भोपाल ब्यूरो
मध्यप्रदेश का स्थापना दिवस इस बार एक अलग रंग में मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार को भोपाल के लोक भवन में राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मुलाकात की और उन्हें आने वाले दिनों के दो बड़े कार्यक्रमों की जानकारी दी — पहला, 1 नवंबर को मनाया जाने वाला प्रदेश का स्थापना दिवस और दूसरा, 15 नवंबर को मनाई जाने वाली भगवान बिरसा मुंडा की जयंती। मुख्यमंत्री ने बताया कि स्थापना दिवस का उत्सव इस बार प्रदेश में चल रहे किसान कल्याण वर्ष से जोड़कर मनाया जाएगा, ताकि खेती और किसान की तरक्की ही इस उत्सव की असली पहचान बने। राज्यपाल ने इस दौरान सरकार के कामकाज पर प्रोत्साहन भरे शब्द भी कहे।
मुख्यमंत्री ने मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश में 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और स्थापना दिवस के कार्यक्रम भी इसी भावना के साथ जोड़े जाएंगे। उन्होंने अपने संदेश में यह भी साफ किया कि बिरसा मुंडा की जयंती पूरे प्रदेश में भव्य रूप से मनाई जाएगी और आने वाले वर्ष के कार्यक्रमों की रूपरेखा भी राज्यपाल के सामने रखी गई है।
लोक भवन की मुलाकात में क्या-क्या हुआ
लोक भवन में हुई इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को तीन बातों की जानकारी दी। पहली बात स्थापना दिवस के कार्यक्रमों की थी, दूसरी बात बिरसा मुंडा की जयंती की तैयारियों की थी और तीसरी बात आने वाले वर्ष में प्रस्तावित कार्यक्रमों की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थापना दिवस को किसान कल्याण वर्ष की योजनाओं से जोड़कर मनाने का फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि खेती और किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था और समाज की रीढ़ हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्यपाल ने सरकार के काम की सराहना करते हुए प्रोत्साहन भरी बातें कहीं। इस तरह की मुलाकातें सिर्फ औपचारिक नहीं होतीं — इनमें राज्य के बड़े कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की जाती है और राज्यपाल का मार्गदर्शन भी लिया जाता है। स्थापना दिवस जैसे राज्यव्यापी उत्सव की तैयारी में यह मुलाकात एक अहम कड़ी मानी जा रही है।
किसान कल्याण वर्ष से क्यों जुड़ा स्थापना दिवस
प्रदेश सरकार ने 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। इसका मतलब यह है कि इस पूरे वर्ष खेती, किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी योजनाओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है। स्थापना दिवस की थीम भी इसी से जुड़ी है — समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश। यानी किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश समृद्ध होगा। इस थीम के तहत स्थापना दिवस पर खेती की आधुनिक तकनीकों, प्राकृतिक खेती और कृषि नवाचारों पर विशेष प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी।
इन प्रदर्शनियों में उन किसानों, उद्यमियों और युवाओं को सम्मानित भी किया जाएगा, जिन्होंने खेती में कुछ नया किया है या अपनी मेहनत से सफलता की मिसाल कायम की है। सरकार का मानना है कि ऐसे सम्मान से दूसरे किसानों को भी नई तकनीक अपनाने और प्रयोग करने की प्रेरणा मिलेगी। जिला स्तर पर भी कार्यक्रम पूरे उत्साह के साथ मनाए जाएंगे, ताकि उत्सव सिर्फ राजधानी तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के हर जिले तक पहुंचे।
1 नवंबर की रात को प्रदेश के सभी सरकारी भवनों को रोशनी से सजाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्थापना दिवस पूरे प्रदेश का त्योहार है और इसमें प्रदेश की प्रतिभाओं को अपनी कला, हुनर और क्षमता दिखाने का मौका मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ जिला मुख्यालयों पर भी स्थानीय उत्पादों और उत्कृष्ट कार्यों की प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी।
लाल परेड ग्राउंड पर तीन दिन का भव्य उत्सव
