भोपाल ब्यूरो। शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास की अमावस्या तिथि पर दुर्लभ संयोग बन रहा है — इस बार अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है। साथ ही यह सर्वपितृ अमावस्या है, यानी पितृपक्ष का अंतिम दिन, जब ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों का श्राद्ध, तर्पण और विसर्जन किया जाता है। उदया तिथि के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या आज ही मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन पितरों की शांति के साथ-साथ शनि देव की कृपा पाने का सुनहरा अवसर है।
अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त
आश्विन मास की अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात से आरंभ होकर 10 अक्टूबर की रात करीब 9:20 बजे तक रहेगी। पितृ-कार्य के लिए श्रेष्ठ माने जाने वाले मुहूर्त — कुतुप मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 तक, रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:31 से 1:18 तक और अपराह्न काल दोपहर 1:18 से 3:37 तक रहेगा।
ये 5 उपाय माने जाते हैं शुभ
1. पीपल की परिक्रमा: मान्यता है कि आज पीपल के पेड़ की कम से कम 11 बार परिक्रमा करना और पीपल के पत्ते पर 5 प्रकार की मिठाई रखकर पितरों को अर्पित करना शुभ माना जाता है।
2. पंचबली का भोग: घर में भोजन तैयार करके उसके पांच भाग निकालने की परंपरा है — गाय, कुत्ते, कौवे, चींटियों और अन्य प्राणियों को भोजन का अंश देने से पितर तृप्त होते हैं, ऐसी मान्यता है।
3. संध्या में 5 दीपक: सर्वपितृ अमावस्या की संध्या में 5 दीपक जलाने का उपाय विशेष शुभ माना गया है।
4. शनि देव की आराधना: शनिवार को अमावस्या होने के कारण शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करना और हनुमान चालीसा का पाठ करना लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैया या दशा चल रही हो, उन्हें इस दिन के उपायों से राहत मिल सकती है।
5. दान-पुण्य: पितरों के नाम पर तर्पण और श्राद्ध के साथ ब्राह्मणों व जरूरतमंदों को भोजन कराना तथा सामर्थ्य के अनुसार दान करना पुण्यदायी माना जाता है। इससे पितृ दोष से मुक्ति की मान्यता है।
पितृविसर्जनी अमावस्या का महत्व
आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पितृविसर्जनी अमावस्या या महालया भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार जिन परिजनों को अपने पितरों की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं है, या जो पितृपक्ष के 15 दिनों में श्राद्ध नहीं कर पाए हैं, वे आज श्राद्ध, दान और तर्पण कर सकते हैं। इस तिथि पर समस्त पितरों का विसर्जन किया जाता है और पितर प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं — ऐसी धार्मिक मान्यता है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित सामान्य जानकारी है।
