इंदौर ब्यूरो
सार: दीपावली से ठीक पहले इंदौर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ग्राम अहीरखेड़ी में संचालित एक मावा फैक्ट्री में दूध से मलाई निकालकर उसमें स्किम्ड मिल्क पाउडर और वनस्पति तेल मिलाकर मावा जैसा उत्पाद तैयार किए जाने की आशंका पर विभाग ने फैक्ट्री का कारोबार तत्काल बंद करा दिया और करीब 341 किलोग्राम खाद्य सामग्री जब्त कर ली। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 75 हजार रुपये बताई गई है। पांच नमूने जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
दीपावली का त्योहार नजदीक है और इसी के साथ मिठाइयों की मांग भी तेजी से बढ़ गई है। मावा इस मौसम में सबसे ज्यादा खपत होने वाली सामग्री में से एक है, क्योंकि पेड़ा, बर्फी, गुलाब जामुन, कलाकंद और मिल्क केक जैसी लगभग हर पारंपरिक मिठाई का आधार मावा ही होता है। मांग बढ़ते ही मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है, इसलिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने त्योहार से पहले निरीक्षण और नमूना संग्रह का विशेष अभियान तेज कर दिया है। इसी अभियान के तहत गुरुवार को इंदौर के ग्राम अहीरखेड़ी में बड़ी कार्रवाई हुई।
इंदौर में नकली मावा: अहीरखेड़ी फैक्ट्री पर छापा
खाद्य सुरक्षा आयुक्त मनोज पुष्प और कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी की टीम गुरुवार को ग्राम अहीरखेड़ी पहुंची। टीम ने वहां प्लॉट नंबर 19 पर संचालित श्री श्याम फूड एजेंसी के कारखाने का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम को मावा निर्माण की प्रक्रिया मौके पर ही चलती हुई मिली। प्रतिष्ठान प्रभारी मौके पर मौजूद थे, लेकिन वे मावा निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज टीम को नहीं दिखा सके।
जांच में सामने आया कि कारखाने में पहले दूध से असली मलाई यानी फैट बाहर निकाल लिया जाता था। इसके बाद बचे हुए दूध में स्किम्ड मिल्क पाउडर और वनस्पति तेल मिलाकर हूबहू असली जैसा दिखने वाला मावा तैयार किया जा रहा था। अधिकारियों ने मौके की परिस्थितियों के आधार पर मावे में मिलावट की आशंका जताई। यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी मिलावट की पुष्टि नहीं हुई है — आशंका के आधार पर कार्रवाई हुई है और अंतिम स्थिति प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगी।
दूध से मलाई निकालकर बनता था मावा जैसा उत्पाद

मावा मूल रूप से पूरे दूध को धीमी आंच पर घंटों उबालकर तैयार किया जाता है, जिससे दूध का पानी सूख जाता है और गाढ़ा, दानेदार ठोस बचता है। इसी ठोस को मावा या खोया कहा जाता है। इसमें दूध का प्राकृतिक फैट ही स्वाद और चिकनाहट देता है। अहीरखेड़ी के कारखाने में जिस प्रक्रिया का आरोप है, उसमें यह प्राकृतिक फैट पहले ही निकाल लिया जाता था और उसकी जगह सस्ता वनस्पति तेल और मिल्क पाउडर मिला दिया जाता था। इस तरह तैयार उत्पाद देखने में मावे जैसा लगता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता और पोषण मूल्य असली मावे से बिल्कुल अलग होते हैं।
त्योहार के मौसम में इस तरह के उत्पाद का खतरा इसलिए भी ज्यादा होता है, क्योंकि मावा सीधे मिठाइयों में जाता है और बड़ी मात्रा में लोग उसे खाते हैं। इसी वजह से विभाग त्योहार से पहले मावा, घी, दुग्ध उत्पाद, मिठाई और नमकीन बनाने वाली इकाइयों पर विशेष नजर रख रहा है। अहीरखेड़ी की कार्रवाई इसी सतर्कता का नतीजा है।
341 किलो सामग्री जब्त, पांच नमूने जांच को
कार्रवाई के दौरान टीम ने मौके से करीब 298 किलोग्राम संदिग्ध मावा, 28 किलोग्राम वनस्पति तेल और 15 किलोग्राम सूजी जब्त की। कुल जब्ती 341 किलोग्राम रही, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 75 हजार रुपये बताई गई है। इसके साथ ही टीम ने कुल पांच नमूने जांच के लिए एकत्र किए — मीठे मावे के दो नमूने, वनस्पति का एक नमूना, सूजी का एक नमूना और स्किम्ड मिल्क पाउडर का एक नमूना।
ये सभी नमूने भोपाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि जब्त सामग्री में वास्तव में मिलावट थी या नहीं, और किस स्तर की थी। रिपोर्ट आने तक किसी भी पक्ष के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। विभाग का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लाइसेंस नहीं मिला तो तत्काल बंद हुआ कारोबार
निरीक्षण के दौरान एक और बड़ी खामी सामने आई। प्रतिष्ठान के पास खाद्य पदार्थों के निर्माण के लिए निर्धारित श्रेणी का पंजीयन उपलब्ध नहीं पाया गया। यानी जिस श्रेणी में मावा निर्माण के लिए पंजीयन होना चाहिए था, वह मौके पर नहीं दिखाया जा सका। मिलावट की आशंका और पंजीयन की कमी — इन दोनों आधारों पर विभाग ने प्रतिष्ठान का खाद्य कारोबार तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत खाद्य कारोबार के लिए वैध लाइसेंस या पंजीयन अनिवार्य है। बिना उचित पंजीयन के खाद्य पदार्थ बनाना और बेचना नियमों का उल्लंघन माना जाता है। विभाग ने साफ किया है कि त्योहार तक इस तरह की सख्ती जारी रहेगी और नियम तोड़ने वाली इकाइयों पर कार्रवाई होती रहेगी।
उसी दिन पांच प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, 12 नमूने
अहीरखेड़ी की कार्रवाई अकेली नहीं थी। गुरुवार को ही खाद्य सुरक्षा दल ने कुल पांच खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया और 12 खाद्य नमूने जांच के लिए लिए। ग्राम पालदा स्थित मार्बल्लो फूड प्रोडक्ट्स में अस्वच्छ परिस्थितियों में खाद्य पदार्थों का निर्माण पाए जाने पर आवश्यक सुधार के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है। पालदा में ही एक चॉकलेट-जेली इकाई में भारी गंदगी और जाम नाली मिलने पर भी कार्रवाई हुई।
ग्राम अहीरखेड़ी स्थित कुंज इंटरप्राइजेज का भी निरीक्षण किया गया, जहां सोनपापड़ी का निर्माण और पैकिंग पाई गई। वहां से सोनपापड़ी का एक नमूना लिया गया। निरीक्षण में पेस्ट कंट्रोल प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं मिला और खाद्य पदार्थों को पैलेट पर रखकर भंडारित नहीं किया जा रहा था, जिस पर संचालक को नोटिस जारी किया जा रहा है। इन कार्रवाइयों से साफ है कि विभाग इस बार सिर्फ मावे तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी खाद्य श्रृंखला पर नजर रख रहा है।
दीपावली से पहले क्यों बढ़ जाती है मिलावट की आशंका
दीपावली से पहले मिठाइयों की मांग कई गुना बढ़ जाती है और बाजार में मावे की खपत भी उसी अनुपात में बढ़ती है। मांग और आपूर्ति के इस दबाव में कुछ कारोबारी सस्ते विकल्पों से मावा तैयार करने की कोशिश करते हैं। वनस्पति तेल और मिल्क पाउडर से बना उत्पाद सस्ता पड़ता है, इसलिए त्योहार के मौसम में इस तरह की गड़बड़ी की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। उपभोक्ताओं के लिए भी यह मौसम सबसे ज्यादा सतर्क रहने का है।
विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि मावा और मिठाई हमेशा भरोसेमंद और लाइसेंस वाली दुकान से ही खरीदें, बिल जरूर लें और पैकेट पर लाइसेंस नंबर देखें। असली मावे की पहचान उसकी हल्की दानेदार बनावट और घी जैसी सौंधी खुशबू से होती है। हथेली पर थोड़ा मावा रगड़ने पर असली मावे में हल्की चिकनाहट और घी की गंध महसूस होती है। रंग, गंध या स्वाद में कुछ भी असामान्य लगे तो उसे खाने से पहले जांच करा लेना ही समझदारी है।
पहले भी हो चुकी हैं बड़ी कार्रवाइयां
इंदौर और भोपाल में त्योहार से पहले इस तरह की कार्रवाइयां लगातार हो रही हैं। कुछ दिन पहले भोपाल में एनालॉग पनीर की बड़ी खेप पकड़ी गई थी, जब रेलवे स्टेशन के बाहर से सात क्विंटल से अधिक संदिग्ध पनीर जब्त किया गया था। इसी तरह इंदौर में खाद्य सुरक्षा निरीक्षण के तहत पहले भी कई प्रतिष्ठानों की जांच हो चुकी है और नमूने प्रयोगशाला भेजे जा चुके हैं। अहीरखेड़ी की कार्रवाई उसी कड़ी का नया अध्याय है।
विभाग का अभियान दीपावली तक जारी रहने वाला है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मावा और मिठाई माफियाओं के खिलाफ सर्चिंग अभियान शहर में लगातार चलता रहेगा। उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि मिलावट की आशंका वाली किसी भी सामग्री की सूचना विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर भोपाल की राज्य खाद्य प्रयोगशाला की रिपोर्ट पर है। पांच नमूनों की जांच के बाद ही यह साफ होगा कि अहीरखेड़ी के कारखाने में तैयार हो रहा उत्पाद मानकों पर खरा था या उसमें मिलावट थी। रिपोर्ट के आधार पर विभाग खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई तय करेगा। तब तक प्रतिष्ठान का कारोबार बंद रहेगा और जब्त सामग्री विभाग की निगरानी में रहेगी।
यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि त्योहार की खुशी तभी पूरी होती है, जब थाली में परोसी गई मिठाई शुद्ध हो। प्रशासन की सख्ती और उपभोक्ता की सतर्कता — दोनों मिलकर ही मिलावट पर लगाम लगा सकते हैं।
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