नई दिल्ली ब्यूरो
भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने बुधवार, 28 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। यह सीट पूर्व केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। इस सीट के लिए 12 नवंबर को मतदान होगा और उसी दिन शाम को मतगणना भी कराई जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश की खाली राज्यसभा सीट के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने बुधवार को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नाम को मंजूरी दी। पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि आगामी राज्यसभा उपचुनाव 2026 के लिए मध्य प्रदेश से हरदीप सिंह पुरी के नाम को स्वीकृति दी गई है। इस घोषणा के साथ ही उन अटकलों पर भी विराम लग गया है, जो पुरी के संसदीय भविष्य और मंत्रिमंडल में बने रहने को लेकर पिछले कुछ समय से चल रही थीं।
क्या हुआ: भाजपा की औपचारिक घोषणा
बुधवार दोपहर भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव के लिए हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया गया है। बयान में सीट, चुनाव का चरण और उम्मीदवार का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है। पार्टी ने इस घोषणा को अपने केंद्रीय कार्यालय से जारी किया, जो नई दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित है।
इस घोषणा का राजनीतिक महत्त्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि पुरी का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। वे अभी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य हैं। संसदीय व्यवस्था के तहत किसी मंत्री को मंत्री पद पर बने रहने के लिए एक निश्चित अवधि के भीतर संसद के किसी सदन का सदस्य होना जरूरी होता है। ऐसे में मध्य प्रदेश से उपचुनाव में उम्मीदवारी उनके संसदीय सफर को आगे बढ़ाने का रास्ता खोलती है।
पार्टी के भीतर इस फैसले को पुरी पर नेतृत्व के भरोसे के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। हाल के राज्यसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश से उन्हें दोबारा टिकट नहीं मिला था। तब से यह चर्चा चल रही थी कि उनका अगला संसदीय ठिकाना कहां होगा। मध्य प्रदेश की खाली सीट ने इस सवाल का जवाब दे दिया है।

सीट क्यों खाली हुई: एल मुरुगन का इस्तीफा
मध्य प्रदेश की यह राज्यसभा सीट पूर्व केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। चुनाव आयोग के अनुसार, यह रिक्ति 14 अक्टूबर 2026 को उत्पन्न हुई। मुरुगन का मूल कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक चलना था, लेकिन उनके इस्तीफे के बाद यह सीट समय से पहले खाली हो गई।
मुरुगन ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्यसभा से इस्तीफा देकर तमिलनाडु में पार्टी संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देने का फैसला किया था। उनके इस्तीफे के बाद चुनाव आयोग ने इस सीट के लिए उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया। यही वजह है कि यह चुनाव सामान्य द्विवार्षिक चुनाव नहीं, बल्कि एक उपचुनाव है, जिसमें केवल एक सीट पर मतदान होना है।
उपचुनाव की प्रक्रिया में राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं। इसलिए इस चुनाव का परिणाम काफी हद तक विधानसभा के भीतर दलों के संख्याबल से तय होता है। मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा का स्पष्ट बहुमत है, जिसकी वजह से राजनीतिक विश्लेषक इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार की जीत को प्रबल मान रहे हैं। हालांकि, औपचारिक परिणाम मतगणना के बाद ही सामने आएगा।
चुनाव का पूरा कार्यक्रम: तारीख दर तारीख
चुनाव आयोग ने 22 अक्टूबर को इस उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। इसके अनुसार, उपचुनाव की अधिसूचना 26 अक्टूबर को जारी की गई। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 2 नवंबर तय की गई है। नामांकन पत्रों की जांच 3 नवंबर को होगी, जबकि उम्मीदवार 5 नवंबर तक अपने नाम वापस ले सकेंगे।
मतदान 12 नवंबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना शुरू होगी। चुनाव आयोग के अनुसार, पूरी चुनाव प्रक्रिया 16 नवंबर से पहले संपन्न कर ली जाएगी। इस कार्यक्रम के हिसाब से अगले कुछ दिनों में नामांकन, जांच और प्रचार से जुड़ी औपचारिकताएं तेजी से आगे बढ़ेंगी।
