नमस्कार प्रिय Followers
आज हमारी चर्चा नये विषय पर आरंभ होगी। आप लोग जब भी किसी astrologer के पास कुंडली दिखाने जाते है तो अक्सर वह बोलते है की आप पर कारक ग्रह की दशा चल रही है अथवा मारक ग्रह की। आज हम इसी पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
कारक एवम अका रक ग्रह के संदर्भ मे शास्त्र कारों ने लगन के अनुसार ग्रह की स्थिति बतायी है।
कुंडली मे कारक ग्रह त्रिकोण के स्वामी अर्थात लग्नेश ,पंचमेश और नवमेश होते है। यह ग्रह अपनी दशा या अन्तर्दशा मे विशेष फल देते है। यह ग्रह बलवान होते है।
अका रक ग्रह ग्रह वह होते जो लग्नेश के नैसर्गिक रूप से शत्रु होते है। और इनको प्रभाव हीन कहा गया है।
मारक ग्रह वह है जो लगन के अनुसार 6,8,12 भावों के स्वामी हो यह अपनी दशा अन्तर्दशा मे मृत्यु तुल्य कष्ट देते है।
कारक एवम अका रक का निर्णय करने मे शास्त्र कारों ने योग कारक ग्रह केंद्र एवम त्रिकोण स्वामी ग्रह ,बाधा कारक ग्रह एवम शत्रु ग्रहों की स्थिति को ध्यान मे रखकर निर्णय किया है।
अब आगामी पोस्ट मे हम प्रत्येक लगन के अनुसार कारक और मारक ग्रह की चर्चा करेंगे।
पोस्ट को like और share करें।
कुंडली analysis के लिये संपर्क करें।

ज्योतिषाचार्य निर्विकार शर्मा
संपर्क: 9758023241