राज्य स्तरीय मुख्य समारोह भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर आयोजित होगा। जानकारी के अनुसार स्थापना दिवस का उत्सव तीन दिन तक चलेगा। इस दौरान खेती और किसान से जुड़ी प्रदर्शनियां, संगोष्ठियां और नई तकनीकों का जीवंत प्रदर्शन होगा। डेयरी, मत्स्य पालन और रेशम उत्पादन जैसे खेती से जुड़े सहयोगी क्षेत्रों पर भी खास ध्यान दिया जाएगा, साथ ही कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और विपणन के पहलुओं को भी दिखाया जाएगा।
उत्सव की शामें भी खेती की खुशबू से जुड़ी होंगी। दूसरे और तीसरे दिन की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां खेती से जुड़ी लोक परंपराओं पर आधारित होंगी — बुवाई और कटाई के समय गाए जाने वाले लोकगीत और फसलों का उत्सव मनाने वाले जनजातीय नृत्य भी इनमें शामिल होंगे। एक दिन की शाम को देशभर के नामी कलाकारों का भव्य संगीत कार्यक्रम भी होगा, जिसके बाद आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा।
प्रदर्शनियों में विकसित मध्यप्रदेश-2047, एक जिला-एक उत्पाद, प्रदेश के लोकनायकों, पारंपरिक कलाओं, मंदिर वास्तुकला, ऋषि परंपरा और विरासत से विकास तक की पहल जैसे विषय भी शामिल होंगे। इसके अलावा स्वदेशी व्यंजनों का एक विशेष मेला भी लगेगा, जिसमें प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के स्वाद एक जगह देखने को मिलेंगे। रिपोर्ट के अनुसार पार्श्व गायिका मोनाली ठाकुर का लाइव संगीत कार्यक्रम भी इस उत्सव का एक बड़ा आकर्षण होगा।
15 नवंबर: बिरसा मुंडा की जयंती और जनजातीय गौरव
स्थापना दिवस के बाद अगला बड़ा पड़ाव 15 नवंबर का होगा, जब भगवान बिरसा मुंडा की जयंती मनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह जयंती पूरे प्रदेश में भव्य रूप से मनाई जाएगी। मध्यप्रदेश में जनजातीय आबादी बड़ी संख्या में रहती है, इसलिए इस दिन का प्रदेश के लिए खास महत्व है। 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
बिरसा मुंडा ने उन्नीसवीं सदी के आखिरी दौर में ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनजातीय आंदोलन का नेतृत्व किया था। उनका संघर्ष सिर्फ एक विद्रोह नहीं था, बल्कि अपनी जमीन, जंगल और पहचान की रक्षा की लड़ाई थी। यही वजह है कि आज भी वे जनजातीय समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत माने जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उनकी जयंती को भव्य रूप से मनाकर नई पीढ़ी को उनके जीवन और संघर्ष से जोड़ने की कोशिश होगी।
मध्यप्रदेश का गठन और स्थापना दिवस का अर्थ
मध्यप्रदेश का गठन 1 नवंबर 1956 को राज्यों के पुनर्गठन के बाद हुआ था। उस समय मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल जैसे क्षेत्रों को मिलाकर नए मध्यप्रदेश की रचना की गई थी। बाद में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ को मध्यप्रदेश से अलग करके नया राज्य बनाया गया, इसलिए दोनों ही राज्य 1 नवंबर को अपना स्थापना दिवस मनाते हैं।
स्थापना दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि प्रदेश की पहचान, संस्कृति और विकास की यात्रा का प्रतीक है। हर साल इस दिन प्रदेश की उपलब्धियों को याद किया जाता है और आगे की राह तय की जाती है। इस बार किसान कल्याण वर्ष से जुड़कर यह उत्सव खेती और किसान की कहानी को सामने लाएगा, जो प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर स्थापना दिवस की तैयारियों पर होगी। जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की जाएगी, प्रदर्शनियों की तैयारियां पूरी की जाएंगी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कलाकारों की सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि उत्सव में आम लोगों की भागीदारी ज्यादा से ज्यादा हो, ताकि यह सिर्फ सरकारी कार्यक्रम न रहकर जन-उत्सव बन जाए।
किसान कल्याण वर्ष की योजनाओं को स्थापना दिवस से जोड़ने का संदेश भी साफ है — खेती को सिर्फ उत्पादन का जरिया नहीं, बल्कि प्रदेश की समृद्धि की बुनियाद माना जाए। आने वाले दिनों में स्थापना दिवस और बिरसा मुंडा जयंती की तैयारियों से जुड़ी और जानकारियां सामने आएंगी, जिन पर प्रदेश की नजर बनी रहेगी।
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