उम्मीदवारी की घोषणा के बाद अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि हरदीप सिंह पुरी कब अपना नामांकन दाखिल करते हैं और उनके सामने विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार मैदान में उतरता है या नहीं। अभी तक विपक्ष की ओर से इस सीट के लिए किसी उम्मीदवार के नाम की औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है। विपक्षी दलों की रणनीति अगले कुछ दिनों में स्पष्ट होगी।
हरदीप सिंह पुरी कौन हैं: राजनयिक से मंत्री तक
हरदीप सिंह पुरी का जन्म 15 फरवरी 1952 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से इतिहास में स्नातक और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। वे 1974 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रहे हैं। अपने लंबे राजनयिक जीवन में उन्होंने ब्राजील में भारत के राजदूत के रूप में काम किया और कई महत्त्वपूर्ण देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
वर्ष 2009 से 2013 तक वे संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि रहे। इस दौरान वे अगस्त 2011 और नवंबर 2012 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने सुरक्षा परिषद की आतंकवाद निरोधक समिति के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। राजनयिक जीवन के बाद वे जून 2013 में अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान से वरिष्ठ सलाहकार के रूप में जुड़े।
जनवरी 2014 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। वर्ष 2018 से वे राज्यसभा के सदस्य हैं। मई 2019 में उन्होंने पंजाब की अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उस चुनाव में वे कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला से हार गए थे। इसके बाद भी पार्टी और सरकार में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती रही।
मंत्री के रूप में कार्यकाल
वर्ष 2017 में हरदीप सिंह पुरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। उन्होंने आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। मई 2019 में वे नागरिक उड्डयन और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालयों में स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री बने। जुलाई 2021 के मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नत किया गया और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया।
पेट्रोलियम मंत्री के रूप में वे देश की ऊर्जा सुरक्षा, ईंधन आपूर्ति और एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम से जुड़ी नीतियों के प्रमुख चेहरे रहे हैं। उनके कार्यकाल में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य समय से पहले हासिल करने का दावा किया गया। सरकार का कहना है कि इस कार्यक्रम से कच्चे तेल के आयात में कमी, विदेशी मुद्रा की बचत और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिली है।
शहरी विकास के क्षेत्र में भी उनका लंबा अनुभव रहा है। आवास एवं शहरी कार्य मंत्री के रूप में उन्होंने शहरी आवास, स्मार्ट शहर और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं पर काम किया। यही वजह है कि पार्टी उन्हें प्रशासनिक अनुभव और नीतिगत समझ रखने वाले नेता के रूप में प्रस्तुत करती रही है।
मध्य प्रदेश से उम्मीदवारी का राजनीतिक अर्थ
हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाने के फैसले के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। पहला, इससे उनका मंत्री पद पर बने रहना सुनिश्चित होने की दिशा में बड़ा कदम उठ गया है। दूसरा, पार्टी ने एक अनुभवी और राष्ट्रीय चेहरे को मध्य प्रदेश की राजनीति से जोड़ दिया है। तीसरा, इस फैसले से यह संदेश भी गया है कि पार्टी नेतृत्व पुराने और अनुभवी नेताओं को संसद में बनाए रखना चाहता है।
मध्य प्रदेश की राजनीति के लिहाज से यह उपचुनाव भले ही एक सीट का हो, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्त्व कम नहीं है। राज्य में भाजपा की सरकार है और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार विकास, निवेश और शहरीकरण के एजेंडे पर काम कर रही है। ऐसे में दिल्ली के एक वरिष्ठ मंत्री का मध्य प्रदेश से राज्यसभा में पहुंचना केंद्र और राज्य के बीच समन्वय के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
दूसरी ओर, विपक्ष के लिए यह चुनाव अपनी स्थिति को परखने का मौका भी होगा। यदि विपक्ष इस सीट पर उम्मीदवार उतारता है, तो मतदान के दौरान विधानसभा के भीतर दलों की एकजुटता भी सामने आएगी। यदि विपक्ष उम्मीदवार नहीं उतारता है, तो यह चुनाव निर्विरोध भी हो सकता है। दोनों ही स्थितियों में अंतिम तस्वीर नामांकन की अंतिम तारीख के बाद ही साफ होगी।
