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इंदौर में कल ‘जल संकट से जल सुरक्षा’ पर परिचर्चा: विशेषज्ञ बताएंगे जल संरक्षण और टिकाऊ प्रबंधन के उपाय

जल संकट से जल सुरक्षा पर परिचर्चा — हरी पत्ती पर जल की बूंद (सांकेतिक चित्र) सांकेतिक चित्र: हरी पत्ती पर जल की बूंद। स्रोत: विकिमीडिया कॉमन्स (Navaneethpp, CC BY-SA 4.0)

सार: स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. द्वारा रविवार, 1 नवंबर 2026 को इंदौर के अभिनव कला समाज सभागार में दोपहर 2:30 बजे से ‘जल संकट से जल सुरक्षा’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया है। पर्यावरणविद्, जल विशेषज्ञ और शिक्षाविद् जल संकट की चुनौतियों तथा जल संरक्षण और टिकाऊ जल प्रबंधन के प्रभावी उपायों पर अपने विचार रखेंगे। परिचर्चा का उद्घाटन राऊ विधायक मधु वर्मा के मुख्य आतिथ्य में होगा, जबकि अध्यक्षता प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल करेंगे।

इंदौर ब्यूरो

इंदौर। जल संकट की गंभीर होती समस्या और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव के बीच जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर गंभीर मंथन के लिए स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। क्लब द्वारा ‘जल संकट से जल सुरक्षा’ विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन रविवार, 1 नवंबर 2026 को किया गया है। यह परिचर्चा इंदौर के अभिनव कला समाज सभागार में दोपहर 2:30 बजे से शुरू होगी, जिसमें विषय विशेषज्ञ जल संकट की चुनौतियों एवं जल सुरक्षा के उपायों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

आयोजकों के अनुसार इस परिचर्चा का उद्देश्य केवल समस्या पर चर्चा करना नहीं है, बल्कि जल संरक्षण और टिकाऊ जल प्रबंधन के प्रभावी और व्यावहारिक उपायों पर एक साझा समझ बनाना है। कार्यक्रम में पर्यावरण, जल प्रबंधन, तकनीक और समाज — चारों क्षेत्रों के विशेषज्ञ एक ही मंच पर मौजूद रहेंगे।

जल संकट से जल सुरक्षा पर परिचर्चा: कब, कहां और क्या होगा

यह परिचर्चा रविवार, 1 नवंबर 2026 को दोपहर 2:30 बजे से इंदौर के अभिनव कला समाज सभागार में आयोजित होगी। इसका आयोजन स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. द्वारा किया जा रहा है। परिचर्चा का केंद्रीय विषय ‘जल संकट से जल सुरक्षा’ रखा गया है, जिसके तहत जल संकट की चुनौतियों एवं जल सुरक्षा के उपायों पर मंथन होगा।

कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ जल संकट की गंभीर होती समस्या, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा जल संरक्षण एवं टिकाऊ जल प्रबंधन के प्रभावी उपायों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। परिचर्चा का स्वरूप संवादात्मक रखा गया है, ताकि वक्ताओं के विचारों के साथ-साथ उपस्थित श्रोताओं के सवालों और सुझावों को भी जगह मिल सके।

जल संकट से जल सुरक्षा पर परिचर्चा — हरी पत्ती पर जल की बूंद (सांकेतिक चित्र)
सांकेतिक चित्र: हरी पत्ती पर जल की बूंद। स्रोत: विकिमीडिया कॉमन्स (Navaneethpp, CC BY-SA 4.0)

परिचर्चा के प्रमुख वक्ता

परिचर्चा में चार प्रमुख वक्ता अपने-अपने क्षेत्र के अनुभव और दृष्टिकोण साझा करेंगे। इनमें पर्यावरणविद् डॉ. दिलीप वाघेला, एसजीएसआईटीएस के सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संदीप नरुलकर, भारत सरकार के पेयजल मिशन के निदेशक सुधेंद्र मोहन शर्मा तथा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर की हिंदी एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. उपासना गुप्ता शामिल हैं।

वक्ताओं के चयन से स्पष्ट है कि जल संकट के तकनीकी, पर्यावरणीय, प्रशासनिक और सामाजिक — सभी पहलुओं पर संतुलित चर्चा का प्रयास किया गया है। पर्यावरणविद् के रूप में डॉ. दिलीप वाघेला से जल संकट के पारिस्थितिक पहलुओं पर, एसजीएसआईटीएस के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संदीप नरुलकर से जल प्रबंधन के तकनीकी समाधानों पर, पेयजल मिशन के निदेशक सुधेंद्र मोहन शर्मा से शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन के अनुभवों पर और डॉ. उपासना गुप्ता से जल संरक्षण के सामाजिक आयामों पर विचार सुनने की उम्मीद है।

