Headlines

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित बने वायुसेना के 29वें प्रमुख, एपी सिंह से ली कमान

Symbolic image (सांकेतिक चित्र): fighter jets in the sky, for the story on Air Chief Marshal Ashutosh Dixit / एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित Symbolic image (सांकेतिक चित्र): fighter jets

नई दिल्ली ब्यूरो

सार: भारतीय वायुसेना को शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को नया प्रमुख मिल गया। एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने नई दिल्ली में वायुसेना प्रमुख का पदभार संभाल लिया है। वे वायुसेना के 29वें प्रमुख बने हैं। उन्होंने निवर्तमान प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का स्थान लिया है, जो लंबी सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं। नए प्रमुख के सामने लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या बढ़ाना, स्वदेशी विमानों को शामिल करना और वायुसेना के आधुनिकीकरण को गति देना बड़ी चुनौतियां हैं।

नई दिल्ली में शनिवार को भारतीय वायुसेना की कमान बदलने का औपचारिक समारोह हुआ। इस समारोह में निवर्तमान वायुसेना प्रमुख ने नए प्रमुख को कमान सौंपी। इसके साथ ही वायुसेना के नेतृत्व में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नए प्रमुख ने 31 अक्टूबर की दोपहर से अपना कार्यभार संभाल लिया है। वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, जवानों और अन्य सैन्य अधिकारियों ने इस अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

वायुसेना प्रमुख का पद देश की सुरक्षा व्यवस्था में सबसे अहम पदों में से एक माना जाता है। वायुसेना प्रमुख न केवल वायुसेना की संचालन क्षमता के लिए जिम्मेदार होता है, बल्कि वह सरकार को हवाई सुरक्षा, रक्षा तैयारियों और सैन्य आधुनिकीकरण के बारे में सलाह भी देता है। नए प्रमुख की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब वायुसेना अपने बेड़े के आधुनिकीकरण, स्वदेशी विमानों के उत्पादन और पड़ोसी देशों की बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

रेस कोर्स में सलामी और कमान का हस्तांतरण

पदभार ग्रहण से पहले निवर्तमान वायुसेना प्रमुख को नई दिल्ली के रेस कोर्स स्थित वायुसेना स्टेशन पर औपचारिक विदाई दी गई। वहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस समारोह के बाद उन्होंने नए प्रमुख को कमान की छड़ी सौंपी। कमान सौंपने की यह परंपरा सैन्य अनुशासन और निरंतरता का प्रतीक मानी जाती है। समारोह में वायुसेना के जवानों ने मार्च पास्ट किया और अपने निवर्तमान प्रमुख को सलामी दी।

कमान हस्तांतरण के बाद नए प्रमुख ने वायुसेना के जवानों और अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने वायुसेना की परंपराओं, उसके गौरवशाली इतिहास और भविष्य की जिम्मेदारियों का उल्लेख किया। इस तरह के समारोहों में आमतौर पर तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होते हैं, क्योंकि सेनाओं के बीच तालमेल आज की सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा है। नए प्रमुख का पहला संदेश यही रहा कि वायुसेना की तैयारियों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

कौन हैं आशुतोष दीक्षित: 3500 घंटे से अधिक की उड़ान

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित एक अनुभवी लड़ाकू पायलट हैं। उनके पास 3500 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है और वे 20 से अधिक प्रकार के विमानों को उड़ा चुके हैं। वे 6 दिसंबर 1986 को वायुसेना की लड़ाकू शाखा में कमीशन हुए थे। तब से लेकर अब तक उन्होंने लगभग चार दशक तक वायुसेना में सेवा दी है। इस लंबे करियर में उन्होंने संचालन, प्रशिक्षण, परीक्षण और रणनीतिक नियोजन से जुड़े कई अहम पद संभाले हैं।

एक लड़ाकू पायलट के रूप में उनका अनुभव वायुसेना के लिए बड़ी पूंजी माना जाता है। वे प्रयोगात्मक परीक्षण पायलट भी रहे हैं, यानी उन्होंने नए विमानों और हथियार प्रणालियों के परीक्षण में भी भूमिका निभाई है। इस तरह के पायलटों को विमान की क्षमताओं और सीमाओं की गहरी समझ होती है, जो बाद में बड़े फैसलों में काम आती है। वायुसेना में उन्हें रणनीतिक सोच और नियोजन के लिए जाना जाता है।

