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इंदौर में जल संकट का खतरा: महेश्वर बांध के 27 गेट जर्जर, एक गेट ढहा; महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र — 35 लाख लोगों की प्यास पर संकट

Deteriorating spillway gates of Maheshwar dam and parched reservoir — symbolic image

इंदौर ब्यूरो

देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा रखने वाले इंदौर के सामने अब एक बड़ा और गंभीर संकट खड़ा हो गया है — पीने के पानी का। शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली नर्मदा जल प्रदाय योजना के फुल क्षमता पर चलने पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, और इस खतरे की घंटी खुद शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बजाई है। महापौर ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक अर्जेंट पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि अगर समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो इंदौर की करीब 35 लाख आबादी के सामने पेयजल संकट गहरा सकता है।

महापौर के इस पत्र ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। पत्र में महेश्वर हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना के 27 स्पिलवे गेटों की जर्जर हालत का हवाला देते हुए कहा गया है कि इन गेटों की मरम्मत और रखरखाव में हुई देरी अब सीधे इंदौर की जलापूर्ति को प्रभावित कर रही है। महापौर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि महेश्वर परियोजना के गेटों का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और ओम्कारेश्वर परियोजना से पर्याप्त मात्रा में जल छोड़ा जाए, ताकि शहर को निर्बाध जलापूर्ति मिलती रहे।

पत्र में क्या कहा महापौर ने

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में महेश्वर हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना की गंभीर स्थिति का विस्तृत ब्योरा दिया है। पत्र के अनुसार यह परियोजना पिछले करीब दो दशकों से ठप्प पड़ी है, जिसके चलते इसके 27 स्पिलवे गेट जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि इनमें से एक विशाल गेट के ढहने की भी सूचना है।

सबसे चिंताजनक तथ्य जलस्तर को लेकर है। इंदौर की नर्मदा जल प्रदाय योजना का इंटेक पॉइंट महेश्वर बांध के जलाशय में स्थित है, और इंटेक के लिए न्यूनतम 146.50 मीटर जलस्तर आवश्यक है। जबकि बांध का अधिकतम स्पिलवे स्तर केवल 145.76 मीटर दर्ज किया गया है। यानी आवश्यक जलस्तर और उपलब्ध अधिकतम स्तर के बीच का यह अंतर ही इस पूरे संकट की जड़ है — जलाशय में उतना पानी ही नहीं रुक पा रहा, जितना इंदौर की योजना के इंटेक के लिए चाहिए।

पत्र में आगे कहा गया है कि ओम्कारेश्वर परियोजना से अपर्याप्त जल छोड़ा जा रहा है और महेश्वर के जर्जर गेटों के कारण जलाशय के जलस्तर को नियंत्रित करना लगभग असंभव हो गया है। ऐसे में आवश्यक जलस्तर बनाए रखना मुश्किल हो रहा है, जिससे पंपिंग की क्षमता प्रभावित हो रही है और शहर के निर्धारित जल कोटे की आपूर्ति बाधित हो रही है।

क्यों खतरे में है नर्मदा जल प्रदाय योजना

इंदौर शहर अपनी पेयजल जरूरतों के लिए नर्मदा जल प्रदाय योजना पर भारी रूप से निर्भर है। इस योजना के तहत रोजाना लगभग 445 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी की आपूर्ति होती है, जिससे करीब 35 लाख लोगों की प्यास बुझती है। योजना का इंटेक पॉइंट महेश्वर बांध के जलाशय में होने के कारण जलाशय के जलस्तर का सीधा असर शहर की जलापूर्ति पर पड़ता है। जलस्तर तय न्यूनतम सीमा से नीचे जाने पर पंपिंग दक्षता घट जाती है और शहर को मिलने वाले निर्धारित कोटे की डिलीवरी में बाधा आने लगती है।

