इंदौर ब्यूरो
सार: दीपावली से ठीक पहले पड़े रवि पुष्य योग ने इंदौर के बाजारों को मिनी धनत्रयोदशी जैसा माहौल दे दिया। सुबह से देर रात तक खरीदारों की भीड़ रही और व्यापारियों के अनुमान के अनुसार शहर के बाजारों में करीब 900 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।
दीपावली के त्योहारी मौसम में जब खरीदारी का सबसे शुभ माना जाने वाला योग आता है, तो बाजारों की रौनक देखते ही बनती है। रविवार को इंदौर में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। रवि पुष्य योग के चलते शहर के सभी प्रमुख बाजार सुबह से ही गुलजार हो गए और देर रात तक खरीदारों की आवाजाही बनी रही। सराफा बाजार से लेकर वाहन शोरूम तक, कपड़ा बाजार से लेकर बर्तन बाजार तक हर जगह खरीदारी का उत्साह नजर आया। व्यापारियों के अनुमान के अनुसार इस एक दिन में इंदौर के बाजारों में करीब 900 करोड़ रुपये की धनवर्षा हुई। शहर के बीच के बाजारों में कई जगह यातायात का दबाव भी बढ़ गया और ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति भी देखने को मिली, लेकिन इससे खरीदारों का उत्साह कम नहीं हुआ।
पुष्य नक्षत्र को खरीदारी के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है और जब यह रविवार के दिन पड़ता है तो रवि पुष्य का संयोग बनता है। मान्यता के अनुसार इस योग में खरीदी गई वस्तुओं में वृद्धि और स्थिरता का भाव रहता है। यही वजह है कि दीपावली से पहले पड़ने वाला यह योग व्यापारियों और खरीदारों दोनों के लिए खास हो जाता है। इस बार भी यही हुआ। सुबह से ही परिवारों के साथ लोग बाजारों में पहुंचने लगे। किसी ने आभूषण खरीदे तो किसी ने वाहन की डिलीवरी ली, किसी ने बहीखाता खरीदा तो किसी ने घर के लिए सजावट का सामान लिया।
सुबह से देर रात तक गुलजार रहे बाजार
रविवार की सुबह से ही इंदौर के प्रमुख बाजारों में चहल-पहल शुरू हो गई थी। दोपहर तक भीड़ और बढ़ गई और शाम होते-होते कई बाजारों में पैर रखने की जगह कम पड़ने लगी। सराफा बाजार, मारोठिया, कपड़ा बाजार, बजाज खाना चौक और राजवाड़ा क्षेत्र में खरीदारों की भारी भीड़ देखने को मिली। व्यापारियों के अनुसार सर्वार्थसिद्धि और अमृत सिद्धि जैसे शुभ योगों के चलते खरीदारी का दौर पूरे दिन और रात तक चलता रहा। युवा वर्ग में विश्व स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, लैपटॉप और गैजेट्स की मांग दिखी तो दूसरी ओर दोपहिया वाहन और रेडिमेड कपड़ों की अंतरराष्ट्रीय शृंखला वाले प्रतिष्ठानों में भी खूब भीड़ रही। सरकारी कर्मचारियों के साथ किसान वर्ग भी खरीदारी के प्रति उत्साहित नजर आया।
बाजारों में इस बार एक बात और देखने को मिली कि लोग सिर्फ बड़ी खरीदारी ही नहीं कर रहे थे, बल्कि छोटी-छोटी जरूरतों की चीजें भी शुभ मुहूर्त में ले रहे थे। मिट्टी के दीपक, पूजन सामग्री, घर की सजावट का सामान और गृह उपयोगी वस्तुओं की भी जमकर बिक्री हुई। महिलाओं और बच्चों के साथ युवा वर्ग में भी खरीदारी का खास उत्साह नजर आया। कुल मिलाकर यह दिन इंदौर के व्यापार के लिए त्योहारी सीजन की सबसे मजबूत शुरुआत जैसा साबित हुआ।
सराफा बाजार में 250 करोड़ का अनुमानित कारोबार
