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गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के लिए बड़ी व्यवस्था: केंद्र ने अधिसूचित किया राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड, कल्याण योजनाओं की सिफारिश और निगरानी करेगा

सांकेतिक चित्र: डिलीवरी कार्य में लगा गिग कामगार सांकेतिक चित्र: डिलीवरी कार्य में लगा गिग कामगार (फाइल चित्र)

नई दिल्ली ब्यूरो

सार: केंद्र सरकार ने असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। यह बोर्ड इन कामगारों के लिए कल्याण योजनाओं की सिफारिश करेगा और लागू योजनाओं की निगरानी करेगा, हालांकि अधिसूचना से ही किसी कामगार को कोई सीधा नकद लाभ, बीमा या पेंशन शुरू नहीं हो जाएगी।

केंद्र के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 30 अक्टूबर 2026 को सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन की अधिसूचना जारी की। इस फैसले को देश के विशाल अनौपचारिक कार्यबल के लिए एक संस्थागत व्यवस्था की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब तक गिग और प्लेटफॉर्म से जुड़े कामगार किसी नियमित नियोक्ता-कर्मचारी संबंध के दायरे में नहीं आते थे और इसी कारण वे परंपरागत सामाजिक सुरक्षा के ढांचे से बाहर रह जाते थे। अधिसूचना के बाद अब इन कामगारों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर सिफारिश करने और उनकी निगरानी करने का काम एक तय व्यवस्था के तहत होगा।

क्या हुआ है, कब हुआ

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से 30 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना में असंगठित कामगारों के साथ-साथ गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के गठन की बात कही गई है। यह व्यवस्था सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के वैधानिक ढांचे के तहत बनाई गई है। संहिता में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों को कानून में एक अलग श्रेणी के रूप में परिभाषित किया गया था, और नवंबर 2025 में संहिता के प्रावधान लागू होने के बाद अब बोर्ड का गठन इस दिशा में अगला संस्थागत कदम है। बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करेंगे।

गिग कामगार कौन होते हैं, प्लेटफॉर्म कामगार क्या हैं

गिग कामगार वे लोग होते हैं जो किसी स्थायी नियोक्ता के अधीन नियमित नौकरी करने के बजाय काम या टास्क के आधार पर कमाई करते हैं। प्लेटफॉर्म कामगार गिग कामगारों का ही वह हिस्सा हैं जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों तक पहुंचते हैं और उसी माध्यम से भुगतान पाते हैं। इसमें खाना पहुंचाने वाले डिलीवरी पार्टनर, कैब और बाइक राइड के चालक, घर पर सेवा देने वाले तकनीशियन और ऑनलाइन मंचों से काम लेने वाले फ्रीलांसर शामिल होते हैं। इन कामगारों की सबसे बड़ी खासियत यही है कि उनका कोई एक स्थायी नियोक्ता नहीं होता, इसलिए उनके लिए भविष्य निधि या कर्मचारी राज्य बीमा जैसी परंपरागत व्यवस्थाएं सीधे लागू नहीं हो पाती थीं।

सांकेतिक चित्र: डिलीवरी कार्य में लगा गिग कामगार
सांकेतिक चित्र: डिलीवरी कार्य में लगा गिग कामगार (फाइल चित्र)

बोर्ड की जिम्मेदारी क्या होगी

बोर्ड का काम केवल एक सलाहकार व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसे योजनाओं की सिफारिश, सलाह और निगरानी से जुड़ी छह तरह की जिम्मेदारियां दी गई हैं। बोर्ड अलग-अलग श्रेणियों के असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के लिए केंद्र सरकार को उपयुक्त कल्याण योजनाओं की सिफारिश करेगा। संहिता के संचालन से जुड़े जिन सवालों पर केंद्र सरकार बोर्ड की राय मांगेगी, उन पर बोर्ड सलाह देगा। केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही कल्याण योजनाओं की निगरानी भी बोर्ड करेगा। इसके साथ ही राज्यों की ओर से रखे जा रहे अभिलेखों की समीक्षा और कोष से होने वाले व्यय तथा खातों की समीक्षा भी बोर्ड की जिम्मेदारी में शामिल है। केंद्र सरकार की ओर से सौंपा गया कोई अन्य कार्य भी बोर्ड करेगा।

बोर्ड की संरचना और बैठकें

बोर्ड में केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं, नागरिक समाज के संगठनों, श्रमिक संगठनों और गिग तथा प्लेटफॉर्म कामगारों के संघों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। इसका मकसद यह है कि योजनाओं की सिफारिश करते समय सरकार, कंपनियों और कामगारों — तीनों पक्षों की बात एक मंच पर सुनी जा सके। बोर्ड को वर्ष में कम से कम तीन बार बैठक करनी होगी और बैठकों के संचालन से जुड़े नियम केंद्र सरकार की ओर से तय किए जाएंगे। संहिता में बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष रखा गया है।

