इंदौर ब्यूरो
सार: इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में बुधवार को आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के शहरी विकास के लिए बड़ा रोडमैप सामने रखा। उन्होंने कहा कि भोपाल से इंदौर के बीच एक लाख करोड़ रुपये का औद्योगिक रोडमैप बनेगा, जो देश के मुख्य आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित होगा। मुख्यमंत्री ने इंदौर फ्यूचर सिटी के जरिए वर्ष 2047 तक करीब 20 लाख रोजगार के अवसर तैयार करने का लक्ष्य भी बताया।
कॉन्क्लेव का शुभारंभ सोलर राउंड टेबल से हुआ
इंदौर में मध्य प्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 का शुभारंभ सोलर राउंड टेबल से हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन की शुरुआत की और इसके बाद अपने संबोधन में प्रदेश के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। कॉन्क्लेव में देश-विदेश के निवेशकों, शहरी योजनाकारों, नगरीय निकायों और विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठक भी की, जिसमें शहरी क्षेत्रों में निवेश, परियोजनाओं के क्रियान्वयन और भविष्य के सहयोग पर चर्चा हुई।
कॉन्क्लेव का उद्देश्य महानगरों से आगे बढ़कर राज्य के टियर-2 शहरों के विकास पर विशेष ध्यान देना है। इसी क्रम में मास्टर प्लान, डेवलपमेंट कॉरिडोर, पुनःघनीकरण, ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट, ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स, आवास पुनर्विकास, रेरा स्वीकृतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, एनओसी प्रक्रिया को सरल बनाने और फ्लोर एरिया रेशियो जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए दौर और नए समय में शहरी विकास की चुनौतियां अहम हैं और इनका सामना योजनाबद्ध तरीके से ही किया जा सकता है।
भोपाल-इंदौर के बीच एक लाख करोड़ का औद्योगिक रोडमैप

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सबसे बड़ी घोषणा भोपाल से इंदौर के बीच एक लाख करोड़ रुपये के औद्योगिक रोडमैप की की। उन्होंने कहा कि यह रोडमैप देश के मुख्य आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित होगा। जबलपुर से भोपाल और भोपाल से इंदौर तक औद्योगिक विकास की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शहरों के विकास के साथ औद्योगिक क्षेत्रों और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है।
इस रोडमैप का सीधा अर्थ यह है कि दोनों शहरों के बीच का क्षेत्र अब केवल आवागमन का रास्ता नहीं रहेगा, बल्कि उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और रोजगार का एक बड़ा गलियारा बनेगा। इससे नए उद्योगों के आने, मौजूदा उद्योगों के विस्तार और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का मतलब सिर्फ मकान बनाना नहीं है। उद्योग, निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा जैसे सभी क्षेत्रों को आगे बढ़ाना भी विकास का हिस्सा है। शहरी विकास का मतलब शहरों को व्यापार, उद्योग, निवेश और रोजगार के केंद्र के रूप में तैयार करना है।
इंदौर फ्यूचर सिटी और 2047 तक 20 लाख रोजगार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने इंदौर फ्यूचर सिटी का जिक्र करते हुए कहा कि इंदौर और आसपास के क्षेत्र में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर नियोजित शहरी विकास किया जाएगा। उन्होंने करीब 5 हजार एकड़ क्षेत्र में इंदौर फ्यूचर सिटी विकसित करने की परिकल्पना सामने रखी। इस योजना में आवास, उद्योग और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2047 तक इस क्षेत्र में करीब 20 लाख रोजगार के अवसर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