सांकेतिक चित्र: आसमान में लड़ाकू विमान
सांकेतिक चित्र: लड़ाकू विमान

करियर के अहम पड़ाव: वाइस चीफ से पहले की जिम्मेदारियां

वायुसेना प्रमुख बनने से पहले आशुतोष दीक्षित वायुसेना के उप प्रमुख के पद पर थे। उन्होंने 1 जुलाई 2026 को उप प्रमुख का कार्यभार संभाला था। इससे पहले वे एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय में चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के पद पर रहे। इस पद पर उनका काम तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और संयुक्त अभियानों की योजना बनाना था।

अपने करियर में वे मध्य वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं। मध्य वायु कमान देश के मध्य हिस्से की हवाई सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है। इस कमान के प्रमुख के रूप में उन्होंने बड़े हवाई अभ्यासों, संचालन तैयारियों और आधारभूत ढांचे से जुड़े फैसलों में भूमिका निभाई। इन अनुभवों के कारण उन्हें सेनाओं के बीच संयुक्तता और आधुनिक युद्ध की चुनौतियों की अच्छी समझ रखने वाला अधिकारी माना जाता है।

ऑपरेशन सिंदूर में रणनीतिक भूमिका

नए वायुसेना प्रमुख का नाम हाल के समय में भारतीय वायुसेना की रणनीतिक तैयारियों से भी जुड़ा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने रणनीतिक नियोजन में अहम भूमिका निभाई थी। इस अभियान में वायुसेना की सटीक मारक क्षमता और संचालन कौशल की चर्चा हुई थी। नए प्रमुख के इस अनुभव को उनकी नियुक्ति की एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

हालांकि, किसी भी सैन्य अभियान के विस्तृत संचालन ब्यौरे सार्वजनिक नहीं किए जाते। इसलिए इस बारे में केवल इतना कहा जा सकता है कि नए प्रमुख को ऐसे अभियानों के नियोजन का अनुभव है। यह अनुभव आने वाले समय में वायुसेना की रणनीति तय करने में काम आएगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में केवल विमानों की संख्या ही नहीं, बल्कि सटीक हथियार, निगरानी क्षमता और तीनों सेनाओं का तालमेल भी उतना ही अहम है।

निवर्तमान प्रमुख एपी सिंह को विदाई

निवर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने चार दशक से अधिक समय तक वायुसेना में सेवा दी। वायुसेना प्रमुख के रूप में उन्होंने करीब दो वर्ष तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल में वायुसेना की संचालन तैयारियों, आधुनिकीकरण की योजनाओं और स्वदेशी विमानों को बढ़ावा देने के काम को आगे बढ़ाया गया।

विदाई समारोह में वायुसेना ने अपने निवर्तमान प्रमुख के योगदान को याद किया। वायुसेना की ओर से जारी संदेश में उनके लंबे और विशिष्ट सेवाकाल का उल्लेख किया गया। रक्षा मंत्री की ओर से भी उन्हें पहले ही औपचारिक विदाई दी जा चुकी थी। सेना में किसी प्रमुख की विदाई केवल एक व्यक्ति की विदाई नहीं होती, बल्कि यह उस दौर की समाप्ति भी होती है, जिसमें उसने सेना का नेतृत्व किया था।

नए प्रमुख के सामने बड़ी चुनौतियां

नए वायुसेना प्रमुख के सामने सबसे बड़ी चुनौती लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या को लेकर है। रक्षा मामलों की रिपोर्टों के अनुसार, वायुसेना को मंजूर स्क्वाड्रनों की संख्या से कम स्क्वाड्रनों के साथ काम करना पड़ रहा है। पुराने विमानों की सेवानिवृत्ति और नए विमानों की आपूर्ति में देरी इस कमी की बड़ी वजहें बताई जाती हैं। नए प्रमुख को इस खाई को पाटने के लिए सरकार, रक्षा उत्पादन इकाइयों और वायुसेना के बीच तालमेल बनाना होगा।