यह कदम क्यों अहम माना जा रहा है

भारत में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कानून लंबे समय से एक स्पष्ट नियोक्ता की धारणा पर बने थे, जो अंशदान देता है। गिग और प्लेटफॉर्म काम में ऐसा कोई एक नियोक्ता नहीं होता, इसलिए लाखों कामगार इस ढांचे से बाहर रह गए थे। बोर्ड के गठन से अब इन कामगारों के लिए योजनाएं बनाने की प्रक्रिया को एक संस्थागत रूप मिल गया है। इसके साथ ही ई-श्रम पोर्टल जैसी व्यवस्था पहले से मौजूद है, जिसके जरिए असंगठित कामगारों को आधार से जुड़ी एक विशिष्ट पहचान दी जाती है और प्लेटफॉर्म बदलने के बाद भी उनकी पहचान बनी रहती है। बोर्ड की सिफारिशें इसी ढांचे को आगे बढ़ाने का काम करेंगी।

क्या-क्या अभी तय नहीं है

इस अधिसूचना को समझने में सबसे जरूरी बात यह है कि बोर्ड का गठन ही अभी हुआ है, कोई नई योजना शुरू नहीं हुई है। अधिसूचना में किसी सदस्य का नाम नहीं दिया गया है और बोर्ड की पहली बैठक की तारीख भी घोषित नहीं की गई है। किसी योजना की पात्रता, लाभ की राशि, आवेदन की प्रक्रिया या भुगतान शुरू होने की तारीख के बारे में भी अधिसूचना में कोई ऐलान नहीं किया गया है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि बोर्ड बनते ही हर गिग कामगार को बीमा या पेंशन मिलने लगेगी। लाभ तभी मिलेंगे जब संबंधित योजनाएं बनेंगी, अधिसूचित होंगी और उनके लिए धन की व्यवस्था होगी।

किन क्षेत्रों में योजनाएं बन सकती हैं

सामाजिक सुरक्षा संहिता में गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के लिए जिन क्षेत्रों में योजनाओं की गुंजाइश रखी गई है, उनमें जीवन और दिव्यांगता सुरक्षा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य लाभ, मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा और शिशु देखभाल की सुविधाएं शामिल हैं। ये क्षेत्र अभी योजनाओं की संभावित दिशा बताते हैं, घोषित लाभ नहीं हैं। बोर्ड इन्हीं क्षेत्रों में अलग-अलग श्रेणियों के कामगारों की जरूरत के हिसाब से योजनाओं की सिफारिश कर सकता है। संहिता में एग्रीगेटर अंशदान की व्यवस्था का भी उल्लेख है, लेकिन उसकी वसूली से जुड़े नियम अभी तय होने हैं, इसलिए इस बारे में कोई ठोस आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।

मध्य प्रदेश के कामगारों के लिए इसका क्या मतलब है

यह एक राष्ट्रीय व्यवस्था है, इसलिए इसका दायरा केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के शहरों — जैसे इंदौर, भोपाल और उज्जैन — में भी खाना पहुंचाने वाले डिलीवरी पार्टनर, कैब चालक और घरेलू सेवा से जुड़े कामगार बड़ी संख्या में काम करते हैं, और वे भी इसी श्रेणी में आते हैं। बोर्ड में राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने से राज्यों की जमीनी जरूरतों को भी सिफारिशों में जगह मिलने की उम्मीद है। हालांकि मध्य प्रदेश के गिग कामगारों की कोई अलग संख्या इस अधिसूचना में नहीं दी गई है, इसलिए इस खबर में कोई राज्य-विशेष आंकड़ा नहीं दिया जा रहा है।

आगे क्या होगा

आगे की प्रक्रिया में बोर्ड की बैठकों के बाद अलग-अलग श्रेणियों के कामगारों के लिए योजनाओं की सिफारिशें तैयार होंगी। इसके बाद केंद्र सरकार की ओर से योजनाओं को अंतिम रूप देना, उन्हें अधिसूचित करना और उनके लिए धन की व्यवस्था करना होगा। तभी यह तय हो पाएगा कि किस कामगार को कौन सा लाभ, किस पात्रता पर और किस प्रक्रिया से मिलेगा। तब तक इस अधिसूचना को एक संस्थागत शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए — एक ऐसा मंच बन गया है जहां गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के कल्याण की बात अब नियमित रूप से, तय व्यवस्था के तहत उठाई जा सकेगी।

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डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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