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इंदौर में अब संभागीय कार्यालय में ही छपेंगी संशोधित मार्कशीट, भोपाल जाने का झंझट खत्म

सांकेतिक चित्र: कार्यालय की मेज पर रखी अंकसूचियों का ढेर सांकेतिक चित्र: कार्यालय की मेज पर रखी अंकसूचियों का ढेर

इंदौर ब्यूरो

सार: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की संशोधित और डुप्लीकेट मार्कशीट अब भोपाल मुख्यालय के बजाय संभागीय कार्यालयों में छपेंगी। 1 नवंबर 2026 से लागू इस व्यवस्था का सीधा फायदा इंदौर संभाग के छात्रों को मिलेगा, जिन्हें अब अपनी सुधरी हुई अंकसूची के लिए भोपाल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। हालांकि इंदौर कार्यालय में छपाई का काम भोपाल से जरूरी आंकड़े मिलने के बाद ही शुरू होगा।

मध्य प्रदेश के लाखों छात्रों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने संशोधित अंकसूचियों की छपाई की व्यवस्था को विकेंद्रीकृत कर दिया है। अब तक संशोधन के बाद नई अंकसूची भोपाल स्थित मंडल मुख्यालय में छपती थी और फिर आवेदक के पते पर भेजी जाती थी। प्रदेशभर से आने वाले प्रकरणों के कारण इस प्रक्रिया में लंबा समय लग जाता था। नई व्यवस्था में छपाई का काम संभागीय कार्यालयों को सौंप दिया गया है, ताकि छात्रों को उनका दस्तावेज़ जल्दी मिल सके।

क्या बदला है

बदलाव सिर्फ छपाई के स्थान का है, पूरी आवेदन प्रक्रिया का नहीं। मंडल के स्थायी आदेश के अनुसार 1 नवंबर 2026 से संशोधित अंकसूची मुद्रित करने का काम संभागीय कार्यालयों को स्थानांतरित कर दिया गया है। इंदौर संभाग के छात्रों की संशोधित अंकसूची अब इंदौर संभागीय कार्यालय में ही छपेगी। इससे पहले भोपाल मुख्यालय पर निर्भरता के कारण छात्रों को हफ्तों, कई बार महीनों तक इंतजार करना पड़ता था।

यह व्यवस्था डुप्लीकेट अंकसूची और प्रमाण-पत्रों पर भी लागू होगी। यानी अंकसूची गुम होने, खराब होने या उसमें सुधार की जरूरत होने पर छात्रों को अब अपने संभाग के कार्यालय से ही दस्तावेज़ मिलने की उम्मीद है। मंडल का उद्देश्य साफ है — सेवा को छात्र के करीब लाना और केंद्रीय छपाई पर निर्भरता घटाना।

पहले क्या होता था

पहले की व्यवस्था को समझना जरूरी है, क्योंकि उसी से नई व्यवस्था का फायदा समझ में आता है। छात्र एमपी ऑनलाइन के माध्यम से अंकसूची में संशोधन के लिए आवेदन करते थे। जिले में निर्धारित समन्वयक संस्थाएं प्रकरणों का गुण-दोष के आधार पर परीक्षण करती थीं। संशोधन को मंजूरी मिलने के बाद प्रकरण मंडल मुख्यालय की लॉगिन पर भेजा जाता था।

इसके बाद भोपाल स्थित अभिलेख कक्ष में केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत संशोधित अंकसूची प्रिंट की जाती थी और फिर उसे आवेदक के पते पर स्पीड पोस्ट से भेजा जाता था। प्रदेश के सभी जिलों के प्रकरण एक ही जगह पहुंचते थे, इसलिए काम का बोझ बढ़ता था और समय लगता था। नाम की स्पेलिंग या जन्मतिथि जैसी छोटी गलती के सुधार में भी लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती थी।

कई छात्रों का कहना रहा है कि संशोधित अंकसूची समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें आगे की प्रवेश प्रक्रिया, दस्तावेज़ सत्यापन और नौकरी ज्वाइन करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में जरूरी दस्तावेज़ समय पर उपलब्ध नहीं होने से रोजगार के अवसर भी प्रभावित हुए। यही परेशानी नई व्यवस्था की पृष्ठभूमि है।

सांकेतिक चित्र: कार्यालय काउंटर पर दस्तावेज़ सौंपता छात्र
सांकेतिक चित्र: कार्यालय काउंटर पर दस्तावेज़ सौंपता छात्र

इंदौर में अभी क्या स्थिति है

इंदौर के छात्रों के लिए यह खबर इसलिए खास है, क्योंकि इंदौर संभागीय कार्यालय को अब छपाई का अधिकार मिल गया है। संभागीय अधिकारी ज्योति भास्कर ने पुष्टि की है कि अनुमोदित संशोधित अंकसूचियों की छपाई इंदौर कार्यालय में ही होगी। यह व्यवस्था इंदौर संभाग के अधिकार क्षेत्र के छात्रों पर लागू होगी।

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इंदौर कार्यालय में छपाई का काम अभी शुरू नहीं हुआ है। कार्यालय भोपाल मुख्यालय से जरूरी आंकड़े मिलने का इंतजार कर रहा है। आंकड़ों का स्थानांतरण पूरा होने के बाद ही स्थानीय स्तर पर छपाई शुरू हो सकेगी। इसलिए छात्रों को यह समझना चाहिए कि व्यवस्था लागू हो गई है, लेकिन इंदौर में इसका व्यावहारिक लाभ आंकड़े मिलने के बाद मिलेगा। नई व्यवस्था की सफलता काफी हद तक इसी आंकड़ा स्थानांतरण की गति और संभागीय स्तर पर कुशल प्रसंस्करण पर निर्भर करेगी।

