार इन किसानों को 55 ट्रैक्टर, 55 बुलेट मोटरसाइकिल और 55 ई-स्कूटर प्रदान किए जाएंगे। यह पुरस्कार किसान कल्याण वर्ष की भावना के अनुरूप है, जिसमें किसानों को सम्मान और आधुनिक साधनों से जोड़ने पर जोर दिया गया है।

कृषि प्रदर्शनी और विकास की झलक

लाल परेड ग्राउंड में 2 और 3 नवंबर को दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक विशेष कृषि प्रदर्शनी आयोजित होगी। इसमें उन्नत बीज, जैविक इनपुट, आधुनिक कृषि यंत्र, स्मार्ट सिंचाई तकनीक, एग्री स्टार्टअप और कृषि क्षेत्र के नवाचारों को प्रदर्शित किया जाएगा। किसानों के लिए यह प्रदर्शनी नई तकनीक और बेहतर खेती के तरीकों को जानने का अवसर होगी।

समारोह परिसर में ‘विरासत से विकास’, ‘जन-कल्याण एवं विकास’ और 160 चित्रों पर आधारित ‘राजाभोज का भोपाल’ प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदेश की विकास यात्रा, जनकल्याण के काम और भोपाल के इतिहास की झलक दिखाई जाएगी। इसके साथ ही किसान बाजार और महिला उद्यमिता मंडप में प्रदेश के स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प की बिक्री भी होगी।

देशज व्यंजनों और लोक संस्कृति का संगम

राज्योत्सव में नागरिकों को प्रदेश के विभिन्न अंचलों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर भी मिलेगा। इसके लिए ‘स्वाद-देशज व्यंजन मेला’ लगाया जाएगा। यह मेला प्रदेश की खान-पान संस्कृति की विविधता को एक जगह पर लाएगा, जहां लोग अलग-अलग अंचलों के पारंपरिक स्वाद का आनंद ले सकेंगे।

समारोह के दूसरे दिन, 2 नवंबर को शाम 6:30 बजे से विभिन्न लोक एवं जनजातीय नृत्यों के साथ ‘अनुगूँज’ वाद्य संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं को प्रदर्शित किया जाएगा। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां राज्योत्सव को एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप देंगी।

71 वर्ष की यात्रा: क्यों खास है स्थापना दिवस

मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान का उत्सव है। 1956 में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद मध्य प्रदेश अस्तित्व में आया था, और तब से 1 नवंबर को प्रदेश के लोग अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं का उत्सव मनाते हैं। इस बार का समारोह इसलिए भी खास है, क्योंकि इसे किसान कल्याण वर्ष से जोड़ा गया है।

पहले की तैयारियों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए थे कि इस बार समारोह की थीम ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ रहे और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले किसानों, युवाओं व उद्यमियों को विशेष मंच दिया जाए। राज्य स्तरीय समारोह में उन्नत कृषि, प्राकृतिक खेती और कृषि क्षेत्र में हुए नवाचारों पर प्रदर्शनियां लगाने की योजना बनी थी। साथ ही ‘विकसित मध्यप्रदेश-2047’, ‘एक जिला-एक उत्पाद’, प्रदेश के जननायक, पारंपरिक कलाएं, मंदिर स्थापत्य और भारत की ऋषि परंपरा जैसे विषयों पर प्रदर्शनियां प्रस्तावित थीं।

स्थापना दिवस का आयोजन सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री ने जिला स्तर पर भी कार्यक्रमों को उत्साह के साथ आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। हर जिले में सांस्कृतिक कार्यक्रम, सम्मान समारोह और प्रदर्शनियों के माध्यम से स्थापना दिवस मनाया जाएगा, ताकि प्रदेश के हर कोने में उत्सव की भावना पहुंचे।

आगे क्या होगा

आज, 30 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से भोपाल में पहली सांस्कृतिक गौरव यात्रा निकलेगी, और 31 अक्टूबर को भी यही क्रम जारी रहेगा। इसके बाद 1 नवंबर की शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राज्योत्सव का शुभारंभ करेंगे। 2 और 3 नवंबर को कृषि प्रदर्शनी, लोक नृत्य और सांस्कृतिक संध्या के कार्यक्रम होंगे।

भोपाल आने वाले लोगों के लिए लाल परेड ग्राउंड परिसर में तीनों दिन कार्यक्रमों की भरमार रहेगी। जो लोग भोपाल नहीं आ सकते, वे अपने जिला मुख्यालयों पर आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकते हैं। स्थापना दिवस का यह तीन दिवसीय उत्सव प्रदेश की संस्कृति, कृषि और विकास की एक साझा तस्वीर पेश करेगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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