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मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना: मुरैना से शुभारंभ, 50 लाख ग्रामीण मकानों की मुफ्त पक्की रजिस्ट्री होगी

सांकेतिक चित्र: मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना — ग्रामीण मकान सांकेतिक चित्र

मुरैना ब्यूरो

करुआ गांव से मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के अभियान की शुरुआत

धनतेरस पर मुरैना जिले की बानमोर तहसील के ग्राम करुआ में मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत स्वामित्व दस्तावेजों के पंजीयन अभियान की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलित कर और ऑनलाइन रिमोट का बटन दबाकर अभियान का शुभारंभ किया। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद योजना के हितग्राहियों से मुख्यमंत्री ने आत्मीय संवाद किया और उनसे जाना कि पक्की रजिस्ट्री मिलने से उनके जीवन में क्या बदलाव आएगा। ग्रामीणों ने बताया कि अब उनके पास मकान के कानूनी दस्तावेज होंगे, जिससे भविष्य में बैंक से ऋण लेने और आर्थिक जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से आबादी की जमीन पर बने मकानों की पक्की रजिस्ट्री नहीं होना बड़ी समस्या रही है। लोग अपनी जमा पूंजी खर्च कर मकान तो बना लेते थे, लेकिन उनके पास स्वामित्व साबित करने के लिए पंजीकृत दस्तावेज नहीं होते थे। इसका खामियाजा उन्हें आर्थिक जरूरत के समय भुगतना पड़ता था। बैंक भी संपत्ति के वैध दस्तावेज नहीं होने के कारण मकान के आधार पर ऋण देने से बचते थे। अब मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना इस कमी को दूर करेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जिला प्रशासन, तहसीलदार और पटवारी मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। जिन गांवों में 80 से 100 प्रतिशत तक रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं, वहां जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचकर हितग्राहियों को स्वामित्व दस्तावेज वितरित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का वैधानिक अधिकार मिल सके।

50 लाख रजिस्ट्री का लक्ष्य: ग्रामीणों को क्या मिलेगा

मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत प्रदेश सरकार ने 50 लाख नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा है। इस योजना के जरिए ग्रामीणों को उनके मकानों की नि:शुल्क पक्की रजिस्ट्री कराकर वैध मालिकाना हक दिया जाएगा। रजिस्ट्री का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। पक्की रजिस्ट्री होने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति का कानूनी प्रमाण मिलेगा। इसके आधार पर वे जरूरत पड़ने पर बैंक से ऋण भी ले सकेंगे।

सांकेतिक चित्र: गांव की पक्की गली और मकान
सांकेतिक चित्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को संपत्ति का अधिकार दिलाने की पहल की है। प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के जरिए इसे आगे बढ़ा रही है। रजिस्ट्री केवल वर्तमान में मकान का मालिकाना हक देने तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में यही दस्तावेज बच्चों के लिए भी उपयोगी होंगे। वे पढ़ाई के बाद डॉक्टर, इंजीनियर या कारोबारी बनकर अपना अस्पताल, नर्सिंग होम या दूसरा व्यवसाय शुरू करना चाहेंगे तो बैंक से ऋण लेने में इन दस्तावेजों से मदद मिलेगी।

राज्य शासन ने 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूर्ण करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। धनतेरस पर प्रदेश के चयनित ग्रामों में शत-प्रतिशत पंजीयन के लिए भी विशेष अभियान संचालित किया गया। मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना की समीक्षा पहले भी की जा चुकी है और पंजीयन का काम पहले से चल रहा है। अब धनतेरस पर हुए शुभारंभ के बाद इस अभियान को और गति मिलेगी।

हितग्राही अतर सिंह: 89 हजार रुपये का खर्च सरकार ने उठाया

कार्यक्रम में हितग्राही अतर सिंह ने बताया कि उनके मकान की करीब 89 हजार रुपये की रजिस्ट्री का खर्च भी सरकार ने उठाया है। उन्हें इसके लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ा। अतर सिंह जैसे हजारों ग्रामीणों के लिए यह राहत बड़ी है, क्योंकि पहले रजिस्ट्री का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल होता था। अब सरकार खर्च उठा रही है और दस्तावेज भी घर तक पहुंचाए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रजिस्ट्री अभियान में बेहतर काम करने वाले पटवारियों और तहसीलदारों को सम्मानित किया। 200 से अधिक रजिस्ट्रियां कराने वाले पटवारियों को विशेष रूप से सम्मान दिया गया। मुख्यमंत्री ने पटवारी मुकेश तिवारी और विवेक सिकरवार से अभियान के अनुभव भी जाने। मुख्यमंत्री ने उनसे पूछा कि ग्रामीणों के मकानों की रजिस्ट्री कराते समय उन्हें कैसा अनुभव हुआ। पटवारियों ने बताया कि जब वे किसी ग्रामीण के मकान की रजिस्ट्री कराकर उसे उसके नाम का पक्का मालिकाना अधिकार दिलाते हैं, तो हितग्राही के चेहरे पर आने वाली खुशी और संतुष्टि देखकर उन्हें भी आत्मिक प्रसन्नता होती है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पंजीकृत दस्तावेज मिलने से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिलेंगे। वे अपनी संपत्ति के आधार पर नियमानुसार बैंक से ऋण लेने के लिए आवेदन कर सकेंगे। कार्यक्रम में कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना, सांसद शिवमंगल सिंह तोमर, चंबल संभाग आयुक्त मनोज खत्री और कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय

मुख्यमंत्री ने ग्राम करुआ के प्राथमिक स्कूल को माध्यमिक स्कूल में उन्नत करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि सरकार किसान कल्याण वर्ष में खेती के साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। 25 गाय या भैंस खरीदने पर करीब 40 लाख रुपये के निवेश में 10 लाख रुपये तक अनुदान देने का प्रावधान है। सरकार चाहती है कि किसान खेती के साथ दूध उत्पादन से भी अपनी आमदनी बढ़ाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसान कल्याण वर्ष मना रही है। पूरे वर्ष किसानों की बेहतरी और आमदनी बढ़ाने के लिए काम करना सरकार का उद्देश्य है। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अगर कोई किसान 25 गाय या भैंस खरीदने के लिए बैंक से ऋण लेता है और इस पर लगभग 40 लाख रुपये खर्च होते हैं, तो इस पर 10 लाख रुपये का अनुदान सरकार दे रही है। किसान दूध का उत्पादन करें और सहकारी समिति या अन्य माध्यमों से बेचें। सरकार का प्रयास है कि खेती के साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से भी किसानों की आमदनी बढ़े और वे आर्थिक रूप से समृद्ध बनें।

किसानों को सिंचाई के लिए दिन में भी बिजली मिल रही है। अब दूर-दराज के ग्रामीण परिवारों को मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा का लाभ मिलेगा। अच्छी नस्ल की गौमाता पालने वाले गौपालकों को पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं। राज्य के सभी विकासखंडों में एक गांव को वृंदावन ग्राम बनाया गया है।

करुआ का स्कूल होगा माध्यमिक, मुरैना में भाजपा कार्यालय का लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुरैना के वीआईपी रोड पर बने भाजपा के पांच मंजिला संभागीय कार्यालय का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी का धन उसके कार्यकर्ता हैं और धनतेरस पर कार्यकर्ताओं को अपना घर मिला है। कार्यालय ऐसा केंद्र बने, जहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अपनी समस्या के समाधान का भरोसा हो।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आजादी के बाद से गांवों में लोगों के लिए अपने मकानों की पक्की रजिस्ट्री कराना बड़ी चुनौती रहा है। लोग अपनी जमीन पर लाखों रुपये खर्च कर मकान बना लेते थे, लेकिन उनके पास उसका पंजीकृत दस्तावेज नहीं होता था। इससे संपत्ति होने के बावजूद उन्हें बैंक से कर्ज लेने में परेशानी होती थी। अब सरकार ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का पूरा कानूनी अधिकार दिला रही है।

स्वामित्व योजना से रजिस्ट्री योजना तक: पृष्ठभूमि

मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में वर्षों से सरकारी जमीन पर कागज रहकर मकान बनाने वालों के लिए यह योजना बड़ी राहत लेकर आई है। आजादी के बाद संपत्तियों की पक्की रजिस्ट्री का कार्य काफी चुनौतीपूर्ण था। गांव में अपनी जमीन पर लाखों रुपये खर्च कर पक्का मकान बनाने के बाद भी उस संपत्ति का कोई रजिस्टर्ड दस्तावेज नहीं होता था। बैंक भी उस संपत्ति पर कोई ऋण नहीं देते थे।

प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में ग्रामीण आबादी को पट्टे दिए गए। स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को संपत्ति का अधिकार दिलाने की पहल हुई। अब राज्य सरकार ने संपत्तियों की पक्की रजिस्ट्री कराने का अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के अंतर्गत किसानों और ग्रामवासियों को उनकी संपत्ति का पूरा अधिकार दिया जा रहा है। जिन गांवों में 80 से 100 प्रतिशत तक रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं, ऐसे गांवों में मंत्री, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी पहुंचकर धनतेरस पर हितग्राहियों को दस्तावेज बांट रहे हैं।

आगे क्या: गांव-गांव पहुंचेगा अभियान

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा हर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार दीपावली और उसके बाद गोवर्धन पूजा को भी धूमधाम से मनाने जा रही है। गोवर्धन पूजा पर प्रदेशभर में कार्यक्रम होंगे और सभी गौशालाओं में गौपूजन होगा।

रजिस्ट्री अभियान गांव-गांव जारी रहेगा। जिला प्रशासन, तहसीलदार और पटवारी मिलकर इसे आगे बढ़ा रहे हैं। जिन गांवों में पंजीयन पूरा हो चुका है, वहां दस्तावेज वितरण का काम चल रहा है। जिन गांवों में काम बाकी है, वहां अभियान के तहत पंजीयन कराया जा रहा है। ग्रामीण परिवारों के लिए यह योजना केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि उनकी संपत्ति पर उनका कानूनी अधिकार है, जो आने वाली पीढ़ियों के काम भी आएगा।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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