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Jio को पीछे छोड़ BLS Polymers का IPO आगे: GMP, सब्सक्रिप्शन और फायदे-नुकसान का पूरा विश्लेषण

सांकेतिक चित्र: शेयर बाजार और आईपीओ। सांकेतिक चित्र।

डेस्क रिपोर्ट

सार: BLS Polymers IPO GMP — देश के सबसे बड़े आईपीओ जियो प्लेटफॉर्म्स को ग्रे मार्केट प्रीमियम के मामले में पीछे छोड़कर बीएलएस पॉलीमर्स का आईपीओ आगे निकल गया है। बीएलएस का जीएमपी करीब 29 प्रतिशत के आसपास है, जबकि जियो का करीब 22 प्रतिशत है। लेकिन जीएमपी सिर्फ एक अनौपचारिक संकेत है, गारंटी नहीं — इसलिए इस विश्लेषण में दोनों आईपीओ के फायदे और नुकसान, दोनों को साथ रखकर समझिए।

शेयर बाजार में इस हफ्ते दो आईपीओ की चर्चा सबसे ज्यादा है। एक तरफ देश का सबसे बड़ा आईपीओ जियो प्लेटफॉर्म्स है, जो आज, 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में लिस्ट हो रहा है। दूसरी तरफ बीएलएस पॉलीमर्स का आईपीओ है, जो 27 अक्टूबर को बोली के लिए खुला और 29 अक्टूबर को बंद होगा। ग्रे मार्केट में बीएलएस का प्रीमियम जियो से आगे निकल गया है — और यही खबर निवेशकों के बीच सबसे ज्यादा पूछी जा रही है। लेकिन प्रीमियम का आगे निकलना ही पूरी कहानी नहीं है। दोनों कंपनियां, दोनों के इश्यू और दोनों के जोखिम बिल्कुल अलग हैं।

जीएमपी की दौड़: आंकड़े क्या कहते हैं

ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) वह अनौपचारिक भाव है, जिस पर लिस्टिंग से पहले आईपीओ के शेयर ग्रे मार्केट में खरीदे-बेचे जाते हैं। यह किसी एक्सचेंज का आधिकारिक भाव नहीं है, बल्कि बाजार की भावना का संकेत है — और यह तेजी से बदलता है।

आज सुबह के आंकड़ों के अनुसार बीएलएस पॉलीमर्स का जीएमपी करीब 43-44 रुपये है, यानी ऊपरी प्राइस बैंड 150 रुपये पर करीब 29 प्रतिशत। इसका मतलब यह निकाला जा रहा है कि शेयर करीब 194 रुपये के आसपास लिस्ट हो सकता है — लेकिन यह सिर्फ गणितीय संकेत है, तय भाव नहीं। जियो प्लेटफॉर्म्स का जीएमपी करीब 247-248 रुपये है, यानी ऊपरी बैंड 1,119 रुपये पर करीब 22 प्रतिशत, जिससे करीब 1,367 रुपये के आसपास लिस्टिंग का संकेत मिलता है। प्रतिशत के हिसाब से बीएलएस आगे है, लेकिन रुपये के हिसाब से जियो का प्रीमियम कहीं बड़ा है — और दोनों कंपनियों के इश्यू का आकार भी जमीन-आसमान का अंतर रखता है।

जीएमपी की अस्थिरता भी आंकड़ों में दिखती है। बीएलएस का प्रीमियम पिछले कुछ सत्रों में 18 रुपये से 40 रुपये के बीच घूम चुका है, और जियो का प्रीमियम भी 85 रुपये से 275 रुपये के बीच रहा है। यानी आज का आंकड़ा कल बदल सकता है — जीएमपी पर अकेले भरोसा करके निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा।

बीएलएस पॉलीमर्स: कंपनी क्या करती है

बीएलएस पॉलीमर्स दिल्ली की कंपनी है, जिसकी स्थापना 1991 में हुई थी और जो बीएलएस ग्रुप का हिस्सा है। कंपनी विशेष पॉलीमर कंपाउंड बनाती है, जो तारों, केबलों और भूमिगत पाइपलाइनों में इस्तेमाल होते हैं। इसके उत्पादों में एचडीपीई, एमडीपीई, एलएलडीपीई, एक्सएलपीई, पीवीसी, एचएफएफआर, केबल फिलिंग कंपाउंड और एडहेसिव कोटिंग कंपाउंड शामिल हैं। ये उत्पाद बिजली, दूरसंचार, रेलवे, पानी और तेल-गैस जैसे क्षेत्रों में काम आते हैं — यानी कंपनी की मांग बुनियादी ढांचे और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ी है।

