Headlines

नीमच में गांधी सागर पंप स्टोरेज प्लांट तैयार: दिसंबर में पहली टरबाइन चलेगी, मार्च तक पूर्ण उत्पादन की उम्मीद

सांकेतिक चित्र: संध्या समय जलाशय के किनारे बना जलविद्युत संयंत्र और बांध सांकेतिक चित्र

इंदौर ब्यूरो

सार: मध्य प्रदेश के नीमच जिले में तैयार हो रही गांधी सागर पंप स्टोरेज परियोजना से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में बताया कि इस संयंत्र की एक टरबाइन दिसंबर में चालू हो जाएगी और अगले साल मार्च तक इसके पूर्ण संचालन की उम्मीद है। परियोजना के दस्तावेजों के अनुसार इसकी आधिकारिक क्षमता 1,920 मेगावाट है और इसे देश की सबसे बड़ी पंप स्टोरेज परियोजनाओं में गिना जा रहा है।

दिसंबर में पहली टरबाइन, मार्च तक पूर्ण संचालन की उम्मीद

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि मध्य प्रदेश के नीमच जिले में एक निजी कंपनी की ओर से बनाया जा रहा जलविद्युत संयंत्र तैयार है और अगले साल मार्च से इसमें बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने बताया कि एशिया में अपनी तरह के सबसे बड़े संयंत्रों में से एक इस परियोजना की एक टरबाइन दिसंबर में चालू हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 2,000 मेगावाट की इस परियोजना के अगले साल मार्च तक पूरी तरह से चालू हो जाने की उम्मीद है। इससे मध्य प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और राज्य को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की ऊर्जा तैयारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यह परियोजना सौर और पवन ऊर्जा के साथ भंडारण की बड़ी क्षमता जोड़ने वाली है।

पंप स्टोरेज तकनीक की खासियत यह है कि इसमें बिजली की मांग कम होने के समय पानी को ऊपर बने जलाशय में पंप करके संग्रहित किया जाता है और मांग बढ़ने पर उसी पानी को नीचे गिराकर बिजली पैदा की जाती है। इस तरह यह परियोजना सौर ऊर्जा के दिन के उत्पादन और रात की मांग के बीच का अंतर पाटने का काम करेगी। प्रदेश में सौर क्षमता तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में भंडारण की यह सुविधा ग्रिड की स्थिरता के लिए अहम मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री के इंदौर दौरे का दिन: डेली कॉलेज में संघ प्रमुख से मुलाकात

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को इंदौर दौरे पर रहे। वे सुबह 10:40 बजे भोपाल से रवाना होकर सुबह 11:45 बजे डेली कॉलेज पहुंचे। वहां उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी से मुलाकात की। यह मुलाकात करीब एक घंटे तक चली। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री हवाई अड्डे के लिए रवाना हुए और दोपहर 2:20 बजे भोपाल लौट आए।

बैठक के बारे में राज्य सरकार या संघ की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई। डेली कॉलेज में संघ की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक 2 से 4 नवंबर तक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत जी सहित संघ परिवार के लगभग 400 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। तीन दिनों तक चले इस मंथन में सामाजिक समरसता, नशामुक्ति अभियान, आरक्षण और जैन समाज से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई थी।

इंदौर से लौटने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 3:30 बजे मुख्यमंत्री निवास पर जनजातीय प्रतिनिधियों के सम्मेलन में शामिल हुए। इस सम्मेलन में प्रदेश भर के जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि जुटे। सम्मेलन 15 नवंबर को मनाए जाने वाले जनजातीय गौरव दिवस और 11 से 18 नवंबर तक चलने वाले जनजातीय गौरव सप्ताह की तैयारियों के बीच आयोजित हुआ। शाम 5:30 बजे मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक में भी शामिल हुए।

सांकेतिक चित्र: जलाशय के पास खेतों में लगे सौर पैनल
सांकेतिक चित्र

गोवर्धन पूजा पर देसी गायों के लिए नकद पुरस्कार

इंदौर में ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार इस साल गोवर्धन पूजा बड़े पैमाने पर मनाएगी और उन पशुपालकों को नकद पुरस्कार देगी, जिनकी देसी दुधारू गायें प्रतियोगिताओं में जीतेंगी। गोवर्धन पूजा इस साल 10 नवंबर को मनाई जाएगी और इससे जुड़े अन्नकूट पर्व की तैयारियां प्रदेश भर में चल रही हैं।