सोना-चांदी और हीरे के आभूषणों की खरीदारी इस दिन की सबसे बड़ी कहानी रही। सराफा बाजार में करीब 250 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान लगाया गया है। सोना-चांदी के दामों में हाल में आई गिरावट ने खरीदारों का उत्साह बढ़ाया, हालांकि भाव अब भी सामान्य उपभोक्ता की क्रय शक्ति के हिसाब से ऊंचे बने हुए हैं। यही वजह है कि इस बार लोगों ने अपने बजट के अनुसार कम वजन में भारी डिजाइन वाले गहनों की खरीदारी पर ध्यान दिया। ज्वेलर्स के अनुसार शादी-ब्याह के लिए आभूषण खरीदने वाले ग्राहक दाम बढ़ने के बावजूद खरीदारी करते ही हैं, बस इस बार उन्होंने वजन कम करके डिजाइन पर जोर दिया।
सराफा क्षेत्र में सुबह से ही परिवारों की आवाजाही रही। कई ग्राहक पहले से बुक किए गए आभूषणों की डिलीवरी लेने पहुंचे तो कई ने मौके पर ही पसंद के गहने खरीदे। व्यापारियों का मानना है कि दामों में नरमी और शुभ योग के मेल ने इस बार सराफा की रौनक को और बढ़ा दिया। आने वाले दिनों में धनतेरस पर भी इसी तरह की भीड़ की उम्मीद जताई जा रही है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर में 200 करोड़ की रफ्तार
वाहन बाजार में भी रवि पुष्य का असर साफ दिखा। इंदौर के शोरूमों से करीब 2500 दुपहिया वाहन और 1000 से ज्यादा कारें बिकने की जानकारी सामने आई है। ज्यादातर कारें पहले से बुक की जा चुकी थीं और शुभ मुहूर्त में उनकी डिलीवरी ली गई। ऑटोमोबाइल कारोबार करीब 200 करोड़ रुपये का माना जा रहा है। इस राशि में बड़ी हिस्सेदारी वित्तीय संस्थाओं के कर्ज की भी है, क्योंकि वाहन खरीदारी में बड़ी संख्या में लोग ऋण का सहारा लेते हैं।
इस बार खरीदारों की पसंद में इलेक्ट्रिक वाहन भी प्रमुखता से रहे। स्थानीय ग्राहकों के साथ बाहर के शहरों से आए लोगों ने भी इंदौर के शोरूमों से वाहन खरीदे। दोपहिया वाहनों की मांग सबसे ज्यादा रही, क्योंकि त्योहारी सीजन में युवाओं और परिवारों के लिए दोपहिया वाहन एक लोकप्रिय और व्यावहारिक खरीदारी मानी जाती है। डीलरों के अनुसार रवि पुष्य पर हुई बुकिंग और डिलीवरी से धनतेरस के लिए भी अच्छा माहौल बन गया है।
रियल एस्टेट में भी 200 करोड़ के सौदे
जमीन, मकान और दुकानों के सौदों में भी इस शुभ योग का असर दिखा। व्यापारियों के अनुमान के अनुसार रियल एस्टेट क्षेत्र में करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। लोगों ने इस दिन प्लॉट, मकान और दुकानों के सौदे किए और कई ने बुकिंग की राशि भी शुभ मुहूर्त में ही अदा की। मान्यता के अनुसार पुष्य नक्षत्र में भूमि-भवन जैसी चल-अचल संपत्ति की खरीदारी शुभ फल देने वाली मानी जाती है, इसलिए संपत्ति बाजार में भी इस दिन विशेष हलचल रही।
शहर के बाहरी क्षेत्रों के साथ बीच शहर की संपत्तियों में भी पूछताछ बढ़ी। बिल्डरों और प्रॉपर्टी कारोबारियों के अनुसार त्योहारी सीजन में शुभ मुहूर्त की खरीदारी का मनोवैज्ञानिक असर होता है। लोग लंबे समय से टाल रहे फैसले को शुभ दिन पर अंतिम रूप देते हैं। यही वजह है कि रवि पुष्य के दिन संपत्ति सौदों की संख्या भी बढ़ जाती है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स में 50 से 70 करोड़
इलेक्ट्रॉनिक बाजार में भी अच्छी रौनक रही। लैपटॉप और मोबाइल के प्रति खास रुझान देखा गया। एलसीडी, एयरकंडीशनर और अन्य घरेलू उपकरणों की भी जमकर खरीदारी हुई। इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी संघ के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। मोबाइल, गैजेट्स और अन्य उपकरणों को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा 70 करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है।
