नई दिल्ली ब्यूरो
सार: दिल्ली की हवा 4 नवंबर की सुबह फिर गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। सुबह 7 बजे शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 373 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है, जबकि पंजाबी बाग में 452 के साथ कई इलाकों का सूचकांक 400 से ऊपर रहा। इसी बीच गुरुग्राम प्रशासन ने 5 से 20 नवंबर तक निर्माण और तोड़फोड़ पर रोक लगाने के साथ सरकारी और निजी कार्यालयों में आधे कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम का फैसला लिया है। दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का दूसरा चरण लागू है और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने भी 5 से 20 नवंबर तक कुछ निर्धारित निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक का आदेश दिया है।
नवंबर की शुरुआत के साथ ही दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है। सर्दी की शुरुआत में हवा की गति धीमी पड़ने और सुबह के समय धुंध छाने से प्रदूषक तत्व हवा में ही जमा हो जाते हैं। यही वजह है कि सुबह के समय कई इलाकों में सांस लेना मुश्किल महसूस होता है और आंखों में जलन, गले में खराश जैसी शिकायतें बढ़ जाती हैं। 4 नवंबर की सुबह के आंकड़े बताते हैं कि राजधानी के बड़े हिस्से में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब से गंभीर श्रेणी के बीच बनी हुई है। यह स्थिति केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के उत्तर, पश्चिम, मध्य और दक्षिण हिस्सों के कई निगरानी केंद्रों पर सूचकांक ऊंचा दर्ज किया गया है।
सुबह 7 बजे का हाल: औसत 373, पंजाबी बाग में 452
सुबह 7 बजे के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 373 रहा। इस पैमाने पर 201 से 300 के बीच की हवा खराब, 301 से 400 के बीच बहुत खराब और 400 से ऊपर गंभीर श्रेणी में मानी जाती है। इस लिहाज से शहर का औसत बहुत खराब श्रेणी में था, लेकिन कई इलाके गंभीर श्रेणी में पहुंच चुके थे। सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाका पंजाबी बाग रहा, जहां सूचकांक 452 दर्ज किया गया। इसके बाद जहांगीरपुरी में 450 और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली क्षेत्र में 446 दर्ज किया गया। मुंडका में 440, रोहिणी में 435 और दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय क्षेत्र में 434 दर्ज किया गया। पूसा स्थित भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान केंद्र में 429, आरके पुरम में 423 और अलीपुर में 421 दर्ज किया गया। आईटीओ और नरेला में 418-418, पटपड़गंज में 415, मंदिर मार्ग और नॉर्थ कैंपस में 413-413, कर्णी सिंह शूटिंग रेंज और ओखला फेज-दो में 411-411, बवाना में 410 और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम क्षेत्र में 406 दर्ज किया गया। इन सभी इलाकों में हवा गंभीर श्रेणी में रही।
यह समझना जरूरी है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक समय और निगरानी केंद्र के अनुसार बदलता रहता है। सुबह 7 बजे का यह स्नैपशॉट दिनभर की तस्वीर का एक हिस्सा है, पूरी तस्वीर नहीं। दिन में हवा की गति, धूप और तापमान के बदलाव से आंकड़ों में उतार-चढ़ाव आ सकता है। इसलिए किसी एक इलाके या एक समय के आंकड़े को पूरे दिन का स्थायी आंकड़ा मानकर नहीं चलना चाहिए। लेकिन सुबह के आंकड़े यह साफ संकेत देते हैं कि 4 नवंबर की शुरुआत में दिल्ली के बड़े हिस्से में हवा स्वास्थ्य के लिहाज से चिंताजनक स्तर पर थी।
400 से नीचे भी राहत नहीं: कई इलाके बहुत खराब श्रेणी में
जिन इलाकों में सूचकांक 400 से नीचे रहा, वहां भी राहत की स्थिति नहीं थी। मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम और द्वारका सेक्टर-आठ में 398-398 दर्ज किया गया। सीआरआरआई मथुरा रोड और पूसा स्थित दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति केंद्र में 392-392, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 391 और बुराड़ी क्रॉसिंग में 390 दर्ज किया गया। कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 384, नरेला स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान केंद्र में 382 और जाफरपुर स्थित नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 381 दर्ज किया गया। आया नगर में 379, नजफगढ़ में 376, चांदनी चौक में 369 और नांगलोई में 360 दर्ज किया गया। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा टर्मिनल-तीन पर 358 और बुराड़ी में 355 दर्ज किया गया। शादीपुर में 348, अशोक विहार में 346, द्वारका स्थित नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी संस्थान में 341, घोघा में 335 और नेहरू नगर में 334 दर्ज किया गया। बदरपुर में 330, झरोदा कलां में 321 और मैदान गढ़ी में 314 दर्ज किया गया। ये सभी आंकड़े बहुत खराब श्रेणी में आते हैं।
कुछ इलाकों में हवा तुलनात्मक रूप से कम खराब रही, लेकिन वह भी स्वच्छ नहीं थी। आनंद विहार में 300, कैंटोनमेंट क्षेत्र में 299, छावला में 296, लोधी रोड स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग केंद्र में 294 और मैदान गढ़ी स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में 257 दर्ज किया गया। यानी शहर में कोई भी बड़ा इलाका ऐसी श्रेणी में नहीं था जिसे पूरी तरह सुरक्षित कहा जा सके। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी वर्गों के लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

ग्रैप-दो लागू: क्या-क्या पाबंदियां चल रही हैं
दिल्ली में लगातार बिगड़ती हवा के बीच ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का दूसरा चरण लागू है। इसके तहत प्रदूषण पर काबू पाने के लिए कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। निर्माण गतिविधियों पर रोक के साथ खुले में कचरा या अन्य चीजें जलाने और धुआं फैलाने पर पाबंदी है। प्रदूषण कम करने के लिए सड़कों पर स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव किया जा रहा है और जगह-जगह पानी के टैंकर भी लगाए गए हैं। वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जा रहा है। भारत स्टेज-छह से नीचे के मानक वाली गाड़ियों की दिल्ली में एंट्री पर भी रोक लगाई गई है। दिल्ली-नोएडा सीमा पर वाहनों की जांच की जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वाली गाड़ियों का चालान काटा जा रहा है या उन्हें वापस भेजा जा रहा है।
यहां एक महत्वपूर्ण बारीकी समझनी चाहिए। ग्रैप-दो के तहत सभी तरह के निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन ज्यादातर निर्माण कामों पर रोक है। इसके अलावा दिल्ली सरकार के अलग विंटर एक्शन प्लान के तहत 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल पैदा करने वाले तोड़फोड़ और खुले में सिविल निर्माण कार्यों पर रोक लगाई गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दिल्ली-एनसीआर में 5 नवंबर से 20 नवंबर तक 15 दिनों के लिए कुछ निर्धारित निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश भी जारी किया है। यानी अलग-अलग आदेशों के मिलने से निर्माण और तोड़फोड़ पर रोक का दायरा बढ़ गया है, लेकिन हर आदेश का अपना दायरा और अपनी अवधि है।
गुरुग्राम में 5 से 20 नवंबर तक सख्ती: निर्माण पर रोक, 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम
गुरुग्राम में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए जिला प्रशासन ने 5 नवंबर से 20 नवंबर तक कई सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। इस दौरान गुरुग्राम में निर्माण कार्य और तोड़फोड़ पर रोक रहेगी। यह प्रतिबंध सड़क, हाईवे, फ्लाईओवर और पाइपलाइन जैसी परियोजनाओं पर भी लागू होगा। हालांकि कुछ जरूरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को छूट रहेगी, लेकिन उन्हें नियमों का पालन करना होगा। प्रशासन ने नियमों पर नजर रखने के लिए रोजाना निरीक्षण के भी निर्देश दिए हैं। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 की धारा 14 और अन्य आवश्यक धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा सरकारी और निजी कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी गई है। सिर्फ 50 प्रतिशत कर्मचारी ही दफ्तर आ सकेंगे, जबकि बाकी 50 प्रतिशत को घर से काम करना होगा। कार्यालयों को कर्मचारियों की उपस्थिति का रिकॉर्ड भी रखना होगा। हालांकि औद्योगिक इकाइयों और जरूरी सेवाओं को इस नियम से छूट दी गई है। यह व्यवस्था 5 से 20 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। इसका मकसद सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करना और निर्माण से उड़ने वाली धूल को रोकना है, ताकि हवा में प्रदूषक तत्वों का बोझ कुछ कम हो सके।
सेहत के लिहाज से क्या करें, क्या न करें
चिकित्सकों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि जरूरी न हो तो सुबह की सैर से बचें, क्योंकि सुबह के समय प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा महसूस होता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। घर से बाहर निकलते समय एन95 मास्क का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा। घर के अंदर भी दरवाजे-खिड़कियों को उस समय बंद रखना समझदारी है, जब बाहर धुंध घनी हो। जिन लोगों को दमा, सांस या हृदय से जुड़ी समस्या है, उन्हें अपनी दवाएं समय पर लेनी चाहिए और सांस लेने में तकलीफ बढ़ने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। बच्चों को खुले में लंबी दौड़-भाग वाली गतिविधियों से कुछ दिन दूर रखना भी सुरक्षित रहेगा।
यह सलाह किसी एक दिन के आंकड़े तक सीमित नहीं है। सर्दी की शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर आमतौर पर बढ़ता है, क्योंकि ठंडी हवा में प्रदूषक तत्व नीचे ही ठहर जाते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में भी सुबह और रात के समय हवा की गुणवत्ता पर नजर रखना जरूरी है। सरकारी निगरानी केंद्रों के आंकड़े देखने की आदत डालने से लोग अपने दिन की योजना उसी के अनुसार बना सकते हैं।
पहले भी बिगड़ी थी हवा: 2 नवंबर को 350 पार का दौर
दिल्ली की हवा में यह गिरावट अचानक नहीं आई है। इससे पहले 2 नवंबर को भी हवा जहरीली श्रेणी में पहुंच गई थी, जब कई इलाकों में सूचकांक 350 के पार चला गया था। उस समय भी ग्रैप के तहत सख्ती तेज की गई थी और सर्दी के मौसम के लिए विंटर एक्शन प्लान लागू किया गया था। 4 नवंबर के आंकड़े बताते हैं कि दो दिन बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है, बल्कि कई इलाकों में सूचकांक 400 के पार चला गया है। यही वजह है कि गुरुग्राम जैसे पड़ोसी जिले में भी अलग से सख्त आदेश जारी करने पड़े हैं।
आगे क्या: 5 नवंबर से नए आदेश, नजर रहेगी आंकड़ों पर
आगे की राह में सबसे अहम तारीख 5 नवंबर है, जब गुरुग्राम में निर्माण पर रोक और 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू हो जाएगी। साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का 15 दिनों का आदेश भी उसी दिन से प्रभावी होगा। इन आदेशों का असर कितना पड़ता है, यह आने वाले दिनों के आंकड़ों से ही साफ होगा। अगर हवा की गति बढ़ती है और मौसम अनुकूल होता है, तो प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी आ सकती है। लेकिन अगर हवा शांत रही और धुंध घनी बनी रही, तो सख्ती और बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल प्रशासन की नजर निगरानी केंद्रों के आंकड़ों, सीमा पर वाहनों की जांच और निर्माण स्थलों के निरीक्षण पर टिकी हुई है। आम लोगों के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता यही है कि वे आधिकारिक आंकड़े देखते रहें, अनावश्यक बाहर निकलने से बचें और मास्क तथा सावधानी को दिनचर्या का हिस्सा बना लें।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
