दिल्ली ब्यूरो
नेपाल के वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वागले ने भारत-नेपाल संबंधों को लेकर नई दिल्ली में एक बड़ा बयान दिया है। NDTV वर्ल्ड समिट 2026 के दूसरे दिन “प्रॉक्सिमिटी टू प्रॉस्पेरिटी: द इंडिया-नेपाल अपॉर्चुनिटी” सत्र में उन्होंने कहा, “कभी-कभार रुकावटें आ सकती हैं, लेकिन हम कमर से जुड़े हैं।” वागले ने भारत को नेपाल के हर संकट में सबसे पहले पहुंचने वाला देश बताया और कहा कि नेपाली राष्ट्रवाद को भारत-विरोध से जोड़ने का दौर अब खत्म हो चुका है।
“कमर से जुड़े हैं”: वागले ने बताए भारत-नेपाल रिश्ते
वागले ने भारत-नेपाल संबंधों को “असाधारण रूप से घनिष्ठ” बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई दो देश इस तरह एक-दूसरे से जुड़े नहीं हैं, जैसे भारत और नेपाल जुड़े हैं। “सिर्फ भूगोल से नहीं, हम गहरे सांस्कृतिक संबंधों से भी जुड़े हैं,” वित्त मंत्री ने कहा।
उन्होंने माना कि दोनों देशों के रिश्तों में कभी-कभार कुछ नकारात्मक घटनाएं भी हुई हैं, लेकिन उनका कहना था कि ये रुकावटें दोनों देशों के गहरे बंधन को नहीं तोड़ सकतीं। वागले के इस बयान को नेपाल के नए नेतृत्व की भारत के प्रति सकारात्मक सोच का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
2015 के भूकंप से बाढ़ तक: हर आपदा में भारत सबसे पहले
वागले ने नेपाल में आई आपदाओं के दौरान भारत की मदद की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ हाल की आपदा, यानी अचानक आई बाढ़ की बात नहीं है। 2015 में आई पिछली बड़ी आपदा में भी सबसे पहले पहुंचने वाला देश भारत ही था।”
उन्होंने याद दिलाया कि 2015 के भूकंप के कुछ ही घंटों के भीतर काठमांडू में भारत का कार्गो विमान उतर चुका था। इसी तरह इस बार की बाढ़ में भी यही दोहराया गया। “मुझे याद है, भूकंप में भूकंप के कुछ ही घंटों के भीतर काठमांडू में एक कार्गो उड़ान उतरी थी और इस बार भी ऐसा ही हुआ,” वागले ने कहा।
नेपाल के वित्त मंत्री ने बताया कि भारत की ओर से कुल 9 कार्गो विमान अत्यंत आवश्यक मानवीय राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचे थे। दोनों देशों के नेतृत्व के बीच लगातार संपर्क बना रहा।
मोदी का फोन और बालेन शाह को समर्थन का वादा
अगस्त में हिमालयी देश में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत के समर्थन को याद करते हुए वागले ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को तुरंत फोन किया था।
“प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री बालेन शाह को फोन किया और समर्थन का वादा किया। हमारे अपने आधिकारिक चैनलों और आदान-प्रदान में भारत की ओर से हमेशा से यह मददगार हाथ बढ़ा रहा है — नेपाल को जो भी चाहिए, हम हाजिर हैं। यही वह चीज है जो हमारे संबंधों को मजबूत करती है,” वागले ने कहा।
नेपाल के वित्त मंत्रालय ने भी इस सत्र के बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की, जिसमें वागले की भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत का जिक्र था। नेपाल के मीडिया ने भी वागले के इस बयान को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
जेन-Z आंदोलन पर नेपाल मंत्री का विश्लेषण
सत्र में वागले से दुनिया भर में देखे जा रहे जेन-Z आंदोलनों के बारे में भी पूछा गया — बांग्लादेश, श्रीलंका से लेकर नेपाल तक, जहां युवा आंदोलनों के बाद सत्ता परिवर्तन देखे गए। इस पर वागले ने कहा कि हर देश का मामला अलग और विशिष्ट है।
“मुझे लगता है, जैसा चीनी कहते थे, क्रांतियों का निर्यात नहीं होता। मुझे नहीं लगता कि इन चीजों को आंख बंद करके दूसरी जगह लगाया या नकल किया जा सकता है। ये अपने देश की विशिष्ट परिस्थितियों से जन्मी हैं,” उन्होंने कहा।
जेनरेशन-Z (1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग) को “डिजिटल मूल निवासी” बताते हुए वागले ने कहा कि यह पीढ़ी स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के साथ बड़ी हुई है। “यह एक नई तरह की जनसांख्यिकीय संरचना है, जो यथास्थिति से खुश नहीं है।”
नेपाल के मामले पर उन्होंने कहा, “हमारे यहां पिछले सितंबर में एक असाधारण क्षण आया, जो एक तरह का टूटन बिंदु था। हम पुरानी व्यवस्था से तंग आ चुके थे। पुराने नेतृत्व से तंग आ चुके थे और हमें नए सिरे से शुरुआत करनी थी।” उन्होंने बताया कि छह महीने की स्वस्थ संक्रमण अवधि रही, जिसका नेतृत्व एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश और एक महिला प्रधानमंत्री ने किया। “वे नेपाल के इतिहास में सबसे स्वच्छ, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव करा सकीं। इसके बाद अध्यक्ष रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली आरएसपी सरकार बनी।”
“नेपाली राष्ट्रवाद = भारत-विरोध का दौर खत्म”
वागले ने नेपाल की राजनीति के एक पुराने चलन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “एक समय था जब हम नेपाली राष्ट्रवाद को भारत-विरोधी भावना से जोड़ते थे। वह दौर अब खत्म हो चुका है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि बालेन शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार भारत के साथ बेहतर संबंध चाहती है और पुराने नेतृत्व से अलग सोच रखती है। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नेपाल की राजनीति में लंबे समय से भारत के साथ संबंधों को लेकर अलग-अलग धड़े रहे हैं।
पर्यावरण ऋण: जलवायु संकट पर वागले की चिंता
वागले ने जलवायु परिवर्तन से जुड़े एक अहम मुद्दे — “पर्यावरण ऋण” — पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने सवाल उठाया कि नेपाल जैसा गरीब देश, जिसने जलवायु संकट में लगभग कोई योगदान नहीं दिया, उसे आपदा में नष्ट हुए बुनियादी ढांचे — दर्जनों पुल, सैकड़ों किलोमीटर सड़कें, पनबिजली संयंत्र, घर — के पुनर्निर्माण के लिए कर्ज क्यों लेना पड़े?
“यह एक ऐसी बातचीत है जो हमें करनी चाहिए,” वागले ने कहा। उनका यह बयान विकासशील देशों की उस मांग से जुड़ा है, जिसमें जलवायु संकट के लिए जिम्मेदार धनी देशों से क्षतिपूर्ति की मांग की जाती रही है।
आगे क्या: बालेन शाह का भारत दौरा
वागले ने यह भी बताया कि नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह जल्द ही भारत का दौरा करेंगे और दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। इस दौरे को भारत-नेपाल संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद।
कुल मिलाकर, NDTV समिट में वागले के बयान भारत-नेपाल संबंधों के एक नए अध्याय का संकेत देते हैं — जहां पुराने अविश्वास की जगह सहयोग और सांस्कृतिक निकटता की बात हो रही है, और जहां नेपाल का नया नेतृत्व भारत को अपना सबसे भरोसेमंद पड़ोसी बता रहा है।
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