चर्चा के दो मुद्दे: विपक्ष के सवाल और पुरी का पक्ष
हरदीप सिंह पुरी की उम्मीदवारी की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब उनको लेकर दो मुद्दों पर पहले से बहस चल रही है। पहला मुद्दा अमेरिका के न्याय विभाग की ओर से जारी दस्तावेजों से जुड़ा है, जिनमें दिवंगत अमेरिकी वित्तपोषक जेफरी एपस्टीन के साथ उनके पत्राचार और मुलाकातों का उल्लेख है। विपक्षी नेताओं, जिनमें कांग्रेस के राहुल गांधी भी शामिल हैं, ने इन मुलाकातों को लेकर पुरी से सवाल पूछे हैं और स्पष्टीकरण की मांग की है।
पुरी की ओर से इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट किया जा चुका है। उन्होंने कहा है कि एपस्टीन के साथ उनकी मुलाकातें कुछ अवसरों पर हुई थीं और वे पेशेवर प्रकृति की थीं। उनका कहना है कि इन मुलाकातों और पत्राचार में कुछ भी गोपनीय या अनुचित नहीं था। उन्होंने यह भी कहा है कि वे एपस्टीन के निजी द्वीप पर कभी नहीं गए। पुरी के कार्यालय की ओर से भी यही कहा गया है कि किसी एक तस्वीर के आधार पर किसी बैठक की पूरी स्थिति तय नहीं की जा सकती।
दूसरा मुद्दा पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण, यानी ई20 को लेकर है। वाहन मालिकों और विपक्षी नेताओं ने माइलेज में कमी, पुराने वाहनों के साथ संगतता और रखरखाव की लागत को लेकर चिंता जताई है। पुरी ने जुलाई 2026 में यह स्वीकार किया था कि एथनॉल मिश्रण से माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन उन्होंने बड़े पैमाने पर इंजन को नुकसान पहुंचने के दावों को खारिज किया था। सरकार का पक्ष है कि एथनॉल कार्यक्रम से आयात में कमी, उत्सर्जन में कटौती और किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है।
इन दोनों मुद्दों पर भाजपा और विपक्ष के रुख अलग-अलग हैं। भाजपा पुरी को अनुभवी प्रशासक और ऊर्जा नीति के जानकार नेता के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि विपक्ष उनसे जुड़े सवालों पर जवाबदेही की मांग कर रहा है। उम्मीदवारी की घोषणा के बाद इन बहसों के और तेज होने की संभावना है, लेकिन चुनाव का फैसला विधानसभा के भीतर मतदान से ही होगा।
आगे क्या होगा: नामांकन से मतगणना तक
अब इस उपचुनाव की अगली महत्त्वपूर्ण तारीख 2 नवंबर है, जब नामांकन की प्रक्रिया समाप्त होगी। इसके बाद 3 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 5 नवंबर तक नाम वापसी का मौका मिलेगा। इन्हीं तारीखों के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि मुकाबला एकतरफा होगा या फिर विपक्ष भी मैदान में उतरेगा।
यदि मतदान की नौबत आती है, तो 12 नवंबर को विधानसभा परिसर में मतदान होगा और उसी दिन शाम को परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। जीतने वाले उम्मीदवार का कार्यकाल मुरुगन के बचे हुए कार्यकाल के अनुसार होगा, जो मूल रूप से 2 अप्रैल 2030 तक था। इसका अर्थ यह है कि इस उपचुनाव से चुना गया सदस्य लंबी अवधि तक राज्यसभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेगा।
मध्य प्रदेश के लिए यह भी महत्त्वपूर्ण है कि इस सीट से चुना गया सदस्य दिल्ली में राज्य के हितों की पैरवी करेगा। राज्य में निवेश, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा और शहरी विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ समन्वय में राज्यसभा सदस्यों की भूमिका अहम होती है। पुरी के मंत्री पद के अनुभव को देखते हुए पार्टी समर्थक इसे राज्य के लिए लाभदायक बता रहे हैं, जबकि विपक्ष का कहना है कि उम्मीदवार का चयन राज्य की स्थानीय राजनीति से नहीं, बल्कि दिल्ली की जरूरतों से हुआ है।
मध्य प्रदेश के लिए इसका अर्थ
मध्य प्रदेश में इस उपचुनाव को केवल एक संसदीय सीट के चुनाव के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह चुनाव केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत देगा। भाजपा के लिए यह सीट जीतना अपने संख्याबल की पुष्टि जैसा होगा। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए यह मौका होगा कि वे अपनी एकजुटता दिखाएं और सरकार के फैसलों पर सवाल उठाएं।
आने वाले दिनों में इस उपचुनाव से जुड़ी हर गतिविधि पर नजर रहेगी। नामांकन, विपक्ष की रणनीति, मतदान और मतगणना — हर चरण की जानकारी प्रदेश की राजनीति के लिए महत्त्वपूर्ण होगी। फिलहाल इतना तय है कि भाजपा ने अपनी चाल चल दी है और अब गेंद विपक्ष के पाले में है।
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