देसी गायों के संरक्षण और पशुपालन को बढ़ावा देने की यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब सरकार प्राकृतिक खेती और पशुपालन से जुड़े किसानों को अनुदान देने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। इससे पहले किसान संघ से मुलाकात में भी प्राकृतिक खेती करने वाले पशुपालकों को अनुदान देने की बात सामने आई थी। गोवर्धन पूजा के मौके पर होने वाली प्रतियोगिताओं में देसी नस्ल की दुधारू गायों को पुरस्कृत करने का फैसला पशुपालकों के लिए प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है।

परियोजना की पृष्ठभूमि: खिमला में बन रहा देश का सबसे बड़ा पंप स्टोरेज प्लांट

गांधी सागर पंप स्टोरेज परियोजना नीमच जिले के खिमला गांव, रामपुरा तहसील में ग्रीनको समूह की ओर से बनाई जा रही है। इस परियोजना की आधारशिला 4 अक्टूबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्चुअल कार्यक्रम में रखी थी। परियोजना की शुरुआत 1,440 मेगावाट क्षमता से हुई थी और इसे बढ़ाकर 1,920 मेगावाट करने की योजना है।

परियोजना में कुल 9 रिवर्सिबल टरबाइन लगाई जा रही हैं, जिनमें 240 मेगावाट की 7 यूनिट और 120 मेगावाट की 2 यूनिट शामिल हैं। इसमें गांधी सागर जलाशय को निचले जलाशय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि ऊपर एक नया जलाशय बनाया गया है। परियोजना की भंडारण क्षमता 10,326 मेगावाट घंटा बताई गई है। पूरी क्षमता पर यह परियोजना 6 घंटे तक भंडारण के साथ रोजाना लगभग 11 गीगावाट घंटा बिजली दे सकेगी।

उपकरणों की आपूर्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनी एंड्रिट्ज को ठेका दिया गया है। परियोजना के दस्तावेजों के अनुसार इसका सिविल कार्य 79 प्रतिशत और उपकरण आपूर्ति का काम 85 प्रतिशत पूरा हो चुका है। परियोजना के रोडमैप के अनुसार पहली दो इकाइयों से दिसंबर 2026 में और शेष सात इकाइयों से जून 2027 तक उत्पादन शुरू करने की तैयारी है। यह भी जानकारी सामने आई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परियोजना का शुभारंभ कर सकते हैं, हालांकि इसकी तारीख अभी तय नहीं है।

आंकड़ों में अंतर: मुख्यमंत्री के बयान और परियोजना दस्तावेज

मुख्यमंत्री के आज के बयान और परियोजना के दस्तावेजों में कुछ आंकड़े अलग-अलग दिखते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने परियोजना की क्षमता करीब 2,000 मेगावाट बताई, जबकि परियोजना के दस्तावेजों के अनुसार इसकी आधिकारिक क्षमता 1,920 मेगावाट है। इसी तरह मुख्यमंत्री ने परियोजना की लागत करीब 6,000 करोड़ रुपये बताई, जबकि परियोजना के दस्तावेजों में कुल निवेश लगभग 11,470 करोड़ रुपये दर्ज है। आधारशिला के समय 2023 में निवेश करीब 10,000 करोड़ रुपये बताया गया था।

समयसीमा को लेकर भी दोनों जगह अलग बात सामने आई है। मुख्यमंत्री ने अगले साल मार्च तक पूर्ण संचालन की उम्मीद जताई है, जबकि परियोजना के रोडमैप के अनुसार पहली दो इकाइयों से दिसंबर 2026 में और शेष सात इकाइयों से जून 2027 तक उत्पादन शुरू करने की तैयारी है। यह अंतर इसलिए अहम है, क्योंकि परियोजना के पहले चरण और पूर्ण क्षमता के बीच का फर्क उत्पादन की तारीखों को प्रभावित करता है। दिसंबर में पहली टरबाइन के चालू होने की बात पर हालांकि दोनों जगह सहमति दिखती है।

