नई दिल्ली ब्यूरो
केंद्र सरकार ने दवाओं के आयात के लिए अधिकृत प्रवेश द्वारों का नेटवर्क बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। औषधि नियमों में संशोधन के मसौदे के तहत 8 अंतर्देशीय कंटेनर डिपो, एक विशेष आर्थिक क्षेत्र और एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को इस सूची में जोड़ने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य आयात की प्रक्रिया को सरल बनाना, भीतरी परिवहन की दूरी घटाना और स्वास्थ्य उत्पादों की समय पर उपलब्धता को मजबूत करना है। यह अभी प्रस्ताव के स्तर पर है, अंतिम नियम नहीं बना है।
क्या प्रस्ताव आया है
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 के नियम 43A में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इस मसौदे में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और सौंदर्य प्रसाधनों के आयात के लिए अधिकृत प्रवेश द्वारों की सूची का विस्तार करने का प्रस्ताव है। प्रस्ताव के अनुसार कुल 10 नए स्थान इस नेटवर्क से जोड़े जाएंगे। इनमें 8 अंतर्देशीय कंटेनर डिपो, एक विशेष आर्थिक क्षेत्र और एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शामिल है।
यह प्रस्ताव 3 नवंबर 2026 को सामने आया। मंत्रालय का कहना है कि इस विस्तार से आयात की प्रक्रिया सुगम होगी, रसद व्यवस्था की दक्षता बढ़ेगी और देश के विभिन्न हिस्सों में स्वास्थ्य उत्पादों की आवाजाही समय पर हो सकेगी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि यह कदम कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य आपूर्ति श्रृंखला की क्षमता मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।
यह समझना जरूरी है कि यह कोई अंतिम आदेश नहीं है। मसौदा संशोधन पर हितधारकों से आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। उन पर विचार के बाद ही संशोधन को आगे बढ़ाया जाएगा। इसलिए नए स्थानों पर आयात की सुविधा तभी शुरू होगी, जब नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और संशोधन अंतिम रूप से लागू होगा।
कौन-कौन से 10 स्थान जुड़ेंगे

प्रस्तावित सूची में हरियाणा के तीन अंतर्देशीय कंटेनर डिपो शामिल हैं। ये सोनीपत, पियाला और हरसरू में स्थित हैं। उत्तर प्रदेश से दादरी का अंतर्देशीय कंटेनर डिपो इस सूची में है। गुजरात से गांधीधाम-मुंद्रा क्षेत्र का कंटेनर डिपो प्रस्तावित है, जिसे सूची में गांधीधाम-मुंद्रा के नाम से दर्ज किया गया है।
तेलंगाना से हैदराबाद के सनत नगर और थिम्मापुर के कंटेनर डिपो शामिल किए गए हैं। कर्नाटक से बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड का कंटेनर डिपो प्रस्तावित है। इसके अलावा कर्नाटक का बोम्मासंद्रा विशेष आर्थिक क्षेत्र भी सूची में है। उत्तर प्रदेश का नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा हवाई मार्ग से दवाओं के आयात के लिए अतिरिक्त प्रवेश द्वार के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
इस तरह प्रस्तावित 10 स्थान पांच राज्यों में फैले हैं। हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना और कर्नाटक के ये स्थान मौजूदा नेटवर्क के पूरक के रूप में काम करेंगे। इन स्थानों का चयन इस आधार पर किया गया है कि आयातक अपने विनिर्माण केंद्रों, गोदामों और वितरण केंद्रों के निकट ही खेपों की निकासी करा सकें।
नियम 43A क्या है और यह क्यों जरूरी है