कंपनी का विनिर्माण संयंत्र गोवा में है, जिसकी स्थापित क्षमता 35,251 मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। कंपनी 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में काम करती है और अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, जर्मनी और बांग्लादेश सहित 13 देशों को निर्यात करती है। इसके 190 से ज्यादा ग्राहक हैं।

वित्तीय आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की परिचालन आय 349.43 करोड़ रुपये रही और शुद्ध लाभ 27.01 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 21 करोड़ रुपये से करीब 28 प्रतिशत ज्यादा है। कुल आय 337 करोड़ रुपये से बढ़कर 354 करोड़ रुपये हुई। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (जून 2026 तिमाही) में आय 107.03 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 10.23 करोड़ रुपये रहा।

बीएलएस आईपीओ के आंकड़े: प्राइस, सब्सक्रिप्शन और तारीखें

बीएलएस पॉलीमर्स का आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू है — यानी पूरा पैसा कंपनी के पास जाएगा, किसी पुराने शेयरधारक की बिक्री नहीं है। इश्यू का आकार 255 करोड़ रुपये है, जिसमें 1.70 करोड़ नए शेयर जारी हो रहे हैं। प्राइस बैंड 142-150 रुपये प्रति शेयर है, लॉट साइज 100 शेयर है और एक लॉट के लिए कम से कम 15,000 रुपये (ऊपरी बैंड पर) चाहिए।

बोली 27 अक्टूबर को खुली और 29 अक्टूबर को बंद होगी। अलॉटमेंट 30 अक्टूबर को होने की उम्मीद है, रिफंड और डीमैट में शेयर 2 नवंबर को आएंगे और लिस्टिंग 3 नवंबर को बीएसई और एनएसई पर प्रस्तावित है। एंकर निवेशकों से कंपनी ने पहले ही 76.50 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जिसमें 51 लाख शेयर 150 रुपये प्रति शेयर पर आवंटित हुए। इश्यू में योग्य संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) के लिए 50 प्रतिशत, गैर-संस्थागत निवेशकों (एनआईआई) के लिए 15 प्रतिशत और खुदरा निवेशकों के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण है। बुक रनिंग लीड मैनेजर यूनिस्टोन कैपिटल है और रजिस्ट्रार केफिन टेक्नोलॉजीज है।

पहले दिन ही आईपीओ को जबरदस्त मांग मिली — कुल सब्सक्रिप्शन करीब 9.62 गुना रहा। क्यूआईबी हिस्सा 12.03 गुना, एनआईआई करीब 13 गुना और खुदरा हिस्सा करीब 6.76 गुना भरा। पहले दिन 3,07,835 आवेदन आए।

पैसे के इस्तेमाल की योजना के अनुसार 77.56 करोड़ रुपये विनिर्माण सुविधा के विस्तार और चुनिंदा उत्पादों की क्षमता बढ़ाने पर, 89.50 करोड़ रुपये कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर और बाकी राशि सामान्य कॉरपोरेट कामों पर खर्च होगी।

जियो प्लेटफॉर्म्स: तुलना का दूसरा पक्ष

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ देश का सबसे बड़ा आईपीओ है — करीब 30,213 करोड़ रुपये का इश्यू, जो 21 से 23 अक्टूबर तक खुला था। प्राइस बैंड 1,065-1,119 रुपये, लॉट साइज 12 शेयर और एक लॉट के लिए कम से कम 13,428 रुपये (ऊपरी बैंड पर) थे।

इस इश्यू को कुल 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। योग्य संस्थागत खरीदारों ने अपने हिस्से का 71 गुना, संपन्न निवेशकों ने 14 गुना और खुदरा निवेशकों ने 2.7 गुना बोली लगाई। कुल मांग एंकर सहित 7.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही और करीब 1.39 करोड़ आवेदन आए। अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को फाइनल हुआ और आज, 28 अक्टूबर को शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो रहे हैं।

तुलना साफ है — जियो का इश्यू बीएलएस से करीब 118 गुना बड़ा है। इसलिए प्रतिशत में बीएलएस का आगे निकलना, आकार में जियो से आगे निकलना नहीं है। दोनों की तुलना सिर्फ जीएमपी के प्रतिशत से करना अधूरी तस्वीर देगा।

फायदे: निवेशकों के नजरिए से क्या अच्छा है

बीएलएस के पक्ष में सबसे बड़ा संकेत मजबूत ग्रे मार्केट प्रीमियम और पहले दिन का करीब 9.62 गुना सब्सक्रिप्शन है — संस्थागत और खुदरा, दोनों तरह के निवेशकों की मांग दिख रही है। फ्रेश इश्यू होने से पैसा कंपनी के विस्तार और कार्यशील पूंजी में जाएगा, जिससे कारोबार बढ़ने की गुंजाइश बनती है। कंपनी का लाभ पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 28 प्रतिशत बढ़ा है, और उसके उत्पाद बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में जाते हैं, जहां मांग लंबी अवधि में बनी रहती है। एंकर निवेशकों की 76.50 करोड़ रुपये की भागीदारी भी संस्थागत भरोसे का संकेत मानी जाती है। एक लॉट की रकम 15,000 रुपये होने से छोटे निवेशकों के लिए भी इसमें भाग लेना आसान है।

