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भोपाल में दीपावली से पहले बड़ी कार्रवाई: रेलवे स्टेशन के बाहर से 7 क्विंटल से अधिक संदिग्ध एनालॉग पनीर जब्त, मुरैना से लाई गई थी खेप

सांकेतिक चित्र: भोपाल एनालॉग पनीर जब्त मामले का प्रतीकात्मक चित्र सांकेतिक चित्र: पनीर — प्रतीकात्मक तस्वीर

भोपाल ब्यूरो

सार: दीपावली से पहले राजधानी भोपाल में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रेलवे स्टेशन के बाहर से सात क्विंटल से अधिक संदिग्ध एनालॉग पनीर की खेप जब्त की है। यह खेप मुरैना से भोपाल लाई जा रही थी और इसकी अनुमानित कीमत करीब ढाई लाख रुपये बताई गई है। विभाग ने बिल्टी और बिल के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि यह पनीर असली है या एनालॉग, इसकी अंतिम पुष्टि प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी।

देर रात स्टेशन के बाहर कैसे पकड़ी गई खेप

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने मंगलवार देर रात करीब दो बजे भोपाल रेलवे स्टेशन के बाहर कार्रवाई की। विभाग को सूचना मिली थी कि मुरैना से बड़ी मात्रा में संदिग्ध पनीर भोपाल लाया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने स्टेशन के बाहर निगरानी की और खेप के पहुंचते ही उसे रोककर जांच की। जांच के दौरान सात क्विंटल से अधिक पनीर मिलने पर विभाग ने उसे जब्त कर लिया।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब प्रदेश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग अलर्ट मोड पर है। नियंत्रक मनोज पुष्प के मार्गदर्शन और भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्र के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने यह कार्रवाई की। विभागीय अधिकारियों के अनुसार त्योहारी सीजन में इस तरह की जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

क्या होता है एनालॉग पनीर

सांकेतिक चित्र: भोपाल एनालॉग पनीर जब्त मामले का प्रतीकात्मक चित्र
सांकेतिक चित्र: पनीर — प्रतीकात्मक तस्वीर

एनालॉग पनीर दिखने और स्वाद में असली पनीर जैसा होता है, लेकिन इसे तैयार करने में दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी कीमत असली पनीर की तुलना में कम होती है, इसलिए बाजार में इसकी खपत बढ़ने की आशंका रहती है। आम ग्राहक के लिए पहली नजर में असली और एनालॉग पनीर में फर्क करना आसान नहीं होता। यही वजह है कि त्योहारी सीजन में जब पनीर और मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है, तब इस तरह के उत्पादों की आपूर्ति पर विभाग की नजर और सख्त हो जाती है।

मिलावटी है या एनालॉग — लैब रिपोर्ट से होगी पुष्टि

इस मामले में एक अहम बारीकी यह है कि जब्त पनीर को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी बाकी है। विभाग ने पनीर से संबंधित बिल्टी और बिल के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। पनीर मिलावटी है या फिर एनालॉग, इसकी पुष्टि जांच के बाद होगी, लेकिन खाद्य विभाग उसे एनालॉग मानकर ही आगे की कार्रवाई कर रहा है।

यह सावधानी इसलिए जरूरी है, क्योंकि किसी भी खाद्य पदार्थ को लेकर अंतिम फैसला प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट पर निर्भर करता है। नमूनों की जांच के बाद ही यह तय होगा कि जब्त पनीर में किन मानकों का उल्लंघन हुआ है और उसके आधार पर आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तब तक इस खेप को बाजार में नहीं पहुंचने दिया जाएगा।

मुरैना से भोपाल तक: सप्लाई चेन की जांच

विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि यह खेप भोपाल में किन होटलों, रेस्तरां या डेयरियों तक पहुंचने वाली थी। मुरैना से भोपाल तक की सप्लाई चेन में कौन-कौन शामिल था, माल किसके नाम पर बुक हुआ था और बिल्टी व बिल में दर्ज जानकारी कितनी सही है, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच में जिन लोगों या प्रतिष्ठानों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

सप्लाई चेन की जांच इसलिए भी अहम है, क्योंकि त्योहारी सीजन में पनीर की खपत अचानक बढ़ जाती है। होटलों और मिठाई की दुकानों में पनीर से तैयार होने वाले व्यंजनों की मांग ज्यादा रहती है। ऐसे में अगर संदिग्ध गुणवत्ता वाला पनीर बाजार में पहुंच जाए, तो वह सीधे बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकता है। विभाग का मकसद सिर्फ खेप जब्त करना नहीं, बल्कि उसके स्रोत और गंतव्य तक पहुंचना है।