उद्घाटन और अध्यक्षता

परिचर्चा का उद्घाटन राऊ विधानसभा क्षेत्र के विधायक मधु वर्मा के मुख्य आतिथ्य में होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल करेंगे। कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार राजू धोलप हैं।

जनप्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और मीडिया के एक मंच पर आने से जल सुरक्षा जैसे विषय को अपेक्षित गंभीरता मिलने की उम्मीद है।

क्यों जरूरी है जल संकट से जल सुरक्षा पर मंथन

जल संकट आज केवल किसी एक शहर या क्षेत्र की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक व्यापक चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। बढ़ती आबादी, तेजी से होता शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा चक्र में आ रहे बदलाव और भूजल स्तर में निरंतर गिरावट — ये सभी कारक मिलकर जल उपलब्धता पर दबाव बढ़ा रहे हैं। ऐसे में जल संरक्षण और टिकाऊ जल प्रबंधन की दिशा में ठोस और समयबद्ध कदम उठाना आवश्यक हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल संकट से निपटने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का संरक्षण, जल का विवेकपूर्ण उपयोग, अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण और पारंपरिक जल संरचनाओं के पुनर्जीवन जैसे उपायों को जन आंदोलन का रूप देना होगा। केंद्र सरकार का जल जीवन मिशन भी इसी दिशा में एक बड़ा प्रयास है, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है।

इंदौर जैसे तेजी से बढ़ते शहरों के लिए यह विषय और भी प्रासंगिक हो जाता है। हाल ही में इंदौर में जल संकट का खतरा उस समय सामने आया था, जब महेश्वर बांध के जर्जर गेटों को लेकर चिंता जताई गई थी। वहीं कमजोर मानसून के बाद शहर में पेयजल संकट गहराने की खबरें भी सामने आ चुकी हैं। इन परिस्थितियों में ‘जल संकट से जल सुरक्षा’ जैसे विषय पर विशेषज्ञों का मंथन समय की मांग कहा जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। अनियमित वर्षा, लंबे सूखे के दौर और अचानक होने वाली अतिवृष्टि — ये सभी जल प्रबंधन के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। ऐसे में टिकाऊ जल प्रबंधन की रणनीतियों पर चर्चा और उनके स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन के उपाय खोजना अत्यंत आवश्यक है।

किसे आना चाहिए: शहर के नाम अपील

कार्यक्रम संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार राजू धोलप ने बताया कि जल संकट आज समाज के सामने एक गंभीर चुनौती है। इससे निपटने के लिए शासन, विशेषज्ञों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, पत्रकारों, पर्यावरण प्रेमियों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा जल संरक्षण में रुचि रखने वाले सभी लोगों से कार्यक्रम में उपस्थित होकर विशेषज्ञों के विचार सुनने और इस जनहितकारी पहल का हिस्सा बनने की अपील की है।

आयोजकों के अनुसार यह परिचर्चा विशेष रूप से उन युवाओं और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी होगी, जो पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए भी यह एक अवसर होगा कि वे जल संकट के विभिन्न पहलुओं को विशेषज्ञों की जुबानी समझ सकें और अपने-अपने स्तर पर जागरूकता फैला सकें। स्वच्छता में सिरमौर इंदौर की पहचान को जल सुरक्षा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ाने की दिशा में यह परिचर्चा एक सार्थक कदम साबित हो सकती है।

परिचर्चा से क्या उम्मीद

आयोजकों को उम्मीद है कि इस परिचर्चा से जल संकट की चुनौतियों पर एक साझा समझ बनेगी और जल संरक्षण एवं टिकाऊ जल प्रबंधन के प्रभावी उपायों पर व्यावहारिक सुझाव सामने आएंगे। विशेषज्ञों के विचारों से न केवल नीति-निर्माताओं और प्रशासन को दिशा मिलेगी, बल्कि आम नागरिकों में भी जल के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।

स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. का मानना है कि मीडिया और विशेषज्ञों के इस तरह के संवाद से जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस को बढ़ावा मिलता है। ‘जल संकट से जल सुरक्षा’ विषय पर होने वाली यह परिचर्चा जल संरक्षण की दिशा में एक जन आंदोलन की नींव रखने में सहायक हो सकती है। ऐसे में रविवार दोपहर अभिनव कला समाज सभागार में होने वाले इस कार्यक्रम में शहर के लोगों की भागीदारी ही इसकी सफलता तय करेगी।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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