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33 साल में 24 लाख ‘शिकायतें’ — आज NHRC का स्थापना दिवस, CJI सूर्यकांत होंगे मुख्य अतिथि

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के 33वें स्थापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत (फाइल फोटो)

दिल्ली ब्यूरो। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), भारत आज अपना 33वां स्थापना दिवस मना रहा है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और सभा को संबोधित करेंगे।

मुख्य अतिथि और उपस्थित गणमान्य

समारोह में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम, सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी, श्रीमती विजया भारती सयानी और श्री प्रियांक कानूनगो, महासचिव श्री पीयूष गोयल सहित आयोग के वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। (आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार)

न्यायमूर्ति सूर्यकांत (फाइल फोटो)
न्यायमूर्ति सूर्यकांत (फाइल फोटो) — फोटो: Rogers49 (विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY-SA 3.0)

33 साल का सफर — आंकड़ों में आयोग

स्थापना के बाद से 33 वर्षों की यात्रा में आयोग ने 24,33,716 मामलों का निपटारा किया है, जिनमें 3,100 मामले स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) के हैं। मानवाधिकार उल्लंघन के 9,085 मामलों में आयोग ने पीड़ितों के लिए ₹274 करोड़ से अधिक की मौद्रिक राहत की सिफारिश की है। आयोग का कहना है कि यह उपलब्धि मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में जवाबदेही मजबूत करने के उसके निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।

एक साल का लेखा-जोखा

1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच आयोग ने 54,673 शिकायतें और 119 स्वतः संज्ञान मामले दर्ज किए। इस अवधि में 80 स्थलीय जांचें (स्पॉट इन्क्वायरी) की गईं और 157 मामलों में ₹9.7 करोड़ से अधिक की राहत की सिफारिश की गई।

‘जल’ पर राष्ट्रीय सम्मेलन

स्थापना दिवस समारोह के बाद ‘Water as the Elixir of Life: Advancing Human Dignity through the Right to Water’ विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें दो तकनीकी सत्र होंगे — ‘जल निकायों का संरक्षण और पुनरुद्धार: जल के अधिकार की नींव की रक्षा’ तथा ‘पेयजल स्रोतों की सुरक्षा: सभी के लिए सुरक्षित और टिकाऊ पहुंच सुनिश्चित करना’। सम्मेलन में विशेषज्ञ, हितधारक, शिक्षाविद, शोधकर्ता, नागरिक समाज के प्रतिनिधि और मानवाधिकार रक्षक सुरक्षित एवं पर्याप्त जल तक पहुंच के मानवाधिकार आयामों पर विचार-विमर्श करेंगे, जिसमें मानव गरिमा को आगे बढ़ाने और जल सुरक्षा मजबूत करने पर ध्यान रहेगा।

पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत हुई थी। स्थापना दिवस समारोह आयोग की यात्रा पर चिंतन करने और मानवाधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर प्रदान करता है।

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