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कूनो में चीता शावक की मौत पर बड़ा खुलासा: सर्जरी में शरीर से मिलीं 5 छर्रे, जांच के लिए एसटीएफ गठित

सांकेतिक चित्र: घास के मैदान में चीता सांकेतिक चित्र: घास के मैदान में एक चीता (विकिमीडिया कॉमन्स से साभार)

श्योपुर ब्यूरो

सार: कूनो राष्ट्रीय उद्यान के 19 महीने के चीता शावक की इलाज के दौरान मौत हो गई है। सर्जरी के दौरान उसके शरीर से बंदूक की 5 छर्रे निकलीं। राज्य सरकार ने वन और पुलिस अधिकारियों की विशेष कार्यबल गठित कर जांच शुरू कर दी है। सितंबर 2022 में चीतों की वापसी के बाद संदिग्ध गोलीबारी से हुई यह पहली मौत बताई जा रही है।

रविवार रात से मंगलवार सुबह तक: कैसे सामने आया पूरा मामला

रविवार रात कूनो के निगरानी दल को सूचना मिली कि श्योपुर वन मंडल के कक्ष क्रमांक 748 में एक चीता घायल अवस्था में मिला है। दल ने रात में ही शावक को बचाया और उसे कूनो राष्ट्रीय उद्यान के चिकित्सा केंद्र ले जाया गया। शुरुआती जांच में उसके शरीर में कई बाहरी वस्तुएं होने का पता चला।

विशेषज्ञों से सलाह के बाद शावक को जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के पशु शल्य चिकित्सा एवं विकिरण विज्ञान विभाग में भेजा गया, जहां विस्तृत जांच और गहन इलाज शुरू हुआ। सीटी जांच में पता चला कि बाहरी वस्तुओं ने उसके आंतरिक अंगों, मांसपेशियों की प्रणाली और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाया था।

आपातकालीन सर्जरी के दौरान शावक के शरीर से बंदूक की 5 छर्रे निकाली गईं। लगातार कोशिशों के बावजूद मंगलवार सुबह शावक की मौत हो गई। वन विभाग के बयान के अनुसार, सर्जरी और पशु चिकित्सकों की लगातार कोशिशों के बावजूद नर शावक को बचाया नहीं जा सका।

यह शावक कूनो की मादा चीता निर्वा का 19 महीने का नर शावक था, जिसे KNG22 के रूप में पहचाना गया है।

कूनो चीता शावक मौत: एसटीएफ जांच के दायरे में क्या-क्या

राज्य सरकार ने इस मामले की विस्तृत जांच के लिए वन और पुलिस अधिकारियों की विशेष कार्यबल गठित की है। यह कार्यबल शावक के घायल होने और मौत तक पहुंचने वाली परिस्थितियों की जांच करेगा। वन विभाग की विशेष बाघ सुरक्षा बल की टीम भी इलाके में तैनात की गई है और पुलिस की मदद भी ली जा रही है।

जांच में यह पता लगाया जाएगा कि शावक को किस हथियार से गोली मारी गई। भरमार बंदूक जैसे पारंपरिक हथियार और देशी 12 बोर बंदूक, दोनों की संभावना की जांच हो रही है। छर्रों की फॉरेंसिक और बैलिस्टिक जांच से हथियार के प्रकार का पता लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कुछ शुरुआती आकलनों में करीब से गोली चलने की आशंका जताई गई है, लेकिन वन विभाग ने साफ किया है कि चोट का सटीक कारण अभी स्थापित नहीं हुआ है। जांच में तेंदुए से मुठभेड़, ग्रामीणों से टकराव और शिकार की आशंका समेत सभी पहलुओं की जांच हो रही है।

अभी तक इस मामले में किसी संदिग्ध की पहचान नहीं हुई है और गोली चलाने के पीछे का मकसद भी साफ नहीं है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

सांकेतिक चित्र: घास के मैदान में चीता
सांकेतिक चित्र: घास के मैदान में एक चीता (विकिमीडिया कॉमन्स से साभार)

कौन था KNG22: निर्वा का 19 महीने का शावक

KNG22 कूनो राष्ट्रीय उद्यान की मादा चीता निर्वा का 19 महीने का नर शावक था। यह शावक रविवार रात घायल अवस्था में मिला था और उसे बचाने के लिए कूनो से जबलपुर तक इलाज की लंबी प्रक्रिया चली।