नीमच बन रहा हरित ऊर्जा का केंद्र

नीमच जिला अब हरित ऊर्जा के बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसी साल जून में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ नीमच में 500 मेगावाट क्षमता वाले नीमच सोलर पार्क और 450 मेगावाट क्षमता वाले शाजापुर सोलर पार्क का लोकार्पण किया था। नीमच के नए सोलर पार्क से 2.14 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली उपलब्ध होने की बात कही गई थी, जिसे देश में सबसे सस्ती दरों में गिना गया।

नीमच जिले में कुल 675 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाएं कार्यशील हैं और लगभग 1,952 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाओं का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि मध्य प्रदेश बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के साथ स्वच्छ, सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 12,000 मेगावाट से अधिक हो चुकी है।

प्रदेश में भंडारण आधारित परियोजनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। मुरैना में 600 मेगावाट सौर और 880 मेगावाट घंटा भंडारण वाली परियोजना से 2.70 रुपये प्रति यूनिट की रिकॉर्ड कम दर हासिल हुई है। सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में ऊर्जा सब्सिडी के सालाना करीब 18,000 करोड़ रुपये के बोझ को कम करना है। पंप स्टोरेज और बैटरी भंडारण वाली परियोजनाएं इसी रणनीति का हिस्सा हैं, ताकि किसानों और घरों को चौबीसों घंटे हरित बिजली मिल सके।

18 नवंबर को गांधी सागर में डेस्टिनेशन कैबिनेट

गांधी सागर क्षेत्र इस महीने एक और बड़े आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। प्रदेश सरकार की अगली डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक 18 नवंबर को मंदसौर जिले के गांधी सागर बांध पर होगी। यह नौवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट होगी। बैठक में गांधी सागर बांध पर प्रस्तावित 1,920 मेगावाट क्षमता के पंप स्टोरेज प्लांट के साथ क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री चेतन कश्यप ने यह जानकारी दी थी कि बैठक में प्रदेश में 15 नए सैटेलाइट टाउन विकसित करने के प्रस्ताव पर भी विचार होगा। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठकों को मंत्रालय तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश के अलग-अलग ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व वाले स्थानों पर आयोजित करने की पहल की है। इस क्रम में अब तक आठ स्थानों पर डेस्टिनेशन कैबिनेट की बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें जबलपुर, सिंग्रामपुर, महेश्वर, इंदौर का राजवाड़ा, पचमढ़ी, खजुराहो, बड़वानी का नागलवाड़ी और भोपाल के पास जगदीशपुर शामिल हैं।

आगे क्या: दिसंबर और मार्च की दो तारीखों पर नजर

अब सबकी नजर दिसंबर और मार्च की दो तारीखों पर रहेगी। दिसंबर में पहली टरबाइन के चालू होने से परियोजना के परीक्षण और शुरुआती उत्पादन की तस्वीर साफ होगी, जबकि मार्च तक पूर्ण संचालन का दावा परियोजना की गति की असली परीक्षा होगा। परियोजना के रोडमैप में शेष इकाइयों के लिए जून 2027 की तारीख दर्ज है, इसलिए आने वाले महीनों में इस समयसीमा को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

दीपावली के सप्ताह में बिजली की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। ऐसे में प्रदेश के 45 हजार आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों की ओर से 7-8 नवंबर को काम बंद करने की चेतावनी भी चर्चा में है। सरकार की ओर से त्योहारी मांग को पूरा करने की तैयारियों पर जोर दिया जा रहा है। गांधी सागर परियोजना के चालू होने के बाद प्रदेश को सौर ऊर्जा के साथ भंडारण की बड़ी क्षमता मिलेगी, जिससे मांग के उतार-चढ़ाव को संभालना आसान होगा।

प्रधानमंत्री की ओर से परियोजना के शुभारंभ की संभावना भी बनी हुई है, लेकिन इसकी तारीख अभी तय नहीं है। 18 नवंबर की कैबिनेट बैठक के बाद परियोजना को लेकर और घोषणाएं सामने आ सकती हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री के आज के बयान ने नीमच-मंदसौर क्षेत्र को प्रदेश की ऊर्जा राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार