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आज शेयर बाजार: सेंसेक्स 72,558 पर बंद, 649 अंक चढ़ा — निफ्टी 22,600 के पार, आठ हफ्तों की गिरावट के बाद राहत

बीएसई भवन, मुंबई — फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स

मुंबई। घरेलू शेयर बाजार में सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को शानदार रिकवरी देखने को मिली। गांधी जयंती के तीन दिन के ब्रेक के बाद खुला बाजार तेजी के मूड में रहा और दिनभर हरे निशान में कारोबार हुआ। बीएसई सेंसेक्स 648.56 अंक यानी 0.90 प्रतिशत चढ़कर 72,558.26 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स भी करीब 190 अंक की बढ़त के साथ 22,600 के स्तर के ऊपर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 72,594.57 तक पहुंच गया था। इस तेजी के साथ आठ हफ्तों से चली आ रही गिरावट का सिलसिला टूटने की उम्मीद बढ़ गई है।

बाजार की चौड़ाई (ब्रेड्थ) काफी मजबूत रही — बीएसई 500 में 365 शेयरों में तेजी आई, जबकि सिर्फ 136 शेयरों में गिरावट दर्ज हुई। 38 में से 34 सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 0.8 प्रतिशत चढ़े, जिससे छोटी कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी का माहौल दिखा।

किन शेयरों ने संभाला, किन्होंने डुबोया

आज की तेजी में सबसे आगे वित्तीय शेयर रहे। बजाज फाइनेंस दिन का स्टैंडआउट गेनर रहा — लार्जकैप में करीब 4.5 प्रतिशत की छलांग के साथ। आईटीसी, बजाज फिनसर्व, लार्सन एंड टुब्रो, एक्सिस बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया भी सेंसेक्स के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में रहे। बीएसई का अपना शेयर 3.27 प्रतिशत चढ़ा, जबकि टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स में 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई। बैंकिंग शेयरों में रिकवरी का रुख दिखा — साल की शुरुआत से करीब 10 प्रतिशत की गिरावट झेल चुके बैंक निफ्टी में सुधार की उम्मीद तेज हुई।

दूसरी ओर, आईटी और फार्मा शेयरों ने बाजार की तेजी को कुछ सीमित किया। एचसीएल टेक्नोलॉजीज 3.26 प्रतिशत टूटा, एशियन पेंट्स 2.8 प्रतिशत फिसला और इंफोसिस 2.2 प्रतिशत गिरा। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और सन फार्मा भी दबाव में रहे। निफ्टी मीडिया 1.85 प्रतिशत चढ़कर सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जबकि बीएसई हेल्थकेयर 0.77 प्रतिशत गिरकर सबसे पिछड़ा।

तेजी की वजह

तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में नरमी रही। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.70 प्रतिशत गिरकर 101.5 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश के बाजारों को बड़ी राहत मिली। इसके साथ ही अमेरिका के उम्मीद से कमजोर रोजगार आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व की ओर से और सख्ती की आशंका को कम कर दिया, जिससे वैश्विक बाजारों में जोखिम-रुचि (रिस्क एपेटाइट) बढ़ी। जापान का निक्केई इंडेक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा और अमेरिकी बाजार भी शुक्रवार को बढ़त में बंद हुए थे।

घरेलू मोर्चे पर घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) का सहारा जारी रहा — डीआईआई ने सितंबर में शुद्ध 76,030 करोड़ रुपये डाले और अक्टूबर में अब तक 10,042 करोड़ रुपये की खरीदारी कर चुके हैं। हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव बना हुआ है — गुरुवार को एफआईआई ने 9,484 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे थे, और सितंबर में उनकी शुद्ध निकासी करीब 44,013 करोड़ रुपये रही।

विश्लेषकों की क्या राय

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, आठ हफ्तों की लगातार गिरावट के बाद बाजार में अल्पकालिक सुधार के आसार बन रहे हैं। एक्सेंचर के उम्मीद से बेहतर नतीजों और एचडीएफसी बैंक के नए प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति को आरबीआई की मंजूरी मिलने को भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

एक अन्य विश्लेषक के मुताबिक, अमेरिका के नरम रोजगार आंकड़ों से फेडरल रिजर्व की अक्टूबर बैठक में और सख्ती की तत्काल चिंता घटी है, जिससे वैश्विक जोखिम-रुचि को सहारा मिला है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि ऊंची बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और नए भू-राजनीतिक जोखिम ऊपर की दिशा को सीमित रख सकते हैं, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। सत्र के दौरान इंडिया VIX (अस्थिरता का मापक) करीब 3 प्रतिशत बढ़ा, जो निवेशकों की चिंता दर्शाता है।

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई है और नीति फैसले की घोषणा बुधवार, 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे होगी। ब्याज दरों पर केंद्रीय बैंक के रुख को लेकर बाजार की नजरें इस फैसले पर टिकी हैं — फिलहाल रेपो दर 5.25 प्रतिशत है और कई अर्थशास्त्रियों को 25 बेसिस अंक की बढ़ोतरी की उम्मीद है, हालांकि यह सिर्फ अनुमान है, फैसला बुधवार को ही होगा।

फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स

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