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चिन्मय अमृत महोत्सव: भारत मंडपम में PM मोदी ने किया वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन, कहा- मेरी नीतियों के केंद्र में देश के युवा

Chinmaya Amrit Mahotsav Global Conference, Bharat Mandapam (symbolic image)

दिल्ली ब्यूरो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन’ का उद्घाटन किया। चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन में देश-विदेश से आए संतों, आचार्यों और हजारों साधकों की उपस्थिति रही। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी नीतियों के केंद्र में देश के युवा हैं और सशक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी सबसे अहम भूमिका निभाएगी।

भारत मंडपम में हुआ भव्य उद्घाटन समारोह

शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत मंडपम पहुंचे, जहां चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया था। स्रोत के अनुसार, प्रधानमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ सम्मेलन का शुभारंभ किया और इसके बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। सम्मेलन स्थल पर आध्यात्मिक वातावरण के बीच देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। उद्घाटन सत्र में चिन्मय मिशन से जुड़े वरिष्ठ संत और आचार्य भी मंच पर उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि इस अमृत महोत्सव में शामिल होने का अवसर मिलना उनके लिए एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव है।

“मेरी नीतियों के केंद्र में देश के युवा हैं”

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में युवाओं को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “मेरी नीतियों के केंद्र में देश के युवा हैं।” प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि सशक्त भारत के निर्माण के लिए युवाओं की भागीदारी अहम है और युवा शक्ति ही देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। स्रोत के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि सरकार की हर योजना और नीति में युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं को केंद्र में रखा गया है। प्रधानमंत्री के इस बयान को युवाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।

“चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, चिन्मय विचार है”

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा, “चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं है, यह चिन्मय विचार है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस चिन्मय ऋषि ने इस मिशन की स्थापना की, उनकी दृष्टि और संकल्पों से भरी यह यात्रा दशकों से चली आ रही है। उन्होंने कहा, “जो चिन्मय है, वह स्वाभाविक ही अमर है, अमृतमय है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि इसीलिए भारत मंडपम में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ का नाम भी उतना ही सार्थक है। उन्होंने दुनिया भर में चिन्मय मिशन से जुड़े संतों, आचार्यों, लाखों साधकों और अनुयायियों को अमृत महोत्सव की बधाई दी।

नवरात्रि व्रत पूरे होने का किया जिक्र

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एक व्यक्तिगत और भावुक क्षण भी साझा किया। स्रोत के अनुसार, उन्होंने कहा, “गुरुजी, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। मेरे नवरात्रि के व्रत अभी-अभी पूरे हुए हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि वह संतों को नमन करते हैं और उनका आशीर्वाद चाहते हैं। उन्होंने कहा, “आपके दिखाए मार्ग पर चलने के लिए भारत हर संभव प्रयास करेगा।” प्रधानमंत्री के इस कथन पर सभागार में उपस्थित लोगों ने तालियों से स्वागत किया। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री हर वर्ष नवरात्रि के दौरान व्रत रखते हैं और इस बार भी उन्होंने नौ दिनों तक व्रत का पालन किया था।

भारतीय विरासत पर गर्व का संदेश

प्रधानमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा और विरासत पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, “हमारा ज्ञान और बोध अमर है। इसी बोध के कारण भारत भी हजारों वर्षों से अमर बना हुआ है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘भारत’ शब्द का अर्थ ही है जो ज्ञान और प्रकाश के अनुसंधान में लगा हो। उन्होंने कहा कि जब देश की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने का अवसर आया, तब उनके मन में विचार आया था कि इस अवसर को केवल भारत का प्रेरणा मंच ही नहीं बनाना है, बल्कि भारत के उस स्वरूप को भी जीवंत करना है जो अमृत विचारों को जीना जानता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय विरासत पर गर्व करना और उसका संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य है। इस सम्मेलन के उद्घाटन की पूर्वसंध्या पर प्रकाशित पूर्वावलोकन यहां पढ़ें: https://pradesh24news.in/?p=7035

नौ हजार से अधिक श्रद्धालु, देश-विदेश से प्रतिनिधि

चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन में देश-विदेश से नौ हजार से अधिक श्रद्धालुओं और प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। स्रोत के अनुसार, सम्मेलन में चिन्मय मिशन के वैश्विक केंद्रों से जुड़े साधक, आचार्य और अनुयायी बड़ी संख्या में पहुंचे हैं। यह सम्मेलन चिन्मय मिशन के 75 वर्षों की आध्यात्मिक और सामाजिक यात्रा का उत्सव है। सम्मेलन के दौरान चिन्मय मिशन से जुड़े विचारों, शिक्षाओं और गतिविधियों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

चिन्मय मिशन के 75 वर्ष: आध्यात्मिक यात्रा की एक झलक

चिन्मय मिशन की स्थापना को 75 वर्ष पूरे हो गए हैं और इस उपलक्ष्य में ‘अमृत महोत्सव’ मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इतने दशकों की यह यात्रा चिन्मय संकल्पों से भरी रही है। स्रोत के अनुसार, चिन्मय मिशन आज दुनिया के कई देशों में फैला हुआ है और लाखों साधक तथा अनुयायी इससे जुड़े हैं। मिशन आध्यात्मिक ज्ञान, वेदांत दर्शन और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कार्य करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संतों का उनके प्रति विशेष स्नेह और आशीर्वाद है और इस महोत्सव में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि सभी के सौजन्य से उन्हें इस आयोजन में शामिल होने का अवसर मिला।

सम्मेलन में आगे क्या होगा

उद्घाटन सत्र के बाद वैश्विक सम्मेलन के विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें चिन्मय मिशन के विचारों, आध्यात्मिक शिक्षाओं और सामाजिक गतिविधियों पर चर्चा होगी। स्रोत के अनुसार, सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वान, संत और आचार्य अपने विचार रखेंगे। यह सम्मेलन भारतीय दर्शन और आध्यात्मिकता को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री के ‘युवा केंद्रित’ संदेश के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि सम्मेलन के आगामी सत्रों में युवाओं की भागीदारी और भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर क्या मंथन होता है। सम्मेलन के समापन पर एक साझा संकल्प लिए जाने की भी उम्मीद है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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