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कूनो की निर्वा का शावक मुरैना में घायल मिला: रात में बचाव, कूनो में इलाज जारी; चोट का कारण अभी रहस्य

सांकेतिक चित्र: घास के मैदान में चीता (विकिमीडिया कॉमन्स से साभार) सांकेतिक चित्र: घास के मैदान में चीता (विकिमीडिया कॉमन्स से साभार)

श्योपुर ब्यूरो

सार: कूनो राष्ट्रीय उद्यान के मादा चीता निर्वा का 19 माह का नर शावक मुरैना के जंगल में घायल अवस्था में मिला है। निगरानी दल ने उसे रात में बचाकर कूनो के चिकित्सा केंद्र पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है। चोट का कारण अभी स्पष्ट नहीं है और वन विभाग ने हर पहलू से जांच के लिए विशेष दल भेजा है।

मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। मादा चीता निर्वा का 19 महीने का नर शावक मुरैना वन मंडल के पहाड़गढ़ क्षेत्र में घायल अवस्था में पाया गया। चीता निगरानी दल ने रविवार 25 अक्टूबर की शाम को उसे देखा और रात भर चले बचाव अभियान के बाद उसे कूनो लाया गया, जहां अब उसका इलाज चल रहा है। वन विभाग ने सोमवार 26 अक्टूबर की शाम को इस घटना की आधिकारिक जानकारी दी।

जंगल में कैसे मिला घायल शावक

मिली जानकारी के अनुसार यह शावक कूनो से बाहर निकलकर मुरैना के क्षेत्रीय वन मंडल के जंगल में विचरण कर रहा था। रविवार की शाम निगरानी दल को वह लंबे समय तक एक ही स्थान पर बिना हिले-डुले पड़ा दिखाई दिया। दल के सदस्यों ने पास जाकर देखा तो पता चला कि वह घायल है और सामान्य रूप से चल-फिर नहीं पा रहा है।

सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा। रात में ही शावक को सुरक्षित तरीके से बेहोश करके जांच की गई और फिर उसे कूनो राष्ट्रीय उद्यान के चिकित्सा केंद्र ले जाया गया। वहां पशु चिकित्सकों की देखरेख में उसका उपचार शुरू किया गया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शावक की पीठ पर चोट के निशान मिले हैं, लेकिन चोट की पूरी प्रकृति और गंभीरता के बारे में जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।

चोट का कारण अभी रहस्य, हर पहलू से जांच

इस घटना का सबसे अहम सवाल यही है कि शावक को चोट कैसे लगी। वन विभाग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि चोट के कारण का पता लगाया जा रहा है और सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। विभाग ने यह भी कहा है कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

जांच के लिए वन विभाग का विशेष कार्य बल (एसटीएफ) भी मौके पर भेजा गया है। यह दल यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि शावक को किसी अन्य वन्यजीव ने नुकसान पहुंचाया है या इसमें किसी मानवीय गतिविधि की भूमिका रही है। मुरैना के वन अधिकारियों के अनुसार आसपास के क्षेत्र में हर सुराग को खंगाला जा रहा है और स्थानीय स्तर पर भी पूछताछ की जा रही है।

रिपोर्टों के अनुसार चोट की असली प्रकृति के बारे में 48 घंटे के भीतर अधिक स्पष्ट जानकारी मिलने की उम्मीद है। तब तक शावक चिकित्सकों की निगरानी में रहेगा और उसकी सेहत पर लगातार नजर रखी जाएगी।

शिकार के आरोप पर कार्यकर्ता का दावा, विभाग ने नहीं की पुष्टि

इस घटना को लेकर एक वन्यजीव कार्यकर्ता ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि शावक की रीढ़ की हड्डियों में कई जगह टूटन है, जो किसी भारी वस्तु से बार-बार किए गए प्रहार की ओर इशारा करती है। उन्होंने इसे शिकारियों की करतूत बताते हुए वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।

हालांकि वन विभाग ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। विभाग का आधिकारिक रुख यही है कि चोट का कारण जांच के बाद ही सामने आएगा और अभी किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया गया है और न ही किसी पर आरोप लगाया गया है। इस खबर में शिकार का आरोप केवल एक कार्यकर्ता के दावे के रूप में दर्ज किया जा रहा है, न कि स्थापित तथ्य के रूप में। जांच पूरी होने के बाद ही इस पहलू पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

यह सावधानी इसलिए भी जरूरी है क्योंकि अतीत में ऐसे मामलों में शुरुआती अटकलें कई बार गलत साबित हुई हैं। वन्यजीवों के बीच आपसी संघर्ष में भी गंभीर चोटें लग सकती हैं, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि चिकित्सा जांच और मौके के साक्ष्य ही सही तस्वीर देंगे।

कूनो से बाहर विचरण: निगरानी की बड़ी चुनौती

यह घटना एक और बड़ी चुनौती की ओर भी ध्यान खींचती है। कूनो में इस समय कुल 53 चीते हैं, जिनमें से 15 खुले जंगल में स्वतंत्र विचरण कर रहे हैं। जब ये चीते संरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलकर आसपास के जिलों के जंगलों में पहुंच जाते हैं, तो उनकी निगरानी करना कहीं अधिक कठिन हो जाता है।