नियम 43A औषधि नियम, 1945 का वह प्रावधान है, जिसमें यह तय किया गया है कि दवाओं का आयात किन-किन स्थानों से हो सकता है। इस नियम में बंदरगाहों, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, सड़क पारगमन बिंदुओं और अन्य निर्दिष्ट प्रवेश द्वारों की सूची दी गई है। कोई भी आयातक अपनी मर्जी के किसी भी स्थान से दवाओं की खेप की निकासी नहीं करा सकता। खेप को अधिकृत प्रवेश द्वार से ही आना होता है और वहां नियामकीय तथा सीमा शुल्क से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करना होता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य दोहरा है। पहला, आयातित उत्पादों की निगरानी सुनिश्चित करना, ताकि दस्तावेजों की जांच हो सके और यह पुष्टि हो सके कि खेप देश के औषधि आयात नियमों का पालन करती है। दूसरा, आपूर्ति श्रृंखला को व्यवस्थित रखना, ताकि दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और सौंदर्य प्रसाधनों की आवाजाही नियंत्रित और पारदर्शी तरीके से हो।
जब अधिकृत प्रवेश द्वारों की संख्या कम होती है, तो आयातकों को कई बार खेप को लंबी दूरी तक भीतर ले जाना पड़ता है। इससे परिवहन लागत बढ़ती है और समय भी अधिक लगता है। नए स्थान जुड़ने से आयातक अपने निकटतम उपयुक्त प्रवेश द्वार का चयन कर सकेंगे। इससे भीतरी परिवहन की दूरी घटेगी और खेपों की आवाजाही तेज होगी।
इंदौर का क्या संबंध है
मध्य प्रदेश के पाठकों के लिए इस प्रस्ताव में एक सीधा स्थानीय संदर्भ है। देश के मौजूदा अधिकृत प्रवेश द्वारों के नेटवर्क में इंदौर के धन्नड़ और तिही स्थित अंतर्देशीय कंटेनर डिपो पहले से शामिल हैं। इसके अलावा पहले से अधिसूचित हवाई अड्डे भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। प्रस्तावित विस्तार इन्हीं मौजूदा स्थानों के पूरक के रूप में आएगा।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस प्रस्ताव में इंदौर के लिए कोई नया स्थान नहीं जोड़ा गया है। धन्नड़ और तिही की मौजूदगी पहले से है और प्रस्ताव में उनका नाम मौजूदा नेटवर्क के उदाहरण के रूप में दर्ज है। फिर भी इस विस्तार का अप्रत्यक्ष लाभ मध्य प्रदेश से जुड़े कारोबार और वितरण व्यवस्था को मिल सकता है, क्योंकि देश भर में प्रवेश द्वारों का जाल घना होने से खेपों की आवाजाही अधिक लचीली हो जाएगी।
इंदौर एक बड़ा व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र है। यहां दवाओं और चिकित्सा उत्पादों से जुड़े वितरण, भंडारण और परिवहन के काम बड़े पैमाने पर होते हैं। जब देश के अलग-अलग हिस्सों में निकासी के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे, तो आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े कारोबारियों को मार्ग चुनने में अधिक सुविधा मिलेगी। इससे समय की बचत और लागत के प्रबंधन में मदद मिलने की संभावना है।
आयातकों और आपूर्ति श्रृंखला को क्या लाभ होगा
मंत्रालय के अनुसार विस्तार का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि आयातक खेपों की निकासी अपने विनिर्माण केंद्रों, गोदामों और वितरण केंद्रों के निकट करा सकेंगे। इससे भीतरी परिवहन की आवश्यकता घटेगी, रसद लागत का बेहतर प्रबंधन होगा और आयातित खेपों की आवाजाही में देरी कम होगी।
आपूर्ति श्रृंखला के लिहाज से यह बदलाव महत्वपूर्ण है। दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खेपों में कई बार समय की संवेदनशीलता होती है। भंडारण, तापमान नियंत्रण और वितरण की व्यवस्था को समय पर पूरा करना जरूरी होता है। निकासी का स्थान निकट होने से इन व्यवस्थाओं को संभालना आसान हो जाता है। साथ ही वितरण केंद्रों तक पहुंचने में लगने वाला समय भी कम हो सकता है।
कारोबार सुगमता के दृष्टिकोण से भी यह प्रस्ताव अहम है। अधिक प्रवेश द्वार होने से आयातक मार्गों के चयन में अधिक लचीलापन पा सकेंगे। किसी एक स्थान पर दबाव बढ़ने की स्थिति में वैकल्पिक स्थानों का उपयोग किया जा सकेगा। इससे समूची व्यवस्था पर भार कम होगा और संचालन की सुविधा बढ़ेगी।
मरीजों के लिए इसका क्या अर्थ है और क्या नहीं
आम लोगों के लिए इस प्रस्ताव का लाभ अप्रत्यक्ष है, लेकिन महत्वपूर्ण है। अधिक कुशल आपूर्ति श्रृंखला से स्वास्थ्य उत्पादों की समय पर उपलब्धता को सहारा मिल सकता है। जब खेपों की निकासी और आवाजाही तेज होगी, तो दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और सौंदर्य प्रसाधनों के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचने की प्रक्रिया सुगम होगी।
