Headlines

मणिपुर में फिर भड़की हिंसा: सेनापति में दो नागा नागरिकों की गोली मारकर हत्या, दो घायल

मणिपुर में सुरक्षा बलों की तैनाती

शनिवार दोपहर मणिपुर के सेनापति जिले के कलेनजांग गांव में अज्ञात बंदूकधारियों ने दो नागा नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी। हमले में दो अन्य लोग घायल भी हुए हैं। पुलिस के मुताबिक वारदात गांव के मुखिया के घर के अंदर हुई। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।

मणिपुर में सुरक्षा बलों की गश्त। फोटो: ज़ी न्यूज़ (प्रतीकात्मक)
मणिपुर में सुरक्षा बलों की गश्त। फोटो: ज़ी न्यूज़ (प्रतीकात्मक)

पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों मृतक सेनापति जिले के ही निवासी थे — एक माओ नागा समुदाय से और दूसरा पोउमई नागा समुदाय से ताल्लुक रखता था। पुलिस ने बताया कि कलेनजांग गांव जुलाई महीने में आगजनी की घटना के बाद से खाली पड़ा था; तब शरारती तत्वों ने गांव के दो घरों में आग लगा दी थी। यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है कि मृतक और घायल उस समय मुखिया के घर में किस परिस्थिति में मौजूद थे।

गौरतलब है कि यह वारदात उसी दिन हुई, जिस दिन यूनाइटेड नागा काउंसिल ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ त्रिपक्षीय वार्ता के बाद चार महीने से चली आ रही आर्थिक नाकेबंदी को अस्थायी रूप से खत्म करने की घोषणा की। शनिवार को असम के गुवाहाटी में हुई वार्ता के बाद परिषद ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 और राष्ट्रीय राजमार्ग-37 पर लगी नाकेबंदी शनिवार शाम 6 बजे से हटाने का एलान किया। यह नाकेबंदी मई महीने में कांगपोकपी जिले से छह नागा नागरिकों के अपहरण के बाद लगाई गई थी; बाद में उनके शव बरामद हुए थे।

परिषद की प्रमुख मांगों में कुकी सशस्त्र समूहों के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (एसओओ) समझौता रद्द करना, राज्य की उपमुख्यमंत्री को तत्काल हटाना और अगवा किए गए नागा नागरिकों की हत्या के मामले में न्याय शामिल है। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि सबूत मिलने पर संबंधित संगठन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि व सहायता दी जाएगी।

यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में नागा-कुकी संघर्ष लगातार तेज हो रहा है। इससे महज दो दिन पहले गुरुवार रात को कामजोंग जिले के पिलोंग गांव में चार नागा नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी — यह इलाका भारत-म्यांमार सीमा के करीब है। रिपोर्टों के अनुसार सितंबर महीने में संदिग्ध उग्रवादियों के अलग-अलग हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि फरवरी से शुरू हुए नागा-कुकी संघर्ष में 40 से अधिक जानें जा चुकी हैं।

इसी हफ्ते कांगपोकपी जिले के तीन गांवों में 41 से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया गया था; एक चर्च और सार्वजनिक भवनों को भी नुकसान पहुंचा था। राज्य के मुख्यमंत्री ने शनिवार की वारदात को कायरतापूर्ण कृत्य बताते हुए इसकी निंदा की है। वहीं, विपक्ष ने केंद्र और राज्य सरकार पर नागरिकों की हत्याओं पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए म्यांमार सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस, इकोनॉमिक टाइम्स, ट्रिब्यून, टाइम्स ऑफ इंडिया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

दैनिक संपूर्ण प्रदेश — आपका अपना अख़बार