आने वाले समय में 12 से 15 नई टाउनशिप विकसित करने और लगभग 25 से 30 हजार एकड़ क्षेत्र में नियोजित शहरी विकास की योजना भी सामने रखी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के विकास से शहरों का विस्तार व्यवस्थित तरीके से होगा और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। विकास में बड़े निवेशकों के साथ गरीब और मध्यम वर्ग की आवास संबंधी जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और वॉटर मैनेजमेंट सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं का उल्लेख किया।
इंदौर, उज्जैन और भोपाल बनेंगे मेट्रोपॉलिटन सिटी
मुख्यमंत्री ने इंदौर, उज्जैन और भोपाल को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय विकास के लिए शहरों के बीच बेहतर संपर्क, औद्योगिक विस्तार और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने इंदौर और उज्जैन के बीच चार लेन और छह लेन की सड़कों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्र में आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
इस योजना का एक अहम पहलू यह है कि विकास केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहेगा। इंदौर, उज्जैन और भोपाल को एक-दूसरे से जोड़कर एक बड़ा महानगरीय क्षेत्र तैयार करने की दिशा में काम हो रहा है। इससे तीनों शहरों के बीच उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और व्यापार की आवाजाही आसान होगी और पूरे क्षेत्र को एक साझा आर्थिक पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों के विकास के लिए भी बॉन्ड जारी कर रही है, जिससे धार्मिक पर्यटन से जुड़ी अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।
सौर ऊर्जा, फ्लोटिंग सोलर और नगर निकायों की वित्तीय मजबूती
कॉन्क्लेव के पहले दिन सौर ऊर्जा क्षेत्र के 20 से अधिक निवेशकों ने भाग लिया। बैठक में नगरीय निकायों को सौर ऊर्जा से जोड़ने, बिजली व्यय को कम करने तथा नगरीय विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के नवाचारी मॉडल पर विचार-विमर्श किया गया। फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और पूल्ड म्युनिसिपल बॉन्ड के माध्यम से नगरीय विकास को नई दिशा देने पर जोर दिया गया।
अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं, नगरीय निकायों के वित्तीय सशक्तीकरण तथा विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नवाचार आधारित मॉडल अपनाने की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं, म्युनिसिपल पूल बॉन्ड और प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना से संबंधित नीतिगत पहलुओं के महत्व पर विचार रखे। इसका उद्देश्य यह है कि शहर अपनी बिजली की जरूरत का एक हिस्सा खुद पूरा कर सकें, बिजली पर होने वाला खर्च घटे और बची हुई राशि विकास कार्यों में लगाई जा सके। जल सुरक्षा, सीवरेज के पानी के पुनः उपयोग और किफायती आवास जैसे विषय भी कॉन्क्लेव के एजेंडे में शामिल रहे।
निःशुल्क रजिस्ट्री से ग्रामीण परिवारों को मिला संपत्ति का अधिकार
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ग्रामीण क्षेत्रों में कराए गए निःशुल्क रजिस्ट्री के काम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के पास करोड़ों रुपये के मकान थे, लेकिन मकान के दस्तावेज नहीं थे। दस्तावेज न होने के कारण वे लोग लोन नहीं ले पाते थे और व्यापार नहीं कर पाते थे। सरकार ने उन्हें निःशुल्क रजिस्ट्री करके दी, जिससे उनकी संपत्ति को कानूनी पहचान मिली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने गांवों के 50 लाख लोगों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने का काम किया है। यह काम शहरी विकास से सीधे जुड़ा हुआ है, क्योंकि संपत्ति के दस्तावेज मिलने के बाद परिवार बैंक से ऋण ले सकते हैं, अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और अपने मकान का विस्तार कर सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलती है और शहरों की ओर पलायन का दबाव कम होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की योजनाओं में गरीब और मध्यम वर्ग की आवास संबंधी जरूरतों को हमेशा केंद्र में रखा जाना चाहिए।
