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चिन्मय अमृत महोत्सव: पीएम मोदी आज भारत मंडपम में करेंगे वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन, देश-विदेश से जुटेंगे 9,000 से अधिक श्रद्धालु

Chinmaya Amrit Mahotsav Global Conference, Bharat Mandapam (symbolic image)

दिल्ली ब्यूरो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे और उपस्थित सभा को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, उद्घाटन कार्यक्रम आज सुबह 11 बजे आयोजित होगा। तीन दिन चलने वाला यह सम्मेलन रविवार को संपन्न होगा, जिसमें भारत के साथ-साथ विदेशों से भी नौ हजार से अधिक लोग शामिल होंगे।

Symbolic image — Chinmaya Amrit Mahotsav global conference

यह सम्मेलन चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पूरे साल चले आयोजनों का समापन समारोह है। मिशन की स्थापना पूज्य स्वामी चिन्मयानंद ने वर्ष 1951 में की थी। इसका मूल उद्देश्य वेदांत और भगवद्गीता के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना है।

भारत मंडपम में आज का कार्यक्रम

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से गुरुवार को जारी जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी आज सुबह 11 बजे भारत मंडपम पहुंचकर वैश्विक सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन के बाद वे सभा को संबोधित भी करेंगे। इस अवसर पर चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख स्वामी स्वरूपानंद सहित देश-विदेश के अनेक विद्वान, संत और श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे।

तीन दिवसीय इस सम्मेलन में वेदांत दर्शन, भगवद्गीता के संदेश और भारतीय ज्ञान परंपरा पर व्यापक मंथन होगा। आयोजकों के अनुसार, देश के कोने-कोने से और विदेशों के कई केंद्रों से नौ हजार से अधिक प्रतिनिधि इसमें भाग लेंगे।

75 वर्षों की यात्रा: स्वामी चिन्मयानंद की विरासत

चिन्मय मिशन की स्थापना का इतिहास स्वयं में एक प्रेरक कथा है। पूज्य स्वामी चिन्मयानंद अपने शुरुआती जीवन में पत्रकार थे। हिमालय इसलिए गए थे ताकि जान सकें कि साधु-संत आखिर क्या करते हैं। वहां उनकी मुलाकात स्वामी शिवानंद और स्वामी तपोवन जैसे संतों से हुई, जिनके जीवन ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।

हिमालय में वेदांत और श्रीमद्भगवद्गीता का अध्ययन करने के बाद स्वामी चिन्मयानंद को यह अहसास हुआ कि भारत के युवाओं को अपने गौरवशाली ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। इसके बाद उन्होंने पूरे देश में वेदांत और गीता का संदेश पहुंचाने का संकल्प लिया और वर्ष 1951 में चिन्मय मिशन की नींव रखी।

स्वामी चिन्मयानंद का मानना था कि जब व्यक्ति बदलता है, तभी राष्ट्र बदलता है। इसी सोच के साथ उन्होंने देशभर में गीता ज्ञान यज्ञ शुरू किए, जिनके माध्यम से लोगों को जीवन के उद्देश्य, कर्तव्य और मूल्यों की शिक्षा दी गई। आज चिन्मय मिशन के केंद्र दुनिया के अनेक देशों में सक्रिय हैं।

युवाओं को गीता से जोड़ना मिशन का लक्ष्य

चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख स्वामी स्वरूपानंद ने हाल ही में एक बातचीत में कहा था कि मिशन का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को जन-जन तक पहुंचाना है।

स्वामी स्वरूपानंद के अनुसार, इस वैश्विक सम्मेलन का एक बड़ा लक्ष्य युवाओं को श्रीमद्भगवद्गीता से जोड़ना है। आज के दौर में जब युवा पीढ़ी आधुनिकता की तेज रफ्तार में अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है, ऐसे में गीता के संदेश को सरल और प्रासंगिक भाषा में उन तक पहुंचाना मिशन की प्राथमिकता है।

तीन दिवसीय सम्मेलन में क्या-क्या होगा

स्रोत के अनुसार, 23 से 25 अक्टूबर तक चलने वाले इस महासम्मेलन में अनेक सत्र आयोजित होंगे। इनमें वेदांत दर्शन के विभिन्न पक्षों, गीता के व्यावहारिक संदेश, भारतीय संस्कृति की समकालीन प्रासंगिकता और वैश्विक शांति में आध्यात्मिक ज्ञान की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

सम्मेलन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा, जिनमें भारतीय शास्त्रीय संगीत और आध्यात्मिक प्रस्तुतियां शामिल रहेंगी। विदेशों से आए प्रतिनिधि भी अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे यह सम्मेलन वास्तव में वैश्विक स्वरूप ग्रहण करेगा।

प्रधानमंत्री के संबोधन से उम्मीदें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से गहरा जुड़ाव रहा है। वे अक्सर अपने संबोधनों में भारतीय ज्ञान परंपरा, योग और वेदांत के वैश्विक संदेश की चर्चा करते हैं। इस सम्मेलन में उनका संबोधन युवाओं और आध्यात्मिक जगत दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस कार्यक्रम की घोषणा गुरुवार को ही की गई थी, जिसके बाद देशभर के श्रद्धालुओं में उत्साह है। भारत मंडपम में सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।

साल भर चले उत्सवों का समापन

यह वैश्विक सम्मेलन चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पूरे साल चले समारोहों का समापन बिंदु है। स्रोत के अनुसार, वर्षभर देश-विदेश के विभिन्न केंद्रों में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें गीता ज्ञान यज्ञ, विद्वत संगोष्ठियां और सांस्कृतिक आयोजन शामिल रहे। भारत मंडपम में हो रहा यह महासम्मेलन उन सभी आयोजनों का शिखर है, जहां मिशन के अनुयायियों के साथ-साथ आम श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में जुटेंगे।

चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख स्वामी स्वरूपानंद का कहना है कि मिशन का लक्ष्य व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को जन-जन तक पहुंचाना है। यही सोच इस सम्मेलन के हर सत्र में झलकेगी।

आगे क्या

तीन दिवसीय चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन रविवार, 25 अक्टूबर को संपन्न होगा। समापन समारोह में मिशन के आगामी कार्यों और वैश्विक विस्तार की योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की जा सकती है। चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा का यह समापन समारोह भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के वैश्विक प्रभाव का प्रतीक माना जा रहा है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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