ऑनलाइन शिक्षा के दौर में लैपटॉप की मांग पहले से ही बढ़ी हुई है और त्योहारी सीजन में इस मांग को और बल मिला। युवाओं ने नए गैजेट्स खरीदे तो परिवारों ने घरेलू उपकरणों की खरीदारी की। जीएसटी में राहत के बाद इलेक्ट्रॉनिक बाजार में पहले से ही सकारात्मक माहौल था और रवि पुष्य के शुभ योग ने इसे और मजबूत कर दिया।
कपड़ा, बर्तन, किराना और सजावट बाजार की रौनक
कपड़ा बाजार में भी उत्साहजनक कारोबार हुआ। रिटेल गारमेंट व्यापारियों के अनुसार ऑनलाइन को छोड़कर परंपरागत बाजारों से खरीदारी का रुझान उम्मीद से बेहतर रहा। करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार का अनुमान लगाया गया है। दीपावली के लिए नए वस्त्रों की खरीदारी हर परिवार की परंपरा का हिस्सा है और रवि पुष्य पर यह खरीदारी और बढ़ गई।
बर्तन बाजार में ग्राहकी 30 फीसदी से अधिक रही। ग्राहक सुबह से ही तांबा, पीतल, स्टील के बर्तनों के साथ फैंसी और ब्रांडेड बर्तनों की खरीदारी के लिए दुकानों पर पहुंच रहे थे। बर्तन निर्माता विक्रेता संघ के अनुसार करीब 300 दुकानें इस संगठन से जुड़ी हैं और बाजार में 8 से 10 करोड़ रुपये के कारोबार से शुरुआत हुई है। व्यापारियों को उम्मीद है कि धनतेरस पर यह कारोबार और बढ़ेगा।
किराना बाजार में रिटेल काउंटरों पर जोरदार भीड़ रही। ड्रायफ्रूट के भाव पिछले साल के मुकाबले 15 से 20 फीसदी कम होने से खरीदारी में करीब 20 फीसदी का उछाल आया। किराना बाजार में भी करीब 8 से 10 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। सजावट के सामान में भी करीब 10 करोड़ रुपये का कारोबार आंका गया है। लोगों ने घर के लिए मोती के बंदनवार, हार और अन्य सजावट सामग्री खरीदी। मिट्टी के दीपक, मूर्तियां और मोम के दीपक भी खूब बिके।
बहीखाता खरीदारी की परंपरा भी निभाई गई
रवि पुष्य के अवसर पर व्यापारियों ने शुभ मुहूर्त में बहीखाता, कलम और दवात की खरीदारी की परंपरा भी निभाई। कई व्यापारी परंपरागत वेशभूषा में सिर पर टोपी और साफा धारण करके, कुर्ता-पायजामा पहनकर सिर पर बहीखाता रखकर अपनी दुकानों पर पहुंचे। यह दृश्य इंदौर के बाजारों की पुरानी व्यापारिक परंपरा की याद दिलाता है। नए जमाने के डिजिटल हिसाब-किताब के बीच भी बहीखाते की यह परंपरा व्यापारियों के लिए शुभ शुरुआत का प्रतीक बनी हुई है।
राजवाड़ा क्षेत्र में भी सुबह से ही खरीदारों की भीड़ रही। दीपावली से सात दिन पहले पड़ने वाले इस महामुहूर्त को लेकर सुबह से ही बाजारों में तैयारी दिख रही थी। दुकानदारों ने विशेष सजावट की थी और कई प्रतिष्ठानों ने त्योहारी छूट की भी घोषणा की थी। कुल मिलाकर रवि पुष्य का दिन इंदौर के लिए व्यापारिक दृष्टि से एक बड़ी सफलता साबित हुआ।
धनतेरस की ओर बढ़ती उम्मीदें
रवि पुष्य पर हुई जोरदार खरीदारी के बाद अब व्यापारियों की नजरें 6 नवंबर को पड़ने वाली धनतेरस पर टिकी हैं। बर्तन व्यापारियों से लेकर सराफा कारोबारियों तक सभी को उम्मीद है कि धनतेरस पर कारोबार इससे भी आगे बढ़ेगा। हर साल की तरह इस साल भी पुष्य नक्षत्र पर अच्छी खरीदारी को देखकर धनतेरस पर व्यापार बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
त्योहारी सीजन में इंदौर का बाजार प्रदेश के सबसे सक्रिय बाजारों में गिना जाता है। रवि पुष्य पर करीब 900 करोड़ रुपये के अनुमानित कारोबार ने यह साबित कर दिया है कि शुभ मुहूर्त और बाजार का उत्साह मिलकर अर्थव्यवस्था को गति देते हैं। अब देखना यह होगा कि धनतेरस और दीपावली पर यह रौनक किस स्तर तक पहुंचती है।
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