आवेदन की प्रक्रिया में क्या नहीं बदला

छात्रों के लिए यह जानना सबसे जरूरी है कि आवेदन की प्रक्रिया पहले जैसी ही रहेगी। एमपी ऑनलाइन के माध्यम से ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। जिले की समन्वयक संस्थाएं पहले की तरह संशोधन के प्रकरणों का परीक्षण करेंगी और गुण-दोष के आधार पर निराकरण करेंगी। मंजूरी के बाद प्रकरण आगे बढ़ेगा, लेकिन छपाई के लिए भोपाल नहीं जाएगा।

डुप्लीकेट अंकसूची, प्रमाण-पत्र और संशोधित अंकसूची के लिए पहले से निर्धारित आवेदन प्रक्रिया और अन्य निर्देश यथावत रहेंगे। यानी छात्रों को कोई नया फॉर्म, कोई नई वेबसाइट या कोई अलग तरीका अपनाने की जरूरत नहीं है। बदलाव केवल इतना है कि मंजूरी के बाद छपाई का काम संभागीय कार्यालय करेगा।

किन छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा

हर साल प्रदेश में कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में करीब 18 लाख छात्र शामिल होते हैं। इनमें से करीब 8,000 से 10,000 छात्रों की अंकसूची में त्रुटि पाई जाती है और वे परिणाम घोषित होने के बाद सुधार के लिए आवेदन करते हैं। यह संख्या छोटी लग सकती है, लेकिन हर एक छात्र के लिए उसकी अंकसूची उसके भविष्य का दरवाजा होती है।

नाम, जन्मतिथि, विषय या अन्य विवरणों में सुधार की जरूरत वाले छात्रों को इस व्यवस्था से सीधा फायदा मिलेगा। कॉलेज में प्रवेश, प्रतियोगी परीक्षाओं, छात्रवृत्ति और रोजगार के लिए सही शैक्षणिक रिकॉर्ड जरूरी होता है। स्थानीय स्तर पर छपाई होने से छात्र अपने संभागीय कार्यालय से छपाई की स्थिति के बारे में जानकारी भी आसानी से ले सकेंगे। दूर-दराज के क्षेत्रों के छात्रों को भोपाल के दफ्तरों की दौड़-धूप से मुक्ति मिलेगी।

डिजिटल हस्ताक्षर की तैयारी

मंडल एक और सुधार की तैयारी कर रहा है, जो हस्ताक्षर की एकरूपता से जुड़ा है। अभी संशोधित अंकसूचियों पर संबंधित संभागीय अधिकारियों के हस्ताक्षर होते हैं। अलग-अलग कार्यालयों से जारी अंकसूचियों पर अलग-अलग हस्ताक्षर होने से कई बार सवाल उठते रहे हैं।

इस विसंगति से बचने के लिए मंडल सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग करने की तैयारी कर रहा है। योजना यह है कि जारी करने वाला कार्यालय कोई भी हो, सभी दस्तावेज़ों पर एक समान डिजिटल हस्ताक्षर हो। यह व्यवस्था अभी तैयारी के चरण में है, लागू होने की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए छात्रों को इसे भविष्य की योजना के रूप में समझना चाहिए, वर्तमान व्यवस्था के हिस्से के रूप में नहीं।

छात्रों को क्या ध्यान रखना चाहिए

पहली बात, आवेदन एमपी ऑनलाइन के माध्यम से ही करें और संशोधन से जुड़े सभी दस्तावेज़ सही ढंग से जमा करें। दूसरी बात, इंदौर संभाग के छात्र यह मानकर न चलें कि छपाई तुरंत शुरू हो गई है — भोपाल से आंकड़े मिलने के बाद ही स्थानीय छपाई शुरू होगी। तीसरी बात, डुप्लीकेट और संशोधित अंकसूची के लिए पहले से तय नियम ही लागू रहेंगे, इसलिए किसी भी नए शुल्क या नई प्रक्रिया के दावे पर भरोसा करने से पहले मंडल के संभागीय कार्यालय से पुष्टि कर लें।

चौथी बात, अंकसूची में छोटी गलती को भी हल्के में न लें। नाम की स्पेलिंग, जन्मतिथि या विषय में गलती बाद में प्रवेश और नौकरी के समय बड़ी परेशानी बन सकती है। परिणाम घोषित होने के बाद अंकसूची को ध्यान से जांचना और त्रुटि मिलने पर समय पर सुधार के लिए आवेदन करना छात्रों के हित में है।

आगे क्या होगा

नई व्यवस्था का असली परीक्षण आने वाले हफ्तों में होगा, जब इंदौर सहित संभागीय कार्यालयों को भोपाल से आंकड़े मिलेंगे और स्थानीय छपाई शुरू होगी। अगर आंकड़ा स्थानांतरण समय पर पूरा होता है और संभागीय कार्यालय कुशलता से काम करते हैं, तो छात्रों को संशोधित अंकसूची मिलने का समय पहले से कम होगा।

जबलपुर सहित अन्य संभागीय कार्यालयों में भी यही व्यवस्था लागू हुई है, इसलिए यह बदलाव सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है। प्रदेशभर के छात्रों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। मंडल की यह पहल शिक्षा प्रशासन को छात्र के करीब लाने की दिशा में एक ठोस कदम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि संभागीय कार्यालय इस नई जिम्मेदारी को कितनी तेजी और पारदर्शिता से निभाते हैं।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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