इंदौर ब्यूरो।
शासकीय संस्कृत महाविद्यालय, रामबाग, इंदौर में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को भूतपूर्व छात्र संघ मिलन समारोह का भव्य आयोजन होने जा रहा है। वर्ष 2026-27 के इस मिलन समारोह में 1963 से लेकर 2024 तक के सैकड़ों भूतपूर्व छात्र और छात्राएं एक साथ जुटेंगे। आयोजन के साथ ही महाविद्यालय के विकास कार्यों और नवीनीकरण को लेकर एक अति आवश्यक मीटिंग भी होगी, जिसमें पूर्व विद्यार्थी अपने सुझाव रखेंगे।
23 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से शुरू होगा समारोह
भूतपूर्व छात्र संगठन द्वारा जारी आमंत्रण के अनुसार मिलन समारोह 23 अक्टूबर को सुबह 10:00 बजे शासकीय संस्कृत महाविद्यालय, रामबाग परिसर में शुरू होगा। आमंत्रण पत्र पर महाविद्यालय का ध्येय वाक्य “सङ्घे शक्तिः कलौ युगे” (संगठन में ही कलियुग में शक्ति है) अंकित है, जो इस समागम की भावना को दर्शाता है। संपूर्ण मध्यप्रदेश के दूर-दराज के नगरों और गांवों से पूर्व विद्यार्थियों के शामिल होने की सूचना है — कई पूर्व छात्र दशकों बाद अपने पुराने महाविद्यालय लौटेंगे।
भजन-गीत-संगीत और काव्य पाठ के साथ भोजन
समारोह का कार्यक्रम सांस्कृतिक रंग में रंगा होगा। आयोजन में भजन, गीत-संगीत और काव्य पाठ की प्रस्तुतियां होंगी, जिनमें पूर्व विद्यार्थी स्वयं भाग लेंगे। इसके साथ ही सभी अतिथियों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई है। पुराने मित्रों और आदरणीय गुरुजनों के साथ स्नेह और स्मृतियों को ताजा करने का यह अवसर होगा — कई पूर्व छात्र अपने जमाने के अनुभव और संस्मरण साझा करेंगे।
विकास कार्यों और नवीनीकरण पर अति आवश्यक मीटिंग
मिलन समारोह के साथ ही महाविद्यालय के विकास कार्यों तथा नवीनीकरण को लेकर एक अति आवश्यक मीटिंग भी आयोजित होगी। इसमें पूर्व छात्र महाविद्यालय की वर्तमान स्थिति, भवन और सुविधाओं के उन्नयन, पुस्तकालय के विस्तार और संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार जैसे विषयों पर अपने-अपने सुझाव रखेंगे। आयोजकों का कहना है कि पूर्व विद्यार्थियों के अनुभव और सहयोग से महाविद्यालय को नई दिशा मिलेगी।
“समागम महाविद्यालय को नई ऊंचाइयां देगा” — आयोजक
पूर्व छात्र संगठन के अध्यक्ष लक्ष्मण कुकराजा, सचिव आचार्य गोपाल बैरागी तथा कोषाध्यक्ष गोपाल प्रसाद बिलोरे ने बताया कि शासकीय संस्कृत महाविद्यालय में इतने वर्षों के विद्यार्थियों का एक साथ समागम महाविद्यालय को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि 1963 से 2024 तक — छह दशकों से अधिक की अवधि के विद्यार्थी जब एक मंच पर जुटेंगे, तो यह न केवल स्मृतियों का संगम होगा, बल्कि महाविद्यालय के भविष्य की रूपरेखा तय करने वाला अवसर भी होगा।
संस्कृत शिक्षा में पूर्व छात्रों की भूमिका
संस्कृत महाविद्यालयों के पूर्व छात्र संघ लंबे समय से संस्थान के विकास में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। पूर्व विद्यार्थी न केवल आर्थिक सहयोग देते हैं, बल्कि अपने अनुभव से वर्तमान विद्यार्थियों का मार्गदर्शन भी करते हैं। इंदौर के इस आयोजन से भी यही अपेक्षा है कि पुराने और नए विद्यार्थियों के बीच सेतु बनेगा और संस्कृत भाषा के अध्ययन-अध्यापन को प्रोत्साहन मिलेगा। आयोजकों ने सभी भूतपूर्व छात्र-छात्राओं से समय पर पहुंचकर समारोह को सफल बनाने की अपील की है।
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