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कैबिनेट ने खेलो इंडिया खेल सामान विनिर्माण योजना को दी मंजूरी: 1,856.67 करोड़ रुपये से बनेंगे खेल सामान विनिर्माण क्षेत्र, छोटे उद्यमों और खिलाड़ियों को मिलेगा बढ़ावा

सांकेतिक चित्र: खेल का सामान सांकेतिक चित्र: खेल का सामान

नई दिल्ली ब्यूरो

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बुधवार को इस योजना को स्वीकृति मिली। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। योजना की अवधि 2026-27 से 2033-34 तक तय की गई है। इसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी और अब मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इसके क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का कहना है कि इस पहल से निवेश आकर्षित होगा, घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत वैश्विक खेल सामान बाजार में मजबूत स्थिति हासिल करेगा।

क्या मंजूरी मिली है

योजना का कुल परिव्यय 1,856.67 करोड़ रुपये रखा गया है। यह राशि आठ वर्षों की अवधि में खर्च की जाएगी। योजना का उद्देश्य खेल सामान के क्षेत्र में निवेश, विनिर्माण, नवाचार और निर्यात को एक साथ बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि भारत में खेल सामान बनाने की क्षमता तो है, लेकिन उसे व्यवस्थित समर्थन, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों से जोड़ने की जरूरत है। यही कमी इस योजना के जरिए दूर करने की कोशिश की जाएगी।

योजना के तहत तकनीक अपनाने, अनुसंधान और नवाचार, कौशल विकास, गुणवत्ता प्रमाणन और बाजार विकास के लिए लक्षित मदद दी जाएगी। इसका लक्ष्य एक ऐसा उद्योग खड़ा करना है जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की हिस्सेदारी बढ़ा सके।

समर्पित खेल सामान विनिर्माण क्षेत्र बनेंगे

योजना की सबसे अहम विशेषता समर्पित खेल सामान विनिर्माण क्षेत्रों का विकास है। इन क्षेत्रों में निर्माता, आपूर्तिकर्ता, परीक्षण सुविधाएं, डिजाइन और प्रोटोटाइप केंद्र तथा सहायक उद्यम एक ही एकीकृत औद्योगिक परिवेश में काम करेंगे। इससे उत्पादन की दक्षता बढ़ेगी, उद्योगों के बीच आपसी जुड़ाव मजबूत होगा और लागत भी नियंत्रित रहेगी।

जानकारी के अनुसार चार एकीकृत खेल सामान विनिर्माण क्षेत्र विकसित किए जाएंगे और प्रत्येक क्षेत्र 300 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला होगा। इन क्षेत्रों को मौजूदा औद्योगिक ढांचे से जोड़ा जाएगा। इसके लिए भव्य योजना और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम के औद्योगिक पार्कों के साथ अभिसरण किया जाएगा, ताकि नए सिरे से ढांचा खड़ा करने के बजाय पहले से उपलब्ध सुविधाओं का बेहतर उपयोग हो सके।

सांकेतिक चित्र: खेल का सामान
सांकेतिक चित्र: खेल का सामान

एंकर निवेश और टर्नओवर से जुड़ी मदद

योजना में विनिर्माण प्रोत्साहन के लिए एंकर निवेश सहायता और टर्नओवर से जुड़ी सहायता को मिलाकर 1,130 करोड़ रुपये रखे गए हैं। एंकर निवेश सहायता के तहत देशी और वैश्विक स्तर के बड़े निर्माताओं, ब्रांडों और खुदरा श्रृंखलाओं को निर्धारित क्षेत्रों में विनिर्माण इकाइयां लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे मजबूत आपूर्तिकर्ता और सहायक उद्योगों का तंत्र भी विकसित होगा।

टर्नओवर से जुड़ी सहायता का उद्देश्य अधिक उत्पादन, क्षमता विस्तार और निरंतर विनिर्माण वृद्धि को प्रोत्साहन देना है। जानकारी के अनुसार कम से कम 100 करोड़ रुपये का निवेश करने वाले एंकर निवेशक पूंजीगत व्यय पर 20 प्रतिशत तक की सहायता के पात्र होंगे, जबकि 10 करोड़ रुपये या अधिक का निवेश करने वाले निर्माताओं को 15 प्रतिशत तक की टर्नओवर से जुड़ी प्रोत्साहन राशि मिल सकेगी। सरकार का अनुमान है कि इन उपायों से निजी निवेश बढ़ेगा, आयात पर निर्भरता घटेगी और घरेलू मूल्य संवर्धन में इजाफा होगा।

छोटे उद्यमों और मौजूदा क्लस्टरों पर विशेष जोर

देश में खेल सामान का अधिकांश विनिर्माण सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के हाथ में है। इसी वजह से योजना में इन छोटे उद्यमों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। मौजूदा विनिर्माण क्लस्टरों के उन्नयन के लिए साझा सुविधाओं और साझा ढांचे के विकास में मदद दी जाएगी। राज्य सरकारों के साथ लागत साझेदारी के आधार पर इन क्लस्टरों को आधुनिक बनाया जाएगा।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद दी गई जानकारी में देश के तीन प्रमुख खेल सामान क्लस्टरों का उल्लेख किया गया है — उत्तर प्रदेश का मेरठ, पंजाब का जालंधर-लुधियाना क्षेत्र और जम्मू। इन क्षेत्रों में पहले से खेल सामान बनाने का काम होता रहा है। योजना का मकसद इन उद्यमों को बड़े पैमाने पर काम करने, तकनीक उन्नत करने, बेहतर सामग्री का उपयोग करने और प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद करना है।

प्रमाणन, शोध और कौशल विकास

अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच के लिए गुणवत्ता प्रमाणन को योजना का अहम हिस्सा बनाया गया है। अंतरराष्ट्रीय खेल संघों से प्रमाणन प्राप्त करने और उसके नवीनीकरण में निर्माताओं की मदद के लिए 105 करोड़ रुपये रखे गए हैं। जानकारी के अनुसार पहली बार प्रमाणन की लागत का 70 प्रतिशत और नवीनीकरण की लागत का 50 प्रतिशत तक सरकार वहन करेगी। इससे भारतीय खेल सामान की गुणवत्ता पर भरोसा बढ़ेगा और वैश्विक बाजारों में उसकी स्वीकार्यता मजबूत होगी।

शोध, डिजाइन और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख शिक्षण और शोध संस्थानों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में खेल उपकरण, सामग्री विज्ञान, सुरक्षात्मक गियर और उन्नत विनिर्माण तकनीकों पर शोध होगा। अनुसंधान गतिविधियों को राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान के साथ अभिसरण के जरिए बढ़ावा दिया जाएगा। स्टार्टअप को भी समर्थन मिलेगा — औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के साथ पंजीकृत खेल सामान स्टार्टअप 20 लाख रुपये तक के अनुदान के पात्र होंगे। कौशल विकास के कार्यक्रम कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय तथा उद्योग जगत के साथ मिलकर चलाए जाएंगे, ताकि बदलती जरूरतों के अनुसार कुशल कार्यबल तैयार हो सके।

बाजार, ब्रांडिंग और निर्यात की रणनीति

योजना में भारतीय खेल सामान की ब्रांडिंग, प्रचार और बाजार विकास के लिए भी प्रावधान किया गया है। निर्यात संवर्धन मिशन के माध्यम से भारतीय उत्पादों की दृश्यता बढ़ाई जाएगी, बाजार तक पहुंच मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी पैठ गहरी होगी। सरकार का मानना है कि प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के बिना निर्यात में टिकाऊ बढ़त हासिल करना मुश्किल है, इसलिए प्रमाणन, शोध और ब्रांडिंग को एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

खिलाड़ियों और खेल कार्यक्रमों से जुड़ाव

योजना को खेलो भारत नीति 2025, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि से जोड़ा गया है। सरकार का कहना है कि उच्च गुणवत्ता वाले और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित खेल सामान की उपलब्धता से खिलाड़ियों के विकास को भी बल मिलेगा। यह पहल खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे कार्यक्रमों की पूरक बनेगी, क्योंकि खिलाड़ियों को बेहतर उपकरण मिलेंगे तो प्रशिक्षण और प्रदर्शन दोनों में सुधार होगा।

खेल मंत्री ने इस मंजूरी को युवाओं के लिए अवसरों से जोड़ते हुए कहा है कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। योजना का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत को खेल सामान के डिजाइन, विकास और विनिर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना और 2047 तक विकसित भारत की दृष्टि को आगे बढ़ाना है।

पृष्ठभूमि: बजट की घोषणा से मंत्रिमंडल की मंजूरी तक

इस योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी। बजट में खेल सामान उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का इरादा जताया गया था। इसके बाद योजना के स्वरूप, वित्तीय प्रावधानों और क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार की गई और अब मंत्रिमंडल ने इसे औपचारिक मंजूरी दे दी है। इसी बैठक में सरकार ने विनिर्माण और ग्रामीण शासन से जुड़े अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी, लेकिन खेल सामान योजना एक अलग और स्वतंत्र निर्णय है।

भारत में खेल सामान उद्योग लंबे समय से छोटे उद्यमों पर टिका रहा है। बड़े पैमाने पर उत्पादन, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन की कमी के कारण भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी पूरी क्षमता से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते थे। नई योजना इसी अंतर को पाटने का प्रयास है — एक ओर बड़े निवेशकों को आकर्षित करना और दूसरी ओर छोटे उद्यमों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना।

आगे क्या होगा

मंजूरी के बाद अब योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू होगी। समर्पित विनिर्माण क्षेत्रों की पहचान और विकास, एंकर निवेशकों और निर्माताओं के लिए पात्रता की प्रक्रिया, प्रमाणन सहायता और उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना जैसे काम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगे। योजना की अवधि 2033-34 तक है, इसलिए इसके परिणाम धीरे-धीरे सामने आएंगे।

खेल सामान उद्योग से जुड़े उद्यमियों, खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए यह योजना इसलिए अहम है, क्योंकि इससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि देश में ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के उपकरण उपलब्ध होने की उम्मीद है। अगर योजना के तहत तय लक्ष्य पूरे होते हैं, तो भारत खेल सामान के आयात पर निर्भरता घटाकर निर्यातक के रूप में भी उभर सकता है। आने वाले महीनों में क्षेत्रों के चयन और निवेश प्रस्तावों की प्रगति पर नजर रहेगी।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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