शावक संरक्षित क्षेत्र की सीमा से बाहर, श्योपुर और मुरैना जिलों से लगते वन क्षेत्र में घूम रहा था। चीते अक्सर अपने विचरण क्षेत्र में उद्यान की सीमा से बाहर निकल जाते हैं, इसलिए निगरानी दल उनकी गतिविधियों पर नजर रखते हैं।

निर्वा के शावक की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संरक्षित क्षेत्र से बाहर घूमने वाले चीतों की सुरक्षा कैसे पुख्ता की जाए।

2022 के बाद पहली संदिग्ध गोलीबारी: क्यों अहम है यह मामला

सितंबर 2022 में दशकों बाद भारत में चीतों की वापसी हुई थी और कूनो राष्ट्रीय उद्यान को उनका पहला घर बनाया गया था। इसके बाद भारत में ही चीता शावकों का जन्म भी हुआ और आबादी धीरे-धीरे बढ़ी।

वन विभाग के बयान के अनुसार, अब देश में चीतों की कुल संख्या 58 है — इनमें 52 कूनो राष्ट्रीय उद्यान में, 4 गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में और 2 वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में हैं। ये सभी मध्य प्रदेश में स्थित हैं।

यदि गोलीबारी की पुष्टि होती है तो यह पुनर्स्थापना के बाद किसी चीते की संदिग्ध गोलीबारी से हुई पहली मौत होगी। यही वजह है कि इस मामले को प्रोजेक्ट चीता के लिए एक गंभीर झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अभी भी आबादी छोटी है और हर जानवर का महत्व बहुत अधिक है।

संरक्षित क्षेत्र से बाहर चीतों की सुरक्षा पर उठे सवाल

चीते अपने विचरण के दौरान उद्यान की सीमा से बाहर निकलकर आसपास के वन क्षेत्रों और जिलों में चले जाते हैं। ऐसे में मानव बस्तियों और हथियारों वाले इलाकों के करीब पहुंचने का खतरा बना रहता है।

जिस पहाड़गढ़ इलाके में यह शावक मिला था, वहां पहले भी तेंदुओं के शिकार की खबरें सामने आ चुकी हैं। इसी वजह से जांच में स्थानीय पहलू की भी बारीकी से जांच हो रही है।

इस घटना ने वन प्रबंधन के सामने यह चुनौती भी रखी है कि उद्यान से बाहर घूमने वाले चीतों की निगरानी और सुरक्षा को और मजबूत कैसे किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।

आगे क्या होगा: जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और निगरानी

विशेष कार्यबल अब घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, छर्रों की फॉरेंसिक रिपोर्ट और इलाके की गतिविधियों की जांच करेगा। हथियार के प्रकार का पता चलने के बाद जांच की दिशा और साफ होगी।

यदि गोलीबारी की पुष्टि होती है तो वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है। वन विभाग का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा।

इस बीच कूनो और आसपास के क्षेत्रों में घूमने वाले अन्य चीतों की निगरानी पर विशेष ध्यान रहेगा। वन विभाग की टीमें उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखेंगी और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी जांच के साथ-साथ चलती रहेगी।

प्रोजेक्ट चीता: भारत में चीतों की वापसी की कहानी

भारत से दशकों पहले विलुप्त हो चुके चीते की वापसी सितंबर 2022 में हुई थी। कूनो राष्ट्रीय उद्यान को इस ऐतिहासिक परियोजना के लिए चुना गया और यहां पहले चीते लाए गए।

इसके बाद भारत की धरती पर ही चीता शावकों का जन्म हुआ, जिससे परियोजना को नई गति मिली। धीरे-धीरे कुछ चीतों को गांधी सागर और वीरांगना दुर्गावती जैसे अन्य स्थलों पर भी बसाया गया।

आज देश में 58 चीतों की आबादी के साथ यह परियोजना दुनिया की नजर में है। ऐसे में किसी भी चीते की असामान्य मौत की जांच और उससे मिलने वाले सबक, पूरी परियोजना के भविष्य के लिए अहम माने जाते हैं।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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