इंदौर ब्यूरो।
भोपाल के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी होने के बाद अब इंदौर की बारी है। प्रदेश के सबसे तेजी से बढ़ते शहर का नया मास्टर प्लान पिछले पांच साल से कागजों में अटका है। अब नगरीय प्रशासन मंत्री ने संकेत दिए हैं कि भोपाल के बाद इंदौर के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट भी जल्द जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इस दिशा में गतिविधियां तेज हो गई हैं।

2008 का प्लान, 2021 में खत्म हुई मियाद
इंदौर का मौजूदा मास्टर प्लान वर्ष 2008 में बनाया गया था और इसकी मियाद 2021 में समाप्त हो गई। यानी शहर पिछले पांच साल से बिना किसी अद्यतन विकास योजना के चल रहा है। इस दौरान शहर की आबादी और भौगोलिक फैलाव दोनों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। नए इलाके बस गए, कॉलोनियां फैल गईं, लेकिन नियोजित विकास की कोई रूपरेखा सामने नहीं आई। शहरी नियोजन के जानकारों का मानना है कि इतने लंबे समय तक मास्टर प्लान का न बनना शहर के सुनियोजित विकास के लिए ठीक नहीं है।
882 वर्ग किलोमीटर में फैलेगा नियोजन क्षेत्र
प्रस्तावित नए मास्टर प्लान में इंदौर के नियोजन क्षेत्र को मौजूदा 505 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 882 वर्ग किलोमीटर करने की योजना है। इसका मतलब है कि शहर के आसपास के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों को भी नियोजित विकास के दायरे में लाया जाएगा। सड़क, पानी, सीवेज और हरित क्षेत्र जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार इन्हीं इलाकों में सबसे ज्यादा जरूरी है।
पुराने प्लान का 80 प्रतिशत ही हो सका पूरा
मास्टर प्लान-2021 के क्रियान्वयन की हकीकत भी चिंताजनक है। रिपोर्ट्स के अनुसार पुराने प्लान के लक्ष्यों का केवल 80 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा हो सका। एमआर-3, एमआर-11 और एमआर-12 जैसी प्रमुख सड़कें आज भी अधूरी हैं। कई प्रस्तावित ग्रीन बेल्ट और सार्वजनिक सुविधाओं वाले क्षेत्र या तो अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए या उन पर अन्य निर्माण हो गए। नए प्लान में इन खामियों को दूर करने की चुनौती होगी।
हरी झंडी का इंतजार
नईदुनिया की रिपोर्ट के अनुसार इंदौर के मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है, लेकिन इसे जारी करने के लिए राज्य शासन की हरी झंडी का इंतजार है। संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश के स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। भोपाल का ड्राफ्ट जारी होने के बाद अब इंदौर के लिए भी रास्ता साफ माना जा रहा है। नगरीय प्रशासन मंत्री ने हाल ही में कहा है कि भोपाल के बाद इंदौर के प्लान पर भी तेजी से काम होगा।
सियासत भी गरमाई
मास्टर प्लान में देरी को लेकर सियासत भी गरमा चुकी है। करीब पंद्रह दिन पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने इंदौर से भोपाल तक पैदल मार्च की चेतावनी दी थी। उनका कहना था कि यदि तीन महीने में मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। ऐसे में सरकार पर जल्द ड्राफ्ट जारी करने का दबाव भी बढ़ गया है।
शहरवासियों को क्या उम्मीद
इंदौरवासियों को नए मास्टर प्लान से कई उम्मीदें हैं। यातायात की बढ़ती समस्या, पानी की किल्लत, हरित क्षेत्र का सिकुड़ना और अव्यवस्थित कॉलोनियों का विस्तार—ये सभी मुद्दे नए प्लान में सुलझने चाहिए। शहर के नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि ड्राफ्ट जारी होने के बाद आम जनता के सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी। यही वह मौका होगा जब शहरवासी अपने भविष्य के शहर की रूपरेखा तय करने में भागीदारी निभा सकेंगे। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बहुप्रतीक्षित ड्राफ्ट कब जारी होता है।