जियो के पक्ष में सबसे बड़ा फायदा उसका आकार और तरलता है — इतने बड़े इश्यू में संस्थागत मांग 71 गुना रही, जिससे लिस्टिंग के दिन भी कारोबार में गहराई रहने की उम्मीद है। जियो का कारोबार देश के सबसे बड़े डिजिटल कारोबारों में है, और उसकी लिस्टिंग पर पूरे बाजार की नजर है।

नुकसान और जोखिम: क्या-क्या ध्यान रखें

पहला और सबसे बड़ा जोखिम यह है कि जीएमपी कोई गारंटी नहीं है। हाल के उदाहरणों में ऐसा हुआ है कि ऊंचा जीएमपी होने के बावजूद लिस्टिंग सपाट रही है — एक मामले में करीब 21.67 प्रतिशत के अंतिम जीएमपी के बावजूद लिस्टिंग पर कोई बढ़त नहीं मिली, और एक अन्य में करीब 25.70 प्रतिशत के जीएमपी के बावजूद शेयर अपने इश्यू भाव पर ही लिस्ट हुआ। यानी जीएमपी का संकेत और लिस्टिंग का वास्तविक भाव अलग-अलग हो सकते हैं।

दूसरा जोखिम अलॉटमेंट का है। बीएलएस में खुदरा हिस्सा करीब 6.76 गुना भरा है, यानी हर आवेदक को शेयर मिलना तय नहीं है — अलॉटमेंट लॉटरी से होगा, और जिनको शेयर नहीं मिलेंगे, उनका पैसा रिफंड तक ब्लॉक रहेगा।

तीसरा, छोटे इश्यू में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। 255 करोड़ रुपये के इश्यू में लिस्टिंग के बाद भाव में तेज हलचल आम बात है, इसलिए छोटे निवेशकों को एक दिन की बढ़त देखकर जल्दबाजी में फैसला नहीं करना चाहिए।

चौथा, मूल्यांकन को लेकर कुछ समीक्षाओं में सतर्क राय भी है — यानी शेयर सस्ता है या महंगा, इस पर सबकी राय एक जैसी नहीं है। साथ ही, इश्यू की बड़ी रकम (89.50 करोड़ रुपये) कार्यशील पूंजी में जाएगी, जबकि विस्तार पर 77.56 करोड़ रुपये खर्च होंगे — यानी ग्रोथ के लिए सीधे लगने वाली रकम, कुल इश्यू का एक तिहाई से भी कम है।

पांचवां, प्रतिशत की तुलना का भ्रम है। बीएलएस का 29 प्रतिशत, जियो के 22 प्रतिशत से ज्यादा है, लेकिन जियो का इश्यू, कारोबार और निवेशकों का आधार कहीं बड़ा है। सिर्फ प्रतिशत देखकर किसी एक को दूसरे से बेहतर मान लेना सही विश्लेषण नहीं होगा।

जीएमपी को कैसे समझें

ग्रे मार्केट प्रीमियम को समझने का सही तरीका यह है कि इसे बाजार की भावना का एक अनौपचारिक संकेत मानें, न कि लिस्टिंग भाव का वादा। यह एक्सचेंज का भाव नहीं है, यह तेजी से बदलता है, और इस पर आधारित सौदे आधिकारिक बाजार के बाहर होते हैं। निवेश का फैसला कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, इश्यू के उद्देश्य और अपनी जोखिम क्षमता को देखकर करना चाहिए — सिर्फ जीएमपी देखकर नहीं।

आगे क्या देखें

बीएलएस आईपीओ की बोली 29 अक्टूबर को बंद होगी, अलॉटमेंट 30 अक्टूबर को आएगा और लिस्टिंग 3 नवंबर को होगी — तब पता चलेगा कि 29 प्रतिशत का जीएमपी संकेत कितना सही निकला। जियो की लिस्टिंग आज, 28 अक्टूबर को हो रही है — उसका लिस्टिंग भाव भी जीएमपी संकेत की परीक्षा होगी। दोनों की लिस्टिंग के बाद ही यह तुलना पूरी होगी।

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डिस्क्लेमर: इस विश्लेषण में दिए गए सुझाव व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, प्रदेश 24 न्यूज़ के नहीं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श कर लें। क्योंकि शेयर बाजार की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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