इंदौर ब्यूरो
सार: देश में स्वच्छता के मामले में सबसे आगे रहने वाले इंदौर के एयरपोर्ट पर यात्री सफाई को लेकर खुश नहीं हैं। एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटी सर्वे की जुलाई-सितंबर 2026 की रिपोर्ट में स्वच्छता के अंक पिछली तिमाही के मुकाबले घट गए हैं, और कुल स्कोर बढ़ने के बावजूद इंदौर देश के 16 प्रमुख एयरपोर्ट की सूची में 10वें स्थान पर खिसक गया है।
सर्वे में क्या सामने आया
इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट शहर की पहचान से जुड़ा एक अहम ठिकाना है। हर दिन हजारों यात्री यहाँ से उड़ान भरते हैं और हजारों यात्री यहाँ उतरते हैं। इन यात्रियों के अनुभव को मापने के लिए एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशनल की ओर से एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटी सर्वे कराया जाता है। इस सर्वे में यात्रियों से 31 अलग-अलग बिंदुओं पर सुविधाओं को लेकर सवाल पूछे जाते हैं और हर बिंदु पर एक से पाँच तक अंक देने को कहा जाता है। एक अंक सबसे कम संतुष्टि का संकेत है और पाँच अंक सबसे ज्यादा संतुष्टि का। जुलाई से सितंबर 2026 की तीसरी तिमाही की रिपोर्ट हाल ही में सामने आई है। इस रिपोर्ट में इंदौर एयरपोर्ट को कुल मिलाकर पाँच में से 4.90 अंक मिले हैं। इसी स्कोर के साथ इंदौर देश के 16 प्रमुख एयरपोर्ट की सूची में 10वें स्थान पर रहा है। अप्रैल से जून की दूसरी तिमाही में इंदौर को 4.88 अंक मिले थे और तब वह नौवें स्थान पर था। यानी कुल स्कोर में 0.02 अंक का सुधार होने के बावजूद रैंकिंग एक पायदान नीचे खिसक गई है। जनवरी से मार्च की पहली तिमाही में इंदौर 13वें स्थान पर था, इसलिए साल के भीतर रैंकिंग में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
सफाई के बिंदु पर यात्रियों ने घटाए अंक
रिपोर्ट का सबसे ध्यान खींचने वाला हिस्सा सफाई से जुड़ा है। इंदौर शहर देश में स्वच्छता के मामले में लगातार सबसे आगे रहा है, लेकिन एयरपोर्ट की सफाई को लेकर यात्रियों का अनुभव इससे अलग नजर आता है। स्वच्छता के बिंदु पर यात्रियों ने पाँच में से 4.91 अंक दिए हैं, जबकि पिछली तिमाही में यही अंक 4.93 था। इस तरह स्वच्छता के अंक में 0.03 की गिरावट दर्ज की गई है। वाशरूम और शौचालयों की सफाई को लेकर भी यात्रियों की नाराजगी सामने आई है। इस बिंदु पर तीसरी तिमाही में 4.92 अंक मिले हैं, जबकि दूसरी तिमाही में 4.93 अंक थे। गिरावट भले ही मामूली दिखे, लेकिन इसका संदेश साफ है कि जिन जगहों पर यात्री सबसे ज्यादा सफाई की उम्मीद करते हैं, वहीं अनुभव कमजोर पड़ रहा है। एयरपोर्ट के भीतर खानपान की कीमतों को लेकर भी यात्रियों ने कम अंक दिए हैं। रेस्तरां में मिलने वाले खाने-पीने की चीजों के मूल्य अनुकूल होने के बिंदु पर 4.89 अंक मिले हैं, जबकि पिछली तिमाही में यह 4.92 था। चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता पर 4.92 अंक और गेट के पास सीटों की उपलब्धता पर 4.92 अंक मिले हैं, जो पिछली तिमाही के 4.93 और 4.94 से कम हैं।

अंक बढ़े, फिर भी रैंकिंग क्यों फिसली
आम तौर पर यह माना जाता है कि अंक बढ़ने पर रैंकिंग भी सुधरनी चाहिए, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इसकी वजह यह है कि दूसरे एयरपोर्ट ने भी अपने अंक सुधारे हैं और कुछ एयरपोर्ट ने इंदौर से ज्यादा तेजी से सुधार किया है। रायपुर, देहरादून, अमृतसर और श्रीनगर जैसे एयरपोर्ट के अंक भी घटे हैं, लेकिन कुल मिलाकर प्रतिस्पर्धा इतनी कड़ी रही कि 0.02 अंक का सुधार इंदौर को नौवें स्थान पर बनाए रखने के लिए काफी नहीं रहा। इस सर्वे में शामिल 16 एयरपोर्ट की औसत रेटिंग भी 4.90 ही रही है। यानी इंदौर का स्कोर औसत के बराबर है, उससे ऊपर नहीं। समझौता ज्ञापन के तहत एयरपोर्ट के लिए उत्कृष्ट रेटिंग का लक्ष्य पाँच में से 4.68 अंक तय किया गया है। इंदौर का 4.90 अंक इस लक्ष्य से 0.22 अंक ज्यादा है, इसलिए न्यूनतम मानक के लिहाज से प्रदर्शन कमजोर नहीं कहा जा सकता। फिर भी, जिस शहर की पहचान देश की सबसे स्वच्छ नगरी के रूप में है, उसके एयरपोर्ट से यात्रियों की उम्मीदें औसत से कहीं ज्यादा होती हैं।
देश के दूसरे एयरपोर्ट कहाँ खड़े हैं
तीसरी तिमाही की सूची में पुणे एयरपोर्ट 4.98 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा है। चेन्नई और पटना एयरपोर्ट को 4.94-4.94 अंक मिले हैं और वे दूसरे स्थान पर रहे हैं। कालीकट और वाराणसी एयरपोर्ट की रेटिंग 4.93 रही है, जबकि गोवा एयरपोर्ट को 4.92 अंक मिले हैं। इंदौर 4.90 अंकों के साथ 10वें स्थान पर है। इन आंकड़ों से यह साफ होता है कि शीर्ष स्थानों और इंदौर के बीच का अंतर बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन छोटा अंतर भी रैंकिंग में कई पायदान का फर्क पैदा कर देता है। यह सर्वे एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से उन सरकारी एयरपोर्ट पर कराया जाता है, जहाँ सालाना यात्री संख्या 20 लाख से ज्यादा होती है। इसमें सुरक्षा जांच, सफाई, कर्मचारियों का व्यवहार, खानपान, बैठने की व्यवस्था और चार्जिंग जैसी सुविधाओं को लेकर यात्रियों की राय ली जाती है। इसलिए यह सर्वे सिर्फ एक नंबर नहीं है, बल्कि यात्रियों के पूरे अनुभव का लेखा-जोखा है।
पहले कहाँ था इंदौर एयरपोर्ट
इंदौर एयरपोर्ट का पिछला रिकॉर्ड बताता है कि यह शीर्ष स्थान तक भी पहुँच चुका है। वर्ष 2023 की दूसरी तिमाही में इंदौर को पहली रैंक मिली थी और तब स्कोर 4.94 था। इसके बाद से अब तक पहली रैंक दोबारा नहीं मिल सकी है। वर्ष 2024 की चौथी तिमाही में इंदौर 4.97 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर पहुँचा था, लेकिन उसी वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही में वह 12वें स्थान पर रहा था। वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में इंदौर को तीसरी रैंक मिली थी। वर्ष 2026 में अब तक इंदौर शीर्ष पाँच में नहीं पहुँच सका है। पिछले तीन वर्षों में हर तिमाही में रैंकिंग ऊपर-नीचे होती रही है और स्थायी रूप से शीर्ष पर बने रहना चुनौती साबित हुआ है। इस उतार-चढ़ाव से एक बात साफ होती है कि एयरपोर्ट की सुविधाओं में निरंतरता बनाए रखना ही सबसे बड़ी चुनौती है। एक तिमाही में अच्छा प्रदर्शन कर लेना काफी नहीं है, बल्कि हर तिमाही में सफाई, बैठने की व्यवस्था, खानपान की कीमत और चार्जिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं पर एक जैसा ध्यान देना जरूरी है।
इंदौर की स्वच्छता पहचान और एयरपोर्ट का अंतर
इंदौर की पहचान देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में बनी हुई है। शहर की सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक जगहों पर सफाई को लेकर नागरिकों और प्रशासन की साझा मेहनत की चर्चा देशभर में होती है। ऐसे में जब उसी शहर के एयरपोर्ट पर यात्री सफाई को लेकर कम अंक देते हैं, तो यह अंतर खुद एक सवाल बन जाता है। एयरपोर्ट शहर का पहला दरवाजा होता है। बाहर से आने वाला यात्री सबसे पहले एयरपोर्ट के माहौल से ही शहर का अंदाजा लगाता है। इसलिए एयरपोर्ट की सफाई का सीधा असर शहर की छवि पर भी पड़ता है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़, उड़ानों का दबाव और सीमित समय में सुविधाओं का इस्तेमाल, सफाई बनाए रखने को और मुश्किल बना देता है। वाशरूम, प्रतीक्षा क्षेत्र और खानपान क्षेत्र में लगातार सफाई की जरूरत होती है। अगर इन जगहों पर सफाई में थोड़ी भी कमी आती है, तो यात्री उसे तुरंत महसूस करते हैं और सर्वे में इसका असर दिखता है।
आगे क्या सुधार जरूरी है
रिपोर्ट से मिलने वाले संकेतों के आधार पर कुछ बिंदु साफ तौर पर उभरते हैं। पहला, वाशरूम और शौचालयों की सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि यात्रियों ने इसी बिंदु पर पिछली तिमाही से कम अंक दिए हैं। दूसरा, गेट के पास बैठने की व्यवस्था और चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता बढ़ानी होगी, ताकि लंबी प्रतीक्षा के दौरान यात्रियों को असुविधा न हो। तीसरा, एयरपोर्ट के भीतर खानपान की कीमतों को लेकर यात्रियों की शिकायत को गंभीरता से लेना होगा, क्योंकि मूल्य अनुकूल होने के बिंदु पर भी अंक घटे हैं। इस रिपोर्ट पर एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई हो, ऐसा रिपोर्टों में दर्ज नहीं है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रबंधन ने इन बिंदुओं पर क्या कदम उठाने की योजना बनाई है। आने वाली तिमाही की रिपोर्ट ही बताएगी कि सफाई और सुविधाओं के अंकों में सुधार होता है या नहीं। तब तक यह रिपोर्ट इंदौर के लिए एक चेतावनी की तरह है कि स्वच्छता की पहचान को बनाए रखने के लिए एयरपोर्ट पर भी उसी स्तर की मेहनत जरूरी है। इंदौर एयरपोर्ट से जुड़ी एक और अहम जानकारी यह है कि 25 अक्टूबर से लागू विंटर शेड्यूल के तहत उड़ानों के समय और रूट में बदलाव हुए हैं, जिससे यात्रियों की संख्या और आवाजाही पर भी असर पड़ता है। बढ़ती यात्री संख्या के बीच सुविधाओं का स्तर बनाए रखना आने वाले महीनों में और भी अहम हो जाएगा।
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