लेकिन यहां एक स्पष्ट सीमा भी समझनी चाहिए। यह प्रस्ताव दवाओं की कीमतों में कमी की गारंटी नहीं देता। दवाओं की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें स्रोत, नियमन, वितरण व्यवस्था और मूल्य निर्धारण शामिल हैं। प्रवेश द्वार बढ़ने से रसद लागत में बचत हो सकती है, लेकिन इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि हर दवा सस्ती हो जाएगी या हर उत्पाद हर जगह तुरंत उपलब्ध हो जाएगा।
इसी तरह यह प्रस्ताव अभी लागू नहीं हुआ है। जब तक मसौदे पर प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार नहीं हो जाता और नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक नए स्थान अधिकृत प्रवेश द्वार नहीं बनेंगे। इसलिए पाठकों को इस प्रस्ताव को भविष्य की व्यवस्था के रूप में देखना चाहिए, न कि आज से लागू हुए बदलाव के रूप में।
इससे पहले दवाओं की कीमतों से जुड़ी राहत की खबरें भी सामने आती रही हैं। लेकिन हर मामले की अपनी प्रक्रिया और अपने नियम होते हैं। आयात द्वारों का विस्तार एक ढांचागत सुधार है, जिसका असर धीरे-धीरे और व्यवस्था के स्तर पर दिखाई देगा।
आपत्ति और सुझाव कैसे भेजें
मंत्रालय ने मसौदा संशोधन पर हितधारकों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए हैं। जो व्यक्ति, संगठन या कारोबारी इस प्रस्ताव से जुड़े पक्षों पर अपनी राय देना चाहते हैं, वे अपनी आपत्ति या सुझाव अवर सचिव (औषधि विनियमन), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार को भेज सकते हैं। पत्राचार का पता नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-1 में दिया गया है।
इसके अलावा सुझाव ईमेल के माध्यम से भी भेजे जा सकते हैं। मंत्रालय ने इसके लिए drugsdiv-mohfw@gov.in ईमेल पता जारी किया है। मसौदा अधिसूचना आधिकारिक राजपत्र की वेबसाइट पर उपलब्ध है, जहां से इसके पूरे पाठ को देखा जा सकता है।
आपत्ति या सुझाव भेजते समय संबंधित स्थान, नियम और व्यावहारिक पक्षों का उल्लेख करना उपयोगी होगा। इससे मंत्रालय को यह समझने में मदद मिलेगी कि प्रस्ताव का जमीनी असर क्या होगा और किन बिंदुओं पर और स्पष्टता की जरूरत है। मसौदा प्रक्रिया का यही उद्देश्य है कि अंतिम नियम बनने से पहले सभी संबंधित पक्षों की राय सामने आ जाए।
आगे क्या होगा
अगला चरण आपत्तियों और सुझावों पर विचार का होगा। मंत्रालय को प्राप्त राय का परीक्षण करने के बाद संशोधन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस प्रक्रिया में यह भी देखा जाएगा कि प्रस्तावित स्थानों पर निकासी, जांच और निगरानी की व्यवस्था कैसे संचालित होगी।
यदि संशोधन अंतिम रूप से लागू होता है, तो नए स्थानों पर दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और सौंदर्य प्रसाधनों की खेपों की निकासी की सुविधा शुरू हो जाएगी। इससे देश के आयात नेटवर्क का दायरा बढ़ेगा और विभिन्न क्षेत्रों में वितरण व्यवस्था को और सहारा मिलेगा।
तब तक आयातकों को मौजूदा अधिकृत प्रवेश द्वारों के माध्यम से ही काम करना होगा। प्रस्तावित स्थानों पर सुविधा शुरू होने की तारीख तभी तय होगी, जब अंतिम अधिसूचना जारी होगी। इसलिए इस मसौदे को लेकर किसी भी तरह की जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए।
स्वास्थ्य उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था में इस तरह के ढांचागत बदलावों का महत्व लंबे समय में सामने आता है। प्रवेश द्वारों का विस्तार, जांच व्यवस्था की मजबूती और वितरण नेटवर्क का सुदृढ़ होना, ये सभी मिलकर देश में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता को बेहतर बनाने की दिशा में काम करते हैं। इस प्रस्ताव पर अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि अंतिम नियम किस रूप में सामने आता है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।