दूसरी बड़ी चुनौती विमानों की आपूर्ति में देरी से जुड़ी है। स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस और अन्य परियोजनाओं की समय पर आपूर्ति वायुसेना की तैयारियों के लिए अहम है। इसके साथ ही आधुनिक हथियारों, रडार प्रणालियों और हवाई ईंधन भरने की क्षमता को भी बढ़ाना होगा। नए प्रमुख को यह भी देखना होगा कि पुराने विमानों का रखरखाव और उन्नयन समय पर हो, ताकि मौजूदा बेड़ा पूरी क्षमता से काम करता रहे।

तीसरी चुनौती सेनाओं के बीच संयुक्तता को लेकर है। एकीकृत थिएटर कमानों के प्रस्ताव पर लंबे समय से चर्चा चल रही है। इस प्रस्ताव के तहत तीनों सेनाओं के संसाधनों को एकीकृत कमानों के तहत लाने की बात है। नए प्रमुख का इस मुद्दे पर रुख आने वाले समय में साफ होगा। इस विषय पर वायुसेना की अपनी चिंताएं और सुझाव रहे हैं, जिन पर सरकार के स्तर पर विचार चल रहा है।

स्वदेशीकरण और आधुनिकीकरण की दिशा

भारत सरकार पिछले कई वर्षों से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दे रही है। वायुसेना में स्वदेशी विमानों, हेलीकॉप्टरों, मिसाइलों और रडार प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नए प्रमुख के कार्यकाल में स्वदेशी क्षमता को और मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है। स्वदेशी उत्पादन से न केवल विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम होती है, बल्कि देश में रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलता है।

आधुनिकीकरण का मतलब केवल नए विमान खरीदना नहीं है। इसमें पायलटों का प्रशिक्षण, रखरखाव की व्यवस्था, हवाई अड्डों का बुनियादी ढांचा और साइबर तथा अंतरिक्ष क्षेत्र की क्षमताएं भी शामिल हैं। आज के युद्ध में उपग्रहों से मिलने वाली जानकारी, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की भूमिका लगातार बढ़ रही है। नए प्रमुख को इन सभी क्षेत्रों में वायुसेना की क्षमता को संतुलित तरीके से बढ़ाना होगा।

आगे की राह: क्या बदलेगा, क्या जारी रहेगा

जारी अधिसूचना के अनुसार, नए वायुसेना प्रमुख का कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा। यानी उन्हें वायुसेना का नेतृत्व करने के लिए दो वर्ष से अधिक का समय मिलेगा। इस अवधि में वायुसेना की कई बड़ी परियोजनाओं पर फैसले होने हैं। नए विमानों की आपूर्ति, पुराने बेड़े के उन्नयन और संयुक्त अभियानों की तैयारियों को लेकर उनकी प्राथमिकताएं जल्द सामने आएंगी।

वायुसेना की परंपरा रही है कि नए प्रमुख आते ही संचालन तैयारियों की समीक्षा करते हैं। वे विभिन्न वायु कमानों का दौरा करते हैं, जवानों से मिलते हैं और तैयारियों का जायजा लेते हैं। आने वाले महीनों में नए प्रमुख के दौरे और बैठकों से उनकी प्राथमिकताओं का अंदाजा लगेगा। देश की सुरक्षा के लिहाज से यह महत्वपूर्ण है कि वायुसेना हर समय पूरी तरह तैयार रहे।

कुल मिलाकर, 31 अक्टूबर 2026 का दिन भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण दिन रहा। एक अनुभवी लड़ाकू पायलट ने वायुसेना की कमान संभाली है, जिसके पास दशकों का संचालन और रणनीतिक अनुभव है। उनके सामने चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन उनका अनुभव और सेनाओं के बीच तालमेल की समझ वायुसेना के काम आएगी। आने वाले समय में उनकी अगुवाई में वायुसेना के आधुनिकीकरण और तैयारियों पर सबकी नजर रहेगी। पदभार ग्रहण की ताजा जानकारी के अनुसार, कमान हस्तांतरण शांतिपूर्ण और गरिमामय तरीके से संपन्न हुआ।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार