इंदौर ब्यूरो
सार: क्षेत्रीय भविष्य निधि कार्यालय इंदौर द्वारा ‘निधि आपके निकट 2.0’ के अंतर्गत 27 अक्टूबर 2026 को नौ जिलों में शिकायत निवारण शिविर आयोजित किए गए, जिनमें पेंशन, जीवन प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रकरण जैसी समस्याओं का मौके पर निवारण किया गया। खंडवा के शिविर में सहायक भविष्य निधि आयुक्त अर्जित दुबे स्वयं उपस्थित होकर अंशदाताओं और संस्थाओं की समस्याएं सुनीं।
नौ जिलों में एक साथ लगे शिविर
इंदौर भविष्य निधि कार्यालय के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले नौ जिलों — बुरहानपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, देवास और इंदौर — के विभिन्न स्थानों पर 27 अक्टूबर को ये शिविर लगाए गए। इन शिविरों का उद्देश्य यह था कि भविष्य निधि से जुड़ी समस्याओं के लिए अंशदाताओं और संस्थाओं को दूर के कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें, बल्कि उनकी शिकायतें उनके निकट ही सुनी जाएं और जहां संभव हो, तुरंत हल की जाएं।
शिविरों में भविष्य निधि से जुड़ी विभिन्न प्रकार की समस्याएं सामने आईं। कई अंशदाता ऐसे थे जिनकी पेंशन या दावा किसी दस्तावेज की कमी के कारण अटका हुआ था। कई संस्थाओं के प्रतिनिधि भी पहुंचे, जिन्होंने अपने प्रतिष्ठानों से जुड़े मामलों पर जानकारी और समाधान मांगा। अधिकारियों ने प्रत्येक मामले को अलग-अलग सुना और मौके पर ही उसका हाल बताया।
खंडवा शिविर में स्वयं पहुंचे सहायक आयुक्त
खंडवा में लगे शिविर में कार्यालय के सहायक भविष्य निधि आयुक्त अर्जित दुबे स्वयं उपस्थित रहे। उन्होंने अंशदाताओं और विभिन्न संस्थाओं की समस्याओं को एक-एक करके सुना। इस शिविर में प्रमुख रूप से पेंशन के जीवन प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रकरण संबंधी समस्याएं सामने आईं।
जीवन प्रमाण पत्र पेंशनधारकों के लिए हर वर्ष जमा किया जाने वाला एक जरूरी दस्तावेज है। इसके बिना पेंशन रुक सकती है। मृत्यु प्रकरणों में परिवार को पेंशन या अन्य लाभ के लिए दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करनी होती है, जिसमें कई बार कागजी अड़चनें आ जाती हैं। खंडवा शिविर में इन्हीं मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया और जहां दस्तावेज पूरे थे, वहां तुरंत कार्रवाई की गई।

पोस्ट ऑफिस के अतिरिक्त काउंटर से रुकी पेंशन का हल
इस बार के सभी नौ जिलों के शिविरों में जीवन प्रमाण पत्र पूर्ण करवाने की सुविधा के लिए पोस्ट ऑफिस के अतिरिक्त काउंटर लगवाए गए थे। इसका सीधा लाभ उन पेंशनधारकों को मिला जिनकी पेंशन जीवन प्रमाण पत्र न होने के कारण रुकी हुई थी। काउंटर पर ही प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी होने से उनकी समस्याओं का तुरंत निवारण हुआ।
यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बुजुर्ग पेंशनधारकों के लिए बार-बार कार्यालय आना मुश्किल होता है। शिविर में ही प्रमाण पत्र की सुविधा मिलने से उन्हें एक ही स्थान पर समाधान मिल गया। अधिकारियों ने बताया कि जिन मामलों में दस्तावेज अधूरे थे, उन्हें भी स्पष्ट जानकारी दी गई कि आगे क्या करना होगा, ताकि वे दोबारा भटकें नहीं।
हर माह की 27 तारीख को लगता है शिविर
भविष्य निधि कार्यालय द्वारा पहल करते हुए प्रत्येक माह की 27 तारीख को इस तरह के शिविर आयोजित किए जाते हैं। इनमें भविष्य निधि और संस्थानों की समस्याओं का बिना विलंब निवारण किया जाता है। यह नियमित व्यवस्था अंशदाताओं के लिए एक भरोसेमंद मंच बन गई है, जहां वे अपनी शिकायतें सीधे अधिकारियों के सामने रख सकते हैं।
‘निधि आपके निकट’ कार्यक्रम की सोच ही यह है कि भविष्य निधि की सेवाएं अंशदाता तक पहुंचें, न कि अंशदाता को सेवाओं तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़े। इसी सोच के तहत शिविरों को जिलों और कस्बों तक ले जाया जा रहा है, ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों के लोग भी इसका लाभ उठा सकें।
अंशदाताओं के लिए आगे क्या
जो अंशदाता या पेंशनधारक किसी कारण से इस बार के शिविर में नहीं पहुंच सके, उनके लिए अगले माह की 27 तारीख को फिर शिविर लगेगा। आमतौर पर ऐसे शिविरों में जाने से पहले अपने पहचान दस्तावेज, पेंशन भुगतान आदेश और संबंधित कागजात साथ रखना उपयोगी रहता है, ताकि मौके पर ही कार्रवाई हो सके। मृत्यु प्रकरणों में परिवार के सदस्यों को मृत्यु प्रमाण पत्र और संबंध के दस्तावेज साथ लाने चाहिए।
शिविरों का अनुभव यह दिखाता है कि कई समस्याएं सिर्फ जानकारी की कमी या एक छोटे से दस्तावेज के कारण अटकी रहती हैं। सीधे अधिकारियों से मिलने पर ये समस्याएं जल्दी सुलझ जाती हैं। इंदौर कार्यालय के इस प्रयास से नौ जिलों के अंशदाताओं और पेंशनधारकों को सीधा लाभ पहुंचा है।
निधि आपके निकट कार्यक्रम की सोच
‘निधि आपके निकट’ कर्मचारी भविष्य निधि संगठन का एक पहुंच कार्यक्रम है, जिसका मकसद भविष्य निधि की सेवाओं को अंशदाताओं के द्वार तक ले जाना है। इसमें शिकायत निवारण के साथ-साथ अंशदाताओं को उनकी जमा राशि, पेंशन और दावा प्रक्रिया के बारे में जानकारी भी दी जाती है। ऐसे शिविरों में अधिकारी सीधे लोगों से मिलते हैं, जिससे औपचारिक शिकायत प्रक्रिया में लगने वाला समय बचता है और कई मामले उसी दिन सुलझ जाते हैं।
इंदौर क्षेत्र में इस कार्यक्रम के तहत नौ जिलों तक पहुंच बनाना इसलिए भी अहम है क्योंकि इनमें कई जिले मुख्यालय से दूर हैं। वहां के अंशदाताओं के लिए हर छोटे काम के लिए इंदौर आना खर्चीला और समय लेने वाला होता है। जिलों में शिविर लगने से यह दूरी खत्म होती है और लोगों का संगठन पर भरोसा बढ़ता है।
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