धार्मिक पर्यटन और सीधी उड़ानों की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश धार्मिक पर्यटन में भारत का मुख्य केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि साल 2022 से पहले उज्जैन में सालाना 2 से 4 लाख श्रद्धालु आते थे, जबकि अब सालभर में 7 करोड़ से अधिक लोग यहां पहुंच रहे हैं। इससे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है और दुनियाभर के होटल उद्योग के बड़े ब्रांड मध्यप्रदेश में आ चुके हैं। महाकाल लोक, काशी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर और अन्य देवी स्थलों के विकास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक स्थलों का विकास भी प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार बन रहा है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकतर बड़े देशों के लिए डायरेक्ट फ्लाइट शुरू करने की योजना पर काम हो रहा है। सीधी उड़ानें शुरू होने से निवेशकों, पर्यटकों और व्यापारियों की आवाजाही आसान होगी और इंदौर-भोपाल क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी। धार्मिक पर्यटन, उद्योग और सीधी हवाई संपर्क का यह मेल प्रदेश को देश के मुख्य आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि: कॉन्क्लेव 2.0 का एजेंडा और इंदौर आर्थिक क्षेत्र
अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 राज्य सरकार की शहरी विकास से जुड़ी प्रमुख पहल है, जिसमें शहरी विकास, निवेश संवर्धन, आधुनिक नगरीय अधोसंरचना, डिजिटल गवर्नेंस, किफायती आवास और जल सुरक्षा से जुड़ी संभावनाओं पर मंथन होता है। कॉन्क्लेव में अर्बन चैलेंज फंड के तहत 2,753 करोड़ रुपये से अधिक की शहरी विकास परियोजनाओं को प्रमुखता दी गई है। इन परियोजनाओं से राज्य के शहरों में विकास कार्यों को गति देने का लक्ष्य रखा गया है।
इससे पहले सामने आए इंदौर आर्थिक क्षेत्र के रोडमैप के अनुसार, इंदौर और उसके आसपास के 8 जिलों को शामिल कर देश के सबसे बड़े आर्थिक क्षेत्रों में से एक के रूप में विकसित करने की योजना है। इस क्षेत्र की मौजूदा अर्थव्यवस्था को वर्ष 2047 तक कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस विकास एजेंडे को जमीन पर उतारने के लिए क्षेत्र में 80 से अधिक विशिष्ट परियोजनाओं और 20 से अधिक नीतिगत सुधारों की बात सामने आई है। इसमें 1,100 किलोमीटर लंबी सड़कें और हाईवे, 864 किलोमीटर इंटरसिटी रेल नेटवर्क और इंदौर-उज्जैन-देवास को जोड़ने के लिए 118 किलोमीटर की रीजनल मेट्रो व मेट्रो रेल परियोजनाओं पर काम हो रहा है। फार्मा, टेक्सटाइल, आटोमोटिव और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योगों के लिए हजारों एकड़ में नए औद्योगिक और खाद्य प्रसंस्करण हब विकसित करने की योजना भी इस रोडमैप का हिस्सा है।
आगे क्या होगा
कॉन्क्लेव में सामने आए रोडमैप का असली परीक्षण अब इसके क्रियान्वयन में होगा। भोपाल-इंदौर औद्योगिक रोडमैप के तहत कौन-कौन सी परियोजनाएं पहले चरण में शुरू होंगी, निवेशकों के साथ हुई वन-टू-वन बैठकों से कितना निवेश जमीन पर उतरेगा और फ्यूचर सिटी व नई टाउनशिप की योजनाओं को किस समयसीमा में पूरा किया जाएगा, इस पर सबकी नजर रहेगी। सोलर राउंड टेबल में सामने आए फ्लोटिंग सोलर और पूल्ड म्युनिसिपल बॉन्ड जैसे मॉडलों को नगर निकायों में लागू करने की प्रक्रिया भी आने वाले महीनों में सामने आएगी।
शहरी विकास से जुड़ी नई नीतियों के ड्राफ्ट, किफायती आवास की व्यवस्था और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग से जुड़ी योजनाओं पर भी कॉन्क्लेव में चर्चा हुई है। इन नीतियों के अंतिम रूप और उनके लागू होने के बाद ही यह तय होगा कि आम नागरिकों तक इनका लाभ किस रूप में पहुंचता है। इंदौर, उज्जैन और भोपाल को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की योजना के तहत सड़कों, मेट्रो और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति पर भी नजर बनी रहेगी।
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