श्योपुर ब्यूरो
सार: कूनो राष्ट्रीय उद्यान के 19 महीने के चीता शावक केजीएन22 की मौत के मामले में केंद्र सरकार ने उच्चस्तरीय जांच टीम गठित कर दी है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर जाकर पूरे घटनाक्रम की जांच करेंगे और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी करेंगे।
केंद्र ने क्यों भेजी उच्चस्तरीय टीम
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 28 अक्टूबर को इस मामले में उच्चस्तरीय टीम की तैनाती की घोषणा की। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। बयान में यह भी कहा गया है कि प्रोजेक्ट चीता का विशेष महत्त्व है और फिर से बसाई गई चीता आबादी की सुरक्षा के उच्चतम मानक सुनिश्चित करना जरूरी है।
इसी वजह से केंद्र ने सिर्फ राज्य की जांच पर निर्भर रहने के बजाय अपनी टीम को मौके पर भेजने का फैसला किया है। यह टीम जमीन पर जाकर जांच करेगी, ताकि मौत के कारणों और उसके पीछे की परिस्थितियों को पूरी तरह समझा जा सके।
टीम में कौन-कौन शामिल है
केंद्रीय टीम में तीन वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं। इनमें राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के वन महानिरीक्षक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के अतिरिक्त निदेशक और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के क्षेत्रीय उप निदेशक शामिल हैं।
तीनों अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के अनुभवी अधिकारी माने जाते हैं। बाघ संरक्षण प्राधिकरण वन्यजीव संरक्षण और संरक्षित क्षेत्रों की निगरानी से जुड़ा है, जबकि वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो वन्यजीवों के खिलाफ अपराधों की जांच और रोकथाम का काम देखता है। इन दोनों संस्थाओं के अधिकारियों की संयुक्त टीम से जांच के हर पहलू को देखने की उम्मीद की जा रही है।

टीम क्या-क्या जांचेगी
केंद्रीय टीम को कई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सबसे पहले टीम चीता शावक की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की गहन जांच करेगी। टीम उपलब्ध सभी साक्ष्यों की पड़ताल करेगी और मध्य प्रदेश वन विभाग के साथ निकट समन्वय में काम करेगी, ताकि मामले में सख्त और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
इसके साथ ही टीम सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन की भी समीक्षा करेगी। यह देखा जाएगा कि चीता आबादी की निगरानी और सुरक्षा के लिए जो व्यवस्थाएं लागू हैं, वे जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से काम कर रही हैं। भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए सुरक्षा और निगरानी उपायों की भी जांच की जाएगी।
जांच पूरी होने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें मंत्रालय को सौंपेगी। इसके आधार पर मंत्रालय राज्य सरकार और क्षेत्रीय अधिकारियों को आगे के निर्देश देगा।
शावक के साथ क्या हुआ था
यह पूरा मामला 25 अक्टूबर से शुरू हुआ था। उस दिन 19 महीने का नर चीता शावक केजीएन22 मुरैना जिले के क्षेत्रीय वन क्षेत्र में घायल अवस्था में मिला था। यह इलाका कूनो राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षित क्षेत्र से बाहर है। उसी दिन वन विभाग की टीम ने उसे श्योपुर क्षेत्रीय वन मंडल के कक्ष संख्या 748 से बचाया और इलाज के लिए जबलपुर के पशु चिकित्सा केंद्र ले जाया गया।
शुरुआती एक्स-रे में शावक के शरीर में कई जगह बाहरी वस्तुएं दिखीं। इसके बाद सीटी जांच में पता चला कि इन वस्तुओं से उसके आंतरिक अंगों, मांसपेशियों की व्यवस्था और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा है। आपात सर्जरी के दौरान उसके शरीर से आग्नेयास्त्र के पांच छर्रे निकाले गए। गहन इलाज और सर्जरी के बावजूद शावक की 27 अक्टूबर को मौत हो गई।
केजीएन22 मादा चीता निर्वा का शावक था। वन विभाग के अनुसार, चीतों की फिर से बसाहट शुरू होने के बाद से यह पहला ऐसा संदिग्ध मामला माना जा रहा है, जिसमें गोली या छर्रे लगने से किसी चीते की मौत हुई हो। इसी वजह से यह मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
राज्य की विशेष कार्य बल जांच पहले से जारी
केंद्र की टीम से पहले ही मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए वन और पुलिस अधिकारियों का एक विशेष कार्य बल गठित कर दिया था। राज्य का यह कार्य बल भी घटना की विस्तृत जांच कर रहा है। इसके अलावा विशेष बाघ सुरक्षा बल की तैनाती भी की गई है।
अब केंद्रीय टीम राज्य के कार्य बल के साथ समन्वय में काम करेगी। दोनों जांचों का मकसद एक ही है — यह पता लगाना कि शावक के शरीर में छर्रे कैसे पहुंचे, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और सुरक्षा व्यवस्था में कहां कमी रह गई।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छर्रे किस परिस्थिति में लगे और इसके पीछे कौन लोग हो सकते हैं। किसी संदिग्ध की पहचान की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियां इसी बिंदु पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
प्रोजेक्ट चीता के लिए क्यों अहम है यह मामला
प्रोजेक्ट चीता के तहत देश में चीतों को फिर से बसाने का काम सितंबर 2022 से चल रहा है। दशकों बाद देश में चीते लौटे हैं और उनकी आबादी धीरे-धीरे बढ़ रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस घटना के समय देश में चीतों की संख्या 58 के आसपास बताई गई थी, जिनमें कूनो में 52, गांधी सागर में चार और वीरांगना दुर्गावती अभयारण्य में दो चीते शामिल थे।
इसीलिए किसी एक चीते की इस तरह की मौत को सिर्फ एक घटना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि फिर से बसाई गई आबादी की सुरक्षा ही इस पूरे कार्यक्रम की सफलता की कुंजी है। अगर सुरक्षा में कोई कमी है, तो उसे समय रहते दूर करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
केंद्र की उच्चस्तरीय टीम का गठन भी इसी सोच को दिखाता है। मंत्रालय ने साफ किया है कि चीता आबादी की सुरक्षा के मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
आगे क्या होगा
आने वाले दिनों में केंद्रीय टीम मौके पर पहुंचकर जांच शुरू करेगी। टीम घटनास्थल और आसपास के इलाकों का जायजा लेगी, वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से बात करेगी और सुरक्षा व्यवस्था के दस्तावेजों की पड़ताल करेगी।
इसके बाद टीम की रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी जाएगी। मंत्रालय की ओर से राज्य सरकार को जो निर्देश दिए जाएंगे, उनसे यह तय होगा कि सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाएंगे और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।
तब तक राज्य का विशेष कार्य बल भी अपनी जांच जारी रखेगा। दोनों जांचों के नतीजे आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि शावक की मौत के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है। फिलहाल वन विभाग और केंद्र सरकार, दोनों ने इस मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।
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