प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध

मध्य प्रदेश सरकार ने कुछ महीने पहले पूरे प्रदेश में एनालॉग पनीर के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर रोक लगा दी थी। इस प्रतिबंध के बाद भी अगर एनालॉग पनीर की खेप पकड़ी जाती है, तो वह सीधे तौर पर नियमों के उल्लंघन का मामला बनता है। यही कारण है कि भोपाल में पकड़ी गई इस खेप को विभाग गंभीरता से ले रहा है।

प्रतिबंध का मकसद उपभोक्ताओं को असली पनीर के नाम पर मिलता-जुलता उत्पाद बेचे जाने से बचाना है। जब कोई उत्पाद असली पनीर जैसा दिखता है और उसी नाम से बेचा जाता है, तब ग्राहक को यह जानने का हक है कि वह वास्तव में क्या खरीद रहा है। खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले उत्पादों पर कार्रवाई का यही आधार है।

त्योहारी सीजन में क्यों बढ़ जाती है मिलावट की आशंका

दीपावली के दौरान दूध, मावा, पनीर और इनसे तैयार होने वाली मिठाइयों की खपत कई गुना बढ़ जाती है। मांग बढ़ने के साथ ही कुछ लोग कम लागत वाले उत्पादों को असली बताकर बाजार में उतारने की कोशिश करते हैं। त्योहारों पर खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ अभियान इसलिए हर साल तेज किया जाता है, ताकि त्योहार के समय लोगों तक सुरक्षित खाद्य पदार्थ पहुंचें।

भोपाल में हुई यह कार्रवाई उसी अभियान का हिस्सा है। विभाग ने संकेत दिया है कि पूरे त्योहारी सीजन के दौरान शहर भर में जांच अभियान और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। दूध, मावा और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों के साथ-साथ मिठाइयों की दुकानों पर भी नजर रखी जा रही है।

इंदौर में भी चल रही है त्योहारी जांच

राजधानी के साथ-साथ इंदौर में भी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण तेज है। मंगलवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित नौ खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया और विभिन्न खाद्य पदार्थों के 18 नमूने जांच के लिए संग्रहित किए गए। निरीक्षण के दौरान खराब क्रीम के दो टीन मौके पर नष्ट कराए गए। खाद्य कारोबारियों को साफ-सफाई बनाए रखने, खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करने और वैध पंजीयन व अनुज्ञप्ति के अंतर्गत कारोबार संचालित करने के निर्देश दिए गए। इंदौर में खाद्य सुरक्षा निरीक्षण की यह कड़ी बताती है कि त्योहारी सीजन में प्रदेश भर में एक साथ सख्ती बरती जा रही है।

ग्राहकों के लिए सावधानियां

त्योहारों के दौरान खाने-पीने की चीजें खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। पनीर और अन्य दुग्ध उत्पाद भरोसेमंद विक्रेताओं से ही खरीदना बेहतर है। खरीदते समय पैकिंग, लेबल, निर्माण और समाप्ति तिथि तथा बिल पर ध्यान देना चाहिए। बिना बिल के सामान खरीदने से बचना चाहिए, क्योंकि शिकायत की स्थिति में बिल ही सबसे बड़ा प्रमाण होता है।

अगर किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को लेकर कोई संदेह हो, तो इसकी सूचना संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को दी जा सकती है। मिठाई या पनीर का स्वाद, रंग या गंध सामान्य से अलग लगे, तो उसे इस्तेमाल करने से पहले जांच कराना समझदारी है। त्योहार खुशियों का समय होता है और खाने की सुरक्षा उसी खुशी का एक अहम हिस्सा है।

आगे क्या होगा

अब इस मामले में आगे की कार्रवाई प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। नमूनों की जांच के बाद विभाग यह तय करेगा कि जब्त पनीर के मामले में किन धाराओं के तहत और किसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही सप्लाई चेन की जांच से यह भी सामने आएगा कि यह खेप भोपाल में कहां-कहां भेजी जानी थी।

तब तक विभाग की नजर त्योहारी बाजार पर बनी रहेगी। दीपावली से पहले भोपाल में हुई यह कार्रवाई मिलावट करने वालों के लिए एक चेतावनी के तौर पर देखी जा रही है। विभाग का मकसद साफ है — त्योहार के समय लोगों की थाली तक सिर्फ सुरक्षित और मानकों के अनुरूप खाद्य पदार्थ ही पहुंचें।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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