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अक्टूबर में जीएसटी संग्रह ने बनाया रिकॉर्ड: 23% बढ़कर 2.31 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, चार साल की सबसे तेज रफ्तार

सांकेतिक चित्र: रुपये के सिक्के सांकेतिक चित्र: रुपये के सिक्के

नई दिल्ली ब्यूरो। देश की अर्थव्यवस्था के लिए अक्टूबर 2026 का महीना राजस्व के लिहाज से ऐतिहासिक साबित हुआ है। रविवार, 1 नवंबर को जारी हुए अनंतिम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का सकल संग्रह 2.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले साल अक्टूबर में यह आंकड़ा 1.88 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह सालाना आधार पर संग्रह में 22.9 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है। यह पिछले चार वर्षों में जीएसटी संग्रह की सबसे तेज रफ्तार मानी जा रही है। लगातार चौथे महीने सरकार को 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी मिला है, और चालू वित्त वर्ष में अप्रैल के बाद अक्टूबर सबसे बड़ा संग्रह वाला महीना रहा है।

कितना बढ़ा संग्रह: मुख्य आंकड़े एक नजर में

अक्टूबर के आंकड़ों को समझने के लिए पहले मुख्य आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। सकल जीएसटी संग्रह 2.31 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 1.88 लाख करोड़ रुपये से 43 हजार करोड़ रुपये अधिक है। सालाना वृद्धि दर 22.9 प्रतिशत रही। रिफंड की रकम घटाने के बाद शुद्ध जीएसटी राजस्व 2.03 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 1.61 लाख करोड़ रुपये था। यानी शुद्ध राजस्व में 25.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई — सकल संग्रह की वृद्धि दर से भी अधिक। इसका अर्थ यह है कि रिफंड की रफ्तार संग्रह की रफ्तार से धीमी रही, जिससे सरकार के खाते में शुद्ध रूप से अधिक राशि आई।

घरेलू खपत से 1.59 लाख करोड़, आयात से 72,246 करोड़

अक्टूबर के संग्रह की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि मजबूती दोनों मोर्चों से आई — घरेलू कारोबार से भी और आयात से भी। देश के भीतर हुए कारोबार से जीएसटी राजस्व 15.8 प्रतिशत बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह आंकड़ा घरेलू मांग और खपत की मजबूती को दर्शाता है। त्योहारी सीजन में खरीदारी बढ़ने से घरेलू कारोबार में तेजी आई, जिसका असर कर संग्रह पर साफ दिखा। दूसरी ओर, आयात से मिलने वाला जीएसटी राजस्व 42.2 प्रतिशत की भारी छलांग के साथ 72,246 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आयात से राजस्व में इतनी तेज वृद्धि अंतरराष्ट्रीय व्यापार की मजबूती और आयातित वस्तुओं पर कर संग्रह बढ़ने का संकेत है।

सांकेतिक चित्र: रुपये के सिक्के
सांकेतिक चित्र: रुपये के सिक्के

करों के हिस्से: सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी का गणित

अक्टूबर के कुल संग्रह में करों के अलग-अलग हिस्सों को देखें तो तस्वीर और साफ होती है। घरेलू कारोबार से केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के रूप में 42,935 करोड़ रुपये मिले, जबकि राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) के रूप में 51,340 करोड़ रुपये आए। घरेलू कारोबार पर एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) का हिस्सा 64,769 करोड़ रुपये रहा। इन तीनों को जोड़ने पर घरेलू राजस्व का आंकड़ा 1.59 लाख करोड़ रुपये बनता है। आयात पर लगे आईजीएसटी को जोड़ने पर कुल आईजीएसटी लगभग 1.37 लाख करोड़ रुपये हो जाता है। सीजीएसटी केंद्र सरकार के खाते में जाता है, एसजीएसटी राज्यों को मिलता है, और आईजीएसटी अंतरराज्यीय कारोबार पर लगता है, जिसका बंटवारा केंद्र और संबंधित राज्य के बीच तय नियमों से होता है।

रिफंड के बाद भी शुद्ध राजस्व में बड़ी छलांग

अक्टूबर के दौरान सरकार ने कारोबारियों और अन्य पात्र करदाताओं को कुल 27,934 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड जारी किया। यह राशि पिछले साल अक्टूबर में जारी किए गए रिफंड से 6.5 प्रतिशत अधिक है। रिफंड की रफ्तार संग्रह की रफ्तार से काफी धीमी रही — यही वजह है कि रिफंड घटाने के बाद शुद्ध संग्रह में 25.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जो सकल वृद्धि दर 22.9 प्रतिशत से अधिक है। घरेलू कारोबार से शुद्ध जीएसटी राजस्व 16.4 प्रतिशत बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि आयात से शुद्ध संग्रह 56.2 प्रतिशत की बड़ी छलांग के साथ 58,319 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

अप्रैल से अक्टूबर: सात महीने का हिसाब भी मजबूत

केवल अक्टूबर ही नहीं, चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले सात महीनों का हिसाब भी मजबूत दिख रहा है। अप्रैल से अक्टूबर के दौरान कुल सकल जीएसटी संग्रह 13.2 प्रतिशत बढ़कर 14.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी अवधि में शुद्ध जीएसटी संग्रह लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12.69 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह रुझान बताता है कि अक्टूबर की तेजी कोई एक महीने की घटना नहीं है, बल्कि पूरे वित्त वर्ष में राजस्व संग्रह की गति बनी हुई है। लगातार चौथे महीने 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संग्रह इस स्थिरता की पुष्टि करता है।

राज्यों की कमाई: महाराष्ट्र सबसे आगे, उत्तर प्रदेश की रफ्तार सबसे तेज

राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कुल रकम के मामले में महाराष्ट्र एक बार फिर सबसे आगे रहा। अक्टूबर में महाराष्ट्र से सरकार को सबसे ज्यादा 35,150 करोड़ रुपये का घरेलू जीएसटी मिला, जो पिछले साल के 31,013 करोड़ रुपये से 13 प्रतिशत अधिक है। कर्नाटक 15,922 करोड़ रुपये के संग्रह के साथ दूसरे स्थान पर रहा। वृद्धि की रफ्तार के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे निकला — वहां से अक्टूबर में 10,235 करोड़ रुपये का कर मिला, जो पिछले साल के अक्टूबर की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। राज्यों के लिए जीएसटी की यह कमाई इसलिए अहम है, क्योंकि एसजीएसटी सीधे राज्य के खजाने में जाता है और इसी से जनकल्याण की योजनाओं, बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं का खर्च चलता है। केंद्र से राज्यों को कर हस्तांतरण की अलग व्यवस्था भी है, जिसके तहत हाल ही में अतिरिक्त किस्त जारी की गई है।

त्योहारी मांग और मजबूत आर्थिक गतिविधि का संकेत

अक्टूबर का महीना त्योहारी सीजन का महीना रहा है, और इस दौरान खरीदारी, यात्रा, खानपान और सेवाओं की मांग बढ़ती है। घरेलू राजस्व में 15.8 प्रतिशत की वृद्धि इसी मजबूत घरेलू खपत की ओर इशारा करती है। आयात से राजस्व में 42.2 प्रतिशत की वृद्धि यह भी बताती है कि देश के भीतर मांग इतनी मजबूत रही कि आयातित वस्तुओं की खपत भी तेजी से बढ़ी। जीएसटी संग्रह को अर्थव्यवस्था की नब्ज माना जाता है — कारोबार बढ़ता है तो कर संग्रह बढ़ता है, और कर संग्रह बढ़ना आर्थिक गतिविधि के विस्तार का संकेत होता है। चार साल की सबसे तेज वृद्धि दर इस लिहाज से उत्साहजनक संकेत है।

जीएसटी व्यवस्था क्या है और सुधारों का पहला चरण भी लागू

जीएसटी देश में जुलाई 2017 से लागू एकीकृत अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था है, जिसमें केंद्र और राज्यों के कई पुराने अप्रत्यक्ष करों को एक कर में समाहित कर दिया गया था। इसके तहत वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर एक ही कर लगता है, जो गंतव्य आधारित होता है — यानी कर उसी राज्य को मिलता है, जहां वस्तु या सेवा का उपभोग होता है। इसी 1 नवंबर से जीएसटी सुधारों का पहला चरण भी लागू हुआ है, जिसमें छूट, रिफंड और छोटे निर्यातकों को राहत से जुड़े बदलाव शामिल हैं। इन सुधारों का उद्देश्य कर व्यवस्था को सरल बनाना और कारोबारियों, खासकर छोटे उद्यमियों के लिए अनुपालन आसान करना है।

आगे क्या: राज्यों के खजाने और अर्थव्यवस्था पर नजर

अक्टूबर के रिकॉर्ड संग्रह का असर आने वाले महीनों में राज्यों के खजाने पर भी दिखेगा, क्योंकि एसजीएसटी और केंद्र से हस्तांतरण, दोनों से राज्यों को संसाधन मिलते हैं। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या संग्रह की यह रफ्तार बनी रहती है, खासकर तब जब त्योहारी सीजन का असर कम होगा। नवंबर के आंकड़े यह बताएंगे कि अक्टूबर की तेजी मौसमी थी या आर्थिक गतिविधि में स्थायी सुधार का संकेत है। फिलहाल, अक्टूबर के आंकड़े अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत संदेश लेकर आए हैं — घरेलू मांग मजबूत है, व्यापार बढ़ रहा है, और सरकारी खजाने में राजस्व की आवक तेज हुई है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध स्रोतों और सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है। किसी तथ्य में त्रुटि होने पर सुधार प्रकाशित किया जाएगा।

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