इस साल शहर में अपेक्षा से काफी कम वर्षा हुई है — मात्र करीब 23 इंच। कम बारिश ने पहले से ही जल प्रबंधन की चुनौतियों को बढ़ा दिया था, और अब महेश्वर के गेटों की जर्जर हालत ने संकट को और गहरा कर दिया है। महेश्वर जलाशय में जलस्तर घटने से पंपिंग की दक्षता प्रभावित हुई है, जिससे पेयजल की संभावित कमी की चिंता बढ़ गई है। यही वजह है कि महापौर ने इस मामले को सीधे मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाना जरूरी समझा।

महेश्वर परियोजना की पृष्ठभूमि

महेश्वर हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना नर्मदा नदी पर ओम्कारेश्वर परियोजना के डाउनस्ट्रीम में स्थित है। महापौर के पत्र के अनुसार यह परियोजना करीब दो दशकों से ठप्प पड़ी है। लंबे समय तक रखरखाव और मरम्मत का काम न होने के कारण इसके 27 स्पिलवे गेट धीरे-धीरे जर्जर होते चले गए। स्पिलवे गेट किसी भी बांध के जलाशय के जलस्तर को नियंत्रित करने का सबसे अहम माध्यम होते हैं — इन्हीं से यह तय होता है कि कितना पानी रोका जाए और कितना छोड़ा जाए।

जब ये गेट ही जर्जर हो जाएं तो जलस्तर का नियमन असंभव हो जाता है। महेश्वर के मामले में ठीक यही हुआ है। पत्र के अनुसार एक विशाल गेट के ढहने की सूचना ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि इससे जलाशय में पानी रोकने की क्षमता पर सीधा असर पड़ता है।

महापौर की दो अहम मांगें

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दो स्पष्ट और तात्कालिक मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि महेश्वर परियोजना के सभी गेटों का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और जहां जरूरी हो, वहां मरम्मत व रखरखाव का काम फौरन शुरू किया जाए। महापौर का कहना है कि बिना तकनीकी निरीक्षण के गेटों की वास्तविक स्थिति का सही आकलन नहीं हो सकेगा।

दूसरी मांग ओम्कारेश्वर परियोजना से जुड़ी है। महापौर ने कहा है कि ओम्कारेश्वर से पर्याप्त मात्रा में जल छोड़ा जाए, ताकि महेश्वर जलाशय में आवश्यक जलस्तर बना रहे और इंदौर की नर्मदा जल प्रदाय योजना निर्बाध रूप से चलती रहे। महापौर ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को इस दिशा में तत्काल निर्देश देने का आग्रह मुख्यमंत्री से किया है।

इंदौर के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा

इंदौर लगातार स्वच्छता के मामले में देश में अव्वल रहा है, लेकिन पेयजल की सुरक्षा उसके सामने एक स्थायी चुनौती रही है। शहर की बढ़ती आबादी और सीमित जल स्रोतों के बीच नर्मदा जल प्रदाय योजना ही वह आधार है, जिस पर शहर की प्यास टिकी है। रोजाना 445 एमएलडी पानी की आपूर्ति किसी छोटे-मोटे वैकल्पिक इंतजाम से पूरी नहीं हो सकती।

यही कारण है कि महेश्वर के गेटों का मामला सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि 35 लाख लोगों के दैनिक जीवन से जुड़ा मुद्दा है। अगर जलाशय का जलस्तर इंटेक के न्यूनतम स्तर से नीचे बना रहा तो शहर के कई इलाकों में जलापूर्ति का दबाव घट सकता है और आपूर्ति का समय भी प्रभावित हो सकता है।

आगे क्या होगा

अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभागों पर टिकी हैं। महापौर के पत्र के बाद उम्मीद की जा रही है कि जल संसाधन विभाग और ऊर्जा विभाग के अधिकारी महेश्वर परियोजना के गेटों की स्थिति का जायजा लेंगे और ओम्कारेश्वर से जल छोड़ने की व्यवस्था पर विचार होगा। समाचार लिखे जाने तक मुख्यमंत्री कार्यालय या संबंधित विभाग की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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