मुरैना का पहाड़गढ़ क्षेत्र कूनो से करीब 100 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है। इतनी दूरी तक चीते का पहुंच जाना इस बात का संकेत है कि खुले में रहने वाले चीतों की आवाजाही का दायरा लगातार बढ़ रहा है। निगरानी दल रेडियो कॉलर और मैदानी गश्त के जरिये इन पर नजर रखते हैं, लेकिन घने जंगल और दूर-दराज के इलाकों में हर पल निगरानी संभव नहीं हो पाती।

विशेषज्ञों के अनुसार चीता परियोजना की सफलता के लिए यह जरूरी है कि संरक्षित क्षेत्र के बाहर विचरण करने वाले चीतों की सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत हो। स्थानीय ग्रामीणों के साथ तालमेल और त्वरित सूचना तंत्र इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

निर्वा और कूनो की चीता परियोजना

घायल शावक की मां निर्वा को फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से कूनो लाया गया था। वह उन मादा चीतों में से है, जिनके शावकों ने भारत की धरती पर जन्म लिया है। भारत में चीता पुनर्वास परियोजना के तहत कूनो को इन वन्यजीवों का नया घर बनाया गया है और यहां पैदा हुए शावक इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि माने जाते हैं।

परियोजना के तहत चीतों को पहले बाड़ों में रखा जाता है और फिर धीरे-धीरे खुले जंगल में छोड़ा जाता है। खुले जंगल में छोड़े गए चीते शिकार करना, अपना क्षेत्र बनाना और नई परिस्थितियों में ढलना सीखते हैं। इसी प्रक्रिया में कुछ चीते संरक्षित क्षेत्र से बाहर भी निकल जाते हैं, जैसा कि इस मामले में हुआ।

वन विभाग के अनुसार अब तक इस परियोजना में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, लेकिन कुल संख्या का बढ़ना और नए शावकों का जन्म इसकी प्रगति का संकेत है। हर नई घटना से मिले सबक को सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया जाता है।

अलग घटना: कराहल में चीतों ने मारे दो बछड़े

इसी सप्ताहांत कूनो के आसपास एक अलग घटना भी सामने आई। कराहल क्षेत्र के एक गांव में दो चीतों ने एक झोपड़ी में घुसकर दो बछड़ों को मार दिया। ग्रामीणों ने शोर मचाकर चीतों को वहां से खदेड़ दिया।

रिपोर्टों में यह स्पष्ट किया गया है कि यह घटना मुरैना में घायल मिले शावक से जुड़ी नहीं है। दोनों स्थानों के बीच काफी दूरी है, इसलिए ग्रामीणों द्वारा खदेड़े गए चीतों और घायल शावक को एक ही घटना से जोड़ना सही नहीं होगा। इस स्पष्टीकरण के बाद दोनों घटनाओं को अलग-अलग देखा जा रहा है।

फिर भी, यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि कूनो के आसपास के गांवों में मानव और वन्यजीव के बीच टकराव की स्थितियां बन रही हैं। मवेशियों के नुकसान से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती है और इससे वन्यजीवों के प्रति असहिष्णुता भी पैदा हो सकती है। वन विभाग के लिए यह भी एक चुनौती है कि वह ग्रामीणों को नुकसान की भरपाई और सुरक्षा के प्रति भरोसा दिलाए।

आगे क्या: इलाज, जांच और सुरक्षा समीक्षा

आने वाले दिनों में तीन बातों पर सबकी नजर रहेगी। पहली, घायल शावक की सेहत। चिकित्सकों की रिपोर्ट बताएगी कि वह कितनी जल्दी सामान्य जीवन में लौट पाएगा और क्या उसे लंबे समय तक चिकित्सा केंद्र में ही रखना होगा। दूसरी, जांच की रिपोर्ट। विशेष कार्य बल की जांच से चोट के कारण का पता चलेगा और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। तीसरी, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा। यदि जांच में कोई मानवीय लापरवाही या शिकार की पुष्टि होती है, तो वन विभाग को कूनो के बाहर विचरण करने वाले चीतों की सुरक्षा और कड़ी करनी होगी।

फिलहाल वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अटकलों पर ध्यान न दें और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करें। चीता परियोजना देश की एक महत्वपूर्ण वन्यजीव पहल है और इसके हर पड़ाव पर पारदर्शी जानकारी ही लोगों का भरोसा बनाए रख सकती है। घायल शावक के जल्द स्वस्थ होने की कामना के साथ अब सबकी निगाहें कूनो से आने वाली अगली चिकित्सा रिपोर्ट पर टिकी हैं।

क्या है कूनो राष्ट्रीय उद्यान

कूनो राष्ट्रीय उद्यान मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित है। कूनो नदी के किनारे फैला यह उद्यान शुष्क पर्णपाती जंगलों, घास के मैदानों और नदी किनारे के वन क्षेत्र के लिए जाना जाता है। यहां चीते के अलावा तेंदुए, भेड़िए, चीतल, सांभर, नीलगाय और जंगली सूअर जैसे वन्यजीव भी पाए जाते हैं। कभी इसे एशियाई शेरों के पुनर्वास के लिए भी चुना गया था, लेकिन बाद में यह चीता परियोजना का केंद्र बन गया।

उद्यान के आसपास सहरिया जनजाति के लोग रहते हैं, जिनका जीवन जंगल से गहराई से जुड़ा है। चीता परियोजना की सफलता के लिए इन स्थानीय समुदायों का सहयोग बेहद अहम माना जाता है। वन विभाग समय-समय पर स्थानीय लोगों के साथ संवाद कार्यक्रम भी चलाता है, ताकि मानव और वन्यजीव के बीच संतुलन बना रहे।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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